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अमेरिका के इंस्टिट्यूट ऑफ हेल्थ मेट्रिक्स एंड इवैलूएशन के लेटेस्ट आंकड़ों के अनुसार, दुनियाभर में करीब 8 लाख से अधिक बच्चों के खून में सीसा यानी लेड का खतरनाक स्तर मौजूद है और इनमें से आधे से ज्यादा बच्चे दक्षिण एशिया के देशों में रहते हैं। गैर-सरकारी एजेंसी प्योर अर्थ के साथ मिलकर बच्चों के लिए काम करने वाली संस्था यूनिसेफ ने 30 जुलाई 2020 को अपनी रिपोर्ट "द टॉक्सिक ट्रूथ: चिल्ड्रन्स एक्पोजर टू लेड पलूशन अंडरमान्स ए जेनेरेशन ऑफ पोटेंशियल" शीर्षक से यह डेटा जारी किया है।

वैसे तो लेड पोइजनिंग या सीसा विषाक्तता की समस्या किसी को भी या किसी भी उम्र में हो सकती है लेकिन बच्चे अपने विकास के विभिन्न चरणों में सीसा विषाक्तता के प्रति विशेष रूप से अतिसंवेदनशील या कमजोर होते हैं। उदाहरण के लिए, भ्रूण, गर्भावस्था के दौरान अपनी मां के खून से सीसे को अवशोषित कर सकते हैं। वयस्क जहां भोजन और पानी में मौजूद सीसे को सिर्फ 10 प्रतिशत ही अवशोषित करते हैं वहीं, बच्चे भोजन या पानी के साथ लगभग 50 प्रतिशत तक सीसे को अवशोषित कर लेते हैं। इतना ही नहीं, अपने आसपास मौजूद चीजों को एक्सप्लोर करने के क्रम में बच्चे बहुत सारी चीजों को मुंह में डाल लेते हैं- ऐसे में अगर बच्चे कोई गंदी चीज या पेंट को मुंह में डाल लें जिसमें उच्च मात्रा में सीसा होता है इसका उनके समग्र विकास पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है।

(और पढ़ें - बच्चों की सेहत के इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज)

बच्चों की सेहत पर लेड के कई नकारात्मक प्रभाव देखने को मिलते हैं। लेड या सीसा के प्रति उम्र के शुरुआती दिनों में ही संपर्क में आने के कारण जीवन के बाद के सालों में इम्यून सिस्टम में गड़बड़ी, मनोभ्रंश और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। दरअसल, विशेषज्ञों ने बचपन में ही सीसा के उच्च मात्रा में संपर्क में आने की समस्या को 15 साल बाद युवाओं में आक्रामकता के उच्च स्तर के जोखिम से जोड़ा है।

"बचपन में सीसा विषाक्तता" विषय पर विश्व स्वास्थ्य संगठन की 2010 की रिपोर्ट के अनुसार, "जीवन के शुरुआती सालों में ही सीसा के संपर्क में आने के कारण जीन्स री-प्रोग्राम हो सकती हैं जो कि परिवर्तित जीन अभिव्यक्ति और जीवन के बाद के सालों में बीमारी के जुड़े जोखिम को बढ़ा सकता है। लेड या सीसा के जल्दी संपर्क में आने के कारण व्यक्ति की जीवन के बाद के सालों में तंत्रिका संबंधी अपमान को सफलतापूर्वक आकार बदलने की क्षमता घट जाती है। ” तंत्रिका संबंधी अपमान का अर्थ है केंद्रीय तंत्रिका तंत्र में किसी तरह की शारीरिक या मानसिक चोट लगना जिसमें ब्रेन भी शामिल।

(और पढ़ें - जीन एडिटिंग से गर्भ में ही फेफड़ों की जानलेवा बीमारी से बचाव संभव)

हालांकि सीसा कई सालों तक शरीर में धीरे-धीरे जमा होता रहता है, लेकिन सीसा के जल्दी संपर्क में आने का शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म दोनों ही तरह का प्रभाव खतरनाक हो सकता है। हम आपको इस आर्टिकल में बच्चों में सीसा विषाक्तता होने पर इसका उनकी सेहत पर क्या प्रभाव पड़ता है, बच्चों में सीसा विषाक्तता के लक्षण क्या हैं, शिशुओं और बच्चों में सीसा विषाक्तता किन वजहों से होती है, बच्चों में सीसा विषाक्तता को डायग्नोज कैसे किया जाता है और बच्चों में सीसा विषाक्तता की समस्या का इलाज कैसे किया जाता है।

  1. बच्चों में सीसा विषाक्तता का सेहत पर असर
  2. बच्चों में सीसा विषाक्तता के लक्षण
  3. बच्चों में सीसा विषाक्तता का कारण
  4. बच्चों में सीसा विषाक्तता से बचाव
  5. बच्चों में सीसा विषाक्तता को कैसे डायग्नोज करें?
  6. बच्चों में सीसा विषाक्तता का इलाज
  7. बच्चों में सीसा विषाक्तता के डॉक्टर

यह तो हम जानते हैं कि बच्चों को विशेष रूप से सीसा विषाक्तता का खतरा होता है। वास्तव में, जन्म से पहले से ही बच्चों का सीसा के प्रति संपर्क शुरू हो जाता है, क्योंकि गर्भवती महिला की हड्डियों में जमा सीसा मां और गर्भ में पल रहे भ्रूण दोनों के खून के साथ मिल जाता है। आंकड़े यह भी बताते हैं कि 1 से 6 साल के बच्चे रोजाना करीब 100-400 मिलीग्राम घर के अंदर मौजूद धूल या मिट्टी को सांस के जरिए शरीर के अंदर ले लेते हैं- इस धूल में सीसा की अलग-अलग मात्रा होती है, इसमें वातावरण से जुड़े अलग-अलग फैक्टर्स भी जिम्मेदार होते हैं। 

बच्चों की सेहत पर सीसा के कई तरह के प्रभाव नजर आते हैं, यहां सबसे महत्वपूर्ण बिंदुओं पर एक नजर डालते हैं:

  1. गर्भ में सीसा विषाक्तता का बच्चे की सेहत पर असर
  2. नवजात शिशुऔं और बच्चों में सीसा विषाक्तता का सेहत पर असर

गर्भ में सीसा विषाक्तता का बच्चे की सेहत पर असर

गर्भावस्था के दौरान अपरिपक्व भ्रूण और विकसित भ्रूण दोनों तरह के बच्चे पर सीसा विषाक्तता का बुरा प्रभाव देखने को मिलता है। यहां मुख्य मुद्दों पर एक नजर डालते हैं : (और पढ़ें - गर्भ में बच्चे का विकास)

  • मस्तिष्क का विकास : गर्भ में सीसे का एक्सपोजर बच्चे के मस्तिष्क के विकास में हस्तक्षेप करता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि मां की हड्डियों में जमा सीसा खून के साथ मिल जाता है। गर्भावस्था के दौरान, मां के खून में मौजूद सीसा आसानी से बच्चे तक पहुंचने के लिए प्लेसेंटा से होकर गुजरता है। शोध से पता चलता है कि गर्भ में लेड का बेहद कम एक्सपोजर (5 माइक्रोग्राम से अधिक डेसिलिटर) भी तीन साल तक के बच्चों में न्यूरोलॉजिकल यानी तंत्रिका संबंधी विकास को प्रभावित कर सकता है। गर्भवती महिला और बच्चे में अगर आयरन की कमी हो जाए तो सीसा अवशोषण के कारण चीजें और बदतर हो सकती हैं। इसके अतिरिक्त, जब तक भ्रूण एक उचित रक्त-मस्तिष्क अवरोध विकसित नहीं कर लेता है तब तक यह रक्त भ्रूण के विकासशील मस्तिष्क को भी प्रभावित कर सकता है। रक्त-मस्तिष्क अवरोध एक प्रकार का फिल्टर है जो पानी, ऑक्सीजन आदि को अनुमति देता है, लेकिन मस्तिष्क से रक्त में अन्य पदार्थों को बाहर रखता है। अनुसंधान से पता चलता है कि यह अवरोध गर्भावस्था के 8वें सप्ताह में ही विकसित हो जाता है।
  • जीन अभिव्यक्ति : हमारे जीन सब कुछ निर्धारित करते हैं इसमें शरीर में एंजाइम बनाने से लेकर हम कैसे दिखते हैं यह भी शामिल है। गर्भ में सीसा का एक्सपोजर जीन की अभिव्यक्ति के साथ हस्तक्षेप भी करता है, जिसका अर्थ है कि भविष्य में कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं होने का जोखिम अधिक होता है।
  • रक्तचाप : 323 बच्चों के साथ न्यू हैम्पशायर बर्थ कोहॉर्ट स्टडी के आधार पर, 5.5 वर्ष की आयु में गर्भ में सीसे के संपर्क को छोटे बच्चों, विशेष रूप से लड़कों में सिस्टॉलिक रक्तचाप में वृद्धि के साथ जोड़ा गया है। सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर को ब्लड प्रेशर मशीन की रीडिंग में ऊपरी संख्या द्वारा इंगित किया जाता है- यह उस फोर्स को दर्शाता है जो जिसे हमारी रक्त वाहिकाएं  अनुभव करती हैं जब दिल धड़कता है या पंप करता है।

नवजात शिशुऔं और बच्चों में सीसा विषाक्तता का सेहत पर असर

बच्चे के जन्म के बाद घर के अंदर और वातावरण से जुड़े सीसा के संपर्क से के ऐसे कई अस्थिर कारक हैं जिनका जोखिम बच्चों को हो सकता है। जन्म के बाद बच्चों में सीसा विषाक्तता के कुछ स्वास्थ्य प्रभाव यहां देखे जा सकते हैं:

  • मानसिक मंदता और हृदय की समस्याएं : 2004 के एक मेटा-विश्लेषण से पता चला है कि दुनिया में हल्की मानसिक मंदता और हृदय की समस्याओं (उच्च रक्तचाप के साथ शुरू होने वाले) के सभी मामलों का लगभग 1 प्रतिशत सीसा के संपर्क से जुड़ा है।
  • इम्यून सिस्टम में गड़बड़ी : लेड एक्सपोजर इम्यून सिस्टम को बाधित करता है। हालांकि, इसका प्रभाव एक्सपोजर के तुरंत बाद दिखाई नहीं देता है। इसका असर दिखने में महीनों या सालों का समय लगता है जब किसी संक्रमण या अन्य बीमारी के कारण इम्यून सिस्टम पर तनाव आता है। लेड या सीसा के संपर्क में आने के कारण एलर्जी, संक्रमण, ऑटोइम्यून बीमारियां और कैंसर तक होने का खतरा बढ़ सकता है।

नवजात शिशुओं और बच्चों पर सीसा विषाक्तता का सबसे बड़ा प्रभाव उनके तंत्रिका तंत्र संबंधी विकास पर देखने को मिलता है। कुछ संकेत और लक्षण जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए वे हैं :
नवजात के लिए

शिशुओं और छोटे बच्चों के लिए

सीसा विषाक्तता की समस्या शरीर के कई सिस्टम्स को एक साथ प्रभावित कर सकता है। कौन सा सिस्टम प्रभावित हो रहा है इसके आधार पर लक्षणों को अलग-अलग विभाजित किया जा सकता है। बच्चों में सीसा विषाक्तता के निम्नलिखित संकेत हैं:

  1. बच्चों में सीसा विषाक्तता के तंत्रिका तंत्र संबंधी लक्षण
  2. बच्चों में सीसा विषाक्तता के जठरांत्र (गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल) संबंधी लक्षण
  3. बच्चों में सीसा विषाक्तता के कारण हड्डी और मांसपेशी संबंधी लक्षण
  4. बच्चों में सीसा विषाक्तता के अन्य कारण

बच्चों में सीसा विषाक्तता के तंत्रिका तंत्र संबंधी लक्षण

लेड या सीसा एक ज्ञात न्यूरोटॉक्सिन है। बच्चों में मस्तिष्क सहित केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को सीसा विषाक्तता निम्नलिखित तरीकों से प्रभावित कर सकता है :

  • बुद्धिमता अनुपात (इंटेलिजेंस कोशेंट IQ) में कमी
  • व्यवहार परिवर्तन जैसे ध्यान अवधि में कमी (बच्चा आसानी से और जल्दी से रुचि खो देता है) और असामाजिक व्यवहार
  • ध्यान लगाने या फोकस करने में मुश्किल
  • सिरदर्द
  • रेडियल तंत्रिका न्यूरोपैथी, या लेड पाल्सी, जो कलाई से गुजरने वाली रेडियल तंत्रिका को प्रभावित करती है। यह स्थिति दर्द और कमजोरी का कारण बन सकती है जिस कारण कलाई और उंगलियों में गतिविधि बाधित हो सकती है
  • शब्दों को बोलने और समझने में देरी (भाषा सीखने में देरी)
  • मस्तिष्क के एक हिस्से में बढ़ा हुआ दबाव (इंट्राक्रैनिअल दबाव)
  • लेड एक्सपोजर के उच्च स्तर के मामले में, रोगी को अटैक्सिया (गतिभंग गतिविधि से जुड़ी बीमारी), दौरे पड़ना या कोमा में जाने की समस्या हो सकती है। कुछ मरीजों की मौत भी हो सकती है।
  • भारत के राष्ट्रीय स्वास्थ्य पोर्टल के अनुसार, "गंभीर सीसा विषाक्तता होने के बावजूद जो बच्चे जीवित रह जाते हैं उनमें मानसिक विकलांगता और व्यवहार संबंधी बीमारियां हो सकती हैं।

बच्चों में सीसा विषाक्तता के जठरांत्र (गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल) संबंधी लक्षण

पेट और आंत संबंधी कुछ समस्याएं जो सीसा विषाक्तता के कारण बच्चों में हो सकती हैं, वे हैं :

  • भूख न लगना (एनोरेक्सिया)
  • जी मिचलाना या उल्टी आना
  • पेट में दर्द
  • कब्ज
  • मुंह में मेटल जैसा स्वाद आना
  • सीसा कोलिक : यदि बच्चे को बार-बार पेट में दर्द, उल्टी और कब्ज की समस्या होती है तो बच्चे को बाल रोग विशेषज्ञ के पास ले जाएं। (और पढ़ें - बच्चे में उदरशूल या कोलिक के लक्षण, कारण, इलाज)

बच्चों में सीसा विषाक्तता के कारण हड्डी और मांसपेशी संबंधी लक्षण

तंत्रिकाएं और मांसपेशियां एक दूसरे से बेहद बारीकी से जुड़े होते हैं क्योंकि तंत्रिकाएं ही मांसपेशियों को संदेश भेजती हैं कि क्या करना है और कहां जाना है। बच्चों में सीसा विषाक्तता के मस्क्युलोस्केलेटल (मांसपेशियां और हड्डी) लक्षण निम्नलिखित हैं:

बच्चों में सीसा विषाक्तता के अन्य कारण

जैसा की पहले ही बताया जा चुका है कि सीसा विषाक्तता शरीर के कई सिस्टम्स को एक साथ प्रभावित करता है। बच्चों में इस भारी धातु की विषाक्तता के कुछ अन्य लक्षण इस प्रकार हैं:

  • बहुत ज्यादा थकान
  • बीमार महसूस करना (अस्वस्थ)
  • खून की कमी (एनीमिया)
  • उच्च रक्तचाप और हृदय से जुड़ी समस्याएं
  • बर्टन्स लाइन्स : जहां दांत और मसूड़े मिलते हैं वहां पर नीली-बैंगनी रेखाएं- ये लंबे समय तक सीसा विषाक्तता के मार्कर हैं

कुछ लक्षण वयस्कों में अधिक नजर आते हैं लेकिन यह बच्चों में भी दिख सकते हैं। इनमें मांसपेशियों में दर्द, याददाश्त से संबंधित समस्याएं और दांतों में लेड लाइन्स (बर्टन लाइन) शामिल है। अध्ययनों से पता चला है कि खून में सीसा की अधिक मात्रा गर्भावस्था के परिणामों को प्रभावित कर सकती है, जिसमें अचानक ही अपने आप अबॉर्शन होना, समय से पहले बच्चे का जन्म, गर्भ में ही बच्चे की मौत (स्टिलबर्थ) और जन्मजात दोष जैसी समस्याएं शामिल हैं।

कई बार बच्चों को जन्म से पहले ही सीसा का एक्सपोजर हो जाता है- बच्चे को किस डिग्री में सीसा का एक्सपोजर होगा यह उन परिस्थितियों पर निर्भर करती है जिसमें गर्भवती महिला रहती है और किन उत्पादों का इस्तेमाल करती हैं। यहां कुछ तरीके बताए गए हैं जिसके जरिए मांओं और बच्चों को सीसा एक्सपोजर का खतरा हो सकता है:

  • पर्यावरण संबंधी कारक : उन क्षेत्रों में रहने वाले लोग जहां कार बैटरी (लेड-एसिड बैटरी) और ई-कचरे का सही तरीके से निपटारा नहीं किया जाता है वहां के लोगों को हवा, पानी और मिट्टी के माध्यम से सीसा के एक्सपोजर का उच्च जोखिम होने का खतरा रहता है। हवाई अड्डों के निकट रहने वाले लोग जहां विमानों में सीसा युक्त ईंधन का उपयोग होता है उन लोगों में भी सीसा के उच्च एक्सपोजर का जोखिम होता है।
  • सीसा आधारित पेंट : 2016 में, भारत के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने एक अधिसूचना जारी की- "घरेलू और सजावटी पेंट्स नियमों, 2016 में सीसा सामग्री के इस्तेमाल पर नियंत्रण"- उन सभी तरह के पेंट्स के निर्माण, व्यापार, आयात और निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया गया जिसमें सीसा की मात्रा 90 भाग प्रति मिलियन (पीपीएम) से अधिक थी। फिर भी, अपने घर और कार्यालय के लिए पेंट खरीदने से पहले इसमें मौजूद सीसा की मात्रा के लिए पैकेजिंग की जांच करना जरूरी है। कुछ ब्रांड सीसारहित (लेड-फ्री) पेंट भी बनाते हैं।
  • पुराने पानी के पाइप : वैसी जगहें जहां पर पानी के पाइप में सीसा मौजूद है वहां पर पानी के सप्लाई में भी सीसा मिल जाता है।
  • सीसा युक्त कॉस्मेटिक्स : भारत के ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स रूल्स में ऐसे कॉस्मेटिक्स के इस्तेमाल या आयात पर प्रतिबंध लगा दिया गया है, जिनमें सीसा होता है। फिर भी, आपको उन देशों से खरीदे गए सौंदर्य प्रसाधनों के बारे में सतर्क रहना चाहिए, जहां पर इस तरह के नियम नहीं हैं।
  • अन्य उत्पाद : सीसा, रंगीन कांच, क्रिस्टल ग्लासवेयर, गोला-बारूद (गोलियां), सेरैमिक ग्लेज़, आभूषण, खिलौने, स्मृति चिन्ह और पारंपरिक दवाइओं में भी हो सकता है।
  1. वयस्कों की तुलना में बच्चों को सीसा विषाक्तता अधिक होने का कारण क्या है?

वयस्कों की तुलना में बच्चों को सीसा विषाक्तता अधिक होने का कारण क्या है?

ऐसे ढेरों कारण हैं जिनकी वजह से वयस्कों की तुलना में बच्चों को सीसा विषाक्तता का उच्चा जोखिम हो सकता है :

  • अवशोषण की मात्रा अधिक : जैसा की पहले ही बताया जा चुका है कि वयस्क जहां सीसा से एक्सपोज होने के बाद उसका सिर्फ 10 प्रतिशत हिस्सा ही अवशोषित करते हैं वहीं बच्चे सीसा से एक्सपोज होने के बाद उसका करीब 50 प्रतिशत हिस्सा अवशोषित कर लेते हैं।
  • उच्च प्रभाव : अमेरिकन अकैडमीन ऑफ पीडियाट्रिक्स कमिटी ऑन इनवायरनमेंटल हेल्थ 2003 के अनुसार, प्रारंभिक जीवन में अतिसंवेदनशीलता की अवधि होती है- जन्म से पहले और जन्म के तुरंत बाद- जिसकी वयस्कों से कोई तुलना नहीं की जा सकती।
  • छोटा आकार : अमेरिकन अकैडमीन ऑफ पीडियाट्रिक्स कमिटी ऑन इनवायरनमेंटल हेल्थ 2003 के अनुसार, वयस्कों की तुलना में बच्चे "अपने शरीर के वजन के प्रति यूनिट के हिसाब से अधिक भोजन करते हैं, अधिक पानी पीते हैं और अधिक हवा सांस के जरिए शरीर के अंदर लेते हैं", इसलिए भोजन, पेय और वायु के माध्यम से उन्हें लेड एक्सपोजर अधिक होता है।
  • जिज्ञासा और पीका : बच्चे अपने आसपास की दुनिया को जानने के लिए कई चीजों को अपने मुंह में डाल लेते हैं। अगर इन वस्तुओं में सजावटी पेंट या ग्लेज़ मौजूद हो जिसमें सीसा होता है, तो इससे उनका लेड एक्सपोजर बढ़ जाता है। पीका एक ऐसी स्थिति है जिसमें लोग धूल-मिट्टी या गंदगी खाना पसंद करते हैं; वयस्कों की तुलना में बच्चों में यह समस्या अधिक देखने को मिलती है।
  • पोषक तत्वों की कमी : अनुसंधान से पता चलता है कि विटामिन सी की कमी, आयरन की कमी, कैल्शियम की कमी और कुछ हद तक, जिंक की कमी और फॉस्फोरस की कमी शरीर में सीसा के उच्च अवशोषण से जुड़ा है। हालांकि कुपोषण किसी भी उम्र में हो सकता है, लेकिन बच्चों में इसका खतरा अधिक होता है। (ध्यान दें : अनुसंधान ने खनिजों और विटामिन की कमियों को सीसा के अधिक अवशोषण से जोड़ा है, लेकिन इन पोषक तत्वों का अधिक मात्रा में सेवन शरीर में पहले से जमा सीसा के स्तर को कम नहीं कर सकता)
  • कम उम्र : समय के साथ शरीर में सीसा जमा होने लगता है, और इसका प्रभाव भी कई वर्षों बाद स्पष्ट नजर आता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, जो लोग बचपन में ही सीसा के संपर्क में आते हैं, उनमें कई तरह की जटिलताओं के विकसित होने का खतरा अधिक होता है और ऐसी ही एक जटिलता है डिमेंशिया।

अगर आप किसी ऐसे क्षेत्र में रहते हैं जहां धूल और गंदगी में सीसे की अधिक मात्रा है और जो धूल-धूसरित हो सकती है, या फिर आप किसी पुराने घर में रहते हैं जहां पाइप लाइन में सीसा जमा हो गया है, या फिर ऐसे घर में जहां सीसा युक्त पेंट किया हुआ है तो आप अपने और अपने बच्चों के लिए सीसा के एक्सपोजर के जोखिम को कम करने के निम्नलिखित उपाय कर सकते हैं:

अपने घर के लिए

  • रोजाना एक साफ और नमी वाले कपड़े से सभी सतहों पर मौजूद धूप को अच्छी तरह से पोछें
  • अपने बिल्डिंग मैनेजर या किसी ठेकेदार से पूछें कि क्या वह आपके घर में सीसायुक्त पेंट को हटाने और बदलने की जाए उसे सील करने का कोई विकल्प बता सकते हैं
  • यदि घर में लगी पाइप लाइन पुरानी है और आप पानी में सीसा के स्तर के बारे में अनिश्चित हैं, तो अपने बच्चे के स्नान के लिए पानी भरने से पहले लगभग एक मिनट तक नल को खुला छोड़ दें और पानी को बह जाने दें
  • यदि आपको संदेह है कि घर के आसपास मौजूद पाइन में सीसा की मौजूदगी हो सकती है तो बिना फिल्टर किए हुए नल के पानी से खाना न पकाएं

बच्चे के लिए

  • अपने बच्चे के खिलौनों को नियमित रूप से धोएं और साफ करें
  • बाहर से खेल कर आने के बाद, भोजन करने से पहले और सोने से पहले अपने बच्चे के हाथों को अच्छी तरह से धुलवाएं
  • सुनिश्चित करें कि आपके बच्चे को डाइट के माध्यम से पर्याप्त विटामिन सी, आयरन और कैल्शियम मिल रहा हो। जिन शिशुओं को विशेष रूप से स्तनपान कराया जाता है, उन्हें चार महीने का होने के बाद आयु-उपयुक्त आयरन सप्लिमेंट की आवश्यकता होगी। अपने बच्चे के लिए सबसे अच्छे विकल्प के बारे में अपने डॉक्टर से बात करें।

सीसा विषाक्तता का पहला संकेत आमतौर पर बच्चे का धीमा विकास, सीखने के लक्ष्यों के मामले में अपने साथियों से पीछे रह जाना और शारीरिक लक्षण जैसे- पेट की समस्याएं, सिरदर्द, ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई, सुस्ती और भूख की कमी शामिल है। अपने बाल रोग विशेषज्ञ के साथ इन लक्षणों पर चर्चा करें। डॉक्टर बच्चे की शारीरिक जांच करने के साथ ही लेड ब्लड टेस्ट की भी सलाह दे सकते हैं अगर उन्हें बच्चे में सीसा विषाक्तता होने का शक हो तो।

शोधकर्ताओं ने परमाणु अवशोषण स्पेक्ट्रोफोटोमेट्री का उपयोग किया है बच्चों के टूटे हुए दूध के दांत पर ताकि बच्चों के शरीर में सीसा के जमा होने के स्तर (सालों तक जमा हुए) का पता लगाया जा सके (पिछले चार हफ्तों के जोखिम की तुलना में जिसे बच्चे के खून के माध्यम से देखा जा सकता है)। हालांकि, वैज्ञानिक अनुसंधान के बाहर लोगों पर इस रासायनिक विश्लेषण का व्यापक रूप से उपयोग नहीं किया जाता है।

सीसा विषाक्तता के गंभीर मामलों में (खून में सीसा का स्तर 45 माइक्रोग्राम प्रति डेसिलीटर के ऊपर), डॉक्टर किलेशन थेरेपी की सिफारिश कर सकते हैं- डॉक्टर बच्चे को एक दवा भी प्रिस्क्राइब करते हैं जो उन्हें दी जाती है। यह गोली खून में मौजूद सीसे से खुद को बांध लेते ही और यूरिन के माध्यम से इसे शरीर से बाहर निकालने में मदद करती है। जो बच्चे इस गोली के प्रति बेहतर प्रतिक्रिया नहीं देते हैं उन्हें इंजेक्शन के माध्यम से एक वैकल्पिक किलेशन थेरेपी (EDTA) भी दी जाती है। बच्चों में सीसा विषाक्तता की कुछ जटिलताएं जैसे- व्यवहार संबंधी समस्याएं, सीखने में कठिनाई और रेडियल नर्व पाल्सी होने पर भी थेरेपी की आवश्यकता होती है।

अमेरिका के सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के "लेड द्वारा प्रभावित बच्चों के लिए शैक्षणिक हस्तक्षेप" दस्तावेज़ के अनुसार, जिन बच्चों में सीखने की समस्या और व्यवहार संबंधी मुद्दे होते हैं उनके बारे में जानने और उन्हें अपने साथियों के साथ आत्मसात करने के लिए कुछ शुरुआती हस्तक्षेप की जरूरत होती है ताकि सीसा विषाक्तता वाले बच्चों में सीखने के परिणामों में सुधार किया जा सके।

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