सेलुलाइटिस - Cellulitis in Hindi

Dr. Ayush PandeyMBBS

September 17, 2018

March 06, 2020

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सेलुलाइटिस
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सेलुलाइटिस क्या है?

सेलुलाइटिस एक आम और गंभीर बैक्टीरियल इन्फेक्शन होता है। सेलुलाइटिस में त्वचा में सूजन व लालिमा आ जाती है, जो छूने पर गर्म लगती है और उसमें छूने पर दर्द भी महसूस होता है। यह रोग शरीर के दूसरे भागों में काफी तेजी से फैलता है। सेलुलाइटिस संक्रमण आमतौर पर एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलता।

सेलुलाइटिस में आमतौर पर टांगों के निचले हिस्से की त्वचा अधिक प्रभावित होती है, हालांकि यह चेहरे पर या शरीर के किसी भी हिस्से पर हो सकता है। सेलुलाइटिस आमतौर पर त्वचा की ऊपरी परत को प्रभावित करता है। कुछ गंभीर मामलों में यह आपकी त्वचा के अंदर के ऊतकों को भी प्रभावित कर सकता है और आपकी लिम्फ नोड्स व रक्त प्रवाह में फैल सकता है।

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यदि इस रोग को बिना उपचार किए छोड़ दिया जाए तो यह तेजी से एक जीवन के लिए घातक स्थिति में बदल जाता है। यदि आपको स्वयं में सेलुलाइटिस के लक्षण नजर आने लगे हैं तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।

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सेलुलाइटिस के लक्षण - Cellulitis Symptoms in Hindi

सेलुलाइटिस होने पर कौन से लक्षण विकसित होने लगते हैं?

सेलुलाइटिस में होने वाले कुछ संभावित लक्षण जो आमतौर पर शरीर के एक तरफ ही विकसित होते हैं, इनमें निम्न शामिल हैं:

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डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए?

सेलुलाइटिस की समस्या का जल्द से जल्द पता लगाना और उसका इलाज करवाना बहुत जरूरी होता है क्योंकि यह रोग तेजी से आपके पूरे शरीर में फैल सकता है।

निम्न स्थितियों में आपातकालीन सहायता प्राप्त करें:

  • अगर आपके शरीर पर लाल और सूजन ग्रस्त चकत्ते हैं जिनको छूने पर दर्द होता है और वे तेजी से आकार बदल रहे हैं।
  • यदि आपको बुखार है। (और पढ़ें - बुखार कम करने के घरेलू उपाय)

यदि आपको बुखार नहीं है लेकिन आपकी त्वचा के चकत्ते लाल, गर्म, सूजन ग्रस्त हैं जिनको छूने पर दर्द होता है और वे लगातार फैल रहे हैं, तो आपको उसी दिन डॉक्टर को दिखा लेना चाहिए।

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सेलुलाइटिस के कारण और जोखिम - Cellulitis Causes & Risks in Hindi

सेलुलाइटिस क्यों होता है?  

सेलुलाइटिस तब होता है जब बैक्टीरिया, आमतौर पर "स्ट्रेप्टोकोकस" (Streptococcus) और "स्टैफिलोकोकस" (Staphylococcus) बैक्टीरिया किसी चोट या कट के अंदर से त्वचा में पहुंच जाते हैं। “मेथिसिलिन रेसिस्टेंट स्टैफिलोकोकस ऑरियस” (MRSA) नामक एक अधिक गंभीर स्टैफिलोकोकस इन्फेक्शन की घटनाओं में वृद्धि हो रही है।

वैसे सेलुलाइटिस शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकता है लेकिन यह ज्यादातर टांगों के निचले हिस्से में होता है। बैक्टीरिया ज्यादातर त्वचा के क्षतिग्रस्त क्षेत्र में प्रवेश करते हैं जैसे सर्जरी वाली जगह, त्वचा पर कट, घाव के छिद्र, अल्सर, एथलीट फुट और डर्मेटाइटिस आदि। (और पढ़ें - घाव पकाने का उपाय)

कुछ प्रकार के कीट व मकड़ी आदि के काटने से इस संक्रमण को फैलाने वाले बैक्टीरिया शरीर के अंदर प्रवेश कर जाते हैं। इसके अलावा बैक्टीरिया सूजन ग्रस्त, पपड़ीदार और रूखी त्वचा के अंदर से भी त्वचा के अंदर प्रवेश कर सकते हैं।

कुछ ऐसे कारक हैं जो आपको सेलुलाइटिस के गंभीर जोखिम में डाल देते हैं:

  • चोट - किसी भी प्रकार का त्वचा में कट, फ्रैक्चर, जलना, खरोंच लगना आदि की जगह से बैक्टीरिया त्वचा के अंदर प्रवेश कर जाते हैं।
  • कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली - कुछ ऐसी स्थितियां जो आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर करती हैं, जैसे डायबिटीज़, ल्यूकेमिया और एचआईवी एड्स आदि ये स्थितियां आपको इन्फेक्शन के प्रति अतिसंवेदनशील (आसानी से चपेट में आ जाना) बना देती हैं। कोर्टिकोस्टेरॉयड जैसी कुछ दवाएं भी आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर बना देती हैं। (और पढ़ें - डायबिटीज में परहेज)
  • त्वचा संबंधी समस्याएं - त्वचा के विकार जैसे एक्जिमा, एथलीट फुट, चिकनपॉक्स और शिंगल्स आदि समस्याएं त्वचा में मामूली छिद्र या दरारें बना देते हैं जिससे बैक्टीरिया को त्वचा के अंदर प्रवेश करने का रास्ता मिल जाता है। (और पढ़ें - एक्जिमा का घरेलू उपाय)
  • आपकी बाजू व टांगों में लंबे समय से सूजन (Lymphedema) - ऊतकों में सूजन आने पर त्वचा में मामूली दरारें पड़ सकती हैं जिससे इन्फेक्शन की चपेट में आने के आपके जोखिम बढ़ जाते हैं।
  • पहले कभी सेलुलाइटिस हो चुका हो - जिन लोगों को पहले भी सेलुलाइटिस हो चुका हो खासकर टांगों के निचले हिस्से में उनमें यह इन्फेक्शन फिर से विकसित होने के जोखिम बढ़ जाते हैं।
  • इंट्रावेनस दवाओं का उपयोग - जो लोग अवैध ड्रग्स को इंजेक्शन के द्वारा लेते हैं उनमें सेलुलाइटिस विकसित होने के अत्यधिक जोखिम होते हैं।
  •  मोटापा - अधिक वजन बढ़ने से सेलुलाइटिस विकसित होने के जोखिम बढ़ जाते हैं साथ ही एक बार मोटापा बढ़ने और सेलुलाइटिस होने से इसके दोबारा होने के खतरे बढ़ जाते हैं।

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सेलुलाइटिस के बचाव के उपाय - Prevention of Cellulitis in Hindi

सेलुलाइटिस से बचाव कैसे करें?

यदि सेलुलाइटिस इन्फेक्शन बार-बार हो रहा है तो डॉक्टर “प्रिवेन्टिव एंटीबायोटिक्स” दवाएं लिख सकते हैं। जब आपकी त्वचा पर चोट या घाव आदि हो गया हो जाता है, तो सेलुलाइटिस व अन्य संक्रमणों से बचाव रखने के लिए निम्न सावधानियां बरतनी चाहिए:

  • अपने घाव को पट्टी (बैंडेज) के साथ ढक कर रखें - रोजाना बैंडेज को बदलते रहें।
  • रोजाना अपने घाव को साबुन और पानी के साथ धोएं - रोजाना नहाने के दौरान इस प्रक्रिया को धीरे-धीरे करें।
  • इन्फेक्शन के संकेतों की जांच करते रहें - लालिमा, दर्द और द्रव बहना आदि ये सभी संकेत संभावित रूप से इन्फेक्शन के संकेत हो सकते हैं जिनको मेडिकल जांच की आवश्यकता पड़ती है। (और पढ़ें - मवाद का उपचार)
  • सुरक्षात्मक क्रीम व मरहम (मलहम) लगाएं - ज्यादातर घावों की सतह के लिए  ओवर-द-काउंटर (मेडिकल स्टोर से डॉक्टर की पर्ची के बिना मिलने वाली दवाएं व अन्य प्रोडक्ट्स) एंटीबायोटिक क्रीम और मलहम पर्याप्त सुरक्षा प्रदान करते है।

(और पढ़ें - घाव की मरहम पट्टी कैसे करे)

डायबिटीज वाले लोग या जिन लोगों के खून बहने की प्रक्रिया कमजोर होती है उनको चोट से बचने के लिए अतिरिक्त सावधानियां बरतनी पड़ती हैं। त्वचा के देखभाल उपायों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • एथलीट फुट जैसे त्वचा की सतह पर होने वाले संक्रमण का जल्दी से इलाज करवाएं - सतह पर होने वाले संक्रमण को सुपरफिशल इन्फेक्शन (Superficial infection) भी कहा जाता है, ये संक्रमण एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में आसानी से फैल जाते हैं। इसलिए जल्द से जल्द उपचार शुरू करें।ॉ
  • अपने हाथों व पैरों की उंगलियों के नाखून सावधानीपूर्वक काटें - नाखून काटने के दौरान यह ध्यान रखें कि आप आस-पास की त्वचा को नहीं काट रहे। (और पढ़ें - नाखूनों की देखभाल के लिए टिप्स)
  • अपने हाथों और पैरों को सुरक्षित रखें - इनको पर्याप्त सुरक्षा प्रदान करने के लिए उपयुक्त जूते और दस्ताने पहनें।
  • रोजाना अपने पैरों का निरीक्षण करना - नियमित रूप से अपने पैरों में किसी प्रकार की चोट का निरीक्षण करने से संक्रमण का जल्दी पता लगाया जा सकता है। (और पढ़ें - पैरों में दर्द का इलाज)
  • नियमित रूप से त्वचा को मॉश्चराइज करना - त्वचा में चिकनाई रखने से त्वचा में दरार पड़ने या छिलने से रोकथाम की जा सकती है।

(और पढ़ें - मॉइस्चराइजर लगाने का तरीका)

सेलुलाइटिस का परीक्षण - Diagnosis of Cellulitis in Hindi

सेलुलाइटिस का परीक्षण कैसे किया जाता है?

आपकी त्वचा की दिखावट ही डॉक्टर को स्थिति का परीक्षण करने में मदद करेगी। समस्या की जांच करने के लिए डॉक्टर आपको ब्लड टेस्ट करवाने का सुझाव दे सकते हैं। अन्य स्थिति का पता लगाने के लिए वाउंड कल्चर (घाव का परीक्षण) व अन्य टेस्ट भी किए जा सकते हैं।

(और पढ़ें - क्रिएटिनिन टेस्ट क्या होता है)

सेलुलाइटिस का इलाज - Cellulitis Treatment in Hindi

सेलुलाइटिस का इलाज कैसे किया जाता है?

सेलुलाइटिस के इलाज में आमतौर पर डॉक्टर द्वारा लिखी गई एंटीबायोटिक टेबलेट या कैप्सूल आदि शामिल होते हैं। एंटीबायोटिक दवाएं शुरू होने के तीन दिन के भीतर मरीज डॉक्टर को यह बता देते हैं कि संक्रमण उपचार पर प्रतिक्रिया दे रहा है या नहीं यानि तीन दिन में स्थिती स्पष्ट हो जाती है कि इलाज लाभ दे रहा है या नहीं। आपको एंटीबायोटिक दवाएं उतने ही दिन तक लेनी पड़ती है जितने दिन तक डॉक्टर आपको कहते हैं, आमतौर पर डॉक्टर पांच से दस दिन तक यह दवाएं लेने को कहते हैं कुछ मामलों में 14 दिन तक का समय भी लग सकता है।

(और पढ़ें - एंटीबायोटिक दवा लेने से पहले रखें इन बातों का ध्यान)

ज्यादातर मामलों में सेलुलाइटिस से पैदा होने वाले लक्षण आमतौर पर कुछ दिनों में गायब होने लगते हैं। आपको अस्पताल में भर्ती होने और नसों के द्वारा (intravenously) एंटीबायोटिक दवाएं लेने की आवश्यकता भी पड़ सकती है, यदि:

  • सेलुलाइटिस के लक्षण खाने वाली एंटीबायोटिक दवाओं पर प्रतिक्रिया ना दें
  • लक्षण शरीर में काफी फैल गए हैं
  • यदि आपको बुखार है

आमतौर पर डॉक्टर ऐसी दवाएं लिखते हैं जो स्ट्रेप्टोकोक्की (Streptococci) और स्टैफीलोकोक्की (Staphylococci) दोनों प्रकार के बैक्टीरिया पर प्रभावी होती है। यह बहुत महत्वपूर्ण है कि आप दवाओं को डॉक्टर द्वारा दिए गए निर्देश के अनुसार ही लें और दवाओं का पूरा कोर्स खत्म करें भले ही आप ठीक महसूस कर रहे हों।

डॉक्टर आपको आपके शरीर का प्रभावित क्षेत्र ऊपर उठा कर रखने का सुझाव भी दे सकते हैं जिससे आप और जल्दी ठीक होने लगेंगे।

(और पढ़ें - दवाओं की जानकारी)

सेलुलाइटिस की जटिलताएं - Cellulitis Complications in Hindi

सेलुलाइटिस से कौन सी समस्याएं विकसित हो सकती हैं?

जो बैक्टीरिया सेलुलाइटिस रोग विकसित करता है वह तेजी से फैल सकता है और फैल कर लिम्फ नोड्स व खून में प्रवेश कर सकता है। सेलुलाइटिस बार-बार होने से यह लिम्फैटिक ड्रेनेज सिस्टम (Lymphatic drainage system) को नुकसान पहुंचा सकता है और प्रभावित अंग में एक दीर्घकालिक सूजन का कारण बन सकता है।

(और पढ़ें - पसली में सूजन का इलाज)

कुछ दुर्लभ मामलों में इन्फेक्शन ऊतकों की गहरी परत में भी फैल सकता है जिसको फेसियल लाइनिंग (Fascial lining) कहा जाता है। फ्लैश इटिंग स्ट्रेप (एक घातक रोग जिसको नेक्रोटाइज़िंग फैशिआइटिस भी कहा जाता है।) भी गहरी परतों में होने वाले संक्रमण का एक उदाहरण है। यह अत्यधिक आपातकालीन स्थिति का संकेत देता है।

(और पढ़ें - बैक्टीरियल संक्रमण का इलाज)



संदर्भ

  1. MedlinePlus Medical Encyclopedia: US National Library of Medicine; Cellulitis
  2. MedlinePlus Medical Encyclopedia: US National Library of Medicine; Cellulitis
  3. Healthdirect Australia. Cellulitis. Australian government: Department of Health
  4. Better health channel. Department of Health and Human Services [internet]. State government of Victoria; Cellulitis
  5. Better health channel. Department of Health and Human Services [internet]. State government of Victoria; Cellulitis

सेलुलाइटिस की दवा - Medicines for Cellulitis in Hindi

सेलुलाइटिस के लिए बहुत दवाइयां उपलब्ध हैं। नीचे यह सारी दवाइयां दी गयी हैं। लेकिन ध्यान रहे कि डॉक्टर से सलाह किये बिना आप कृपया कोई भी दवाई न लें। बिना डॉक्टर की सलाह से दवाई लेने से आपकी सेहत को गंभीर नुक्सान हो सकता है।

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सेलुलाइटिस की ओटीसी दवा - OTC Medicines for Cellulitis in Hindi

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