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क्या आप सर्दियों के बारे में चिंतित हैं? क्या अभी भी लगातार कई दवाइयां लेने के बाद आपको ठंड और खांसी है? क्या आप सभी ठंड से संबंधित उपचारों के लिए, दवाइयों के बढ़ते बिल से परेशान हैं? तो हमारे पास हैं आपके लिए एक जादुई उपाय, जो न केवल आपके बिल को कम कर सकता है बल्कि सर्दियों के दौरान आपको खांसी, ठंडा और खराब गले से तुरंत राहत प्रदान कर सकता है। यह जादुई आयुर्वेदिक दवा है 'काढ़ा'। यह एक आयुर्वेदिक फार्मूला है जो घर पर तैयार किया जाता है।

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  1. काढ़ा पीने के फायदे - Kadha peene ke fayde in Hindi
  2. काढ़ा बनाने का तरीका - Kadha banane ka tarika in Hindi
  3. काढ़े के नुकसान - Kadha Side Effects in Hindi

काढ़ा एक आयुर्वेदिक रेसिपी है, जिसका इस्तेमाल लंबे समय से सर्दी जुकाम, खांसी, खराब गले, बुखार एवं पाचन को ठीक करने के लिए किया जा रहा है।

(और पढ़ें - जुकाम के घरेलू उपाय)

तो आइये जानते हैं इसके जादुई लाभों के बारे में -

  1. काढ़ा पीने के फायदे रखें पाचन को स्वस्थ - Kadha for Digestion in Hindi
  2. काढ़ा के फायदे बढ़ाएं प्रतिरक्षा - Kadha for Increasing Immunity in Hindi
  3. काढ़ा बुखार दूर करने में सहायक - Kadha for Fever in Hindi
  4. काढ़े के फायदे है डायबिटीज में लाभकारी - Kadha for Diabetes in Hindi

काढ़ा पीने के फायदे रखें पाचन को स्वस्थ - Kadha for Digestion in Hindi

सामग्री:

  1. सौंफ़ बीज
  2. अदरक
  3. अजवाइन

नीचे बताई गई काढ़े की विधि का पालन करें और सौंफ, अदरक, अजवाइन को मिक्स करके काढ़ा तैयार करें। इसमें स्वाद के अनुसार शहद मिलाएं। यह काढ़ा आपके पाचन को स्वस्थ रखने में मदद करेगा। 

(और पढ़ें - पाचन क्रिया सुधारने के लिए उपाय)

काढ़ा के फायदे बढ़ाएं प्रतिरक्षा - Kadha for Increasing Immunity in Hindi

यदि आप अक्सर विभिन्न प्रकार की बीमारियों से ग्रस्त रहते हैं तो आपको अपनी प्रतिरक्षा को मजबूत करने की जरूरत है। इसके लिए आपको इलायची, सूखी अदरक, दालचीनी, सफेद मिर्च और शहद जैसे मसालों से तैयार काढ़ें का सेवन करना चाहिए। 

(और पढ़ें - रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए क्या खाएं)

काढ़ा बुखार दूर करने में सहायक - Kadha for Fever in Hindi

सामग्री:

  1. 15 तुलसी की पत्तियां
  2. एक चुटकी सौंफ़
  3. 5 लौंग
  4.  एक चुटकी काला नमक

बताई गई जड़ी-बूटियों और मसालों का उपयोग करके काढ़ा तैयार करें। इसमें एक चुटकी काला नमक डालिये और इसका सेवन करें। एक दिन में 3 बार इस काढ़े का सेवन करें। यह काढ़ा बुखार में बहुत ही लाभकारी होता है।

(और पढ़ें - बुखार में क्या खाना चाहिए)

काढ़े के फायदे है डायबिटीज में लाभकारी - Kadha for Diabetes in Hindi

यदि आपको डायबिटीज है और आप अपने रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करना चाहते हैं, तो काढ़ा आपके लिए एक बहुत अच्छा विकल्प है। मेथी और हल्दी को 1-1 चम्मच मिलाएं और पानी में उबाल लें और इस काढ़े का सेवन करें। यह काढ़ा डायबिटीज मरीज के लिए बहुत ही लाभकारी होता है। 

(और पढ़ें - डायबिटीज का आयुर्वेदिक इलाज)

काढ़ा बनाने की सामग्री

  1. ताजा अदरक - 50 ग्राम
  2. ताजा हल्दी - 30 ग्राम
  3. एक चौथाई चम्मच जायफल पाउडर
  4. एक चौथाई चम्मच दालचीनी पाउडर
  5. 1 लौंग
  6. 4 इलायची के टुकड़े
  7. 1-2 तेज पत्ता
  8. कुछ सौंफ़ के बीज
  9. 4 तुलसी के पत्ते
  10. 4 कप पानी
  11. काली मिर्च - एक चुटकी
  12. केसर - एक चुटकी
  13. शहद की कुछ बूंदे
  14. एक चौथाई चम्मच घी
  15. स्वाद के अनुसार चीनी

काढ़ा बनाने की विधि:

सबसे पहले अदरक और हल्दी से धूल मिटटी को निकालने के लिए इसे पानी से धो लें। इसके बाद कुछ तुलसी के पत्ते लें और उन्हें ब्लेंडर का उपयोग करके अदरक, इलायची और हल्दी के साथ पीस लें। इस पेस्ट को जायफल पाउडर, दालचीनी पाउडर, काली मिर्च, तेजपत्ते, सौंफ़ के बीज और लौंग के साथ उबलते हुए पानी में डाल दें। इसे कम से कम 5 मिनट के लिए उबालें। अब इसे कप में गर्मागर्म परोसें (यदि मिट्टी के कप का उपयोग किया जाए तो स्वाद और भी अधिक स्वादिष्ट होगा)। अधिक गर्माहट पाने के लिए इसमें कुछ शहद, घी और केसर मिलाएं।

हालांकि काढ़े का कोई बड़ा नुकसान नहीं है, लेकिन कुछ चीजों को ध्यान में रखना चाहिए-

  1. काढ़े में बहुत अधिक मात्रा में अदरक का उपयोग करने से सीने में जलन और पेट खराब हो सकता है।
  2. काढ़े में सीमित मात्रा में घी का उपयोग करना चाहिए। घी की अतिरिक्त मात्रा अपच, पेट फूलने और बर्निंग सेंसेशन का कारण बन सकती है।
  3. उपवास के दौरान आपको काढ़ा नहीं लेना चाहिए क्योंकि इससे मतली (उल्टी) और पेट में जलन पैदा हो सकती है।
  4. शहद का उपयोग भी सीमित मात्रा में ही होना चाहिए क्योंकि इससे शरीर की गर्मी में वृद्धि हो सकती है, जिसके परिणामस्वरूप बेचैनी पैदा हो सकती है।
  5. डायबिटीज रोगियों के मामले में, चीनी की मात्रा को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
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