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लूप इलेक्ट्रोसर्जिकल एक्सिशन प्रोसीजर एक सर्जरी प्रक्रिया है, जिसमें सर्विक्स और योनि में मौजूद असामान्य कोशिकाओं की पहचान करके इलाज किया जाता है। सर्विक्स में असामान्य कोशिकाओं को सर्वाइकल डिसप्लेसिया कहा जाता है।

यदि सर्वाइकल डिसप्लेसिया का समय पर इलाज न हो पाए, तो यह भविष्य में कैंसर का कारण बन सकता है। लूप इलेक्ट्रोसर्जिकल एक्सिशन प्रोसीजर की मदद से इन कोशिकाओं को निकाला जाता है। इसके बाद इन कोशिकाओं को लेबोरेटरी में कैंसर की जांच के लिए भेज दिया जाता है। सर्जरी से पहले आपको पैप टेस्ट या कोलोनोस्कोपी बायोप्सी करवाने को कहा जाता है। यदि इन टेस्टों की मदद से असामान्य कोशिकाएं मिल जाती हैं, तो आपके सर्जन लूप इलेक्ट्रोसर्जिकल एक्सिशन प्रोसीजर करने पर विचार कर सकते हैं। सर्जरी से कम से कम 30 मिनट पहले आपको कुछ विशेष दर्दनिवारक दवाएं दी जाती हैं। यह सर्जरी लोकल एनेस्थीसिया का इंजेक्शन लगाकर की जाती है, जिससे उस हिस्से को सुन्न कर दिया जाता है जिसकी सर्जरी करनी है।

सर्जरी के दौरान सर्विक्स में लूप नामक एक विशेष उपकरण डाला जाता है, इस उपकरण की मदद से अंदर इलेक्ट्रिकल करंट छोड़ा जाता है। इलेक्ट्रिकल करंट की मदद से ऊतकों की उस परत को हटा दिया जाता है, जिसमें असामान्य कोशिकाएं मौजूद होती हैं। सर्जरी के बाद आपको कुछ समय सर्जरी वालाे हिस्से में दर्द व ऐंठन महसूस हो सकती है और थोड़ी बहुत ब्लीडिंग भी हो सकती है। आपको पीरियड के दौरान रक्तस्राव में भी कुछ बदलाव मिल सकते हैं। सर्जरी के बाद कम से कम चार हफ्तों तक आपको यौन गतिविधियां करने और टैम्पोन आदि का इस्तेमाल करने से मना किया जाता है। सर्जरी के एक महीने बाद फिर से पैप टेस्ट किया जाता है।

(और पढ़ें - मांसपेशियों में ऐंठन के लक्षण)

  1. लूप इलेक्ट्रोसर्जिकल एक्सिशन प्रोसीजर क्या है - What is Loop electrosurgical excision procedure in Hindi
  2. लूप इलेक्ट्रोसर्जिकल एक्सिशन प्रोसीजर किसलिए की जाती है - Why is Loop electrosurgical excision procedure done in Hindi
  3. लूप इलेक्ट्रोसर्जिकल एक्सिशन प्रोसीजर से पहले - Before Loop electrosurgical excision procedure in Hindi
  4. लूप इलेक्ट्रोसर्जिकल एक्सिशन प्रोसीजर के दौरान - During Loop electrosurgical excision procedure in Hindi
  5. लूप इलेक्ट्रोसर्जिकल एक्सिशन प्रोसीजर के बाद - After Loop electrosurgical excision procedure in Hindi
  6. लूप इलेक्ट्रोसर्जिकल एक्सिशन प्रोसीजर की जटिलताएं - Risks with Loop electrosurgical excision procedure in Hindi
लूप इलेक्ट्रोसर्जिकल एक्सिशन प्रोसीजर के डॉक्टर

लूप इलेक्ट्रोसर्जिकल एक्सिशन प्रोसीजर क्या है?

लूप इलेक्ट्रोसर्जिकल एक्सिशन प्रोसीजर को एलईईपी भी कहा जाता है, जिसकी मदद से योनि व सर्विक्स में मौजूद असाधारण कोशिकाओं और ऊतकों का पता लगाकर उनका इलाज किया जाता है। सर्विक्स गर्भाशय का सबसे निचला हिस्सा होता है, जो योनि को गर्भाशय से जोड़ता है। सर्विक्स में असाधारण कोशिकाएं होने की स्थिति को सर्वाइकल डिसप्लेसिया कहा जाता है।

यह भी संभव है कि ये कोशिकाएं कैंसरयुक्त न हों, लेकिन अंत में ये कैंसर होने के खतरे को असाधारण रूप से बढ़ा देती हैं। इसलिए इस प्रोसीजर में सर्जन लूप नामक एक विशेष उपकरण का इस्तेमाल करते हैं। लूप एक पतला तार जैसा उपकरण होता है, जिसकी मदद से असाधारण कोशिकाओं को निकाला जाता है। निकाली गई कोशिकाओं को लेबोरेटरी में जांच के लिए भेज दिया जाता है, ताकि कैंसर की उपस्थिति का पता लगाया जा सके।

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एलईईपी क्यों की जाती है?

जिन लोगों को सर्वाइकल डिसप्लेसिया की समस्या है, उनके लिए लूप इलेक्ट्रोसर्जिकल एक्सिशन प्रोसीजर की जाती है। इसके अलावा योनि या सर्वाइकल कैंसर का पता लगाने के लिए भी एलईईपी की जा सकती है। इस ऑपरेशन प्रोसीजर की मदद से निम्न स्थितियों का पता लगाया जाता है और उनका इलाज किया जाता है -

  • पोलिप्स (असाधारण रूप से बढ़ी हुई त्वचा जो कैंसरयुक्त नहीं है)
  • डाइथिलस्टिलबेस्टोल दवा के संपर्क में आना, जो प्रजनन अंगों में कैंसर होने के खतरे को बढ़ा देती है।
  • जननांग मस्से (यह आमतौर पर ह्यूमन एचपीवी संक्रमण से होता है, जो सर्वाइकल कैंसर होने का खतरा बढ़ा देते हैं।)

कई बार सर्वाइकल डिसप्लेसिया और एचपीवी संक्रमण में कोई लक्षण नहीं होता है। हालांकि, लक्षण विकसित तब होते हैं, जब असाधारण कोशिकाएं कैंसरयुक्त बन जाती हैं और आसपास के ऊतकों को नष्ट करने लग जाती हैं। इनमें निम्न शामिल हैं -

एलईईपी किसे नहीं करवानी चाहिए?

कुछ स्थितियां हैं, जिमें सर्जन लूप इलेक्ट्रोसर्जिकल एक्सिशन प्रोसीजर न करवाने की सलाह देते हैं जैसे :

(और पढ़ें - सर्विक्स में सूजन का इलाज)

एलईईपी से पहले क्या तैयारी की जाती है?

लूप इलेक्ट्रोसर्जिकल एक्सिशन प्रोसीजर से कुछ दिन पहले आपको अस्पताल बुलाया जाता है, जहां आपका शारीरिक परीक्षण किया जाता है और साथ ही कुछ अन्य तैयारियां की जाती हैं। सर्जरी से पहले आमतौर पर निम्न टेस्ट किए जाते हैं -

  • पैप टेस्ट -
    इसकी मदद से योनि व सर्विक्स में किसी प्रकार की असामान्यता या समस्या की जांच की जाती है।
     
  • कोल्पोस्कोपी -
    इसमें कोल्पोस्कोप नामक एक विशेष उपकरण का इस्तेमाल किया जाता है, जिसकी मदद से सर्विक्स की जांच की जाती है।
     
  • बायोप्सी -
    इस टेस्ट की मदद से प्रभावित हिस्से से ऊतकों के सैंपल लिए जाते हैं, जिनकी जांच करके कैंसर आदि का पता लगाया जाता है।

इसके अलावा एलईईपी करने से पहले निम्न तैयारियां की जाती हैं -

  • आपके स्वास्थ्य संबंधी पिछली सभी जानकारियां ली जाती हैं और साथ ही यह भी पूछा जाता है कि आपको कोई रोग या एलर्जी तो नहीं है।
  • यदि आप कोई भी दवा, हर्बल उत्पाद, विटामिन, मिनरल या अन्य कोई सप्लीमेंट ले रहे हैं तो डॉक्टर को इस बार में बता दें। डॉक्टर आपको इनमें से कुछ दवाओं के सेवन को एक निश्चित समय के लिए बंद करन की सलाह दे सकते हैं, जिनमें मुख्य रूप से रक्त पतला करने वाली दवाएं शामिल हैं जैसे एस्पिरिन, आइबुप्रोफेन और विटामिन ई आदि।
  • यदि आप धूम्रपान या शराब का सेवन करते हैं, तो सर्जरी से कुछ दिन पहले और बाद तक इन्हें छोड़ने की सलाह दी जाती है। ऐसा इसलिए क्योंकि सिगरेट व शराब पीने से सर्जरी के बाद कई जटिलताएं होने का खतरा बढ़ जाता है। (और पढ़ें - सिगरेट छोड़ने के घरेलू उपाय)
  • आपको सर्जरी के लिए अस्पताल में खाली पेट आने को कहा जाता है।
  • यदि आप गर्भवती हैं या गर्भधारण करने की कोशिश कर रही हैं तो डॉक्टर को इस बारे में अवश्य बता दें।
  • सर्जरी से एक दिन पहले आपको यौन संबंध बनाने, ड्यूसिंग करने, टैम्पोन लगाने या योनि में कोई अन्य क्रीम आदि का इस्तेमाल करने से मना किया जाता है।
  • ऑपरेशन वाले दिन अस्पताल में अपने साथ किसी करीबी रिश्तेदार या मित्र को लाएं, जो सर्जरी से पहले और बाद के कार्यों में आपकी मदद कर सके।
  • अस्पताल आने से पहले नहा लें और अपने साथ कपड़ों की एक अतिरिक्त जोड़ी भी ले लें। साथ ही आपको अपने साथ कुछ सैनिटरी पैड्स लाने को कहा जाता है।
  • जब आप अस्पताल पहुंच जाते हैं, तो आपको सर्जरी के बारे में सारी जानकारी दे दी जाती है और साथ ही आपको एक सहमति पत्र दिया जाता है। सहमति पत्र पर हस्ताक्षर करके आप सर्जन को सर्जरी करने की अनुमति दे देते हैं। हालांकि, सहमति पत्र पर हस्ताक्षर करने से पहले एक बार उसे अच्छे से पढ़ व समझ लेना चाहिए।

एलईईपी सर्जरी कैसे की जाती है?

जब आप ऑपरेशन के लिए अस्पताल पहुंच जाते हैं, तो मेडिकल स्टाफ आपको एक विशेष ड्रेस (हॉस्पिटल गाउन) पहनने को देते हैं। आपको मूत्राशय खाली करने को कहा जाता है और फिर आपको ऑपरेशन थिएटर में ले जाया जाता है। ऑपरेशन थिएटर में आपको एक विशेष टेबल पर लिटा दिया जाता है और आपके पैरों को टेबल के दोनों तरफ बने फुटरेस्ट पर रख दिया जाता है। इसके बाद योनि में स्पेक्युलम लगा दिया जाता है, जिससे योनिद्वार खुल जाता है और सर्जन सर्विक्स तक पहुंच पाते हैं। सर्विक्स के अंदर देखने के लिए योनि में कोलोस्कोप नामक उपकरण डाला जाता है। सर्विक्स को स्थिर रखने के लिए टेनाक्युलम (एक प्रकार का फॉरसेप्स) का इस्तेमाल किया जाता है। 

इसके बाद लोकल एनेनस्थीसिया का इंजेक्शन लगाया जाता है, जब इसका असर शुरू हो जाता है और हिस्सा सुन्न हो जाता है तो लूप इलेक्ट्रोसर्जिकल एक्सिशन का प्रोसीजर शुरू किया जाता है, जो कुछ इस प्रकार है -

  • सर्जन स्पेक्युलम के अंदर से सर्विक्स में एक इलेक्ट्रोसर्जिकल लूप डालते हैं। सर्विक्स की गहराई तक जाने के लिए कई लूप्स का इस्तेमाल भी किया जा सकता है।
  • जब लूप निर्धारित जगह पर पहुंच जाता है, तो यह ऊतकों की एक पतली सतह को काट देता है, जिससे असाधारण कोशिकाएं निकल पाती हैं।
  • इलेक्ट्रिक करंट की मददद से उस हिस्से की सभी रक्त वाहिकाओं को बंद कर दिया जाता है, ताकि सर्जरी के बाद रक्तस्राव न हो पाए।
  • अंत में निकाले गए ऊतकों को लेबोरेट्री में परीक्षण के लिए भेज दिया जाता है।
  • इस सर्जरी प्रोसीजर को पूरा होने में 10 से 20 मिनट का समय लगता है। यदि सर्जरी के बाद आपका स्वास्थ्य स्थिर है, तो आपको उसी दिन अस्पताल से छुट्टी मिल सकती है।

(और पढ़ें - गर्भाशय ग्रीवा निकालने की सर्जरी)

एलईईपी के बाद देखभाल कैसे की जाती है?

इस सर्जरी प्रोसीजर के बाद जब आप घर पहुंच जाते हैं, तो आपको निम्न तरीके से अपनी देखभाल करने की सलाह दी जाती है -

  • दवाएं
    • आपको सर्जरी के बाद एक से तीन हफ्तों तक योनि से रक्त आना और ऐंठन महसूस होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। साथ ही इस दौरान योनि से काले रंग का द्रव भी आ सकता है। यह द्रव आमतौर पर रक्तस्राव रोकने वाली दवाओं के साइड इफेक्ट के रूप में हो सकता है।
    • आपको सर्जरी के बाद कम से कम चार हफ्तों तक टैम्पोन का इस्तेमाल न करने को कहा जाता है। इसकी बजाय आप सैनिटरी पैड्स का इस्तेमाल कर सकती हैं।
    • सर्जरी के बाद कुछ महीनों तक आपको मासिक धर्म में होने वाले  रक्तस्राव में भी कुछ बदलाव महसूस हो सकता है। उदाहरण के लिए कुछ महीने तक मासिक धर्म में रक्तस्राव सामान्य से अधिक हो सकता है।
       
  • नहाना
    • सर्जरी के बाद आपको नहाने की अनुमति दी जा सकती है।
    • आपको सर्जरी के बाद कम से कम चार हफ्तों तक पूल या बाथटब में नहाने से मना किया जाता है।
       
  • गतिविधियां
    • सर्जरी के बाद कम से कम चार हफ्तों तक आपको यौन संबंध बनाने या ड्यूसिंग करने से मना किया जाता है।
    • सर्जरी के बाद पहले दो हफ्तों तक कोई भी ऐसी गतिविधि न करें जिसमें अधिक मेहनत करनी पड़ती हो और न ही कोई अधिक भारी वस्तु उठाएं।
    • अपनी शारीरिक गतिविधियों को धीरे-धीरे बढ़ाएं। यदि आपको बिना किसी मासिक धर्म के रक्तस्राव महसूस होता है, तो कुछ दिनों के लिए शारीरिक गतिविधियां बंद कर दें।

डॉक्टर को कब दिखाएं?

यदि आपको एलईईपी के बाद निम्न में से कोई भी लक्षण महसूस होता है, तो डॉक्टर को इस बारे में बता दें -

  • अधिक रक्तस्राव होना
  • बुखार
  • सर्जरी वाले हिस्से से बदबूदार द्रव बहना
  • पेट में गंभीर दर्द होना
  • रक्त के साथ-साथ थक्के आना

(और पढ़ें - पेट दर्द का इलाज)

एलईईपी से क्या जोखिम हो सकते हैं?

लूप इलेक्ट्रोसर्जिकल एक्सिशन प्रोसीजर से निम्न जोखिम व जटिलताएं हो सकती हैं -

  • सर्विक्स में संकुचन होना
  • सर्विक्स के ऊतकों में स्कार बनना
  • ब्लीडिंग
  • भविष्य में गर्भधारण करने में दिक्कत होना (जैसे बच्चे का वजन सामान्य से कम होना समय से पहले प्रसव)
  • सर्जरी के दौरान असाधारण ऊतक पूरी तरह से न निकल पाना
  • संक्रमण
  • सर्जरी के दौरान आसपास के स्वस्थ ऊतक क्षतिग्रस्त हो जाना

(और पढ़ें - योनि में संक्रमण का कारण)

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संदर्भ

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