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रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन प्रोसीजर में इलेक्ट्रिक करंट या रेडियो तरंगों का इस्तेमाल करके गर्मी पैदा की जाती है और इस गर्मी से दर्द व अन्य लक्षण पैदा करने वाले असामान्य ऊतकों को नष्ट किया जाता है। रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन एक ऐसी सर्जरी प्रोसीजर है, जिसका उपयोग वेरीकोज वेन्स, बिनाइन प्रोस्टेट हाइपरप्लासिया या स्लीप एपनिया का इलाज करने के लिए किया जाता है। यह सर्जरी खाली पेट की जाती है और सर्जरी के बाद भी आप तब तक सामान्य रूप से खा-पी नहीं सकते हैं, जब तक आप सामान्य रूप से ठीक नहीं हो जाते हैं।

यह सर्जरी लोकल एनेस्थीसिया और अन्य सीडेटिव दवाओं के इंजेक्शन लगाकर की जाती है। सर्जरी के बाद उस हिस्से पर पट्टी कर दी जाती है या स्टॉकिंग्स पहना दी जाती है। सर्जरी के बाद होने वाले दर्द को रोकने के लिए दर्द निवारक दवाएं दी जाती हैं और कुछ दिनों तक आपको आराम करने की सलाह दी जाती है, ताकि सर्जरी के घाव जल्दी ठीक हो सकें।

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  1. रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन क्या है - What is Radiofrequency ablation in Hindi
  2. रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन किसलिए की जाती है - Why is Radiofrequency ablation done in Hindi
  3. रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन से पहले - Before Radiofrequency ablation in Hindi
  4. रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन के दौरान - During Radiofrequency ablation in Hindi
  5. रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन के बाद - After Radiofrequency ablation in Hindi
  6. रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन की जटिलताएं - Complications of Radiofrequency ablation in Hindi

रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन क्या है?

रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन एक सर्जरी प्रोसीजर है, जिसमें इलेक्ट्रिक करंट या रेडियो तरंगों की मदद से असाधारण ऊतकों को नष्ट किया जाता है। इस प्रक्रिया में इलेक्ट्रिक करंट या रेडियों तरंगों की मदद से विशेष गर्मी पैदा की जाती है, जिससे कई समस्याओं का इलाज करने में मदद मिलती है जैसे वेरीकोज वेन्स, एरिद्मिया, प्रोस्टेट बढ़ना और ट्यूमर आदि। इसमें की जाने वाली प्रक्रिया समस्या के प्रकार और प्रभावित ऊतकों की लोकेशन के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। उदाहरण के तौर पर वेरीकोज वेन्स के मामलों में हीट एनर्जी छोड़ी जाती है, जिससे वेरिकोज वेन्स की परत सिकुड़ जाती है और प्रभावित नस बंद हो जाती है। इस प्रक्रिया से प्रभावित नस बंद हो जाती है और उसमें परिणामस्वरूप रक्त जाना बंद हो जाता है।

जब नस बंद हो जाती है, तो रक्त अन्य स्वस्थ नसों के माध्यम से उस हिस्से में पहुंचता है। इसके अलावा बढ़ी हुई प्रोस्टेट ग्रंथि का इलाज करने के लिए सिस्टोस्कोप नामक एक विशेष उपकरण को लिंग के अंदर डाला जाता है। इसके बाद इस उपकरण की मदद से प्रोस्टेट ग्रंथि को गर्मी के संपर्क में लाया जाता है, जिससे वह सिकुड़ जाती है। रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन सर्जरी को एक्स रे, अल्ट्रासाउंड, एमआरआई या सीटी स्कैन के मार्गदर्शन से किया जाता है।

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रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन सर्जरी क्यों की जाती है?

रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन सर्जरी को आमतौर पर निम्न स्थितियों का इलाज करने के लिए किया जाता है -

  • वेरीकोज वेन्स
  • बिनाइन प्रोस्टेट हाइपरप्लासिया या प्रोस्टेट बढ़ना
  • स्लीप एपनिया
  • नस में गंभीर दर्द होना
  • एरिद्मिया (हृदय के उस हिस्से को निकालना या नष्ट करना जो असामान्य धड़कनों का कारण बन रहा है)
  • कैंसरयुक्त ट्यूमर के आकार को कम करने के लिए। (यह सर्जरी तब की जाती है, जब कीमोथेरेपी व अन्य इलाज प्रक्रियाओं से कैंसर ठीक नहीं हो रहा हो)

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रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन सर्जरी से पहले क्या तैयारी की जाती है?

सर्जरी से पहले आपको अस्पताल बुलाया जाता है जहां पर कुछ विशेष परीक्षण किए जाते हैं और साथ ही सर्जरी से पहले की तैयारियां करने के लिए आपको कुछ विशेष सलाह दी जाती हैं। रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन सर्जरी से पहले निम्न टेस्ट किए जा सकते हैं -

रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन सर्जरी के लिए तैयारी के रूप में आपको निम्न सलाह दी जाती है -

  • यदि आप पहले या हाल ही में कोई भी दवा, हर्बल उत्पाद या कोई सप्लीमेंट ले रहे हैं, तो इस बारे में डॉक्टर को बता दें। डॉक्टर सर्जरी से पहले कुछ दवाओं के सेवन को एक निश्चित समय के लिए बंद करवा सकते हैं, जिनमें मुख्य रूप से रक्त पतला करने वाली दवाएं शामिल हैं जैसे एस्पिरिन, वारफेरिन और आइबुप्रोफेन आदि।
  • यदि आप गर्भवती हैं या गर्भधारण करने की योजना बना रही हैं, तो डॉक्टर को इस बारे में बता दें।
  • यदि आपको किसी भी प्रकार का कोई रोग या फिर एलर्जी है, तो भी सर्जरी से पहले ही डॉक्टर को इस बारे में बता दें।
  • आपको सर्जरी के लिए खाली पेट अस्पताल आने को कहा जाता है और जब तक डॉक्टर अनुमति न दें कुछ भी खाएं या पिएं नहीं।
  • ऑपरेशन के लिए अस्पताल जाते समय आपके किसी करीबी रिश्तेदार या मित्र को अपने साथ ले जाएं, जो सर्जरी से पहले और बाद के कार्यों में आपकी मदद कर सके।
  • जब आप अस्पताल पहुंच जाते हैं, तो आपको एक सहमति पत्र दिया जाता है जिसपर हस्ताक्षर करके आप सर्जन को सर्जरी करने की अनुमति दे देते हैं।

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रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन कैसे की जाती है?

जब आप सर्जरी के लिए अस्पताल पहुंच जाते हैं, तो सबसे पहले मेडिकल स्टाफ आपको एक विशेष ड्रेस पहनने को देते हैं जिसे “हॉस्पिटल गाउन” कहा जाता है। इसके बाद सर्जरी प्रोसीजर शुरू किया जाता है -

  • आपको एक टेबल पर लिटाया जाता है और आपकी बांह या हाथ की नस में सुई लगाई जाती है। इंट्रावेनस लाइन की मदद से आपको सर्जरी के दौरान दवाएं व अन्य आवश्यक द्रव दिए जाते हैं।
  • इसके बाद जिस हिस्से की सर्जरी करनी है उसे एंटीसेप्टिक से साफ किया जाता है, इससे संक्रमण होने का खतरा नहीं रहता है।
  • सर्जरी वाले हिस्से को सुन्न करने के लिए लोकल एनेस्थीसिया का इंजेक्शन लगाया जाता है। इसके अलावा आपको सीडेटिव दवाएं भी दी जाती हैं, ताकि आप सर्जरी के दौरान शांत रहें।
  • सर्जरी के दौरान कुछ इमेजिंग स्कैन भी किए जाते हैं, जैसे एमआरआई आदि।

रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन की सटीक सर्जरी प्रोसीजर शरीर के प्रभावित हिस्से की जगह और स्थिति की गंभीरता पर निर्भर करती है। एमआरआई, सीटी स्कैन, एक्स रे या अल्ट्रासाउंड के मार्गदर्शन में सर्जन सर्जरी वाले हिस्से में एक विशेष सुई डालते हैं। इस सुई से प्रोब मशीन जुड़ी होती है और इसे कैथेटर की मदद से प्रभावित हिस्से में डाला जाता है। इसके बाद सुई से जुड़ी मशीन इलेक्ट्रिक करंट या रेडियो तरंगों की मदद से सुई को गर्म किया जाता है, जिससे असामान्य ऊतकों को नष्ट किया जाता है।

स्थितियों के अनुसार रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन सर्जरी को भी अलग-अलग तरीके से किया जाता है -

वेरीकोज वेन्स

जब आपकी टांग सुन्न हो जाती है, तो इस स्थिति का इलाज करने के लिए सर्जन रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन को निम्न सर्जिकल प्रोसीजर के अनुसार करते हैं -

  • सबसे पहले प्रभावित नस में एक छोटा सा छिद्र किया जाता है और इसके बाद कैथेटर ट्यूब के माध्यम से आरएफ डिवाइस को नस में डाला जाता है।
  • जब कैथेटर ठीक से लग जाता है, तो सर्जन इसे नस से वापस खींच लेते हैं।
  • इससे नस का प्रभावित हिस्सा गर्म होकर सिकुड़ जाता है और रक्त की सप्लाई बंद हो जाती है।
  • इसके बाद वेरीकोज वेन्स के आसपास की शाखाओं को निकालने के लिए अन्य कई छोटे-छोटे कट लगाए जाते हैं।
  • जब नसें बंद हो जाती हैं, तो कैथेटर ट्यूब को निकाल दिया जाता है और उस जगह पर थोड़ा दबाव दिया जाता है, ताकि ब्लीडिंग न हो पाए
  • टांग के ऊपर पट्टी कर दी जाती है या एक विशेष इलास्टिक स्टॉकिंग्स लगा दिए जाते हैं।

बिनाइन प्रोस्टेट हाइपरप्लासिया

बिनाइन प्रोस्टेट हाइपरप्लासिया के इलाज के लिए रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन की सर्जरी प्रोसीजर को कुछ इस प्रकार से किया जाता है -

  • लिंग के अंदर से सिस्टोस्कोप नामक उपकरण को मूत्रमार्ग में डाला जाता है। इस उपकरण की मदद से छोटी-छोटी सुइयों को प्रोस्टेट ग्रंथि तक पहुंचाते हैं।
  • जब सुई उस जगह तक पहुंच जाती है, तो सर्जन इनके माध्यम से रेडियो तरंगें भेजते हैं।
  • रेडियो तरंगों से पैदा होने वाली एनर्जी सुई को गर्म कर देती है, जिससे प्रोस्टेट ग्रंथि के कुछ ऊतकों को नष्ट करके उसका आकार कम किया जाता है।
  • प्रोसीजर के बाद ध्यानपूर्वक सिस्टोस्कोप को बाहर निकाल दिया जाता है।

अंत में मूत्राशय में कैथेटर लगा दिया जाता है, जो सर्जरी के घाव ठीक होने तक पेशाब को निकालने का काम करता है। इसी प्रकार स्लीप एपनिया में सर्जन मुंह और गले के अंदर से उपकरण को निकालकर अतिरिक्त ऊतकों को नष्ट करते हैं।

इस सर्जरी प्रोसीजर को पूरा करने में लगभग 45 से 60 मिनट का समय लगता है। सर्जरी के बाद जब तक आपके शारीरिक संकेत (हार्ट रेट, ब्लड प्रेशर और पल्स रेट आदि) सामान्य नहीं होते हैं, आपको रिकवरी रूम में ही रखा जाता है। हालांकि, कुछ जटिलताएं होने पर डॉक्टर आपको लंबे समय तक भी अस्पताल में भर्ती रख सकते हैं। सर्जरी के एक से तीन दिन बाद कैथेटर को भी निकाल दिया जाता है।

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रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन सर्जरी के बाद क्या देखभाल की जाती है?

जब आपको अस्पताल से छुट्टी मिल जाती है, तो घर पर निम्न बातों का ध्यान रखने की सलाह दी जाती है -

  • दवाएं
    • आपको सर्जरी के बाद कुछ दिनों के लिए दर्दनिवारक दवाएं दी जाती हैं, जिन्हें डॉक्टर की सलाह के अनुसार लेते रहना चाहिए।
    • सर्जरी के बाद संक्रमण होने के खतरे को रोकने के लिए एंटीबायोटिक दवाएं भी दी जा सकती हैं।
       
  • घाव की देखभाल
    • डॉक्टर द्वारा बांधी गई पट्टी को एक दिन तक रखने को कहा जाता है इसके बाद डॉक्टर आपको स्टॉकिंग्स का इस्तेमाल करने की सलाह दे सकते हैं।
    • सर्जरी के बाद कम से कम दो हफ्तों तक स्टॉकिंग्स पहन कर रखें, इन्हें सोते व नहाते समय निकाल देना चाहिए।
       
  • शारीरिक गतिविधि
    • आराम करते समय अपनी टांग को सीने की ऊंचाई में रखें
    • दिन में कम से कम तीन बार लगातार 20 मिनट तक चलें, जिससे रक्त के थक्के जमने का खतरा कम होता है और साथ ही रक्त संचरण में भी सुधार होता है।
    • कोई भी भारी वस्तु न उठाएं और न ही कोई अधिक मेहनत वाला कार्य (जैसे व्यायाम आदि) करें
    • आपको सर्जरी के बाद अगले दिन से ही अपनी दिनचर्या के सामान्य कार्य करने की अनुमति दे दी जाती है।
       
  • यात्रा करना
    • जब तक डॉक्टर आपको अनुमति न दें, किसी भी वाहन को न चलाएं।
    • सर्जरी के चार हफ्तों बाद आप विमान व अन्य यातायात से यात्रा कर सकते हैं

डॉक्टर को कब दिखाएं?

यदि आपको रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन सर्जरी के बाद निम्न में से कोई भी समस्या हो रही है, तो डॉक्टर से बात करें

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रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन सर्जरी से क्या जोखिम हो सकते हैं?

रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन से होने वाले जोखिम व जटिलताएं निर्भर करते हैं कि यह सर्जरी किसलिए की जा रही है। उदाहरण के लिए वेरीकोज वेन्स के लिए की जाने वाली सर्जरी से निम्न जोखिम हो सकते हैं -

बिनाइन प्रोस्टेट हाइपरप्लासिया से निम्न जोखिम व जटिलताएं हो सकती हैं -

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