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परिचय

टखने के किसी हिस्से में किसी भी प्रकार के दर्द या तकलीफ को “टखने में दर्द” कहा जाता है। टखने में दर्द के कई संभावित कारण हो सकते हैं, जिनमें टखने में चोट लगना, मोच आना, फ्रैक्चर होना आदि गंभीर स्थितियों से लेकर आर्थराइटिस जैसी दीर्घकालिक समस्याएं शामिल हैं। टखने का दर्द आमतौर पर तीव्र या हल्का (मंद) होता है, जो खासकर टखने को हिलाने के दौरान या वजन उठाते समय महसूस होता है।

(और पढ़ें - टखने में फ्रैक्चर का इलाज)

इस स्थिति के परीक्षण के दौरान डॉक्टर आप से लक्षणों की गंभीरता और आपके स्वास्थ्य संबंधी पिछली जानकारी के बारे में पूछ सकते हैं। इसके अलावा स्थिति का अच्छे से परीक्षण करने के लिए डॉक्टर आपका एक्स रे टेस्ट भी कर सकते हैं और शरीर से द्रव (खून या अन्य शारीरिक द्रव) निकाल कर उसकी जांच कर सकते हैं।

टखने में दर्द पैदा करने वाले कई ऐसे कारण हैं, जिनकी रोकथाम नहीं की जा सकती। हालांकि कुछ तरीके हैं, जिनकी मदद से टखने में चोट आदि लगने से बचा जा सकता है जैसे ऊंची ऐड़ी वाले जूते पहनना, फिसलने आदि से बचना, उबड़-खाबड़ जगह पर ध्यान से चलना और खेल-कूद से पहले अच्छे से वॉर्म-अप कर लेना। 

टखने में दर्द के शुरूआती इलाज में आराम करना, बर्फ से सिकाई करना, टखने को हृदय के स्तर से ऊंचा उठा कर रखना आदि शामिल हैं। इसके अलावा इसमें इबुप्रोफेन जैसी नोन-स्टेरॉयडल दवाएं, फिजिकल थेरेपी और कोर्टिसोन का इंजेक्शन का भी उपयोग किया जा सकता हैं। 

(और पढ़ें - त्वचा पर बर्फ लगाने के फायदे)

  1. टखने का दर्द क्या है - What is Ankle Pain in Hindi
  2. टखने में दर्द के लक्षण - Ankle Pain Symptoms in Hindi
  3. टखने में दर्द के कारण व जोखिम कारक - Ankle Pain Causes & Risk Factors in Hindi
  4. टखने में दर्द से बचाव - Prevention of Ankle Pain in Hindi
  5. टखने में दर्द का परीक्षण - Diagnosis of Ankle Pain in Hindi
  6. टखने में दर्द का इलाज - Ankle Pain Treatment in Hindi
  7. टखने में दर्द की जटिलताएं - Ankle Pain Complications in Hindi

टखने का दर्द क्या है - What is Ankle Pain in Hindi

टखने में दर्द क्या है?

टखने के भीतर किसी भी हिस्से में दर्द या किसी भी प्रकार की तकलीफ को टखने में दर्द कहा जाता है। यह दर्द किसी प्रकार की चोट के कारण भी हो सकता है जैसे मोच आना या किसी बीमारी के कारण भी जैसे गठिया आदि। 

(और पढ़ें - टखने में फ्रैक्चर के लक्षण)

टखने में दर्द के लक्षण - Ankle Pain Symptoms in Hindi

टखने में दर्द के लक्षण क्या हैं?

टखने में दर्द होना खुद में एक लक्षण होता है। हालांकि टखने में दर्द के साथ निम्नलिखित कुछ अन्य लक्षण भी देखे जा सकते हैं:

  • लगातार तीव्र दर्द होना
  • जोड़ों में सूजन
  • जोड़ों के आस-पास की त्वचा गर्म होना
  • टखने पर नील पड़ जाना और छूने पर दर्द होना (और पढ़ें - पैर में फ्रैक्चर का इलाज)
  • टखने को मोड़ने में अक्षमता
  • टखने को हिला न पाना
  • चलने में कठिनाई
  • प्रभावित टखने वाले पैर पर वजन न उठा पाना
  • टखने में गांठ या कोई अन्य विकृति दिखाई देना

(और पढ़ें - सूजन कम करने का उपाय)

डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए?

यदि आप टखने संबंधी समस्या के कारण का पता नहीं लगा पा रहे हैं या आपको उसके इलाज से संबंधित कोई जानकारी नहीं है, तो ऐसे में डॉक्टर को दिखाना चाहिए। खासतौर पर यदि आपको निम्नलिखित संकेत दिखाई दे तो जल्द से जल्द डॉक्टर के पास जाएं।

  • चलने में कठिनाई होना (खासकर प्रभावित टखने की तरफ से)
  • किसी प्रकार की चोट के कारण टखने या उसके आस-पास विकृति होना
  • रात के समय या आराम करते समय टखने में दर्द होना
  • टखने का दर्द कई दिनों तक लगातार रहना
  • संक्रमण के लक्षण दिखाई देना जैसे बुखार, टखने में लालिमा और आस-पास की त्वचा गर्म होना

(और पढ़ें - बुखार भगाने के घरेलू उपाय)

टखने में दर्द के कारण व जोखिम कारक - Ankle Pain Causes & Risk Factors in Hindi

टखने में दर्द क्यों होता है?

टखने में दर्द के कुछ सामान्य कारण जैसे:

  • टखने की मोच:
    इस स्थिति में टखने को सहारा देने वाले बाहरी लिगामेंट्स क्षतिग्रस्त हो जाते हैं। यह क्षति हल्की से अत्यधिक गंभीर भी हो सकती है, जिससे टखने में ढीलापन महसूस होने लगता है। यदि किसी व्यक्ति के टखने में बार-बार मोच आती रहती है, तो हो सकता है कि टखने का कोई भाग काफी कमजोर हो, जिसके परिणामस्वरूप बार-बार मोच आ रही हो। 
    (और पढ़ें - एड़ी में दर्द के घरेलू उपाय)
     
  • आर्थराइटिस:
    इस स्थिति मे जोड़ों में स्थित ऊतकों में सूजन व लालिमा होने लग जाती है।
    (और पढ़ें - गठिया का आयुर्वेदिक इलाज)
     
  • पैर की हड्डी बढ़ना (Bunions):
    इस स्थिति में पैर के अंगूठे की हड्डी में गांठ बन जाती है, यह गांठ अंगूठे की हड्डी के जोड़ पर बनती है जहां पर यह पैर की हड्डी से जुड़ता है। बनियन आमतौर पर पैर के अंगूठे में दबाव बढ़ने के परिणामस्वरूप होता है। यह विकृति या तो अत्यधिक तंग जूते पहनने से या फिर आर्थराइटिस जैसे रोग के कारण होती है।
    (और पढ़ें - पैर की हड्डी बढ़ने का कारण)
     
  • फ्रैक्चर:
    टखना मुख्य रूप से तीन हड्डियों से मिलकर बना होता है, इनमें से कोई भी हड्डी टूट सकती है। टखने में फ्रैक्चर आमतौर पर चोट लगने, गिरने या टखना तेजी से मुड़ने के कारण होती है। 
     
  • टार्सल टनल सिंड्रोम:
    यह मुख्य रूप से पैर की कोई नस दबने के कारण होता है, इसके कारण पैर या टखने में दर्द और टखने या ऐड़ी के अंदर जलन व झुनझुनी होने लग जाती है।
    (और पढ़ें - कार्पल टनल सिंड्रोम के लक्षण)
     
  • स्कार ऊतक बनना:टखने में मोच आने के बाद उसमें कोई स्कार ऊतक बनने से वह जोड़ के अंदर की जगह घेर लेता है। जिससे टखने के लिगामेंट्स में दबाव बढ़ जाता है और टखने में दर्द होने लग जात है।
     
  • गाउट:
    जब “यूरिक एसिड” नामक एक अपशिष्ट पदार्थ सुई के जैसी आकृति में बदल कर जोड़ों में जमा हो जाता है, तो इस स्थिति को गाउट कहा जाता है। इस स्थिति में तीव्र दर्द व सूजन हो जाती है।
    (और पढ़ें - गाउट का इलाज)
     
  • जोड़ों में इन्फेक्शन:
    जोड़ों में संक्रमण आदि होने के कारण भी टखने में दर्द हो सकता है।
    (और पढ़ें - बैक्टीरियल संक्रमण का इलाज)
     
  • रक्त वाहिकाएं अवरुद्ध होना:
    रक्त वाहिकाओं का प्रवाह रुक जाना भी टखने में दर्द का एक कारण हो सकता है। 

टखने में दर्द होने का खतरा कब बढ़ता है?

कुछ स्थितियां हैं जिनसे टखने में दर्द होने का खतरा बढ़ जाता है:

(और पढ़ें - जोड़ों में दर्द का इलाज​)

टखने में दर्द से बचाव - Prevention of Ankle Pain in Hindi

टखने के दर्द की रोकथाम कैसे की जाती है?

कुछ ऐसी भी टिप्स हैं, जिनकी मदद से टखने में दर्द से बचा जा सकता है:

  • अपने टखने को सही स्थिति में रखें:
    रेसिस्टेंस बैंड (विशेष प्रकार की लचीली पट्टी) एक्सरसाइज की मदद से टांग के निचले हिस्से की सारी मांसपेशियों को मजबूत बनाना भी टखने को स्थिर बनाता है और चोट आदि लगने की संभावनाएं कम करता है। टखने का लचीलापन और हिलने-ढुलने की क्षमता को बढ़ाने के लिए दीवार के सामने खड़े होकर पिंडली की एक्सरसाइज करें या किसी कुर्सी पर बैठ कर पैर से कुछ अक्षर लिखने की कोशिश करें। (और पढ़ें - एक्सरसाइज करने का सही टाइम)
     
  • सही जूते चुनें:
    पैरों के आकार के अनुसार सही जूते चुनें और अधिक ऊंची ऐड़ी वाले जूते ना पहनें
     
  • सही अवस्था में बैठें:
    पैरों को पीछे की तरफ मोड़ कर ना बैठें। ऐसा करने से पैर की उंगलियों पर दबाव पड़ता है जिस कारण से टखनों में अकड़न आ जाती है और दर्द होने लगता है।
     
  • खेल-कूद के दौरान सुरक्षित रहें:
    खेल-कूद से दौरान सुरक्षा देने वाले सही उपकरणों का उपयोग करने से टखने में चोट लगने का खतरा कम हो जाता है।

(और पढ़ें - चोट की सूजन का इलाज)

टखने में दर्द का परीक्षण - Diagnosis of Ankle Pain in Hindi

टखने में दर्द की जांच कैसे की जाती है?

टखने में दर्द पैदा करने वाली ऐसी कई स्थितियां हैं, जिनकी जांच करने के लिए एक्स रे, शारीरिक परीक्षण व मरीज के स्वास्थ्य संबंधी पिछली जानकारी ली जाती है। कुछ ऐसी भी स्थितियां हैं, जिनकी जांच करने के लिए कुछ और टेस्ट करने पड़ सकते हैं जिनमें इमेजिंग टेस्ट व खून टेस्ट आदि शामिल हैं। 

डॉक्टर परीक्षण की शुरुआत में आपके टखने के बारे में कुछ सवाल पूछेंगे और यह पूछेंगे कि किस दौरान आपको यह समस्या हुई है (जब दर्द शुरू हुआ तब आप क्या कर रहे थे)। इसके अलावा डॉक्टर आपको चल के दिखाने या कोई अन्य सामान्य शारीरिक गतिविधि करने के लिए बोल सकते हैं। 

(और पढ़ें - क्रिएटिनिन टेस्ट क्या होता है)

उसके बाद डॉक्टर आपके टखने का शारीरिक परीक्षण करते हैं। शारीरिक परीक्षण के दौरान डॉक्टर टखने में सूजन, नील पड़ने या किसी प्रकार की अन्य विकृति का पता लगाते हैं। टखने का परीक्षण करने के दौरान आमतौर पर निम्न टेस्ट किए जाते हैं:

  • एक्स रे:
    टखने में दर्द की जांच करने के लिए एक्स रे भी किया जा सकता है, एक्स रे का उपयोग मुख्य रूप से टखने की हड्डी में फ्रैक्चर और टखने की मोच के बीच का अंतर पता करने के लिए होता है। एक्स रे की मदद से गाउट व ऑस्टियोआर्थराइटिस आदि का भी पता लगाया जा सकता है।
    (और पढ़ें - एएफबी कल्चर टेस्ट)
     
  • सीटी स्कैन व एमआरआई स्कैन:
    जब डॉक्टर को हड्डी में इन्फेक्शन या ट्यूमर आदि का संदेह हो या फिर हड्डी के फ्रैक्चर का संदेह हो जो एक्स रे में ना दिखाई पड़े, तो ऐसे में पुष्टि करने के लिए डॉक्टर सीटी स्कैन या एमआरआई स्कैन जैसे इमेजिंग टेस्ट करवाने को कह सकते हैं। 
    (और पढ़ें - पैप स्मीयर टेस्ट क्या होता है)

टखने में दर्द का परीक्षण करने के लिए कुछ अन्य टेस्ट भी किए जा सकते हैं, जैसे:

  • एंटी-सीपीपी स्तर (Anti-cyclic citrullinated peptide level)
  • सफेद रक्त कोशिकाओं की संख्या की जांच करना
  • ईएसआर टेस्ट (Erythrocyte sedimentation rate)

(और पढ़ें - लैब टेस्ट क्या है)

टखने में दर्द का इलाज - Ankle Pain Treatment in Hindi

टखने में दर्द का इलाज कैसे किया जाता है?

टखने में दर्द से तुरंत राहत पाने के लिए निम्नलिखित कुछ उपचार किए जा सकते हैं:

  • आराम करना:
    अपने टखने पर अधिक वजन आने दें और जितना हो सके उसे आराम दें। समस्या होने के बाद कुछ दिनों तक टखने को जितना हो सके उतना कम हिलाने की कोशिश करें। कुछ दिन कम से कम चले और चलने के दौरान बैसाखी आदि का सहारा लें।
     
  • बर्फ से सिकाई करना:
    अपने टखने की लगातार 20 मिनट तक सिकाई करें, ऐसा एक दिन में तीन से पांच बार करें और चोट लगने के तीन दिन तक करें। इसकी मदद से टखने की सूजन कम हो जाती है और दर्द भी शांत हो जाता है।
    (और पढ़ें - बर्फ की सिकाई के फायदे)
     
  • टखने को ऊपर उठाना:
    जिस समय भी संभव हो अपने टखने को हृदय के स्तर से ऊपर उठा लेना चाहिए। ऐसा करने के लिए आप अपनी टांग के नीचे कुछ तकिये आदि लगा सकते हैं।
     
  • कुछ ओटीसी दवाएं लेना:
    डॉक्टर की पर्ची के बिना मेडिकल स्टोर से मिलने वाली दवाओं को ओवर द काउंटर (ओटीसी) दवाएं कहा जाता है। टखने में दर्द व सूजन को कम करने के लिए कुछ प्रकार की ओटीसी दवाएं भी ली जा सकती है, इनमें इबुप्रोफेन या एसिटामिनोफेन जैसी दवाएं शामिल हैं। (और पढ़ें - चोट की सूजन का इलाज)

यदि आपके टखने में दर्द गठिया के कारण हुआ है, तो इस दर्द से राहत पाना या इसका इलाज करना संभव नहीं है। हालांकि कुछ तरीकों की मदद से स्थिति को नियंत्रित किया जा सकता है, जैसे:

  • कुछ प्रकार की दर्द निवारक क्रीम (Topical pain relievers) लगाना
  • दर्द, सूजन व लालिमा को कम करने के लिए नॉन-स्टेरॉयडल एंटी इंफ्लेमेटरी दवाएं (NSAIDs) लेना
  • शारीरिक रूप से गतिशील रहना और सामान्य एक्सरसाइज की मदद से शरीर को फिट रखना
  • स्वस्थ भोजन खाने की आदत डालना
  • जोड़ों के हिलने-ढुलने की क्षमता को बढ़ाने के लिए स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज करना
  • शरीर का वजन सामान्य बनाए रखना, ऐसा करने से जोड़ों पर अधिक दबाव नहीं पड़ता (और पढ़ें - वजन कम करने का तरीका)
  • ओस्टियोपोरोसिस दवाएं हड्डियों में हो रही क्षति को रोकने के लिए और नई हड्डियों का निर्माण करने के लिए उपयोग की जाती हैं। हालांकि ये दवाएं टखने का इलाज करने के लिए ही विशेष रूप से उपयोग नहीं होती, क्योंकि मजबूत हड्डियों में फ्रैक्चर कम मामलों में होता है।

(और पढ़ें - उंगली में फ्रैक्चर का इलाज)

फिजियोथेरेपी:

इस थेरेपी का उपयोग टखने में दर्द संबंधी कई समस्याओं को ठीक करने के लिए किया जाता है, जैसे मोच आना, टेंडनाइटिस और टखने का ऑपरेशन आदि करने के बाद भी फिजियोथेरेपी का उपयोग किया जाता है।

फिजियोथेरेपिस्ट कुछ प्रकार की रिहैबिलिटेशन एक्सरसाइज (फिर से सामान्य करने की प्रक्रिया) की मदद से टखने की मजबूती व हिलने-ढुलने की क्षमता बढ़ाते हैं, अकड़न को कम करते हैं और टखने संबंधी दीर्घकालिक समस्याओं से बचाते हैं। 

सर्जरी

टखने की टूटी हुई हड्डी को फिर से जोड़ने के लिए टखने का ऑपरेशन किया जाता है। निम्नलिखित कुछ अन्य स्थितियां हैं जिनमें भी टखने की सर्जरी करवाई जा सकती है:

  • टखने में गंभीर रूप से मोच आना
  • गंभीर ऑस्टियोआर्थराइटिस

(और पढ़ें - हड्डी टूटने का प्राथमिक उपचार)

टखने में दर्द की जटिलताएं - Ankle Pain Complications in Hindi

टखने में दर्द से क्या जटिलताएं होती हैं?

निम्नलिखित कुछ समस्याएं हैं, जो टखने में दर्द होने पर विकसित हो सकती हैं:

  • टखना अस्थिर होना
  • लंगड़ाते हुए चलना
  • आर्थराइटिस
  • लंबे समय तक दर्द रहना आदि

 (और पढ़ें - गठिया के घरेलू उपाय)

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