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पथरचट्टा औषधीय गुणों वाला पौधा है जिसका उपयोग किडनी से जुड़े रोगों और मूत्र विकारों के इलाज के लिए किया जाता है। यह सदाबहार पौधा है जो पूरे भारत में पाया जाता है।

खोखले डंठल वाला यह लाल या हरे रंग का पौधा लम्बाई में 3-4 फीट का होता है। इसके पत्ते थोड़े मोटे और थोड़ी-थोड़ी दूरी पर होते हैं।

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यह पथरी के इलाज के साथ-साथ पेट से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है। इसमें रेचक गुण होते है जिससे यह बवासीर (पाइल्स) की समस्या से राहत प्रदान करता है। इसके अलावा यह त्रिदोष (वात, पित्त और कफ) का शमन करता है। पथरचट्टा पेट फूलने की समस्या, अल्सर, घावों को ठीक करने और रक्त को शुद्ध करने में भी मदद करता है। किडनी की पथरी और इसी तरह की अन्य समस्याओं को ठीक करने के लिए यह बहुत लाभकारी है।

(और पढ़ें - पेट में अल्सर के घरेलू उपाय)

  1. पथरचट्टा बचाए किडनी स्टोन से - Patharchatta bachaye kidney stone se
  2. पथरचट्टा मूत्र विकारों के लिए उपयोगी - Patharchatta mootra vikaron ke liye upyogi
  3. पथरचट्टा फोड़ों के इलाज के लिए उपयोगी - Patharchatta fodon ke illaj ke liye upyogi
  4. पथरचट्टा उच्च रक्तचाप को रखे नियंत्रित - Patharchatta uchch raktchaap ko rakhe niyntrit
  5. पथरचट्टा ल्यूकेमिया में लाभकारी - Patharchatta leukaemia mein labhkari
  6. पथरचट्टा योनि संक्रमण में लाभकारी - Patharchatta ka istemal karen yoni ke sankraman ke liye
  7. पथरचट्टा दूर करे सिरदर्द - Patharchatta door kare sirdard
  8. आंखों के लिए लाभकारी है पथरचट्टा - Ankhon ke liye labhkari hai patharchatta
  9. घाव भरने में उपयोगी है पथरचट्टा - Ghav mein upyogi hai patharchatta
  10. पथरचट्टा दिलाए खूनी दस्त से राहत - Patharchatta dilaye khooni dast se raahat

पथरचट्टा का सेवन कर किडनी की पथरी की समस्या से निजात पाया जा सकता है। इसके लिए इस बूटी का उपयोग निम्न तरीके से किया जाना चाहिए -

सामग्री

  1. 40-50 मिलीलीटर - पथरचट्टा का काढ़ा
  2. 500 मिलीग्राम - शिलाजीत 
  3. 2 ग्राम - शहद

पथरचट्टा का इस्तेमाल गुर्दे की पथरी को दूर करने के लिए कैसे करें -

  1. पथरचट्टा के पौधे से काढ़ा तैयार करें।
  2. ठंढा होने पर काढ़े में शिलाजीत और शहद ठीक से मिला लें।
  3. फिर इस मिश्रण का थोड़ा-थोड़ा कर सेवन करें।

ये उपाय कितनी बार करें -

  1. इस काढ़े को दिन में दो बार अवश्य पिएं।

(और पढ़ें - पथरी के घरेलू उपाय)

पथरचट्टा की पत्तियों से किसी भी प्रकार का मूत्र विकार दूर हो सकता है। इसका उपयोग निम्न तरीके नीचे इसके बारे में बताया जा रहा है -

सामग्री -

  1. 5 मिलीलीटर - पथरचट्टा की पत्तियों का रस  
  2. 2 ग्राम - शहद (और पढ़ें - दूध और शहद पीने के फायदे)

पथरचट्टा की पत्तियों का इस्तेमाल मूत्र विकार दूर करने के लिए इस प्रकार करें-

  1. पथरचट्टा की पत्तियों का रस तैयार करें। यह रस किसी भी प्रकार के मूत्र विकार को दूर कर सकता है। 
  2. पुरषों के मूत्र विकार के लिए पत्थरचट्टा के काढ़े में शहद मिलाएं।
  3. इस काढ़े को दिन में दो बार अवश्य पिएं।

(और पढ़ें - महिलाओं में पेशाब रोक न पाने की समस्या का हल)

पथरचट्टा के पत्ते घाव या फोड़ों के इलाज में भी बहुत लाभकारी है। इसका लेप इस तरह तैयार करें -

(और पढ़ें - बालतोड़ का इलाज)

सामग्री -

  1. पथरचट्टा के पत्ते

पथरचट्टा की पत्तियों का इस्तेमाल फोड़े को ठीक करने के लिए कैसे करें -

  1. पथरचट्टा की पत्तियों को हल्का सा गर्म कर पीस लें।
  2. अब इस लेप को प्रभावित जगह पर लगाएं।
  3. इससे फोड़े, लालिमा और जलन-सूजन भी ठीक होते हैं।

(और पढ़ें - सूजन कम करने का तरीका)

पथरचट्टा के पत्तों के अर्क से हाइपरटेंशन (उच्च रक्तचाप - हाई बीपी) कम होता है। नीचे इसके बारे में बताया जा रहा है -

(और पढ़ें - bp kam karne ke upay)

सामग्री -

  1. पथरचट्टा 

पथरचट्टा की पत्तियों का इस्तेमाल हाइपरटेंशन के लिए कैसे करें -

  1. पथरचट्टा की पत्तियों से अर्क तैयार करें।
  2. दिन में दो से तीन बार 5-10 बूंद अर्क का सेवन करें।

यह उपाय हाइपरटेंशन के इलाज में लाभकारी होता है।

(और पढ़ें - हाई बीपी का आयुर्वेदिक इलाज)

पथरचट्टा के ऊपरी हिस्से के अर्क का उपयोग ब्लड कैंसर में फायदेमंद है। इसका निम्न प्रकार से सेवन करें -

सामग्री -

  1. पथरचट्टा

पथरचट्टा की पत्तियों का इस्तेमाल ल्यूकीमिया को ठीक करने के लिए कैसे करें -

  1. पथरचट्टा की पत्तियों से अर्क तैयार करें।
  2. और दिन में दो से तीन बार 5-10 बूंदें अर्क का सेवन करें।
  3. यह ल्यूकीमिया से बचाने में मदद करता है।

(और पढ़ें - कैंसर में क्या खाना चाहिए)

योनि स्राव होने के कारण, महिलाओं को बहुत ही परेशानी होती है। लेकिन इससे राहत पाने में पत्थरचट्टा के पत्ते उपयोगी हैं। इसका उपयोग निम्न तरीके से करें -

(और पढ़ें - योनि में सूजन का इलाज)

सामग्री -

  1. पत्थरचट्टा के पत्ते
  2. शहद - 2 ग्राम

पत्थरचट्टा के पत्ते का इस्तेमाल योनि स्राव कम करने के लिए कैसे करें -

  1. पत्थरचट्टा के पत्तों से काढ़ा तैयार करें।
  2. इसके बाद 40-60 मिलीग्राम काढ़े में, 2 ग्राम शहद मिलाएं।

इस मिश्रण का सेवन दिन में दो बार करें।

(और पढ़ें - योनि से रक्तस्राव के कारण)

अक्सर सिरदर्द से पीड़ित लोगों के लिए पत्‍थरचट्टा बेहद लाभकारी हो सकता है। इसका लेप इस तरह तैयार करें - 

(और पढ़ें - सिर दर्द में क्या खाना चाहिए)

सामग्री -

  1. पथरचट्टा के पत्ते

पथरचट्टा के पत्ते का इस्तेमाल सिरदर्द कम करने के लिए कैसे करें -

  1. पथरचट्टा के पत्ते पीस लें।
  2. अब लेप को माथे पर लगाएं।

इस लेप से सिरदर्द कम होता है।

(और पढ़ें - सिर दर्द से छुटकारा पाने के उपाय)

पथरचट्टा आँखों के दर्द से भी राहत दिलाता है। इसका उपयोग इस प्रकार करें -

सामग्री -

  1. पथरचट्टा के पत्ते

पथरचट्टा के पत्ते का इस्तेमाल आँखों के लिए कैसे करें -

  1. पथरचट्टा के पत्तों का रस निकालें।
  2. इसे अपनी आँखों के चारों ओर इस रस को लगाएं।

 इससे आंखों के सफेद हिस्से में होने वाला दर्द ठीक होता है।

(और पढ़ें - आँखों में दर्द का घरेलू इलाज)

पथरचट्टा के पत्ते घाव भरने में भी लाभकारी हैं। यह घाव और उससे पड़े निशान की समस्या से निजात पाने बहुत अच्छा और प्रभावी इलाज है। इसका उपयोग इस प्रकार करें - 

(और पढ़ें - घाव के दाग हटाने के तरीके)       

सामग्री -

  1. पथरचट्टा के पत्ते

पथरचट्टा की पत्तियों का इस्तेमाल घाव भरने के लिए कैसे करें -

  1. पथरचट्टा की पत्तियों को हल्का सा गर्म करें और उन्हें हाथों से मसल लें।
  2. अब इस लेप को घाव पर लगाएं।
  3. यह लेप घाव जल्दी भरने के साथ साथ निशान मिटाने में मदद करता है।

इस उपाय से फोड़े, लालिमा और सूजन भी ठीक होते हैं।

(और पढ़ें - घाव भरने के उपाय)

पथरचट्टा के पत्ते दस्त के दौरान आ रहे रक्त को रोकने में बेहद कारगर हैं। इसका उपयोग इस प्रकार करें -

(और पढ़ें - दस्त में क्या खाना चाहिए)

सामग्री -

  1. पथरचट्टा के पत्ते
  2. जीरा
  3. घी

पथरचट्टा की पत्तियों का इस्तेमाल खूनी दस्त के लिए कैसे करें -

  1. पथरचट्टा की पत्तों से 3-6 ग्राम रस निकालें।
  2. अब इस रस में जीरा और घी मिलाकर मरीज को पिलाएं।
  3. इसका सेवन दिन में तीन बार करें।

(और पढ़ें - दस्त रोकने के घरेलू उपाय)

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