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सर्वाइकल एमआरआई (मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग) में गर्दन के पीछे की हड्डियों की विस्तृत छवियां तैयार की जाती हैं, इस टेस्ट के लिए मैग्नेटिक फील्ड और रेडियो वेव का उपयोग किया जाता है। टेस्ट के दौरान, एमआरआई मशीन व्यक्ति के शरीर में एक मैग्नेटिक फील्ड बनाती है, जिससे शरीर में मौजूद हाइड्रोजन परमाणुओं को एक साथ संरेखित (रेखाबद्ध) करता है। मशीन में लगा ट्रांसमीटर रेडियो तरंगों को मैग्नेटिक फील्ड वाले हिस्से में भेजता है, जिससे परमाणु संरेखण से बाहर निकल आते हैं। जब रेडियो तरंगें जानी बंद हो जाती हैं, तो यह परमाणु दोबारा से संरेखित हो जाते हैं और अलग अलग संकेत भेजते हैं और स्कैन किए गए हिस्से की विस्तृत छवियां बनाने में मदद करते हैं।

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  1. सर्वाइकल एमआरआई क्यों किया जाता है? - Why is a cervical MRI done in Hindi?
  2. सर्वाइकल एमआरआई कौन नहीं करा स​कता है? - Who cannot have a cervical MRI in Hindi?
  3. सर्वाइकल एमआरआई से पहले की तैयारी? - Cervical MRI preparation in Hindi?
  4. सर्वाइकल एमआरआई कैसे किया जाता है? - Cervical MRI Procedure in Hindi?
  5. सर्वाइकल एमआरआई में कैसा महसूस होगा? - Cervical MRI feel in Hindi?
  6. सर्वाइकल एमआरआई के परिणामों का क्या मतलब है? - Cervical MRI results mean in Hindi?
  7. सर्वाइकल एमआरआई के लाभ और जोखिम क्या हैं? - Cervical MRI risk and benefits in Hindi?
  8. सर्वाइकल एमआरआई के बाद क्या होता है? - What happens after a cervical MRI in Hindi?
  9. कंट्रास्ट बनाम गैर-कंट्रास्ट सर्वाइकल एमआरआई - Contrast vs non-contrast cervical MRI in Hindi
  10. सर्वाइकल एमआरआई के साथ कौन से अन्य टेस्ट किए जा सकते हैं? - Other tests that can be done with cervical MRI in Hindi?

यदि किसी व्यक्ति में निम्नलिखित लक्षण देखे जाते हैं, तो ऐसे में डॉक्टर सर्वाइकल एमआरआई स्कैन के लिए सुझाव दे सकते हैं :

परिस्थितियों का पता लगाने के लिए निम्न परीक्षण भी किए जा सकते हैं :

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ज्यादातर लोग सुरक्षित रूप से एमआरआई स्कैन करा सकते हैं। निम्न स्थितियों में इस टेस्ट को कराने की सलाह नहीं दी जाती है :

  • गर्भावस्था : आमतौर पर गर्भावस्था के दौरान एमआरआई स्कैन की सलाह नहीं दी जाती है।
  • धातु प्रत्यारोपण या मेटल इंप्लांट : यदि आपने अपने शरीर में ​कहीं भी मेटल इंप्लांट कराया है। हालांकि, मेडिकल स्टाफ मामले या स्थिति के आधार पर स्कैन को लेकर सुरक्षा मानक तय करेंगे, क्योंकि कुछ प्रत्यारोपण (जैसे पेसमेकर) एमआरआई को सुरक्षित रूप से किया जाना बेहद जरूरी है।
  • टैटू : कुछ टैटू में सूक्ष्म रूप से धातु होती है, जिसके कारण आपको स्कैन के दौरान असुविधा या गर्मी महसूस हो सकती है।

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आपको टेस्ट से छह घंटे पहले कुछ न खाने-पीने का निर्देश दिया जा सकता है। इसके अलावा यदि आप निम्नलिखित स्थितियों का सामना कर रहे हैं तो अपने डॉक्टर या रेडियोलॉजिस्ट को सूचित करें :

  • हार्ट पेसमेकर / डिफाइब्रिलेटर (पेसमेकर एक छोटा व बैटरी से चलने वाला उपकरण है, जिसका इस्तेमाल तब किया जाता है जब अनियमित दिल की धड़कन या दिल बहुत धीरे-धीरे धड़क रहा होता है)
  • कान का प्रत्यारोपण (एक प्रक्रिया, जिसमें सुनने में कठिनाई को दूर करने के लिए कान या उसके पास इलेक्ट्रॉनिक मशीन लगाई जाती है)
  • प्रोग्रामेबल शंट
  • स्टेंट (एक छोटी ट्यूब जिसकी मदद से डॉक्टर ब्लॉकेज को खोलते हैं)
  • इलेक्ट्रॉनिक / इंप्लांटेड सिमुलेटर्स या डिवाइसेज (दर्द को कम करने और तंत्रिका कार्य को संशोधित करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली डिवाइस)
  • इंप्लांटेड ड्रग पंप
  • एन्यूरिज्म क्लिप एंड कॉइल (धातु की बनी छोटी सी क्लिप जिसकी मदद से एन्यूरिज्म में रक्त प्रवाह को रोका जाता है)
  • ब्लड क्लॉट फिल्टर की तरह फिल्टर
  • शरीर में धातु के टुकड़े जैसे बुलेट्स्, छर्रे या धातु का किसी अन्य प्रकार का टुकड़ा
  • गर्भावस्था
  • घंटेभर तक पेट के बल लेटने में असमर्थ

यदि आपको बंद स्थानों से डर लगता है, तो इस बारे में डॉक्टर को बताएं, ताकि वे आपको ​हल्के सिडेटिव ड्रग्स दे सकें, इससे आपको नींद आएगी और चिंताघबराहट कम होगी।

ध्यान रहे, टेस्ट से पहले सभी आभूषण और कीमती सामान जैसे कि घड़ी, चाबी निकाल दें या अगर आपके साथ कोई सहयोगी आया है तो उसे दे दें या आप चाहें तो घर पर भी इस तरह का समान छोड़कर जा सकते हैं, क्योंकि यह सब एमआरआई वाले कमरे में लेकर जाने की इजाजत नहीं होती है।

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एमआरआई स्कैन में आमतौर पर निम्नलिखित चरण शामिल होते हैं :

  • सबसे पहले रेडियोग्राफर आपको स्कैन वाले कमरे में जाने से पहले डेन्चर (नकली दांत), विग व अन्य धातु की वस्तुओं को हटाने का निर्देश देंगे।
  • कुछ अस्पताल व नैदानिक केंद्र आपको वहां से मिलने वाला गाउन पहनने के लिए कह सकते हैं।
  • टेस्ट के लिए एक टेबल पर लेटना होता है, जो एमआरआई स्कैनर के अंदर स्लाइड (धीरे-धीरे​ जाएगी) होगी।
  • कुछ मामलों में टेस्ट के दौरान कंट्रास्ट डाई का उपयोग किया जाता है। बता दें, यह एक विशेष तरह की डाई है जिसे शरीर में इंजेक्ट करने के बाद टेस्ट करने से स्कैनिंग फोटो और स्पष्ट आती है। यदि डॉक्टर को टेस्ट से पहले इस डाई के प्रयोग की जरूरत लगती है तो वे इसे बांह की नस में इंजेक्ट करेंगे।
  • टेस्ट के दौरान ध्यान रहे कि आपको बिल्कुल भी हिलना नहीं चाहिए, क्योंकि इससे फोटो धुंधली या अस्पष्ट आ सकती है।
  • इस पूरी प्रक्रिया में 30-60 मिनट या कई बार इससे ज्यादा समय लग सकता है।

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इस प्रक्रिया में आमतौर पर दर्द नहीं होता है, ले​किन हां जिस टेबल पर आप लेटेंगे वह ठंडा और कठोर लग सकता है, जिसकी वजह से आप कुछ असहज हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में आप रेडियोलॉजिस्ट से कुछ ओढ़ने के लिए पूछ सकते हैं। चूंकि टेस्ट के दौरान मशीन से शोर आ सकता है ऐसे में आप इयरप्लग का इस्तेमाल कर सकते हैं। टेस्ट के दौरान गर्मी महसूस होना सामान्य है।

यदि कंट्रास्ट डाई का प्रयोग किया जाता है, तो आपको बांह के उस हिस्से में ठंडा एहसास हो सकता है जहां इंजेक्शन लगाया गया हो।

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नॉर्मल रिजल्ट सामान्य है तो यह इस बात का इशारा है कि रीढ़ का हिस्सा और गर्दन की नसें सामान्य हैं। यदि रिजल्ट नॉर्मल नहीं है तो इसके निम्नलिखित कारण हो सकते हैं :

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इस टेस्ट के साथ निम्नलिखित जोखिम जुड़े हुए हैं :

  • कंट्रास्ट डाई के प्रयोग से कुछ लोगों (दुर्लभ मामलों में) को एलर्जी हो सकती है।
  • मेटल इंप्लांट की वजह से गड़बड़ी : एमआरआई मशीन में मौजूद मैग्नेट की वजह से पेसमेकर व धातु वाले अन्य प्रत्यारोपित चीजों में शरीर के अंदर खराबी आ सकती है।
  • कंट्रास्ट डाई का प्रयोग किडनी की बीमारियों से ग्रस्त ऐसे लोगों के लिए हानिकारक हो सकता है, जिन्हें डायलिसिस की आवश्यकता होती है।

टेस्ट से जुड़े लाभों में शामिल हैं :

  • इस प्रक्रिया में आमतौर पर दर्द नहीं होता है
  • इसमें रेडिएशन का उपयोग नहीं होता है
  • एमआरआई में स्पष्ट छवियां प्राप्त होती हैं।

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आप इस टेस्ट के तुरंत बाद अपनी दैनिक गतिविधियों को जारी रख सकते हैं। लेकिन यदि आपको सेडेटिव ड्रग्स दिया गया है तो :

  • आपको गाड़ी नहीं चलानी चाहिए या सार्वजनिक परिवहन का उपयोग नहीं करना चाहिए, ऐसे में बेहतर होगा कि आप किसी भरोसेमंद के साथ आएं। 
  • सुनिश्चित करें कि टेस्ट किए जाने के 24 घंटे बाद तक आपके पास कोई मौजूद रहे।
  • टेस्ट के दिन किसी तरह की भारी या जोखिमभरी मशीन का संचालन करने से बचें।

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टेस्ट के दौरान कंट्रास्ट डाई का इस्तेमाल सिर्फ इसलिए किया जाता है ता​कि प्रभावित हिस्से की अधिक स्पष्ट फोटो प्राप्त की जा सके। डाई का उपयोग आमतौर पर तब किया जाता है जब सॉफ्ट टिश्यू में चोट की आशंका होती है, क्योंकि ऐसी स्थिति में बिना डाई के फोटो स्पष्ट नहीं आती है। एडिमा, खून जमा होना इत्यादि स्थितियों के निदान के लिए कंट्रास्ट डाई की आवश्यक नहीं होती है।

डाई को इंजेक्शन के माध्यम से शरीर में डाला जाता है। जब तकनीशियन कंट्रास्ट डाई को इंजेक्ट करते हैं, तो आप ठंडा महसूस कर सकते हैं। दुर्लभ मामलों में, किसी व्यक्ति को डाई से एलर्जी हो सकती है। यदि किसी व्यक्ति को किडनी की बीमारी है और उसे डायलिसिस की आवश्यकता है, तो उसके लिए कंट्रास्ट डाई हानिकारक हो सकती है।

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इस टेस्ट के साथ किए जाने वाले अन्य टेस्ट में शामिल हैं :

ध्यान रहे : इन सभी टेस्ट के परिणाम रोगी के नैदानिक स्थितियों से सहसंबद्ध यानी जुड़े होने चाहिए। ऊपर मौजूद जानकारी शैक्षिक दृष्टिकोण से दी गई है और यह किसी भी डॉक्टर द्वारा सुझाए गए मेडिकल सलाह का विकल्प नहीं है।

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संदर्भ

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