एमआरआई एक स्कैनिंग प्रक्रिया है, जिसमें मैग्नेट और रेडियो तरंगों का इस्तेमाल करके शरीर के आंतरिंग अंगों की छवियां (चित्र/फोटो) तैयार की जाती हैं। इन फोटो के जरिये डॉक्टर शरीर के ऊतकों जैसे विभिन्न अंगों और मांसपेशियों का अच्छे से निरीक्षण करने में सक्षम हो पाते हैं।

श्रोणि के एमआरआई में कूल्हे की हड्डियों के बीच के ऊतकों की छवियां देखी जा सकती हैं। श्रोणि वाले हिस्से में पाई जाने वाली संरचनाओं में बड़ी आंत, छोटी आंत, मूत्राशय, लिम्फ नोड्स, श्रोणि की हड्डी और प्रजनन अंग शामिल होते हैं।

पेल्विक एमआरआई कूल्हों में दर्द और श्रोणि वाले हिस्से में कैंसर के प्रसार जैसी समस्याओं का निदान करने में मदद करता है। एमआरआई को एक्स-रे और सीटी स्कैन से अधिक सुरक्षित माना जाता है, क्योंकि इसमें रेडिएशन का उपयोग नहीं होता है।

प्रत्येक एमआरआई छवि को स्लाइस के रूप में जाना जाता है। प्रत्येक टेस्ट में दर्जनों स्लाइस तैयार होती हैं। इन स्लाइस को तुरंत कंप्यूटर में स्टोर किया जा सकता है।

(और पढ़ें - रेडिएशन सिकनेस का कारण)

  1. श्रोणि (पेल्विक) का एमआरआई कौन नहीं करा सकता है? - Who cannot have a pelvis MRI in Hindi?
  2. श्रोणि (पेल्विक) का एमआरआई क्यों किया जाता है? - Why is a pelvis MRI done in Hindi?
  3. श्रोणि (पेल्विक) के एमआरआई से पहले की तैयारी? - Pelvis MRI preparation in Hindi?
  4. श्रोणि (पेल्विक) एमआरआई के लिए क्या प्रक्रिया है? - Pelvis MRI procedure in Hindi?
  5. श्रोणि (पेल्विक) एमआरआई में कैसा महसूस होता है? - How will a pelvis MRI feel in Hindi?
  6. श्रोणि (पेल्विक) एमआरआई के परिणामों का क्या मतलब है? - Pelvis MRI results mean in Hindi?
  7. श्रोणि (पेल्विक) एमआरआई के जोखिम और लाभ क्या हैं? - Pelvis MRI risks and benefits in Hindi?
  8. श्रोणि (पेल्विक) एमआरआई के बाद क्या होता है? - What happens after a pelvis MRI in Hindi?

एमआरआई स्कैन के दौरान इस मशीन से उस अंग के चारों ओर मैग्नेटिक फील्ड तैयार होती है, जिसका एमआरआई किया जाना है। लेकिन एमआरआई सभी लोग नहीं करा सकते हैं, यदि आप निम्नलिखित स्थितियों से जुड़े हैं, तो आपको टेस्ट से पहले डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए :

  • पेसमेकर या डिफाइब्रिलेटर लगाया हो - बता दें, पेसमेकर एक छोटा उपकरण है जो दिल की धड़कन को नियंत्रित करने में मदद करने के लिए छाती के अंदर लगाया जाता है। (और पढ़ें - पेसमेकर सर्जरी क्या होती है)
  • मेटल या इलेक्ट्रॉनिक्स सर्किट इम्प्लांट कराया हो - यदि कोई हड्डी टूट जाती है, तो उस टूटी हुई हड्डी के आकार के बराबर का धातु इम्प्लांट किया जाता है, जो कि हड्डी को ठीक होने में मदद करती है, लेकिन, ध्यान रहे यह इम्प्लांट केवल तब तक के लिए रहता है जब ​तक कि प्रभावित हड्डी ठीक न हो जाए।
  • आपने पिछले छह सप्ताह में किसी तरह की सर्जरी करवाई हो।
  • हृदय वाल्व रिप्लेसमेंट सर्जरी करवाई हो।
  • सिर की सर्जरी हुई हो।
  • आडिटरी इम्प्लांट कराया हो - यह एक इलेक्ट्रॉनिक्स डिवाइस है जो सुनने में मदद करता है।
  • वेल्डिंग या किसी दुर्घटना की वजह से आंखों में कोई धातु चली गई हो।
  • आपने कोई भी कैप्सूल कैमरा (कैप्सूल के आकार का कैमरा) निगल लिया हो।

श्रोणि (पेल्विक) का एमआरआई निम्नलिखित स्थितियों के मूल्यांकन या निदान में मदद करता है :

यदि किसी महिला को निम्नलिखित लक्षण महसूस होते हैं, तो श्रोणि का एमआरआई करवाने का आदेश दिया जा सकता है :

श्रोणि का एमआरआई पुरुषों और महिलाओं दोनों में किया जा सकता है :

  • कूल्हों से जुड़ा जन्म दोष
  • कूल्हे वाले हिस्से में चोट
  • कूल्हे का दर्द, जिसका कारण स्पष्ट न हो (और पढ़ें -  हिप का ऑपरेशन कैसे होता है)
  • पैल्विक के एक्स-रे पर कुछ असामान्य दिखना

इसके अलावा, यदि कैंसर अन्य अंगों में फैल रहा है तो ऐसे में इस टेस्ट की मदद ली जा सकती है। यह निम्न प्रकार के कैंसर के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है :

श्रोणि की एमआरआई से पहले आपको आभूषण और धातु के बने सामानों को निकालने की आवश्यकता होगी, जिसमें घड़ियां, बालों में लगाई जाने वाली पिन, चश्मा और रिमूवल टीथ (शरीर से हटाने योग्य दांत) और पियर्सिंग शामिल हैं। इसके बाद अस्पताल में यदि गाउन दिया जाता है तो उसे पहनने की जरूरत होती है।

कुछ मामलों में, डॉक्टर को आपके खून में कंट्रास्ट डाई इंजेक्ट करने की आवश्यकता हो सकती है। बता दें, इस डाई का प्रयोग स्पष्ट छवियां प्राप्त करने के लिए किया जाता है। हालांकि, इसमें आमतौर पर गैडोलीनियम (रसायनिक यौगिक) होता है, जिससे कुछ लोगों में एलर्जी हो सकती है। यदि आपको एलर्जी की समस्या है तो टेस्ट से पहले डॉक्टर को सूचित करें।

(और पढ़ें - एलर्जी होने पर क्या करें)

इस टेस्ट से पहले पेट साफ करने की आवश्यकता हो सकती है और स्कैन से चार से छह घंटे पहले कुछ न खाने का भी निर्देश दिया जा सकता है। टेस्ट के उद्देश्य के आधार पर महिलाओं को फुल ब्लैडर (मूत्राशय पूरा भरा हो) की आवश्यकता हो सकती है।

यदि आप गर्भवती हैं या यदि गर्भवती होने की कोई संभावना है, तो अपने डॉक्टर को इस बारे में सूचित करें। चूंकि इस टेस्ट में मैग्नेटिक फील्ड का इस्तेमाल होता है ऐसे में पहली तिमाही में महिलाओं को एमआरआई स्कैन नहीं करवाना चाहिए। इसके अलावा गैडोलीनियम का प्रयोग आवश्यकता पड़ने पर ही किया जाना चाहिए।

क्या आपको क्लॉस्ट्रोफोबिया (बंद स्थानों पर डर लगना) है, यदि हां तो इस बारे में भी डॉक्टर को जानकारी दें। ऐसे मामले में, वे आपकी मदद करने के लिए स्कैन से पहले कुछ सिडेटिव ड्रग्स दे सकते हैं। यह एक प्रकार की प्रिस्क्रिप्शन दवा है, जो आपके मस्तिष्क की गतिविधि को धीमा करके आपको रिलैक्स महसूस कराती है। डॉक्टर आमतौर पर चिंता और नींद की बीमारी (अनिद्रा) जैसी स्थितियों का इलाज करने के लिए इन दवाओं को लिखते हैं।

छोटे बच्चों और शिशुओं को स्कैन के दौरान हिलने-डुलने से रोकने के ​लिए बेहोश करने की आवश्यकता हो सकती है।

श्रोणि का एमआरआई निम्नलिखित तरीके से किया जाता है :

  • सबसे पहले आपको अपनी पीठ के बल एक मेज पर लेटने की आवश्यकता होगी, जो कि एमआरआई मशीन में स्लाइड हो जाती है।
  • कॉइल जैसी छोटी गोल डिवाइसेज को आपके कूल्हे या श्रोणि वाले हिस्से के आसपास रखा जाएगा। ये कॉइल रेडियो तरंगों को खींचते हैं और उन्हें संचारित करते हैं।
  • यदि कंट्रास्ट डाई का उपयोग किया जाता है, तो डॉक्टर इंजेक्शन में डाई भरकर उसे नसों के माध्यम से शरीर में इंजेक्ट करते हैं।
  • एक बार जब डाई इंजेक्ट कर दी जाती है तो बाद में, आगे के स्कैन किए जाएंगे।
  • स्कैनिंग मशीन का संचालन करने वाला व्यक्ति दूसरे कमरे से आपकी निगरानी करता है।
  • यह टेस्ट आमतौर पर 30-50 मिनट तक चलता है।

(और पढ़ें - पेल्विक अल्ट्रासाउंड क्या है)

एमआरआई एक दर्द रहित टेस्ट है। हालांकि, मशीन शुरू होने पर तेज आवाज होती है, जिससे आपको असुविधा हो सकती है, ऐसे में डॉक्टर या रेडियोलॉजिस्ट आपको कान बंद करने के लिए इयरप्लग दे सकते हैं। इसके अलावा, एमआरआई के लिए जिस टेबल पर आप लेटे हैं उस पर थोड़ी ठंड लग सकती है, इसलिए यदि आप चाहें तो कंबल मांग सकते हैं।

प्रोसीजर के दौरान स्थिर रहना पड़ता है, जो कि थोड़ा परेशान कर सकता है, लेकिन ऐसा करना जरूरी होता है, क्योंकि हिलने-डुलने से फोटो ब्लर यानी अस्पष्ट हो सकती है।

श्रोणि एमआरआई की रिपोर्ट यदि नॉर्मल आती है तो इसका मतलब है कि आपको कोई दिक्कत नहीं है। लेकिन किसी पुरुष में रिपोर्ट असामान्य होने का मतलब यह हो सकता है :

एक महिला में असामान्य रिपोर्ट आने का मतलब हो सकता है :

  • ब्लैडर कैंसर
  • कोलोरेक्टल कैंसर
  • सर्वाइकल कैंसर
  • ओवेरियन कैंसर
  • एंडोमेट्रियल कैंसर
  • डिम्बग्रंथि का विकास
  • प्रजनन अंगों से जुड़ा जन्मजात दोष
  • गर्भाशय में रसौली
  • प्रजनन अंगों की संरचना में दोष

निम्नलिखित स्थितियों के कारण पुरुषों और महिलाओं दोनों में असामान्य परिणाम देखे जा सकते हैं :

अपनी रिपोर्ट से जुड़ी जानकारी के लिए डॉक्टर से परामर्श करें।

श्रोणि एमआरआई के लाभ ​निम्नलिखित हैं :

  • नॉ-इनवेसिव टेक्नीक : इसमें चीर फाड़ की जरूरत नहीं होती है और न ही तो टिश्यू निकालना पड़ता है)
  • रेडिएशन से बचाव : इस प्रोसीजर में रेडिएशन के संपर्क में नहीं आना पड़ता है।
  • यह सॉफ्ट टिश्यू की भी फोटो ले सकता है।
  • यह टेस्ट विभिन्न स्थितियों जैसे कि कैंसर, मांसपेशियों और हड्डियों की असामान्यता, हृदय और नसों से जुड़े रोगों के निदान में मदद कर सकता है।
  • यह टेस्ट हड्डियों के पीछे छिपी असामान्यताओं का पता लगाया जा सकता है।

श्रोणि एमआरआई से जुड़े जोखिम इस प्रकार हैं :

  • एलर्जी : कंट्रास्ट डाई की वजह से कुछ मामलों में एलर्जी का मामूली खतरा हो सकता है।
  • नेफ्रोजेनिक सिस्टेमिक फाइब्रोसिस : यह एक दुर्लभ ​स्थिति है, जो कि किडनी की बीमारी से ग्रस्त लोगों में गैडोलीनियम डाई के उपयोग के कारण होती है।
  • चूंकि इस प्रोसीजर में स्ट्रांग मैग्नेट का इस्तेमाल होता है, इसलिए यदि किसी ने मेटल इम्प्लांट और मेडिकल डिवाइस लगाई है तो उसके खराब होने का खतरा रहता है।

एमआरआई स्कैन के बाद आप आराम से दैनिक गतिविधियों में शामिल हो सकते हैं। इसमें स्वास्थ्य पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है इसलिए रिकवर होने जैसी स्थिति नहीं आती है। लेकिन यदि आपको बंद जगह से दिक्कत है तो डॉक्टर या रेडियोलॉजिस्ट आपको सिडेटिव ड्रग्स दे सकते हैं, यह दिमाग के फंक्शन को धीमा कर देता है। इस स्थिति में आप कोशिश करें कि अकेले घर न जाएं, किसी जानने वाले के साथ जाएं।

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