ब्लड में सी-रिएक्टिव प्रोटीन यानी सीआरपी का ज्यादा होने का मतलब है कि शरीर में सूजन है. सूजन के होने पर लिवर सीआरपी का निर्माण करता है. ये सूजन इंफेक्शन या कैंसर किसी भी कारण से हो सकती है. सीआरपी का ज्यादा होना हृदय की आर्टरीज में सूजन की ओर भी इशारा करता है. इस अवस्था में हार्ट अटैक होने का खतरा रहता है. ऐसे में सीआरपी को कम करने के जरूरत होती है और इसके लिए संतुलित डाइट लेना, रोज एक्सरसाइज करना व वजन को नियंत्रित करना जैसे उपाय शामिल हैं.

आज इस लेख में आप जानेंगे कि सीआरपी को कम करने के उपाय क्या-क्या हैं -

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  1. सीआरपी को कम करने के तरीके
  2. सारांश
सीआरपी कम करने के उपाय के डॉक्टर

संतुलित डाइट का सेवन, नियमित तौर पर एक्सरसाइज और वैट मैनेजमेंट सीआरपी को कम करने का कारगर तरीका है. आइए, इन उपायों के बारे में विस्तार से जानते हैं -

संतुलित डाइट

इस अवस्था में ऐसी डाइट लेने की सलाह दी जाती है, जिसमें सैचुरेटेड फैट, ट्रांस फैट, कोलेस्ट्रॉल, सोडियम व चीनी कम मात्रा में हो. अगर खाने में इनकी मात्रा ज्यादा होती है, तो इससे दिल की सेहत पर असर पड़ सकता है. ऐसी स्थिति में मोनोसैचुरेटेड फैटी एसिड से युक्त ऑलिव ऑयल का इस्तेमाल सही रहता है. ओमेगा 3 फैटी एसिड वाले फूड भी कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स को कम करने में सहायक हो सकते हैं, जैसे - मछलीअखरोटचिया सीड्स आदि. 

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एक्सरसाइज

एक्सरसाइज करना हमेशा से ही हेल्थ के लिए अच्छा होता है. सीआरपी कम करने के लिए भी एक्सरसाइज करने की सलाह दी जाती है. इसमें एरोबिकब्रिस्क वॉकिंग व साइकिलिंग शामिल है. इससे बढ़ा हुआ वजन भी कम होगा.

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स्टैटिन ड्रग्स

शोध बताते हैं कि स्टैटिन दवाइयों की मदद से सीआरपी स्तर को 13 से 50 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है. ये कार्डियक खतरे को भी कम करने में सहायता करती हैं. फिर भी ऐसी किसी भी दवा का सेवन करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए.

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एस्पिरिन

रोजाना एस्पिरिन का सेवन उन लोगों के लिए ठीक है, जिनका सीआरपी स्तर बढ़ा रहता है और जिन्हें दिल का रोग होने का खतरा रहता है. जिनका सीआरपी बढ़ा रहता है, उन्हें एस्पिरिन से फायदा हो सकता है. फिलहाल, एस्पिरिन का सेवन करने से सीआरपी का स्तर कम होने के संबंध में वैज्ञानिक एकमत नहीं है. जहां कुछ शोध इसे फायदेमंद मानते हैं, वहीं कुछ इसके असरदार होने से इंकार करते हैं. इसलिए, एस्पिरिन का इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह पर ही करना चाहिए.

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प्रोबायोटिक्स का सेवन

शोध कहते हैं कि सीआरपी स्तर को कम करने में प्रोबायोटिक्स का सेवन करने से मदद मिलती है. प्रोबायोटिक्स सिर्फ हेल्दी बैक्टीरिया के संतुलन को ही नहीं सुधारते, बल्कि मोटापाइंसुलिन रेजिस्टेंसटाइप 2 डायबिटीज और नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज जैसे रोगों से भी बचाते हैं या उनमें सुधार लाते हैं. सीआरपी बढ़े रहने का मतलब सिस्टम में सूजन होना भी है, जिसे कम करने में प्रोबायोटिक्स के एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण से फायदा हो सकता है. 

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शरीर में सूजन होने पर लिवर जिस चीज का निर्माण करता है, वह सीआरपी है. यदि डॉक्टर को ऐसा लगता है कि व्यक्ति में सूजन का स्तर बढ़ा हुआ है, तो वह सीआरपी ब्लड टेस्ट कराने की सलाह दे सकता है. कई बार बढ़े हुए सीआरपी के कारण कार्डियोवस्कुलर रोग का जोखिम भी हो सकता है. ऐसे में जरूरी है कि संतुलित डाइट के साथ-साथ नियमित एक्सरसाइज करने और स्टैटिन दवाइयों का सेवन सीआरपी कम करने के उपाय के तौर पर मददगार हो सकता है.

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