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जब पेट की अंदरूनी परतों में सूजन की स्थिति बन जाती है तो इसे पेट में सूजन या गेस्ट्राइटिस कहते हैं। यह पेट में संक्रमण, शराब का सेवन करने या कुछ दर्द निवारक दवाओं के अत्यधिक इस्तेमाल के कारण हो सकता है। इसकी वजह से मतली, उल्टी, अपच, उल्टी में खून, मल में खून, वजन कम होना, हिचकी और जलन जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। एलर्जी पैदा करने वाले कुछ कारक और प्रतिरक्षा प्रणाली विकारों से भी गेस्ट्राइटिस की समस्या हो सकती है। यदि इसका उपचार न किया जाए, तो सूजन वाली परतें नष्ट हो सकती हैं, जिस कारण अल्सर और ब्लीडिंग की समस्या हो जाती है।

प्रमाणित रूप से गेस्ट्राइटिस का इलाज रोग के अंतर्निहित कारणों के आधार पर किया जाता है। इस स्थिति में एंटासिड्स, एंटीबायोटिक्स व अन्य दवाएं दी जाती हैं।

होम्योपैथी में पेट में सूजन व इससे जुड़े लक्षणों को ठीक करने के लिए कई तरह की दवाएं मौजूद हैं। आमतौर पर उपयोग की जाने वाली दवाओं में  इपिकाकुअन्‍हा, कैलियम बाइक्रोमाइकम, नक्स वोमिका, ऑक्सालिकम एसिडम, फॉस्फोरस, बिस्मथम सबनीट्राकम, क्यूप्रम मेटालिकम, एंटीमोनियम टार्टारिकम, आर्सेनिकम एल्बम और हाइड्रैस्टिस कैनाडेंसिस शामिल हैं।

होम्योपैथिक चिकित्सा अनोखी और व्यक्तिगत है। इसमें डॉक्टर मरीज के व्यक्तित्व के हर पहलू जैसे उसकी मानसिक व शारीरिक स्थिति को समझने के बाद उसके लिए सही उपाय निर्धारित करता है। यही वजह है कि होम्योपैथिक उपचार एक जैसी बीमारी वाले व्यक्तियों में एक जैसा असर नहीं करती है।

  1. पेट में सूजन के लिए होम्योपैथिक दवाएं - Pet me sujan ke liye homeopathic medicine
  2. होम्योपैथी के अनुसार पेट में सूजन के लिए आहार और जीवन शैली में बदलाव - Pet me sujan ke liye khan pan aur jeevan shaili me badlav
  3. पेट में सूजन के लिए होम्योपैथिक दवाएं और उपचार कितने प्रभावी हैं - Pet me sujan ki homeopathic medicine kitni effective hai
  4. गैस्ट्राइटिस के लिए होम्योपैथिक दवा के दुष्प्रभाव और जोखिम और उपचार - Pet me sujan ki homeopathic medicine ke nuksan
  5. गैस्ट्राइटिस की होम्योपैथिक उपचार से जुड़े टिप्स - Pet me sujan ki homeopathic treatment se jude tips

इपिकाकुअन्‍हा
सामान्य नाम :
इपिकैक-रूट
लक्षण : यह उपाय मुख्य रूप से तंत्रिका में जलन के लिए प्रयोग किया जाता है, जो छाती और पेट में ऐंठन का कारण बनता है। यह एक्यूट गेस्ट्राइटिस की वजह से होने वाली मतली और उल्टी के प्रबंधन में मदद करता है। इसके अलावा यह निम्नलिखित लक्षणों को भी ठीक करने में मददगार है :

यह लक्षण नीचे लेटने व गर्म हवा के संपर्क में आने पर बढ़ जाते हैं।

कैलियम बाइक्रोमाइकम
सामान्य नाम : बाईक्रोमेट ऑफ पोटाश
लक्षण :
कैलियम बाइक्रोमाइकम मुख्य रूप से एक्यूट और क्रोनिक गैस्ट्रिक समस्याओं के उपचार में किया जाता है। हालांकि, इसका उपयोग निम्नलिखित प्रबंधन के लिए भी किया जा सकता है :

  • पेट में अल्सर
  • पेट की परतों में सूजन
  • उल्टी, जो चमकीले पीले रंग की होती है
  • खाने के बाद पेट में तेज दर्द व भारीपन का अहसास
  • मीट पचाने में असमर्थता या दिक्कत
  • बियर पीने के तुरंत बाद मतली और उल्टी

यह लक्षण सुबह, गर्म हवा के संपर्क और बियर पीने से बिगड़ते हैं, जबकि गर्मी से इनमें सुधार होता है।

नक्स वोमिका
सामान्य नाम :
पॉइजन-नट
लक्षण : नक्स वोमिका का उपयोग पेट से जुड़ी एक्यूट व क्रोनिक स्थितियों के इलाज के लिए किया जाता है, विशेष रूप से शराब के दुरुपयोग से होने वाली समस्याओं में यह असरदार है। यह निम्नलिखित लक्षणों के उपचार के लिए भी इस्तेमाल में लाया जाता है :

  • सूजन
  • खट्टी डकार और कुछ खाने के बाद कड़वा लगना
  • सुबह के समय व कुछ खाने के बाद जी मिचलाना
  • अपच व डकार
  • उल्टी
  • पेट में भारीपन और दर्द, जो खाने के बाद बढ़ जाता है

यह सभी लक्षण सूखे और ठंडे मौसम में, सुबह, मसालेदार भोजन के बाद और मानसिक थकान से खराब हो जाते हैं। नम और बरसात के मौसम में, शाम को और पर्याप्त आराम करने के बाद इन लक्षणों में सुधार होता है।

ऑक्सालिकम एसिडम
सामान्य नाम :
सोरेल एसिड
लक्षण : इस उपाय का उपयोग मुख्य रूप से एक्यूट गैस्ट्राटिस के उपचार में किया जाता है, लेकिन यह क्रोनिक गैस्ट्र्राटिस और गैस्ट्रोएंटेराइटिस यानी पेट और आंतों के अस्तरों की सूजन का भी इलाज कर सकता है। यह अन्य लक्षणों के लिए भी उपयोगी है जैसे :

  • पेट में तेज दर्द
  • पेट में गैस की तकलीफ या पेट फूलना
  • पेट में जलन
  • खट्टी व कड़वी डकार, जो कि रात में ज्यादा प्रभावित करती है
  • पेट में छूने पर दर्द
  • पेट में जलन जो पेट के ऊपरी हिस्से तक बढ़ने लगती है

यह लक्षण सुबह 3 बजे खराब हो जाते हैं, जब रोगी अपनी स्थिति के बारे में सोचता है या वह अपने बाईं ओर लेटता है।

फास्फोरस
सामान्य नाम :
फॉस्फोरस
लक्षण : फॉस्फोरस मुख्य रूप से श्लेष्मा झिल्ली (पेट की अंदरूनी परतें) के मामलों जैसे सूजन और परतों के खराब होने की स्थिति के इलाज के लिए उपयोग किया जाता है। यह उपचार शराब के दुरुपयोग के कारण होने वाले एक्यूट और क्रोनिक गैस्ट्राटिस व गैस्ट्राटिस दोनों में प्रभावी है। फास्फोरस का उपयोग निम्नलिखित लक्षणों को प्रबंधित करने के लिए भी किया जा सकता है :

  • पेट दर्द और उल्टी
  • भोजन के बाद अत्यधिक डकार
  • पेट की परतों में सूजन
  • पेट में खाली लगना
  • पेट में जलन जो गले और आंत को प्रभावित करने लगता है

यह सभी लक्षण मौसम के बदलने, गर्म मौसम में पसीना आने, गर्म खाने पीने, बाईं ओर लेटने और थकावट से बिगड़ जाते हैं। ठंडे पानी से नहाने, खुली हवा के संपर्क में आने, ठंडे भोजन का सेवन करने, दाईं ओर लेटने और सोने से इन लक्षणों में सुधार होता है।

बिस्मथम सबनीट्राकम
सामान्य नाम :
पार्टिसिपेटेड सब-नाइट्रेट ऑफ बिस्मथ
लक्षण : इस उपाय का इस्तेमाल मुख्य रूप से धीरे-धीरे विकसित होने वाली जलन और पाचन तंत्र का सही से कार्य न करने जैसी स्थिति को ठीक करने के लिए किया जाता है, लेकिन यह तेजी से प्रभावित करने वाली स्थितियों को ठीक करने में भी सहायक है। इस उपाय से निम्न लक्षण भी ठीक किए जा सकते हैं :

क्यूप्रम मेटालिकम
सामान्य नाम :
कॉपर
लक्षण : निम्नलिखित लक्षण में क्यूप्रम मेटालिकमका का उपयोग करके प्रबंधित किया जा सकता है :

  • मतली और उल्टी
  • दस्त
  • नमकीन जैसे किसी धातु का स्वाद आना
  • तरल पदार्थ पीने के बाद पेट के अंदर से आवाज आना
  • पेट छूने पर दर्द होना

उल्टी के बाद और पीरियड्स की शुरुआत से पहले यह लक्षण बिगड़ जाते हैं। ठंडा पानी पीने से लक्षणों में सुधार होता है।

एंटीमोनियम टार्टारिकम
सामान्य नाम :
टार्टर इमेटिक
लक्षण : एंटीमोनियम टार्टारिकम मल में खून और बलगम आने जैसे लक्षणों का प्रबंधन करने में मदद करता है। इस दवा के साथ निम्नलिखित लक्षणों का भी इलाज किया जा सकता है :

  • भोजन को निगलने में कठिनाई
  • भोजन के बाद मतली और उल्टी
  • मतली जो सिरदर्द, जम्हाई लेने और आंखों से पानी के बाद होती है
  • पेट फूलना
  • पेट वाले हिस्से पर दबाव पड़ने से सनसनी या झनझनाहट लगना, खासकर आगे झुकते समय
  • आंशिक तौर पर होश खोना

यह सारे लक्षण शाम को, ठंडे और नम मौसम में, रात में नीचे लेटने और खट्टे खाद्य पदार्थों व दूध के सेवन के बाद खराब हो जाते हैं। जबकि डकार, खखारने (गला साफ करने) और सेमी इरेक्ट पोजिशन (लेटने व बैठने के बीच वाली स्थिति) में बैठने से लक्षणों से राहत मिलती है।

आर्सेनिकम एल्बम
सामान्य नाम :
आर्सेनिक एसिड
लक्षण : आर्सेनिक एसिड उन व्यक्तियों के लिए बेहतरीन उपचार है, जो मामूली काम करने से थक जाते हैं। यह जलन, कमजोरी, चिड़चिड़ापन और बेचैनी से राहत दिलाता है। इसके अलावा यह पेट की सूजन के लिए भी शानदार उपाय है, जो अत्यधिक शराब के सेवन से होती है। कुछ अन्य लक्षण भी हैं, जिनमें आर्सेनिकम एल्बम प्रभावी है :

  • खट्टी डकार
  • बहुत ज्यादा पेट खराब होना
  • कुछ भी खाने या पीने के बाद मतली और उल्टी। इसमें रोगी भोजन की गंध भी बर्दाश्त नहीं कर सकता
  • पेट में जलन और दर्द
  • सीने में जलन
  • लंबे समय तक डकार की समस्या
  • भोजन पेट में जाने के बजाय भोजन नलिका में जमा रहना
  • बलगम और खून की उल्टी

मध्यरात्रि के बाद यह लक्षण बिगड़ जाते हैं, खासकर यदि बाहर बारिश हो रही है तो ठंडे खाद्य और पेय पदार्थ लेने से लक्षण खराब हो जाते हैं। जब रोगी अपना सिर ऊंचा रखता है और गर्म पेय लेता है, तो रोगी को अस्थायी राहत महसूस होती है।

हाइड्रैस्टिस कैनाडेंसिस
सामान्य नाम :
गोल्डन सील
लक्षण : हाइड्रैस्टिस कैनाडेंसिस उन लोगों के लिए उपयुक्त चिकित्सा है, जिनका अत्यधिक बलगम निकलता है। यह श्लेष्म झिल्ली के दर्द और अल्सरेशन (कुछ अंगों की अंदरूनी परत) के प्रबंधन में भी उपयोगी है। यह एक्यूट और क्रोनिक गैस्ट्राटिस दोनों का इलाज करता है। इस दवा के उपयोग से निम्नलिखित लक्षणों को ठीक किया जा सकता है :

  • ऊपरी पेट में लगातार धमक महसूस होना
  • पाचन धीमा होना
  • लगातार पेट में दर्द
  • पेट की परत का अल्सर और सूजन

(और पढ़ें - पेट में सूजन के लिए क्या करना चाहिए)

होम्योपैथिक उपचार से ज्यादा से ज्यादा लाभ पाने के लिए, डॉक्टर अपने रोगियों को आहार और जीवनशैली में निम्नलिखित बदलाव का सुझाव देते हैं :

क्या करना चाहिए

  • दिनचर्या में शारीरिक व्यायाम के लिए समय निकालें
  • पौष्टिक और स्वस्थ भोजन खाएं।
  • खुद की और आस-पास की स्वच्छता बनाए रखें।
  • अचानक से प्रभावित करने वाली स्थितियों में खाद्य और पेय पदार्थों से संबंधित अपनी इच्छा को पूरा करें।

क्या नहीं करना चाहिए

  • ऐसे पेय पदार्थों का सेवन न करें, जिनमें कैफीन हो या तेज गंध हो
  • मसालेदार खाद्य पदार्थों, रखा हुआ मीट और औषधीय गुणों से युक्त खाद्य चीजों का सेवन न करें
  • नमक और चीनी की अधिकता से बचें
  • मानसिक थकावट से दूर रहें

यदि इन बिंदुओं को ठीक से पालन किया जाता है, तो लक्षणों में तेजी से सुधार होता है।

आमतौर पर होम्योपैथिक दवाएं एक्यूट और क्रोनिक गैस्ट्राइटिस दोनों स्थितियों में प्रभावी है। ये दवाएं गैस्ट्रोएंटेराइटिस के प्रबंधन में भी प्रभावी रूप से उपयोग की जा सकती हैं।

अमेरिका के नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज में किए गए एक अध्ययन में, 53 वर्षीय रोगी ने होम्योपैथिक दवाओं को लेने के बाद गैस्ट्राइटिस के लक्षणों से राहत की जानकारी दी ​थी।

2010 के एक अध्ययन से पता चला है कि नक्स वोमिका और कैलेंडुला जैसे होम्योपैथिक उपचार पेट में अल्सर पैदा करने वाले बैक्टीरिया के हानिकारक प्रभावों को दबाते हैं।

हालांकि, गैस्ट्राइटिस के उपचार में होम्योपैथिक दवाओं की दक्षता को साबित करने के लिए अभी और प्रमाण की आवश्यकता है।

होम्योपैथिक दवाओं को प्राकृतिक पदार्थों से घुलनशील रूप में तैयार किया जाता है। इसीलिए इनका कोई दुष्प्रभाव नहीं है और एक बड़ी आबादी में सुरक्षित रूप से इनका प्रयोग किया जा रहा है। होम्योपैथिक दवाएं गर्भवती महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के लिए भी सुरक्षित हैं। हालांकि, यह हमेशा सलाह दी जाती है कि होम्योपैथिक उपाय करने से पहले एक योग्य चिकित्सक से मिलें और उसके दिशा-निर्देशों का पालन करें।

गैस्ट्राइटिस शराब के दुरुपयोग, संक्रमण और एलर्जी सहित विभिन्न कारकों के कारण होता है। हालांकि, इस स्थिति के लिए कई पारंपरिक या प्रमाणित उपाय हैं, लेकिन लंबे समय तक दर्द निवारक दवाओं के उपयोग से भी गैस्ट्राइटिस हो सकता है। होम्योपैथिक उपचार साइड इफेक्ट से मुक्त होते हैं। होम्योपैथिक डॉक्टर इन दवाओं के साथ-साथ अपने रोगियों को आहार और जीवन शैली में कुछ बदलाव करने की सलाह देते हैं, जिसका पालन करने से कोई भी मरीज इन दवाओं का सर्वोत्तम लाभ उठा सकता है।

और पढ़ें ...

References

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  2. Better health channel. Department of Health and Human Services [internet]. State government of Victoria; Gastritis
  3. William Boericke. Homoeopathic Materia Medica. Kessinger Publishing: Médi-T 1999, Volume 1
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  5. Partha Pratim Pal, Madhu Sudhan Ghosh, Abhijit Chakma. Homoeopathic treatment of ulcerative Colitis: A case report. Year : 2017 Volume : 11 Issue : 1 Page : 74-78
  6. Wenda Brewster O’Reilly. Organon of the Medical art by Wenda Brewster O’Reilly . B jain; New Delhi
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