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परिचय:

कुछ लोगों को ऐसा लगता है, जैसे उनके गले के अंदर गांठ बनी हुई है या चर्बी बढ़ी हुई है, जबकि वास्तव में कोई गांठ या चर्बी आदि नहीं होती। यह स्थिति अक्सर गले या गले के ठीक नीचे की मांसपेशियों में तनाव बढ़ जाने से होता है। गले या गले के नीचे की मांसपेशियों में खिंचाव अक्सर एसिड रिफ्लक्स के कारण होता है। यह स्थिति कुछ लोगों को दुख या गर्व महसूस होने जैसी भावनाएं आने पर भी महसूस होने लगती है। हालांकि हर बार एेसा हो, यह जरूरी नहीं।

गले में गांठ दर्दनाक तो नहीं होती लेकिन यह काफी परेशान कर देने वाली स्थिति हो सकती है। गले में गांठ होने के कारण कुछ कुछ लोगों को निगलने में कठिनाई होने लगती है और कुछ लोगों में यह गांठ गले में बाहरी तरफ उभरी हुई भी दिखाई पड़ती है। 

गले में गांठ की जांच करने के लिए गर्दन का एक्स रे और बेरियम (एक प्रकार की डाई) आदि का इस्तेमाल किया जाता है जिसकी मदद से अंदरुनी समस्याओं की जांच की जाती है। परीक्षण की मदद से यह सुनिश्चित किया जाता है, कि गले में गांठ किसी गंभीर समस्या के कारण तो नहीं हो रही है। इलाज के तरीके सभी लोगों में पूरी तरह से काम नहीं कर पाते और लक्षण इलाज करने के बाद भी रह सकते हैं। 

गले में ट्यूमर होने के कारण भी गले में गांठ जैसा अनुभव हो सकता है, जिसका जल्द से जल्द जांच व इलाज करना जरूरी होता है, क्योंकि गले में ट्यूमर के कारण मरीज की मृत्यु भी हो सकती है।

(और पढ़ें - ब्रेन ट्यूमर के कारण)

  1. गले की गांठ क्या है - What is Lump in Throat in Hindi
  2. गले में गांठ के लक्षण - Lump in Throat Symptoms in Hindi
  3. गले में गांठ के कारण व जोखिम कारक - Lump in Throat Causes & Risk Factors in Hindi
  4. गले की गांठ से बचाव - Prevention of Lump in Throat in Hindi
  5. गले में गांठ का परीक्षण - Diagnosis of Lump in Throat in Hindi
  6. गले में गांठ का इलाज - Lump in Throat Treatment in Hindi
  7. गले में गांठ की जटिलताएं - Lump in Throat Complications in Hindi
  8. गले में गांठ के डॉक्टर

गले की गांठ क्या है - What is Lump in Throat in Hindi

गले की गांठ क्या है?

इसमें मरीज को ऐसा महसूस होने लगता है जैसे उसके गले में गांठ हो गई है, जबकि कई बार गले में ऐसी कोई गांठ नहीं बनती। इस स्थिति में कभी-कभी ऐसा भी लगता है जैसे गांठ खत्म हो गई है लेकिन कुछ समय बाद यह फिर से महसूस होने लगती है। अन्य मामलों में इस स्थिति से भोजन या तरल निगलने पर किसी प्रकार की कठिनाई नहीं होती।

(और पढ़ें - गले में छाले का इलाज

गले में गांठ के लक्षण - Lump in Throat Symptoms in Hindi

गले में गांठ के क्या लक्षण हो सकते हैं?

गले में गांठ महसूस होने से जुड़े लक्षणों में निम्न भी शामिल हो सकते हैं:

  • ऐसा महसूस होना जैसे आपके गले के चारों तरफ कुछ बंधा हुआ है।
  • गले में बलगम या कोई अन्य द्रव जमा होने जैसा महसूस होना। (और पढ़ें - बलगम का इलाज)
  • निगलने के दौरान गले में गांठ महसूस होना।
  • गले में कुछ फंसने जैसा महसूस होना या घुटन महसूस होना। (और पढ़ें - गले में कुछ अटक जाए तो क्या करें)
  • भोजन करने के बाद गले में गांठ महसूस होना या गले में कुछ फंस जाने जैसा महसूस होना।
  • लगातार गले में गांठ महसूस होना।
  • गले की गांठ कभी-कभी महसूस होना कभी-कभी ठीक हो जाना।
  • बार-बार गला साफ करना। (और पढ़ें - गला खराब होने पर क्या करें)
  • सीने में जलन जैसे लक्षण महसूस होना।
  • ऐसा महसूस होना जैसे कोई वस्तु आदि गले या श्वसन मार्ग को अवरुद्ध कर रही है।

(और पढ़ें - ऊपरी श्वसन तंत्र संक्रमण का इलाज)

डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए?

यदि गले में गांठ महसूस होने के लक्षण निम्न स्थितियों से जुड़े हैं, तो आपको जल्द से जल्द डॉक्टर को दिखा लेना चाहिए:

(और पढ़ें - सूजन का इलाज)

गले में गांठ के कारण व जोखिम कारक - Lump in Throat Causes & Risk Factors in Hindi

गले में गांठ क्यों होती है?

ऐसे कई संभावित कारण हैं, जिनके कारण गले में गांठ बनने जैसा महसूस होने लगता है। गले की गांठ के सभी मामलों में इसके कारण के आधार पर ही सही इलाज का चुनाव किया जाता है। कुछ सामान्य कारण जिनमें निम्न शामिल हैं:

  • फेरिंजियल (गले का मध्यम भाग) में सूजन संबंधी समस्याएं:
    ​इसमें फेरिंक्स (Pharynx) में सूजन, जलन व अन्य तकलीफ होने लगती है। कुछ सबसे कारणों में निम्न शामिल हैं:
     
  • मांसपेशियों में खिंचाव होना:
    यदि आप बोल या निगल नहीं रहे हैं, तो इस स्थिति में मांसपेशियां शांत हो जाती हैं। हालांकि यदि वे पूरी तरह से शांत ना हो पाएं तो आपको उन मांसपेशियों में सामान्य से अधिक तनाव मिलता है। ऐसी स्थिति में कई बार गले में उभार या गांठ जैसा महसूस होने लगता है।
  • चिंता जैसी कुछ मानसिक स्थितियां:
    कुछ मामलों में गले में गांठ महसूस होने की स्थिति के साथ कुछ मानसिक स्थितियां भी जुड़ी हो सकती हैं। (और पढ़ें - चिंता दूर करने का तरीका)
  • भोजन नली का स्फिंक्टर ठीक से काम ना कर पाना:
    भोजन नली का निचला सिरा जो पेट में खुलता है उस सिरे पर मांसपेशियों से बना एक यंत्र होता है, जो जरूरत पड़ने पर खुलता व बंद होता रहता है। जब हवा को भोजन नली को रोकने वाले फ्लैप (मांसपेशियों से बने द्वार) ठीक से काम ना कर पाएं, तो ये स्फिंक्टर काम करना बंद कर देते हैं। इस स्थिति के परिणामस्वरूप गले में गांठ जैसा महसूस होने लगता है। (और पढ़ें - मांसपेशियों की कमजोरी का इलाज)
  • मांसपेशियां काम करना बंद कर देना:
    यदि आपकी गर्दन की मांसपेशियां पूरी तरह से काम करना बंद कर देती हैं, तो आपको उन मांसपेशियों में खिंचाव महसूस होने लगता है। ये मांसपेशियां काम करना बंद कर देने के कारण निगलने में कठिनाई होने लगती है या आप निगलने में पूरी तरह से असमर्थ हो जाते हैं। इस स्थिति में जब आप कुछ निगलते हैं, तो आपको गले में असाधारण सी सनसनी महसूस होने लगती है। (और पढ़ें -  मांसपेशियों की कमजोरी दूर करने के उपाय)
  • एसिड रिफ्लक्स रोग:
    इस रोग को गैस्ट्रोइसोफेजियल रिफ्लक्स डिजीज (Gastroesophageal reflux disease) भी कहा जाता है, इस रोग के कारण भी कई बार गले में गांठ जैसा महसूस होता है। (और पढ़ें - एसिड रिफ्लक्स का इलाज)
  • ट्यूमर:
    गले में ट्यूमर होने के कारण भी गले में गांठ बनने जैसा महसूस होने लगता है। (और पढ़ें - गले के कैंसर का इलाज)
  • थायराइड के रोग:
    यदि किसी व्यक्ति की थायराइड ग्रंथि में किसी प्रकार की समस्या है, तो उसको भी गले में गांठ बनने जैसे लक्षण महसूस हो सकते हैं। ऑपरेशन के द्वारा जिन लोगों की थायराइड ग्रंथि को निकाल दिया गया है और जिन लोगों को अभी भी थायराइड संबंधी समस्या है, दोनों को गले में गांठ की समस्या महसूस हो सकती है। (और पढ़ें - थायराइड में क्या खाना चाहिए)
  • गले में कुछ अटकना:
    यदि आपके गले में कुछ फंस गया है, तो उसको निकालने के बाद भी उसका छोटा टुकड़ा रह सकता है, जिस कारण से भी गले में गांठ जैसा महसूस होने लगता है। 

गले में गांठ होने का खतरा कब बढ़ता है?

गले में गांठ होने की संभावना पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में ज्यादा होती है और यह किसी अन्य उम्र के मुकाबले मध्य आयु  वर्ग में अधिक होता है।

कुछ अन्य संभावित कारक जो गले में गांठ होने का खतरा बढ़ाते हैं:

  • पर्याप्त लार ना बना पाना (और पढ़ें - लार ग्रंथि संबंधी समस्याएं)
  • धूम्रपान करना
  • बार-बार गला साफ करने की आदत होना
  • चिल्लाने या तेज आवाज में बोलने वाले लोग जैसे अध्यापक या जनता में भाषण देने वाले लोग (और पढ़ें - आवाज़ को सुरीली कैसे बनाएं)
  • लेरिंक्स (गले के बीच का हिस्सा) या फेरिंक्स (पेट में भोजन व तरल पहुंचाने वाली नली) की मांसपेशियों में खिंचाव आना
  • टेम्पोरोमैन्डिबुलर जॉयंट (Temporomandibular joint ) संबंधी विकार 
  • रीढ़ की हड्डी बढ़ने संबंधी विकार 
  • ईगल सिंड्रोम, गर्दन की हड्डियां सामान्य से अधिक बढ़ जाने के कारण गले के ऊतकों पर दबाव पड़ने लगता है।

(और पढ़ें - रीढ़ की हड्डी में दर्द के कारण)

 

गले की गांठ से बचाव - Prevention of Lump in Throat in Hindi

गले में गांठ से बचाव कैसे करें?

गले में गांठ महसूस होने के कारण का पूरी तरह से पता नहीं लगाया जा सकता, इसलिए यह पता लगाना भी मुश्किल होता है कि इसकी रोकथाम कैसे करें। अपने गले का ध्यान रखना ही गले में गांठ जैसी स्थितियों की जांच करने का सबसे अच्छा तरीका होता है।

  • पर्याप्त मात्रा में पानी पीएं:
    दिन में कम से कम 8 गिलास पानी पीएं। क्योंकि बार-बार पानी निगलने से गले की मांसपेशियों का आराम मिलता है। इसकी मदद से आपके शरीर में तरल का स्तर भी सामान्य रहता है। (और पढ़ें - प्रतिदिन कितना पानी पीना चाहिए)
     
  • यदि आप बीमार हैं, तो अपने गले का आराम दें:
    यदि आपको जुकाम हो गया है या लेरिन्जाइटिस जैसी कोई गंभीर बीमारी हो गई है, तो अपनी आवाज देना चाहिए। क्योंकि ऐसी स्थितियों में गले के अंदर की मांसपेशियों में सूजन आ जाती है और दर्द होने लगता है। ऐसी स्थिति में अधिक बोलने से स्थिति और बदतर हो जाती है, जिसको ठीक करना भी संभव नहीं होता। (और पढ़ें - सर्दी जुकाम के घरेलू उपाय)
     
  • कैफीन वाले पदार्थ ना पीएं:
    चाय, कॉफी व अन्य कोल्ड ड्रिंक्स जिनमें कैफीन होता है, ऐसे पेय पदार्थों को ना पीएं। ये पेय पदार्थ पीने से गला सूखने लगता है और साथ ही साथ इनसे अधिक पेशाब आने लगता है जिससे शरीर में पानी का स्तर कम हो जाता है। (और पढ़ें - तुलसी की चाय के फायदे)
     
  • धूम्रपान छोड़ दें:
    सिगरेट पीने व तंबाकू आदि का सेवन आपके गले, साइनस और मुंह को बुरी तरह से प्रभावित करता है। धूम्रपान या तंबाकू से जुड़े किसी भी उत्पाद का सेवन करने से स्वास्थ्य संबंधी कई गंभीर समस्याएं विकसित होने के जोखिम बढ़ जाते हैं, जिनमें मुंह व गले का कैंसर आदि भी शामिल हैं। (और पढ़ें - सिगरेट पीने के नुकसान
     
  • खराब आदतों को छोड़ दें:
    यदि आपको कोई भी ऐसी आदत है जो आपके गले को प्रभावित करती है तो उसे छोड़ दें, जैसे चिल्लाना, ऊंची आवाज में बोलना, बार-बार गला साफ करना आदि। ऐसी आदतों के कारण भी गले में अनावश्यक तनाव बढ़ जाता है, जिससे गले में गांठ होने जैसा महसूस होने लगता है।

(और पढ़ें - शरीर में पानी की कमी के लक्षण)

गले में गांठ का परीक्षण - Diagnosis of Lump in Throat in Hindi

गले में गांठ की जांच कैसे करें?

स्थिति की जांच के दौरान डॉक्टर गले में किसी प्रकार की गांठ बनने या गले के अंदर मांस बढ़ने की जांच करते हैं और साथ ही यह भी जांच करते हैं कि कहीं कोई बाहरी वस्तु तो गले के अंदर नहीं चली गई। ज्यादातर मामलों में गले में गांठ का कोई स्पष्ट कारण नहीं दिखाई देता। परीक्षण के दौरान अक्सर गले व मुंह के पिछले हिस्से में थोड़ी बहुत सूजन दिखाई देती है। 

ऐसा कोई विशिष्ट टेस्ट उपलब्ध नहीं है, जो गले में गांठ का निश्चित रूप से पता लगा सकता है। इसलिए मुख्य रूप से इस स्थिति का परीक्षण मरीज की पिछली मेडिकल स्थिति के बारे में पूछा जाता है और उसका शारीरिक परीक्षण किया जाता है। कभी-कभी ये परीक्षण टेस्ट के बाद भी किए जाते हैं, जिनकी मदद से ये सुनिश्चित किया जाता है कि आपको गंभीर बीमारी नहीं है। 

(और पढ़ें - मैमोग्राफी क्या है)

यदि डॉक्टर को किसी गंभीर समस्या का संदेह हो रहा है, तो वे आपको कान, नाक और गले के विशेषज्ञ डॉक्टर के पास भेज सकते हैं। ये विशेषज्ञ डॉक्टर आपके कुछ विशेष परीक्षण करते हैं, जिस दौरान यदि आपको कोई अंदरुनी समस्या है तो उसका पता लग जाता है। परीक्षण के दौरान डॉक्टर आमतौर पर आपके मुंह, कान और नाक का परीक्षण करते हैं। गले की जांच करने के लिए परीक्षण के दौरान लैरिंगोस्कोपी की जाती है, इसमें एक ट्यूब जैसे उपकरण का इस्तेमाल किया जाता है जिसके एक सिरे पर कैमरा व लाइट लगी होती है। 

(और पढ़ें - क्रिएटिनिन टेस्ट)

गले में गांठ महसूस होने के ज्यादातर मामलों में और अधिक टेस्ट करवाने की आवश्यकता नहीं पड़ती। हालांकि यदि गले में गांठ महसूस होने के साथ-साथ निगलने आदि में भी कठिनाई हो रही है, तो कुछ अन्य टेस्ट करवाने की आवश्यकता भी पड़ सकती है, जैसे:

  • बेरियम एक्स रे:
    इस प्रक्रिया में मरीज को एक विशेष प्रकार की डाई पिलाई जाती है, जिसे बेरियम कहा जाता है। उस के बाद मरीज का एक्स-रे किया जाता है, एक्स रे की तस्वीर में शरीर के अंदर गई डाई स्पष्ट दिखाई देती है, गले संबंधी समस्याओं का पता लगाने में मदद मिलती है। (और पढ़ें - एमआरआई स्कैन क्या है)
     
  • एक्स रे सी स्पाईन:
    यह साधारण एक्स रे टेस्ट की तरह होता है, जिसकी मदद से गठिया रोग व हड्डी बढ़ने जैसी समस्याओं की जांच की जाती है। (और पढ़ें - बायोप्सी क्या होता है)
     
  • नाक की एंडोस्कोपी:
    इस टेस्ट के दौरान एक पतली व लचीली ट्यूब को नाक से अंदर डाला जाता है, इस ट्यूब को एंडोस्कोप कहा जाता है। इसके सिरे पर कैमरा और लाइट लगी होती है, जिसकी मदद से गले व गले के ध्वनि यंत्र की जांच की जाती है। (और पढ़ें - एंडोस्कोपी क्या है)
     
  • ऊपरी एंडोस्कोपी:
    यदि बेरियम एक्स रे टेस्ट के दौरान गले में किसी प्रकार की रुकावट पाई जाती है, तो कारण का पता लगाने के लिए डॉक्टर आमतौर पर ऊपरी एंडोस्कोपी टेस्ट करते हैं।

(और पढ़ें -  लैब टेस्ट क्या है)

गले में गांठ का इलाज - Lump in Throat Treatment in Hindi

गले में गांठ का इलाज कैसे किया जाता है?

यह ध्यान रखना बहुत जरूरी होता है, कि गले में गांठ महसूस होना सिर्फ एक सनसनी है वास्तव में आपके गले में कोई गांठ या उभार विकसित नहीं हुआ है। 

यदि गले में गांठ महसूस होने के कारण आपके अधिक परेशानी महसूस नहीं हो रही है या स्थिति सौम्य है। ऐसी स्थिति में मरीज को ज्यादा टेस्ट करवाने की आवश्यकता नहीं पड़ती, बल्कि उसके संभावित कारणों का इलाज किया जाता है। 

एसिड रिफ्लक्स -

  • एसिड रिफ्लक्स की दवाएं:
    ओमेप्राजोल (Omeprazole), लेन्सोप्राजोल (Lansoprazole) और रेनिटिडिन (Ranitidine) आदि। 
     
  • जीवनशैली में बदलाव:
     
    एसिड रिफ्लक्स को कम करने के लिए कई प्रकार के खाद्य व पेय पदार्थों का सेवन बंद व कम कर देना चाहिए जैसे फलों के रस, कोल्ड ड्रिंक्स, मसालेदार खाना, चाय, कॉफी और अन्य कैफीन व अल्कोहल वाले पदार्थ। इसके अलावा धूम्रपान को पूरी तरह से छोड़ देना चाहिए और सोने से तीन घंटे पहले ही भोजन कर लेना चाहिए। (और पढ़ें - धूम्रपान छोड़ने के घरेलू उपाय)

गले की मांसपेशियों में कमजोरी:

  • स्पीच एंड लेंगवेज थेरेपी - खासकर जिन लोगों को बार-बार गला साफ करने की आदत होती है, उनके लिए यह थेरेपी काफी सहायक हो सकती है। इसके अलावा स्पीच एंड लेंगवेज थेरेपी की मदद से आपके बोलने व निगलने के की क्षमता में भी सुधार किया जाता है। 
  • बार-बार गला साफ करने की आदत छोड़ दें, क्योंकि इससे गले में गांठ महसूस होने जैसे लक्षण और बदतर हो जाते हैं। यदि आपको आपको गले में कुछ ऐसी समस्याएं हो रही हैं जिससे आपका गला साफ करने का मन हो रहा है, तो स्थिति में हल्का गर्म पानी पी लें। 
  • योगा जैसी कुछ शांत एक्सरसाइज भी काफी फायदेमंद हो सकती हैं। (और पढ़ें - थेरेपी क्या है)

​चिंता व तनाव:

  • मूड में किसी प्रकार का बदलाव होने पर भी कई बार आपको ऐसा लगने लगता है जैसे आपके गले में गांठ बन गई है। यदि आपके गले की गांठ के किसी अन्य कारण का पता नहीं लग पाया है तो इलाज करने के दौरान मूड की जांच करना भी काफी मददगार हो सकता है।
  • आपको ऐसा भी प्रतीत हो सकता है कि गले में गांठ के लक्षण आपको उस समय महसूस होते हैं जब आप अधिक चिंतित होते हैं। गले की गांठ के लक्षणों की जांच करें और पता लगाने की कोशिश करें कि ये कब अधिक होते हैं, हो सकता है ऐसा करने से आपको गले में गांठ महसूस होने के कारण का पता लग जाए।
  • कुछ लोगों में कॉग्निटिव बिहेवियर थेरेपी और एंटीडिप्रेसेंट्स दवाएं (डिप्रेशन को कम करने वाली दवाएं) भी काफी सहायक हो सकती है। 

(और पढ़ें - गर्म पानी पीने के फायदे)

गले में गांठ की जटिलताएं - Lump in Throat Complications in Hindi

गले में गांठ की क्या जटिलताएं हैं?

गले में गांठ महसूस होना कोई गंभीर स्थिति होती और ना ही इससे कोई गंभीर जटिलता पैदा होती। हालांकि कुछ मामलों में गले व भोजन नली से जुड़े कुछ गंभीर विकार भी हैं जिनके कारण भी गले में गांठ सी महसूस होने लग जाती है। 

यदि आपको गले में गांठ महसूस होने के साथ-साथ अन्य कुछ लक्षण भी महसूस हो रहे है, तो आपको इस स्थिति पर खास ध्यान देने की जरूरत है। ज्यादातर मामलों में गले में गांठ महसूस होना किसी गंभीर स्थिति का संकेत नहीं देता, लेकिन इसके प्रति खास ध्यान रखने से अन्य संभावित समस्याओं का जल्दी पता लगाने में मदद मिल सकती है।

गले में गांठ महसूस होना कई गंभीर समस्याओं का शुरूआती संकेत हो सकता है, जैसे:

(और पढ़ें - कैंसर का इलाज)

Dr. K. K. Handa

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कान, नाक और गले सम्बन्धी विकारों का विज्ञान

Dr. Aru Chhabra Handa

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Dr. Yogesh Parmar

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