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हर साल 10 अक्‍टूबर को अंतर्राष्‍ट्रीय स्‍तर पर ‘वर्ल्ड मेंटल हेल्थ डे’ मनाया जाता है। इस दिवस का लक्ष्‍य लोगों के बीच मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य के प्रति जागरूकता फैलाना है ताकि लोग सिर्फ शारीरिक स्‍वास्‍थ्‍य ही नहीं बल्कि मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य को लेकर भी सजग रहें।

विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन के अनुसार दुनियाभर में आत्महत्या के मामलों में सबसे सामान्‍य कारणों में से एक मानसिक विकार भी हैं। अगर मानसिक विकारों के लक्षणों एवं संकेतों को शुरुआत में ही पहचान लिया जाए तो कई लोगों की जिंदगी बचाई जा सकती है। अंतर्राष्‍ट्रीय मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य दिवस के अवसर पर हम आपको मानसिक बीमारी के ऐसे 12 संकेतों के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्‍हें नज़रअंदाज करना हानिकारक साबित हो सकता है।

पेट दर्द

आमतौर पर बार-बार पेट दर्द होने का संबंध एसिडिटी या अपच से होता है लेकिन अगर आपको चिंता या परेशान होने पर सिर्फ पेट में ऐंठन महसूस होती है तो ये खराब मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य का संकेत हो सकता है।

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं का कहना है कि पेट का मस्तिष्क से गहरा संबंध होता है। जब भी आप चिंता या तनाव में होते हैं तो मस्तिष्‍क पेट को धीमी गति से कार्य करने के संकेत भेजता है जिससे आपका पाचन धीमा पड़ जाता है। मस्तिष्‍क ये संकेत इसलिए भेजता है ताकि वो तनाव या चिंता से लड़ सके। ऐसा होने पर अक्‍सर पेट में ऐंठन, पेट फूलने और दर्द की समस्‍या पैदा होती है।

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लंबे समय से दर्द होना

मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य पर किसी तरह का संकट आने पर सबसे पहले आपका पेट आपको संकेत देने लगता है लेकिन अगर आप इस संकेत को नजरअंदाज कर देते हैं तो जल्‍द ही पूरे शरीर पर इसका असर पड़ने लगता है। आंकड़ों की मानें तो डिप्रेशन में जीने वाले लोगों में दर्द होने का खतरा तीन गुना ज्‍यादा होता है। ये दर्द शरीर के किसी भी हिस्‍से या फिर पूरे शरीर में हो सकता है। मस्ति‍ष्‍क में एक ही हिस्‍सा होता है जहां के न्‍यूरॉन्‍स दर्द और डिप्रेशन का अहसास करवाने में मदद करते हैं। इसलिए इस नेटवर्क में किसी भी तरह की गड़बड़ी होने पर आप अवसाद भी महसूस करते हैं और दर्द भी बढ़ जाता है। यही वजह है कि अधिकतर अवसाद-रोधी दवाएं दर्द-निवारक का भी काम करती हैं।

रेपेटिटिव बिहेवियर

अगर कोई बैठते समय बार-बार अपने पैरों को हिलाता है, जल्‍दी-जल्‍दी बातें करता है या नाखून चबाता है तो आपको बता दें कि ये सब रेपेटिटिव बिहेवियर के संकेत हैं। चिंता से ग्रस्‍त व्‍यक्‍ति को अधिकतर समय बेचैनी महसूस होती है और इसीलिए वो रेपेटिटिव बिहेवियर करने लगता है। बेचैनी की वजह से नींद आने में दिक्‍कत और थकान भी महसूस होने लगती है।

बाइपोलर विकार

हर इंसान का अपना एक अलग व्‍यक्‍तित्‍व होता है। कुछ लोग शांत रहते हैं और दूसरों से कम बात करते हैं जबकि कुछ लोगों को नए-नए लोगों से मिलना और बात करना पसंद होता है लेकिन अगर आप दोस्‍तों और अपने परिवार से दूर रहने लगे हैं और अकेलापन आपको अच्‍छा लगने लगा है तो ये डिप्रेशन या बाइपोलर विकार (हमेशा एक प्रकार की दुविधा में रहना या बार-बार मूड बदलना) का संकेत हो सकता है।

कुछ समय अकेले रह कर थोड़ा समय अपने साथ बिताने में कोई बुराई नहीं है लेकिन मानसिक विकार खासतौर पर डिप्रेशन से ग्रस्‍त व्‍यक्‍ति में अकेले रहने की इच्‍छा ज्‍यादा देखी जाती है। इनके चेहरे पर आपको ज्‍यादा हाव-भाव भी नहीं दिखेंगें और इनकी आवाज भी दबी-दबी सी आती है।

हालांकि, एक अन्‍य स्थिति है जिसे ‘स्‍माइलिंग डिप्रेशन’ कहा जाता है। इसमें व्‍यक्‍ति बाहर से तो खुद को खुश दिखाता है लेकिन अंदर उसके मन में आत्‍महत्‍या के विचार चल रहे होते हैं। इस तरह के डिप्रेशन को पहचान पाना मुश्किल होता है क्‍योंकि इसके कोई सामान्‍य लक्षण नहीं होते हैं। अगर आपको सुबह के समय थकान महसूस होती है और आपको अपने रोजमर्रा के काम करने तक का मन नहीं करता तो आपमें इस तरह के डिप्रेशन की संभावना हो सकती है। अपने किसी दोस्‍त या डॉक्‍टर को इस बारें में बताएं और उनकी मदद लें।

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इम्‍युनिटी कमजोर होना

वर्ष 2004 में यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिटिश कोलंबिया की एक स्‍टडी में पाया गया है कि तनाव और चिंता से ग्रस्‍त लोग आसानी से बीमार पड़ जाते हैं। ऐसा इसलिए है क्‍योंकि वो हर समय किसी न किसी चिंता में रहते हैं जिससे उनका मस्तिष्‍क इम्‍यून सिस्‍टम को संकेत देता है जो कि पूरी इम्‍युनिटी को धीरे-धीरे कम कर देता है। इसकी वजह से स्‍ट्रेस से ग्रस्‍त लोगों में संक्रमण होने का खतरा सबसे ज्‍यादा रहता है। हैरानी की बात है कि स्‍ट्रेस इम्‍यून सिस्‍टम को हाइपरएक्टिव (ज्‍यादा काम करना) बना देता है जिसकी वजह से ऑटोइम्‍यून विकार (जिसमें इम्‍यून सिस्‍टम अपने ही शरीर के ऊतकों और अंगों को नुकसान पहुंचाने लगता है) जैसे कि रूमेटाइड आर्थराइटिस और लुपस (एक लंबे समय तक रहने वाला सूजन और जलन संबंधी रोग) हो सकता है।

बार-बार मूड बदलना

विपरीत परिस्थितियों या मुश्किल आने पर गुस्‍सा आना और दुखी होना सामान्‍य बात है लेकिन बिना किसी वजह के गुस्‍सा आना या रोने का मन करना डिप्रेशन या अन्‍य किसी मानसिक बीमारी का संकेत हो सकता है।

हमेशा दुखी रहना

अगर कोई व्‍यक्‍ति हमेशा दुखी रहता है या उसका बेवजह रोने का मन करता है तो ये डिप्रेशन का संकेत हो सकता है। डिप्रेशन की स्थिति में व्‍यक्‍ति की जिंदगी में सब कुछ ठीक होते हुए भी उसे खुशी की बजाय दुख महसूस होता है। डिप्रेशन एक ऐसी स्थिति है जो मनुष्‍य के कंट्रोल में नहीं होती है।

खुद को दूसरों से कम समझना, आत्‍म-सम्‍मान में कमी आना या खुद को बेकार समझना और जीवन में जो कुछ भी गलत हो रहा है उसके लिए खुद को जिम्‍मेदार ठहराना डिप्रेशन जैसी मानसिक बीमारी के संकेत हो सकते हैं। अगर आपको अपने किसी दोस्‍त या परिवार के किसी सदस्‍य में इस तरह के कोई भी लक्षण नजर आते हैं या वो आपसे आत्‍महत्‍या के बारे में बात करते हैं तो इसे हल्‍के में न लें। हो सकता है कि उन्‍हें तुरंत मेडिकल हेल्‍प या काउंसलिंग की जरूरत हो।

हर बात पर परेशान रहना

चुनौतीपूर्ण स्थितियों में परेशान होना आम बात है लेकिन अगर चिंता करना आपका काम ही बन गया है और इसका असर आपकी रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ रहा है तो ये किसी मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍या का संकेत हो सकता है। चिंता के अन्‍य लक्षणों में घबराहट होना, सिरदर्द, सांस लेने में दिक्‍कत, दस्‍त और बेचैन रहना शामिल है।

नींद आने का समय तय न होना

अगर आपकी नींद टूटती रहती है या बार-बार नींद का पैटर्न बदलता रहता है तो ये मानसिक बीमारी का संकेत हो सकता है। बहुत ज्‍यादा या कम सोना इनसोमनिया यानी अनिद्रा भी नींद से संबंधित विकार, डिप्रेशन, चिंता या नशीली चीजों का सेवन करने का लक्षण हो सकता है।

नशीली चीजों का सेवन

शराब या नशीले पदार्थों का सेवन करने का संबंध मानसिक बीमारी से हो सकता है। सबसे पहले मरीज को इन आदतों से दूर करें और उसे अपने भावनात्‍मक या मानसिक दबाव को कम करने में मदद करें। इससे वह अपने आप ही धीरे-धीरे आत्‍मनिर्भर बनने लगेगा। कुछ मामलों में ये आदतें मानसिक विकारों के लिए सहायक साबित होती हैं इसलिए इनसे दूर रहना चाहिए।

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भूख और वजन में अचानक कमी आना

बहुत ज्‍यादा डिप्रेशन होने की स्थिति में भूख और वजन में कमी होने जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। कुछ लोगों को खाना पकाने या खाने में भी दिलचस्‍पी नहीं रहती है या कम समय में बहुत ज्‍यादा खाना (बिंज ईटिंग) खाने की आदत हो जाती है।

मानसिक बीमारी से कैसे लड़ें

  • किसी भी बीमारी या विकार के इलाज में सबसे पहले उसे स्‍वीकार करना जरूरी होता है। अपने दोस्‍तों या परिवार के सदस्‍यों में इन लक्षणों एवं संकेतों को पहचान कर इससे बाहर निकलने में उनकी मदद करें। इस बारे में बात करने में शर्म या हिचक महसूस न करें। डिप्रेशन और चिंता जैसी स्थितियों को दवाओं और थेरेपी की मदद से नियंत्रित किया जा सकता है।
  • खुद को किसी भी गलती या परेशानी के लिए जिम्‍मेदार मानकर दुखी रहने की जरूरत नहीं है। अपने परिवार और दोस्‍तों से खुलकर बात करें या जरूरत पड़ने पर मनोचिकित्‍सक से सलाह लें।
  • मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य और इससे जुड़े विकारों, लक्षणों और मौजूद उपचारों के बारे में जानकारी हासिल करें।
  • ऐसा न सोचें कि आपको किसी दवा या थेरेपी का तुरंत फायदा हो जाएगा। हर व्‍यक्‍ति को ठीक होने में अलग समय लगता है। अपने रास्‍ते को आसान बनाने के लिए परिवार और दोस्‍तों की मदद लें।
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