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मानसिक विकारों में विभिन्न लक्षणों वाले रोग शामिल हैं जो किसी व्यक्ति की सोच, मनोदशा (मूड), भावना, सीखने की क्षमता, याददाश्‍त और व्यवहार को प्रभावित करते हैं। ये लक्षण कभी-कभी दिखाई देते हैं या फिर लंबे समय तक रहते हैं। मानसिक विकार की वजह से व्‍यक्‍ति की दूसरों से संबंध बनाने की क्षमता प्रभावित होती है और वह सामान्‍य तरीके से कार्य नहीं कर पाता है।

आमतौर पर कई वजहों से मानसिक विकार होते हैं जैसे कि अनुवांशिक गड़बड़ी, फैमिली हिस्‍ट्री (मरीज और उसके परिवार के सदस्यों में रहे विकारों एवं बीमारियों का रिकॉर्ड), शोषण (भावनात्‍मक, मानसिक या शारीरिक), मस्तिष्‍क में रसायनिक असंतुलन, शराब की लत, किसी दवा या नशीले पदार्थ की लत, कोई गंभीर चिकित्‍सकीय स्थिति जैसे कि कैंसर, अकेलापन और मस्तिष्क की गंभीर चोट (ट्रॉमैटिक ब्रेन इंजरी)। मानसिक विकारों के कुछ सामान्‍य प्रकारों में शामिल हैं:

मानसिक विकारों से जुड़े कुछ सामान्‍य लक्षण इस प्रकार हैं :

  • आसपास की चीजों से खुद को अलग महसूस करना
  • ऑफिस के काम या स्‍कूल में मन न लगना
  • किसी भी कार्य में हिस्‍सा लेने की इच्‍छा में कमी आना और सामाजिक कार्यों से भी दूरी बना लेना
  • ध्‍यान लगाने, याद रखने और तार्किक सोच (लॉजिकल) में दिक्‍कत
  • नींद और भूख में बदलाव
  • घबराहट
  • असामान्‍य व्‍यवहार और तर्कहीन सोच होना

मानसिक विकारों और इससे जुड़े लक्षणों को नियंत्रित करने में कई होम्‍योपैथिक दवाएं असरकारी हैं। इसमें इग्‍नेशिया अमारा, फॉस्‍फोरिकम एसिडम, पुल्‍सेटिला प्रेटेंसिस, एनाकार्डियम ओरिएंटेल, सेपिया ऑफिसिनेलिस, बेलाडोना, हायोसायमस नाइजर, कैनाबिस इंडिका, औरम मेटालिकम, एगनस कैस्‍टस, नेट्रियम म्‍यूरिएटिकम, सिमिसिफ्यूगा रेसमोसा, स्‍ट्रेमोनियम और स्‍टैफिसैग्रिया होम्‍योपैथिक दवाओं का इस्‍तेमाल किया जाता है।

  1. मानसिक रोग की होम्योपैथिक दवा - Mansik Rog ki homeopathic dawa
  2. होम्योपैथी में मानसिक विकार के लिए खान-पान और जीवनशैली में बदलाव - Homeopathy me Mental Disorder ke liye khan pan aur jeevan shaili me badlav
  3. मानसिक विकार की होम्योपैथी दवा कितनी लाभदायक है - Mental Disorder ki homeopathic dava kitni faydemand hai
  4. मानसिक रोग के होम्योपैथिक इलाज के नुकसान और जोखिम कारक - Mansik Rog ki homeopathic dawa ke nuksan aur jokhim karak
  5. मानसिक विकार के होम्योपैथिक उपचार से जुड़े अन्य सुझाव - Mansik Rog ke homeopathic upchar se jude anya sujhav

मानसिक रोग के लिए इस्तेमाल होने वाली होम्योपैथिक दवाएं इस प्रकार हैं :

  • इग्‍नेशिया अमारा (Ignatia Amara)
    सामान्‍य नाम :
    सैंट. इग्‍नेशियस बीन (St. Ignatius bean)
    लक्षण : ये हिस्‍टीरिया (अचेत अवस्‍था में आना) के लिए सबसे प्रमुख दवाओं में से एक है। ये भावनाओं पर कार्य करती है और मानसिक समन्‍वय में बाधा उत्‍पन्‍न करने वाली स्थितियों के इलाज में उपयोगी है। ये दवा निम्‍न लक्षणों को नियंत्रित करने में भी मदद कर सकती है :
    • बिना किसी वजह के बहुत ज्‍यादा दुखी महसूस करना और साथ ही गहरी सांस लेना एवं रोना
    • सिर में भारीपन महसूस होना
    • दुख, सदमे, निराशा और चिंता का प्रभाव, जैसे कि दुख के कारण अनिद्रा
    • सोने पर हाथ-पैरों का फड़कना

लक्षण सुबह के समय और खाना खाने के बाद बढ़ जाते हैं। खुली हवा में जाने पर, धूम्रपान और गरमाई लेने पर भी लक्षण बदतर हो सकते हैं। पोजीशन बदलने और खाना खाते समय लक्षण बेहतर होते हैं।

  • फॉस्‍फोरिकम एसिडम (Phosphoricum Acidum)
    सामान्‍य नाम :
    फॉस्‍फोरिक एसिड (Phosphoric acid)
    लक्षण : फॉस्‍फोरिक एसिड प्रमुख तौर पर मानसिक कमजोरी के इलाज में उपयोगी है और ये तंत्रिकाओं की थकान को नियंत्रित करने में मदद करती है। ये दवा निम्‍न लक्षणों को भी नियंत्रित करने में मदद कर सकती है :
    • याददाश्‍त में कमी
    • भ्रम के साथ शॉक लगना
    • मानसिक आघात और दुख का प्रभाव
    • सिर में भारीपन के साथ सिर कुचलने जैसा सिरदर्द होना
    • काम करने का मन करना
    • बालों का सफेद और पतला होना
    • शाम के समय, चलने और खड़े होने पर वर्टिगो (इसमें आसपास की सभी चीजें घूमती हुई लगती हैं)
    • सुस्‍ती
    • रात के समय और सुबह बहुत ज्‍यादा पसीना आना

थकान, अधिक सेक्‍स करने, महत्वपूर्ण तरल पदार्थों की कमी एवं लक्षणों के बारे में बात करने पर लक्षण और खराब हो जाते हैं। परिसंचरण को प्रभावित करने वाली हर चीज से लक्षण बदतर हो जाते हैं। गरमाई में रहने से लक्षण बेहतर हो जाते हैं।

  • पल्‍सेटिला प्रेटेंसिस (Pulsatilla Pratensis)
    सामान्‍य नाम :
    विंड फ्लॉवर (Wind flower)
    लक्षण : ये दवा उन लोगों पर बेहतर असर करती है, जिनमें दुखी रहने की प्रवृत्ति होती है, जो आसानी से और बात करने के दौरान रो पड़ते हैं। इस दवा से नीचे बताए गए लक्षणों का भी इलाज किया जा सकता है :
    • शाम के समय अकेले होने और भूत का डर
    • बेवजह दुखी होना
    • सहानुभूति पसंद करना
    • आसानी से हतोत्साहित हो जाना
    • सिर में चुभने वाला दर्द होना जो कि चेहरे और दांतों तक पहुंच जाए
    • बहुत ज्‍यादा भावनात्‍मक होना
    • दोपहर के समय बहुत ज्‍यादा सुस्‍ती होना

गर्मी, खाना खाने के बाद, खासतौर पर वसायुक्‍त भोजन करने के बाद, शाम के समय, गरमाई में और बाईं करवट लेटने पर लक्षण बढ़ जाते हैं। चलने पर, खुली हवा में जाने पर, ठंडा खाना और पेय पदार्थ लेने पर लक्षणों में आराम मिलता है।

  • ऐनाकार्डियम ओरिएंटेल (Anacardium Orientale)
    सामान्‍य नाम :
    मार्किंग नट (Marking nut)
    लक्षण : ये दवा खराब या कमजोर याददाश्‍त, चिड़चिड़ापन, भावनात्‍मक गड़बड़ी, डिप्रेशन और संवेदनात्‍मक अनुभूति में कमी जैसे कि सूंघने, देखने और सुनने की क्षमता पर बेहतर असर करती है।
    ऐनाकार्डियम ओरिएंटेल उन लोगों पर भी बेहतर असर करती है जो आसानी से आक्रामक हो जाते हैं और जिनमें हिंसक भाषा के प्रयोग की प्रवृत्ति होती है। ये दवा निम्‍न लक्षणों के इलाज में भी मदद कर सकती है :
    • मतिभ्रम (ऐसी भावनाएं हैं जो वास्तविक लगती हैं परन्तु इन्हें आपका मस्तिष्क बनाता है)
    • चलने के दौरान चिंता होना, जैसे कि कोई उसका पीछा कर रहा है
    • बेवजह बहुत ज्‍यादा दुखी महसूस करना
    • आसपास क्‍या हो रहा है या आप क्‍या कर रहे हैं, कुछ समझ न आना
    • वर्टिगो
    • मस्तिष्‍क में थकान

गर्म पानी लगाने पर लक्षण और बढ़ जाते हैं जबकि खाना खाने के बाद और करवट लेकर लेटने पर लक्षणों में आराम मिलता है।

  • सेपिया ऑफिसिनेलिस (Sepia Officinalis)
    सामान्‍य नाम :
    कटलफिश का स्याही के रंग का जूस (Inky juice of cuttlefish)
    लक्षण : ये दवा उन लोगों पर बेहतर असर करती है, जिनमें आसानी से क्रोधित होने की प्रवृत्ति होती है। सेपिया से निम्‍न लक्षणों को भी ठीक किया जा सकता है :
    • चिड़चिड़ापन
    • बहुत ज्‍यादा दुखी होना
    • लक्षण बताते समय रोना
    • शाम के समय चिंता

शाम के समय और दोपहर से पहले, गीलेपन में, ठंडी हवा में जाने और पसीना आने के बाद लक्षण बढ़ जाते हैं। व्‍यायाम करने, अच्‍छी नींद लेने और गर्म सिकाई से लक्षण बेहतर होते हैं।

  • बेलाडोना (Belladonna)
    सामान्‍य नाम :
    डेडली नाइटशेड (Deadly nightshade)
    लक्षण : बेलाडोना पूरे तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करती है। ये खासतौर पर भ्रम रोग, सोते समय बेचैन रहना और मानसिक रूप से उत्‍साहित रहने के इलाज में उपयोगी है। ये दवा नीचे बताए गए लक्षणों को भी नियंत्रित करने में उपयोगी है :
    • मतिभ्रम और भ्रम होना, इसमें व्‍यक्‍ति को भयानक चेहरे और राक्षस दिखाई देते हैं
    • छिपने का मन करना
    • आसपास क्‍या हो रहा है या आप क्‍या कर रहे हैं, कुछ समझ न आना
    • बेहोशी
    • नींद में चिल्‍लाना
    • सुस्‍ती के साथ नींद आना

तेज शोर में, दोपहर में और लेटने पर लक्षण और बढ़ जाते हैं। पीठ को सहारा देकर बैठने पर लक्षणों में आराम मिलता है।

  • हायोसायमस नाइजर (Hyoscyamus Niger)
    सामान्‍य नाम :
    हेनबेन (Henbane)
    लक्षण : ये दवा उन लोगों के लिए प्रभावशाली है जिनका संदेहजनक व्‍यवहार होता है। इस दवा के इस्‍तेमाल से नीचे बताए गए लक्षणों का इलाज किया जा सकता है :
    • ईर्ष्‍या रखने वाले और नासमझ व्‍यक्‍ति
    • कामोत्तेज‍क उन्‍माद
    • हर चीज पर हंसना
    • प्रलाप (जिसमें व्यक्ति उलझन महसूस करता है) के साथ छिपने की इच्‍छा करना और ऐसा करना भी
    • नींद की कमी

रात में, खाना खाने के बाद, नीचे लेटने पर और मासिक धर्म के दौरान लक्षण और बढ़ जाते हैं। झुकने पर लक्षण बेहतर होते हैं।

  • कैनाबिस इंडिका (Cannabis Indica)
    सामान्‍य नाम :
    हैशिश (Hashish)
    लक्षण : कैनाबिस इंडिका अवचेतन मन या दोहरा व्‍यवहार करने वाले लोगों के इलाज में उपयोगी है। इस स्थिति में व्‍यक्‍ति अपने वास्‍तविक स्‍वभाव से अलग व्‍यवहार करने लगता है। इस दवा से निम्‍न लक्षणों को भी ठीक किया जा सकता है :
    • मतिभ्रम, ऐसी भावनाएं महसूस होना और चित्र दिखना जो वास्‍तव में न हों
    • भूलने की बीमारी और वाक्‍य को पूरा न कर पाना
    • प्रलाप
    • हंसी न रोक पाना
    • चिंता और डिप्रेशन
    • लगातार पागल होने का डर रहना
    • उन्‍माद
    • बातूनी
    • सुस्‍ती के साथ सोने में दिक्‍कत आना

सुबह के समय और बाईं करवट लेटने पर लक्षण और खराब हो जाते हैं। कॉफी, शराब और तंबाकू भी लक्षणों को बढ़ा देते हैं। आराम करने, ठंडे पानी और खुली हवा में जाने पर लक्षण बेहतर होते हैं।

  • औरम मेटालिकम (Aurum Metallicum)
    सामान्‍य नाम :
    मेटालिक गोल्‍ड (Metallic gold)
    लक्षण : ये दवा डिप्रेशन, निराशा और खुद को नुकसान पहुंचाने की प्रवृत्ति जैसे कि आत्‍महत्‍या करने की इच्‍छा के इलाज में उपयोगी है। इस दवा से जिन अन्‍य लक्षणों को नियंत्रित किया जा सकता है, वो इस प्रकार हैं :
    • शोर के प्रति बहुत ज्‍यादा संवेदनशील होना
    • उत्‍साहित और उलझन में रहना
    • हर चीज के लिए खुद को दोषी ठहराना
    • लोगों और समाज से डर लगना
    • नींद की कमी
    • नींद में तेज रोना
    • बुरे सपने आना

सर्दी में लक्षण और बढ़ जाते हैं एवं कुछ लक्षण सिर्फ सर्दी के मौसम में सूर्यास्‍त से सूर्योदय के बीच में दिखते हैं।

  • एगनस कैस्‍टस (Agnus Castus)
    सामान्‍य नाम :
    चेस्‍ट ट्री (The chaste tree)
    लक्षण : ये दवा उन डरपोक लोगों पर असर करती है, जिनमें निम्‍न लक्षण दिखाई देते हैं :
    • आसपास क्‍या हो रहा है या क्‍या चल रहा है, कुछ समझ न आना
    • भूलने की बीमारी
    • डिप्रेशन के साथ बेचैनी होना
    • मरने का डर और दुख होना
       
  • नेट्रियम म्‍यूरिएटिकम (Natrium Muriaticum)
    सामान्‍य नाम :
    क्‍लोराइड ऑफ सोडियम (Chloride of sodium)
    लक्षण : ये दवाई प्रमुख रूप से कमजोरी और थकान के इलाज में उपयोगी है। नेट्रियम म्‍यूरिएटिकम से कई और लक्षणों का भी इलाज किया जा सकता है, जैसे कि :
    • डर, दुख और क्रोध के दुष्‍प्रभाव
    • दीर्घकालिक बीमारी के कारण डिप्रेशन
    • चिड़चिड़ापन
    • हंसने के साथ आंसू आना
    • दोपहर से पहले सुस्‍ती आना
    • सोने से पहले बेचैनी के साथ झटके महसूस करना

मानसिक थकान, गरमाई और बात करने पर लक्षण और बढ़ जाते हैं। समुद्रतट और सुबह 10 बजे लेटने पर भी लक्षण बढ़ जाते हैं। खुली हवा, टाइट कपड़े पहनने, ठंडे पानी से नहाने और पीठ पर दबाव बनाने से लक्षण बेहतर होते हैं।

  • सिमिसिफ्यूगा रेसमोसा (Cimicifuga Racemosa)
    सामान्‍य नाम :
    ब्‍लैक स्‍नेक रूट (Black snake-root)
    लक्षण : ये दवा प्रमुख तौर पर बेचैनी और दर्द के इलाज में उपयोगी है। इस दवा से मानसिक विकारों से जुड़े निम्‍न लक्षणों को भी नियंत्रित किया जा सकता है :
    • गंभीर अवसाद
    • भ्रम और मानसिक स्थिति खराब होना
    • लगातार और बिना रुके बात करना
    • खुद को नुकसान पहुंचाने वाली आदतें
    • उन्‍माद
    • नींद की कमी

सुबह और मासिक धर्म के दौरान लक्षण और बढ़ जाते हैं। खाने पर और गरमाई में लक्षणों में सुधार आता है।

  • स्‍ट्रेमोनियम (Stramonium)
    सामान्‍य नाम :
    थॉर्न एप्‍पल (Thorn-apple)
    लक्षण : ये दवा बेचैनी और खराब मानसिक स्थिति को नियंत्रित करने में उपयोगी है। इससे निम्‍न लक्षणों का भी इलाज किया जा सकता है :
    • बातूनी
    • हंसने, गाने और गुनगुनाने के दौरे पड़ना
    • भू‍त दिखना और सुनाई देना
    • भूतों से बात करना
    • अंधेरा और अकेलापन बर्दाश्‍त न कर पाना
    • छिपने का मन करना
    • तेजी से मूड बदलना जैसे कि खुश से दुखी होना
    • चमकदार चीज को देखने पर

अकेले रहने और अंधेरे वाले कमरे, जागने के तुरंत बाद, कुछ निगलने और चमकदार चीज देखने पर लक्षण और गंभीर हो जाते हैं। पर्याप्‍त रोशनी वाले कमरे में आने और किसी के साथ रहने या बात करने पर लक्षणों में आराम मिलता है। गरमाई से भी लक्षण बेहतर होते हैं।

  • स्‍टेफिसैग्रिया (Staphysagria)
    सामान्‍य नाम :
    स्‍टेवसैक्रे (Stavesacre)
    लक्षण : ये दवा प्रमुख तौर पर बहुत ज्‍यादा संवेदनशील लोगों में उपयोगी है और निम्‍न लक्षणों को नियंत्रित करने में असरकारी है :
    • अचानक और जोश या जुनून के हाव-भाव आना
    • चिड़चिड़ापन
    • ये दवा खासतौर पर उन बच्‍चों को दी जाती है जो कुछ चीजों के लिए रोते रहते हैं और जब उन्‍हें वो चीज दी जाती है तो वो लेने से मना कर देते हैं

गुस्‍सा और दुख होने जैसी भावनाओं, तरल पदार्थों की कमी और अत्‍यधिक सेक्‍स करने की वजह से लक्षण बढ़ सकते हैं। रात को बेहतर नींद लेने, नाश्‍ता करने के बाद और गरमाई में रहने पर लक्षण बेहतर होते हैं।

कोई भी दवा देने से पहले होम्‍योपैथिक डॉक्‍टर मरीज के आहार और जीवनशैली में कुछ बदलाव करने के लिए कहेंगे। इससे बीमारी जल्‍दी ठीक होने में मदद मिलेगी। ऐसा इसलिए है क्‍योंकि होम्‍योपैथिक दवाओं को अत्‍यधिक पतली खुराक में तैयार किया जाता है और कुछ कारक इनके असर को रोक या प्रभावित कर सकते हैं। मानसिक विकार के लिए होम्‍योपैथिक उपचार लेने के दौरान कुछ निम्‍न बातों का ध्‍यान रखना चाहिए:

क्‍या करें

  • स्‍वस्‍थ और पौष्टिक आहार लें
  • अपने आसपास साफ-सफाई रखें और निजी साफ-सफाई का भी ध्‍यान रखें
  • नियमित व्‍यायाम करें

क्‍या न करें

  • औषधीय गुणों वाले खाद्य पदार्थ न खाएं
  • तेज खुशबू वाले और कैफीन युक्‍त पेय पदार्थ जैसे कि चाय और कॉफी न पिएं
  • चीनी, नमक और मसालों के अत्‍यधिक सेवन से बचें
  • गीली जगहों पर जाने से बचें
  • गुस्‍सा और दुख जैसी भावनाओं से दूर रहें, क्‍योंकि इनका असर आपके मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य पर पड़ सकता है

होम्‍योपैथिक दवाएं प्राकृतिक होती है और इन्‍हें दुष्‍प्रभाव से रहित होने के लिए जाना जाता है। ये दवाएं बच्‍चों, वयस्‍कों, वृद्धों और गर्भवती महिलाओं के लिए सुरक्षित होती हैं। होम्‍योपैथिक दवाएं व्‍यक्‍ति की इम्‍युनिटी को उत्तेजित कर शरीर में वापस संतुलन लाती हैं। इससे बीमारी के लक्षणों को कम करने में मदद मितली है।

मानसिक विकारों के इलाज में होम्‍योपैथिक दवाओं के प्रभाव की जांच के लिए कई अध्‍ययन किए जा चुके हैं।

20 से 60 साल की उम्र के सिजोफ्रेनिया के उन मरीजों पर चिकित्‍सकीय अध्‍ययन किया गया जिन पर एंटीसाइकोटिक ट्रीटमेंट (गंभीर मानसिक रोगों का इलाज करने वाली दवाएं) प्रभावहीन रही थी। इन मरीजों में होम्‍योपैथी ट्रीटमेंट को असरकारी पाया गया। लाइकोपोडियम, सल्‍फर, फास्‍फोरस, नेट्रियम म्‍यूरिएटिकम और पल्‍सेटिला को सबसे ज्‍यादा उपयोगी दवा पाया गया।

जरनल ऑफ होम्‍योपैथी एंड आयुर्वेदिक मेडिसन में प्रकाशित ट्रायल के अनुसार होम्‍योपैथी दवाएं चिंता और अवसाद को नियंत्रित करने में प्रभावशाली हैं। इस ट्रायल में चिंता और अवसाद से ग्रस्‍त 45 साल की उम्र तक के 30 मरीजों को शामिल किया गया। इनमें से आधे लोगों को 16 हफ्तों तक होम्‍योपैथी दवाएं और बाकी लोगों को प्‍लेसिबो दिया गया।

उपचार की प्रभावशीलता को जानने के लिए ट्रीटमेंट से पहले और बाद के टेस्‍ट एवं कुछ प्रश्‍नों का सहारा लिया गया था। इसमें पाया गया कि प्‍लेसिबो ग्रुप की तुलना में होम्‍योपैथिक दवा लेने वाले ग्रुप में चिंता और अवसाद में काफी गिरावट आई है।

होम्‍योपैथिक दवाओं को प्रा‍कृतिक तत्‍वों से बहुत ही पतले रूप में तैयार किया जाता है इसलिए इनके कोई दुष्‍प्रभाव नहीं होते हैं। इन दवाओं को अधिकतर लोगों पर असरकारी और सुरक्षित पाया गया है।

हालांकि, कोई भी होम्‍योपैथिक दवा लेने से पहले अनुभवी होम्‍योपैथी चिकित्‍सक से सलाह लेना बहुत जरूरी है। मरीज की शारीरिक और मानसिक स्थिति से जुड़ी बातों को जानने के बाद ही चिकित्‍सक उनके लिए बेहतर दवा का चयन करते हैं, इसलिए आपको होम्‍योपैथिक डॉक्‍टर की देखरेख में ही ट्रीटमेंट और दवा लेनी चाहिए। मरीज के सभी लक्षणों के आधार पर डॉक्‍टर सबसे सही दवा लिखेंगे।

(और पढ़ें - मानसिक रोग दूर करने के उपाय)

मानसिक विकारों में कई तरह की स्थितियां शामिल हैं जो कि विचारों और व्‍यवहार को प्रभावित करती हैं। एलोपैथी के अपने ही कुछ हानिकारक प्रभाव होते हैं, जिन्‍हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। होम्‍योपैथिक दवाओं को ऐसे प्राकृतिक तत्‍वों से तैयार किया जाता है जो चिकित्‍सकीय रूप से असरकारी और सुरक्षित एवं दुष्‍प्रभाव से रहित होते हैं।

हालांकि, होम्‍योपैथी दवा हमेशा होम्‍योपैथिक चिकित्‍सक की देखरेख में लेनी चाहिए। मानसिक विकारों से ग्रस्‍त व्‍यक्‍ति को ज्‍यादा से ज्‍यादा लाभ पहुंचाने और मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य में संपूर्ण सुधार लाने के लिए चिकित्‍सक हर मरीज के लिए अलग दवा चुनते हैं।

(और पढ़ें - मानसिक रोग का आयुर्वेदिक इलाज)

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References

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  2. Ryan C. Teeple, Jason P. Caplan, Theodore A. Stern. Visual Hallucinations: Differential Diagnosis and Treatment. 2009; 11(1): 26–32. PMID: 19333408
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  5. The European Comittee for Homeopathy. Benefits of Homeopathy. Belgium; [Internet]
  6. Praveen Oberai, S Gopinadhan, Anita Sharma, Chaturbhuja Nayak, Kalpana Gautam. Homoeopathic management of Schizophrenia: A prospective, non-comparative, open-label observational study. Year : 2016 Volume : 10 Issue : 2 Page : 108-118
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