इसमें कोई शक नहीं कि सर्दियों का मौसम हरी सब्जियों का मौसम होता है। फिर चाहे हरी-हरी मटर के दाने हों, ब्रोकली हो, सरसों, मेथी, बथुआ, सोया और पालक जैसे साग हों या फिर हरा चना। जी हां, आपने काला चना, काबुली चना ये सब तो जरूर खाया होगा, लेकिन क्या आपने हरा चना खाया है? यह सर्दियों के मौसम में आने वाली सब्जी है और बेहद टेस्टी होने के साथ ही सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद होती है। हरा चना जिसे छोलिया भी कहा जाता है खासकर उत्तर भारत के राज्यों में पाया जाता है।

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हरा चना आमतौर पर उन शाखाओं या टहनियों के साथ बेचा जाता है जिन पर वे उगते और बढ़ते हैं। इस चने का बाहरी आवरण नरम और हल्के या धुंधले रंग का होता है, जिसे हटाने के बाद उसके अंदर से छोटा सा हरा चना निकलता है। आप चाहें तो इस चने को कच्चा भी खा सकते हैं, इसकी सब्जी बना सकते हैं या फिर फ्राई करके घुघनी बनाकर भी खा सकते हैं। आपको बता दें कि ये हरा चना, मूल रूप से गार्बान्जो बीन्स जिसे चिकपीज या काबुली चना कहते हैं, जिसका मजा आप साल के बाकी समय में उठाते हैं, उसका ताजा और युवा रूप है। लेकिन हरा चना सिर्फ सर्दियों के मौसम में आता है।

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हरा चना में कौन-कौन से पोषक तत्व होते हैं और इसे खाना सेहत के लिए किस तरह से फायदेमंद हो सकता है, इस बारे में हम आपको इस आर्टिकल में बता रहे हैं।

  1. हरा चना में पाए जाने वाले पोषक तत्व - Nutrients in Green Chana in Hindi
  2. हरा चना खाने के फायदे - Hara Chana Khane ke fayde
  3. हरा चना खाने के नुकसान - Hara Chana khane ke nuksan
हरा चना खाने के फायदे और नुकसान के डॉक्टर

हरा चना में विटामिन और मिनरल भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। इसमें विटामिन सी, विटामिन ई, विटामिन के और विटामिन बी कॉम्प्लेक्स भरपूर मात्रा में होता है। इसके अलावा हरे चने में मैग्नीशियम, जिंक, कैल्शियम और आयरन भी पाया जाता है, जो इसे एक हेल्दी फूड की कैटेगरी में रखता है। साथ ही इसमें एंटीऑक्सिडेंट प्रॉपर्टीज भी पायी जाती हैं, जो खून को साफ करने के साथ ही पाचन तंत्र को बेहतर बनाने में मदद करता है।

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काला चना और छोले की ही तरह हरा चना भी फाइबर से भरपूर होता है, इसलिए पेट भरने और संतुष्टि की भावना को बढ़ाने में मदद करता है। इसके अलावा हरे चने में फैट, सैचुरेटेड फैट, कोलेस्ट्रॉल और सोडियम की मात्रा कम होती है और इस वजह से यह हार्ट को हेल्दी रखने के लिए जाना जाता है।

हरा चना फोलेट यानी विटामिन बी9 का भी बेहतरीन सोर्स है और इसमें विटामिन ए और सी जैसे फाइटोन्यूट्रिएंट्स भी होते हैं, लिहाजा इसे प्रोटीन का नैचुरल और प्लांट बेस्ड सोर्स माना जाता है। इसके अलावा हरा चना ग्लूटेन फ्री भी होता है।

न्यू्ट्रिशन फैक्ट्स

1 कप (170 ग्राम) हरा चना में

  • कैलोरीज - 180
  • टोटल फैट - 2 प्रतिशत
  • सैचुरेटेड फैट - 0 प्रतिशत
  • कोलेस्ट्रॉल - 0 एमजी
  • टोटल कार्बोहाइड्रेट्स - 28 ग्राम
  • डाइट्री फाइबर - 32 प्रतिशत
  • प्रोटीन - 10 ग्राम
  • विटामिन ए - 20 प्रतिशत
  • विटामिन सी - 70 प्रतिशत
  • कैल्शियम - 4 प्रतिशत
  • आयरन - 16 प्रतिशत

सर्दियों के मौसम में मिलने वाला हरा चना जिसे छोलिया भी कहा जाता है एक हेल्दी फूड है और इसे खाने के कई फायदे हैं :

  • काबुली चने की ही तरह हरा चना भी प्रोटीन से भरपूर होता है और वेजिटेरियन या वीगन डाइट में आसानी से मीट की जगह प्रोटीन के विकल्प के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है। साथ ही यह प्लांट बेस्ड प्रोटीन का बेहतरीन सोर्स है इस कारण यह मांसपेशियों के विकास के लिए भी अहम माना जाता है। (और पढ़ें- वीगन या शाकाहारी, क्या है ज्यादा फायदेमंद)
  • हरे चने में प्रोटीन के अलावा फाइबर भी होता है और प्रोटीन व फाइबर का ये कॉम्बिनेशन भूख को कंट्रोल में रखने में मदद करता है। प्रोटीन और फाइबर ये दोनों ही पोषक तत्व पाचन की प्रक्रिया को धीमा कर देते हैं, जिससे पेट भरा-भरा महसूस होता है और आप दिनभर में कम कैलोरीज का सेवन करते हैं व आपका वजन भी कंट्रोल में रहता है।
  • पोषक तत्वों के बारे में बात करते हुए जैसा कि हमने आपको पहले ही बताया है कि हरा चना में विटामिन ए, विटामिन सी और एंटीऑक्सिडेंट्स पाए जाते हैं जो इम्यूनिटी यानी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने में मदद करते हैं ताकि सर्दियों के मौसम में आप बीमार न पड़ें। (और पढ़ें - इम्यूनिटी बढ़ाने के उपाय)
  • फोलेट जिसे फोलिक एसिड या विटामिन बी9 के रूप में भी जाना जाता है एक बेहद अहम न्यूट्रिएंट है जो हरी सब्जियों में मौजूद होता है और यह डिप्रेशन के लक्षणों को कम करने के लिए जाना जाता है। सर्दियों में आमतौर पर सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर (एसएडी) की समस्या काफी ज्यादा ट्रिगर होती है इसलिए भी हरा चना का सेवन सर्दियों में फायदेमंद हो सकता है, क्योंकि हरे चने में फोलेट भरपूर मात्रा में पाया जाता है।
  • फाइबर और प्रोटीन से भरपूर होने के साथ ही हरा चना एक लो ग्लाइसिमिक इंडेक्स यानी कम जीआई वाला फूड है और इसलिए यह ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में मदद कर सकता है। लिहाजा डायबिटीज के मरीज भी हरा चना का सेवन कर सकते हैं। इसके अलावा हरा चना फाइबर व प्रोटीन का भी अच्छा सोर्स है और ये दोनों ही चीजें ब्लड शुगर कंट्रोल करने में अहम भूमिका निभाती हैं। (और पढ़ें- डायबिटीज के मरीजों के लिए सबसे अच्छा फल)
  • हरा चना ट्राइग्लिसराइड्स के साथ ही शरीर के ओवरऑल कोलेस्ट्रॉल लेवल को भी कम करने में मदद करता है, जिससे हृदय रोग का खतरा कम हो जाता है। अब तक कई स्टडीज हो चुकी हैं, जिसमें यह दिखाया गया है कि ब्लड शुगर लेवल को कम करने वाले असर की वजह से हरा चना या काबुली चना का सेवन हृदय रोग और डायबिटीज समेत कई बीमारियों के खतरे से बचाता है।
  • फाइबर से भरपूर होने के कारण यह पाचन तंत्र के लिए भी फायदेमंद है और इसमें पाया जाने वाला फाइबर मुख्य रूप से घुलनशील होता है और यह आंत में हेल्दी बैक्टीरिया की संख्या को बढ़ाने में मदद करता है वअनहेल्दी बैक्टीरिया के ग्रोथ को रोकता है।

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वैसे तो हरा चना सेहत के लिए फायदेमंद है लेकिन बहुत अधिक मात्रा में इसका सेवन कर लिया जाए तो इसके कुछ नुकसान भी हो सकते हैं :

  • चूंकि, हरा चना में फाइबर की मात्रा अधिक होती है इसलिए अगर आप बहुत ज्यादा हरा चना खा लें तो हो सकता है आपको पेट में दर्द या ऐंठन महसूस होने लगे। यह इसलिए होता है क्योंकि अगर आपके पाचन तंत्र में अचानक फाइबर की मात्रा बढ़ जाए तो पेट फूलना, डायरिया और पेट दर्द जैसी दिक्कतें देखने को मिल सकती हैं।
  • बहुत ज्यादा मात्रा में हरा चना खाने से पेट में गैस की भी दिक्कत हो सकती है और पेट में टाइटनेस फील होने लगती है।
  • द क्लीवलैंड क्लिनिक की मानें तो आमतौर पर जिन लोगों को सोयाबीन से और फलियों (Legume) से ऐलर्जी होती है उन्हें चने से भी ऐलर्जी हो जाती है। इसलिए अगर आपको अपनी ऐलर्जी के बारे में पता है या फिर अगर हरा चना खाने के बाद आपके पेट में दर्द होने लगे, डायरिया, उल्टी, जी मिचलाना, त्वचा में खुजली जैसी दिक्कतें नजर आए तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। (और पढ़ें - खाने-पीने की चीजों से एलर्जी के लक्षण, कारण)
Dr. Dhanamjaya D

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