फासीओटॉमी (फैशिऑटमी) एक सर्जिकल प्रोसीजर है, जिसकी मदद से फैशिया (Fascia) के ऊतकों को काटा जाता है। फैशिया एक प्रकार के संयोजी ऊतक (कनेक्टिव टिश्यू) होते हैं, जो शरीर के विभिन्न हिस्सों (मांसपेशियों, नसों व रक्त वाहिकाओं) को ढक कर रखते हैं। फासीओटॉमी सर्जरी को शरीर के किसी हिस्से से दर्द व खिंचाव को कम करने के लिए किया जाता है। शरीर के किसी हिस्से (खंड) में दबाव व खिंचाव बढ़ने से एक दर्दनाक स्थिति पैदा हो जाती है, जिसे कम्पार्टमेंट सिंड्रोम कहा जाता है। कम्पार्टमेंट सिंड्रोम का इलाज करने के लिए भी फासीओटॉमी सर्जरी की जा सकती है।

एक्यूट कम्पार्टमेंट सिंड्रोम के मामलों में फासीओटॉमी को एक इमरजेंसी सर्जरी के रूप में किया जाता है और क्रोनिक कम्पार्टमेंट सिंड्रोम के मामलों में इस सर्जरी को एक योजना के तहत किया जाता है। यह सर्जरी करवाने से पहले छह घंटों तक खाली पेट रहना पड़ता है, लेकिन आपको इस दौरान पानी पीने की अनुमति दी जा सकती है। सर्जरी से पहले आपको एक सहमति पत्र दिया जाएगा, जिस पर हस्ताक्षर करके आप सर्जरी के लिए अपनी सहमति देते हैं। सर्जरी के कुछ दिन बाद आपको फिर से अस्पताल बुलाया जाएगा, जिस दौरान टांकों को फिर से कसा जाएगा और घाव की पट्टी बदली जाएगी।

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  1. फासीओटॉमी क्या है - What is Fasciotomy in Hindi
  2. फासीओटॉमी किसलिए की जाती है - Why is Fasciotomy done in Hindi
  3. फासीओटॉमी से पहले - Before Fasciotomy in Hindi
  4. फासीओटॉमी के दौरान - During Fasciotomy in Hindi
  5. फासीओटॉमी के बाद - After Fasciotomy in Hindi
  6. फासीओटॉमी की जटिलताएं - Complications of Fasciotomy in Hindi

फासीओटॉमी सर्जरी किसे कहते हैं?

फासीओटॉमी एक सर्जरी प्रोसीजर है, जिसकी मदद से शरीर के किसी सीमित हिस्से (कम्पार्टमेंट) से सूजन व दबाव को कम किया जाता है। कम्पार्टमेंट शरीर के किसी हिस्से में मौजूद मांसपेशियों, तंत्रिकाओं और रक्त वाहिकाओं के समूह को संदर्भित करता है, जो फैशिया से ढके होते हैं। कम्पार्टमेंट (खंड) में द्रव जमा होना या सूजन उसमें दबाव या खिंचाव होने का कारण बन सकता है। दबाव आने के कारण शरीर के उस खंड में रक्त की सप्लाई कम हो जाती है। ऐसी स्थिति में मांसपेशियों को ऑक्सीजन नहीं मिल पाती है और मांसपेशियां दबाव में आकर क्षतिग्रस्त होने लगती हैं। इस स्थिति को ही कम्पार्टमेंट सिंड्रोम कहा जाता है।

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फासीओटॉमी के दौरान सर्जन फैशिया के ऊतकों को काट देते हैं, ताकि कम्पार्टमेंट के अंदर का दबाव कम हो सके। कम्पार्टमेंट सिंड्रोम अधिकतर मामलों में टांगों में ही देखा जाता है, इसलिए यह सर्जरी अधिकतर टांगों में ही की जाती है। इसके अलावा पैर, हाथ, बांह और पेट में हुए कम्पार्टमेंट सिंड्रोम का इलाज करने के लिए भी फासीओटॉमी सर्जरी की जाती है।

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फासीओटॉमी सर्जरी क्यों की जाती है?

यदि आपको कम्पार्टमेंट सिंड्रोम है, तो सर्जन फासीओटॉमी सर्जरी करने की सलाह दे सकते हैं। कम्पार्टमेंट सिंड्रोम आमतौर पर दो प्रकार का होता है, जो इस प्रकार हैं -

  • एक्यूट कम्पार्टमेंट सिंड्रोम -
    यह आमतौर पर फ्रैक्चर, चोट या अन्य किसी दुर्घटना के कारण अचानक से होता है। एक्यूट कम्पार्टमेंट सिंड्रोम में आमतौर पर निम्न लक्षण महसूस हो सकते हैं -
    • प्रभावित हिस्से में जलन या झुनझुनी महसूस होना
    • गंभीर दर्द होना (विशेष रूप से जब मांसपेशी में फैलाव होता है)
    • मांसपेशी में कमजोरी महसूस होना
    • प्रभावित हिस्सा सुन्न महसूस होना
    • प्रभावित हिस्से में गंभीर थकान रहना (और पढ़ें - थकान दूर करने के उपाय)
       
  • क्रोनिक कम्पार्टमेंट सिंड्रोम -
    यह स्थिति आमतौर पर धीरे-धीरे विकसित होती है। क्रोनिक कम्पार्टमेंट सिंड्रोम में दबाव धीरे-धीरे बढ़ता है और लक्षण बार-बार महसूस होते हैं। इसमें निम्न लक्षण दिखाई दे सकते हैं -

फासीओटॉमी किसे नहीं करवानी चाहिए?

ऐसी कोई विशेष स्थिति नहीं है, जिसमें डॉक्टर फासीओटॉमी सर्जरी न करने की सलाह देते हैं। हालांकि, ऐसी कई स्थितियां हैं, जिनमें फासीओटॉमी सर्जरी करने पर कुछ जोखिम हो सकते हैं। ऐसे में विशेष सावधानियां बरतते हुए ये सर्जरी की जा सकती है।

उदाहरण के लिए यदि चोट के 12 घंटे बाद डॉक्टर को एक्यूट कम्पार्टमेंट सिंड्रोम का संदेह हुआ है, तो फासीओटॉमी सर्जरी से रिपरफ्यूजन इंजरी हो सकती है। रिपरफ्यूजन इंजरी ऐसी स्थिति है, जो मांसपेशियों को लंबे समय बाद फिर से रक्त मिलने के कारण होती है।

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फासीओटॉमी सर्जरी से पहले क्या तैयारी करनी चाहिए?

सर्जरी से पहले आपको निम्न तैयारियां करने की आवश्यकता पड़ती है -

  • यदि आपको एक्यूट कम्पार्टमेंट सिंड्रोम हुआ है, तो इसमें सर्जरी को बिना देर किए तुरंत किया जाता है। हालांकि, यदि कोई इमरजेंसी नहीं है, तो प्रभावित हिस्से की अच्छे से जांच की जाती है। यहां तक डॉक्टर मैनोमीटर की मदद से कम्पार्टमेंट के सभी हिस्सों में दबाव की जांच करेंगे।
  • यदि आप गर्भवती हैं/हो सकती हैं या गर्भवती होने की योजना बना रही हैं, तो सर्जरी से पहले ही डॉक्टर को इस बारे में बता दें। (और पढ़ें - प्रेग्नेंट होने के लक्षण)
  • सर्जरी के लिए आपको खाली पेट जाने की सलाह दी जाती है। खाली पेट जाने के लिए आप सर्जरी से पहले छह घंटों तक कुछ न खाएं। हालांकि, आपको इस दौरान पानी पीने की अनुमति दी जा सकती है।
  • यदि आप किसी भी प्रकार की दवा, हर्बल उत्पाद, विटामिन, मिनरल या अन्य कोई सप्लीमेंट ले रहे हैं, तो उसके बारे में डॉक्टर को बता दें।
  • डॉक्टर आपको कुछ दवाएं एक निश्चित समय तक न लेने की सलाह देते हैं, इनमें रक्त पतला करने वाली दवाएं भी शामिल हैं जैसे एस्पिरिन, वार्फेरिन या क्लोपिडोग्रेल आदि।
  • यदि आप धूम्रपान या शराब का सेवन करते हैं, तो डॉक्टर सर्जरी से कुछ दिन पहले और बाद तक इन्हें छोड़ने की सलाह दे सकते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि सिगरेट या शराब पीने से सर्जरी के बाद कई जटिलताएं होने का खतरा बढ़ जाता है।
  • सर्जरी के लिए आते समय अपने साथ किसी करीबी रिश्तेदार या मित्र को ले आएं, ताकि सर्जरी से पहले और बाद में आपको मदद मिल सके।
  • फासीओटॉमी सर्जरी करने से पहले आपको सहमति पत्र दिया जाता है, जिसपर हस्ताक्षर करके आप सर्जन को सर्जरी करने की अनुमति दे देते हैं। हालांकि, सहमति पत्र को एक बार अच्छे से पढ़ व समझ कर ही उसपर हस्ताक्षर करने चाहिए।

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फासीओटॉमी कैसे की जाती है?

जब आप सर्जरी के लिए अस्पताल पहुंच जाते हैं, तो मेडिकल स्टाफ सर्जरी शुरू करने की तैयारियां करने जाता है, जो इस प्रकार हैं -

  • आपको एक विशेष ड्रेस पहनने को दी जाएगी, जिसे हॉस्पिटल गाउन कहा जाता है
  • ऑपरेशन टेबल पर आपको पीठ के बल लिटा दिया जाएगा
  • आपकी बांह या हाथ की नस में सुई लगाकर उसे इंट्रावेनस ड्रिप से जोड़ दिया जाता है, जिसकी मदद से आपको दवाएं व आवश्यक द्रव दिए जाते हैं।
  • आपको जनरल एनेस्थीसिया का इंजेक्शन लगाया जाएगा, जिसकी मदद से आप सर्जरी के दौरान गहरी नींद में सो जाएंगे और आपको कुछ भी महसूस नहीं होगा। कई बार लोकल एनेस्थीसिया का इंजेक्शन भी लगाया जाता है, जिसकी मदद से सिर्फ उस हिस्से को ही सुन्न किया जाता है, जिसकी सर्जरी की जानी है। (और पढ़ें - इंजेक्शन कैसे लगाते हैं)

ये सभी तैयारियां होने के बाद फासीओटॉमी की सर्जरी प्रोसीजर को शुरू किया जाता है, जो कुछ इस प्रकार है -

  • सर्जन प्रभावित कम्पार्टमेंट की ऊपरी त्वचा पर एक चीरा लगाते हैं।
  • इसके बाद फैशिया के उन ऊतकों को काट दिया जाता है, जिनमें खिंचाव आया हुआ है, जिससे कम्पार्टमेंट के अंदर का दबाव कम हो जाता है।
  • इस दौरान कम्पार्टमेंट में मौजूद मृत ऊतकों और मांसपेशियों को निकाल दिया जाता है।
  • कम्पार्टमेंट में दबाव को कम करने के बाद चीरे को बंद करने के लिए टांके नहीं लगाए जाते हैं, ताकि दबाव को फिर से बनने से रोका जाए। टांके की जगह पर उस हिस्से पर पट्टी कर दी जाती है। (और पढ़ें - टांके कैसे लगाते हैं)
  • कई बार हल्की पट्टी की जाती है या ढीले टांके लगाए जाते हैं, ताकि घाव खुला रहे।
  • जब कम्पार्टमेंट की सूजन चली जाती है, तो फिर सर्जरी वाले चीरे को पूरी तरह से बंद कर दिया जाता है। इसमें कुछ दिनों से हफ्तों तक का समय लग सकता है।
  • फासीओटॉमी सर्जरी करने में लगने वाला कुल समय मुख्य रूप से कम्पार्टमेंट सिंड्रोम की गंभीरता और प्रभावित मांसपेशी में हुई क्षति पर निर्भर करता है।

ऑपरेशन के बाद अस्पताल में की जाने वाली प्रक्रियाएं -

ऑपरेशन होने के बाद मेडिकल स्टाफ आपको ऑपरेशन थिएटर से रिकवरी रूम में शिफ्ट कर देंगे। इस दौरान आपके शारीरिक स्वास्थ्य पर करीब से नजर रखी जाएगी और ध्यान रखा जाएगा कि आप सांस ठीक से ले रहे हैं या नहीं और आपका हृदय ठीक से काम कर रहा है या नहीं। इसके अलावा रिकवरी रूम में निम्न कार्य किए  जाते हैं -

  • दर्द को कम करने के लिए दर्द निवारक और सूजन को कम करने के लिए सूजन रोधी दवाएं दी जाएंगी (और पढ़ें - सूजन का आयुर्वेदिक इलाज)
  • मांसपेशियों के ऊतकों की कार्य प्रक्रिया की जांच करने और किडनी की कार्यक्षमता का पता लगाने के लिए यूरिन टेस्ट किए जाते हैं। (और पढ़ें - किडनी फंक्शन टेस्ट)
  • शरीर में पानी व अन्य आवश्यक तत्वों की पूर्ति करने के लिए इंट्रावेनस लाइन शुरू की जाएगी
  • आपको रिकवरी वार्ड में थोड़ा बहुत चलने फिरने के लिए भी कहा जा सकता है, जिसके लिए आपको बैसाखी या छड़ी दी जा सकती है।

(और पढ़ें - शरीर में पानी की कमी के कारण)

फासीओटॉमी के बाद देखभाल कैसे करें?

फासीओटॉमी सर्जरी के बाद जब आपको अस्पताल से छुट्टी दी जाती है, तो इस दौरान निम्न बातों का ध्यान रखने के लिए कहा जाता है -

  • घाव की देखभाल करना
    • आप नहा सकते हैं, लेकिन एक निश्चित समय तक बाथटब या पूल आदि में नहाने की अनुमति नहीं दी जाती है।
    • सर्जरी वाले घाव को साफ व स्वच्छ रखें। घाव को साफ करने से पहले अपने हाथों को साबुन व पानी के साथ धोकर सुखा लें।
    • घाव पर डॉक्टर की सलाह के बिना किसी प्रकार की क्रीम, लोशन या पाउडर आदि न लगाएं।
    • सर्जरी वाले हिस्से पर खुजली न करें और किसी भी प्रकार की ठेस लगने से बचाएं
    • साथ ही साथ आपको घर पर स्वास्थ्यकर व संतुलित आहार लेने की सलाह दी जाती है, ताकि सर्जरी के घाव जल्दी ठीक हो जाएं।
    • घाव में संक्रमण होने से रोकथाम के लिए कुछ विशेष प्रकार की एंटीबायोटिक दवाएं दी जा सकती हैं, जिन्हें डॉक्टर की सलाह के अनुसार ध्यानपूर्वक लेना चाहिए।
  • दर्द व सूजन कम करना
    • सर्जरी के बाद कुछ दिनों तक घाव में दर्द रह सकता है, जिसके लिए डॉक्टर दर्द निवारक दवाएं देते हैं। (और पढ़ें - दर्द निवारक दवा के साइड इफेक्ट)
    • सूजन को कम करने के लिए सूजन रोधी दवाएं दी जाती हैं, ताकि घाव जल्दी ठीक हो जाए।
  • शारीरिक गतिविधियां करना
    • ऑपरेशन के कुछ दिन बाद फीजियोथेरेपिस्ट आपको कुछ विशेष व्यायाम करने की सलाह देते हैं, जिनकी मदद से आप अपने प्रभावित हिस्से की कार्य क्षमता को फिर से पाते हैं। हालांकि, व्यायाम करते समय फीजियोथेरेपिस्ट द्वारा बताए गए नियमों का ध्यानपूर्वक पालन करना चाहिए। (और पढ़ें - व्यायाम करने का सही समय)
    • जब सर्जरी के घाव पूरी तरह से ठीक हो जाएं, तो आपको अपनी दिनचर्या के सामान्य कार्य करने की अनुमति दी जा सकती है। हालांकि, ऑफिस या स्कूल/कॉलेज जाना शुरू करने से पहले एक बार डॉक्टर से इस बारे में बात कर लें।
    • ड्राइविंग फिर से शुरू करने या कोई मशीन (व्यावसायिक काम) चलाने से पहले एक बार डॉक्टर से अनुमति ले लें।
    • फासीओटॉमी सर्जरी की मदद से मांसपेशियों को फिर से पर्याप्त रक्त व ऑक्सीजन मिलने लगती है, जिससे वे क्षतिग्रस्त होने से बच जाती हैं। (और पढ़ें - ऑक्सीजन की कमी का इलाज)

डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए?

फासीओटॉमी सर्जरी के बाद यदि आपको निम्न में से कोई भी समस्या महसूस हो रही है, तो ऐसे में जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क कर लेना चाहिए -

  • बुखार
  • ठंड लगना
  • प्रभावित हिस्से की मांसपेशियों को हिला-ढुला न पाना
  • ऑपरेशन वाली जगह सुन्न हो जाना या फिर उस हिस्से में झुनझुनी या जलन महसूस होना
  • दर्द की दवाएं लेने के बाद भी असहनीय दर्द होना
  • सर्जरी वाले स्थान से अधिक रक्तस्राव होना
  • सूजन बढ़ जाना
  • छाले पड़ना (और पढ़ें - गले में छाले होने के कारण)
  • सर्जरी वाले घाव फिर से खुल जाना
  • सर्जरी वाले हिस्से में अकड़न/जकड़न महसूस होना

(और पढ़ें - तेज बुखार होने पर क्या करें)

फासीओटॉमी सर्जरी से क्या जोखिम हो सकते हैं?

फासीओटॉमी सर्जरी करवाने से कुछ जोखिम व जटिलताएं हो सकती हैं, जिनमें निम्न शामिल हैं -

इसके अलावा कुछ गंभीर मामलों में फासीओटॉमी सर्जरी ठीक से न होने के कारण प्रभावित अंग को काटना पड़ जाता है या उस जगह पर स्किन ग्राफ्ट करनी पड़ सकती है।

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संदर्भ

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