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लेजर रिसर्फेसिंग एक नॉन सर्जिकल प्रोसीजर है, जिसमें उच्च ऊर्जा वाले प्रकाश की छोटी-छोटी तरंगों (पल्स) का इस्तेमाल किया जाता है। इन तरंगों की मदद से त्वचा की ऊपरी परत को हटा दिया जाता है, जो किसी कारण से क्षतिग्रस्त हो जाती है। यह सर्जरी आमतौर पर चेहरे की त्वचा के लिए ही की जाती है।

लेजर रिसर्फेसिंग को लोकल या जनरल एनेस्थीसिया का इंजेक्शन लगाकर किया जाता है, जिससे आपको सर्जरी के दौरान दर्द आदि महसूस नहीं हो पाता है।

इस सर्जरी से आमतौर पर चार से छह हफ्ते पहले इसके लिए तैयारियां की जाती हैं। त्वचा के जिस हिस्से का ट्रीटमेंट करना है, उसको साफ किया जाता है और उसपर निशान लगा दिए जाते हैं। लेजर निशान लगाए गए स्थान पर कई बार लेजर का इस्तेमाल किया जाता है, यह आमतौर पर समस्या की गंभीरता पर भी निर्भर करता है। यह इलाज प्रक्रिया त्वचा के निशान हटाने व अन्य कई समस्याओं को दूर करने में काफी प्रभावी बताई गई है।

(और पढ़ें - चर्म रोग का इलाज)

  1. लेजर रिसर्फेसिंग क्या है - What is Laser Resurfacing in Hindi
  2. लेजर रिसर्फेसिंग किसलिए की जाती है - Why is Laser Resurfacing done in Hindi
  3. लेजर रिसर्फेसिंग से पहले - Before Laser Resurfacing in Hindi
  4. लेजर रिसर्फेसिंग के दौरान - During Laser Resurfacing in Hindi
  5. लेजर रिसर्फेसिंग की जटिलताएं - Complications of Laser Resurfacing in Hindi

लेजर रिसर्फेसिंग क्या है?

लेजर रिसर्फेसिंग एक नॉन सर्जिकल इलाज प्रक्रिया है, जिसकी मदद से त्वचा की ऊपरी परत पर बनी झाइयां, झुर्रियां, स्कार और त्वचा के अन्य क्षतिग्रस्त हिस्सों को निकाला जाता है। लेजर रिसर्फेसिंग से त्वचा की दिखावट के साथ ही उसके लचीलेपन में भी सुधार किया जा सकता है।

लेजर रिसर्फेसिंग में हाई एनर्जी लाइट की छोटी-छोटी तरंगों को त्वचा के क्षतिग्रस्त हिस्से पर केंद्रित किया जाता है। त्वचा में मौजूद पानी के अणु व क्रोमोफोर (त्वचा को रंग प्रदान करने वाले पदार्थ) इस लाइट में अवशोषित होने लगते हैं और गर्मी पैदा होने के कारण त्वचा की क्षतिग्रस्त परत भाप बनकर उड़ जाती है। इस प्रोसीजर में एक बार में त्वचा की एक ही परत को हटाया जाता है। कुछ दिन के बाद त्वचा के जिस हिस्से से परत को हटाया गया है, वहां पर कुछ दिन बाद नई त्वचा आ जाती है।

लेजर रिसर्फेसिंग में आमतौर पर कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) और अर्बियम का इस्तेमाल किया जाता है। लेजर रिसर्फेसिंग में फ्रैक्शनेटेड सीओ2 नामक नई तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है, जिसमें अपेक्षाकृत तेजी से सेल्स रिजनरेशन होता है। फ्रैक्शनल लेजर में लाइट के कई संकीर्ण कॉलम होते हैं, जो त्वचा के ऊन हिस्सों को लेजर से नष्ट होने से बचाते हैं जो क्षतिग्रस्त नहीं हैं। त्वचा के जो हिस्से नष्ट होने से बचाए जाते हैं, वे लेजर से नष्ट किए गए हिस्सों को जल्दी स्वस्थ होने में मदद करते हैं।

लेजर रिसर्फेसिंग को अधिकतर मामलों में चेहरे की त्वचा के लिए इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन गर्दन, सीने और हाथ आदि की त्वचा के लिए भी इस सर्जरी प्रोसीजर का इस्तेमाल किया जाता है।

(और - चेहरे की झाइयां हटाने के उपाय)

लेजर रिसर्फेसिंग किसलिए की जाती है?

इस प्रोसीजर की मदद से त्वचा की दिखावट में सुधार किया जाता है। लेजर रिसर्फेसिंग आमतौर पर निम्न समस्याओं से ग्रस्त लोगों के लिए की जाती है -

  • त्वचा पर तिल या मस्से होना
  • चेहरे पर लकीरें व झुर्रियां पड़ना
  • धूप से जली त्वचा
  • चिकन पॉक्स, स्मालपॉक्स, दाने, मुहांसे या हर्पीस सिंपलेक्स आदि के कारण त्वचा पर निशान पड़ना
  • जन्म से ही कोई निशान होना
  • वायरल वार्ट्स (त्वचा पर फैलने वाले मस्से)
  • स्ट्रेच मार्क्स
  • उम्र के अनुसार होने वाले धब्बे (त्वचा पर गहरे रंग के निशान)
  • नाक पर तेल ग्रंथियों का आकार बढ़ना
  • झाइयां
  • मेलास्मा (चेहरे पर हल्के या गहरे ब्राउन रंग के धब्बे पड़ना)
  • एक्टिनिक केराटोसिस (त्वचा पर छोटे-छोटे रंगीन धब्बे पड़ना)
  • राइनोफिमा (नाक का आकार कम करना या फिर से आकृति देना)
  • वैस्कुलर बर्थमार्क
  • त्वचा बढ़ना (नॉन कैंसर)
  • सेबोरोएइक केराटोसिस
  • सुपरफीशियल स्किन कैंसर (नॉन मेलानोमा)

लेजर रिसर्फेसिंग किसे नहीं करवानी चाहिए?

निम्न स्थितियों से ग्रस्त लोगों की लेजर रिसर्फेसिंग नहीं की जाती है -

इसके अलावा जिन लोगों की त्वचा संबंधी समस्याओं के लिए पिछले छह महीने में यदि आइसोट्रेटीनोइन का इस्तेमाल किया गया है, तो उनके लिए भी यह सर्जरी नहीं की जा सकती है। जिन लोगों की त्वचा का रंग अधिक सांवला होता है, उन्हें भी लेजर रिसर्फेसिंग न करवाने की सलाह दी जाती है। ऐसा इसलिए क्योंकि अधिक सांवली त्वचा वाले लोगों में नई त्वचा का रंग और अधिक गहरा होने का खतरा रहता है।

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लेजर रिसर्फेसिंग से पहले क्या तैयारी की जाती है?

लेजर रिसर्फेसिंग से लगभग चार हफ्ते पहले प्लास्टिक सर्जन आपको अस्पताल बुलाते हैं और आपकी प्रभावित त्वचा की करीब से जांच की जाती है। सर्जन आपको सर्जरी से पहले कुछ विशेष सुझाव देते हैं -

  • आपसे आपके स्वास्थ्य संबंधी पिछली सभी स्थितियों के बारे में पूछा जाता है और साथ ही यह पूछा जाता है कि आपको कोई रोग या एलर्जी तो नहीं है।
  • यदि आप कोई दवा, हर्बल उत्पाद, विटामिन, मिनरल या अन्य कोई सप्लीमेंट ले रहे हैं तो डॉक्टर को इस बारे में बता दें।
  • यदि आप त्वचा पर कोई क्रीम, लोशन या किसी प्रकार की मलम आदि का इस्तेमाल करते हैं या पहले करते थे तो इस बारे में डॉक्टर को बता दें।
  • यदि आपने पहले कभी चेहरे की त्वचा के लिए केमिकल पीलिंग या एक्स रे ट्रीटमेंट करवाएं हैं, तो सर्जरी से पहले ही डॉक्टर को इस बारे में बता दें।

इस दौरान डॉक्टर आपको निम्न दिशानिर्देश भी देते हैं -

  • ज्यादा देर तक धूप के संपर्क में न आएं, क्योंकि यह त्वचा में पिगमेंटेशन होने के जोखिम बढ़ा सकता है।
  • आपको कुछ विशेष दवाएं न लेने की सलाह दी जा सकती है
  • सर्जरी से कम से कम सात दिन पहले तक फेक टैन का इस्तेमाल न करें
  • यदि आप धूम्रपान करते हैं, तो कुछ दिन तक आपको इससे परहेज करने को कहा जा सकता है (और पढ़ें - सिगरेट पीना छोड़ने के उपाय)

इलाज के लिए अस्पताल आने से पहले आपको निम्न सलाह दी जाती है -

  • अस्पताल आने से पहले नहा लें, मेकअप न करें और यदि आपने कोई आभूषण या गैजेट पहना है तो उसे भी उतार कर घर रख दें।
  • त्वचा के जिस हिस्से की सर्जरी की जानी है यदि वहां पर बाल हैं तो शेविंग करके उन्हें साफ कर लें।
  • कम से कम 30 एसपीएफ वाले सनस्क्रीन का इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है।
  • ऑपरेशन के लिए अस्पताल आते समय अपने साथ किसी करीबी रिश्तेदार या मित्र को ले आएं, ताकि ऑपरेशन से पहले और बाद के कार्यों में आपको मदद मिल सके।
  • आपको ऑपरेशन के लिए खाली पेट अस्पताल आने को कहा जाता है, जिसके लिए आपको पहली आधी रात के बाद कुछ भी न खाने या पीने की सलाह दी जाती है।

(और पढ़ें - एक अच्छी सनस्क्रीन कैसे चुनें)

लेजर रिसर्फेसिंग कैसे की जाती है?

लेजर रिसर्फेसिंग प्रोसीजर को लोकल या जनरल एनेस्थीसिया का इंजेक्शन लगाकर किया जाता है। लोकल एनेस्थीसिया से सिर्फ उस हिस्से को सुन्न किया जाता है, जिसकी सर्जरी करनी है जबकि जनरल एनेस्थीसिया से आप गहरी नींद में सो जाते हैं और सर्जरी के दौरान आपको कुछ भी महसूस नहीं होता है। हालांकि, आपको कौन सी एनेस्थीसिया देनी है, यह प्रभावित त्वचा के आकार पर निर्भर करता है।

जब आप अस्पताल पहुंच जाते हैं, तो मेडिकल स्टाफ आपको हॉस्पिटल गाउन (एक विशेष ड्रेस) पहनने को देते हैं। इसके बाद आपको ऑपरेशन थिएटर में ले जाकर एनेस्थीसिया का इंजेक्शन लगाया जाता है। जब एनेस्थीसिया का असर शुरू हो जाता है, तो प्रोसीजर शुरू किया जाता है जो कुछ इस प्रकार है -

  • जिस त्वचा की लेजर रिसर्फेसिंग करनी है, उसे साफ किया जाता है और फिर पेन से उसपर निशान लगाए जाते हैं।
  • आपको विशेष चश्मे दिए जाते हैं, जो आपकी आंखों को लेजर से बचाते हैं। इसके अलावा सर्जन प्रभावित त्वचा के आसपास (स्वस्थ त्वचा के ऊपर) गीला कपड़ा रखते हैं ताकि अतिरिक्त पल्स स्वस्थ त्वचा तक न जा पाएं। त्वचा को लेजर के संपर्क में कई बार लाया जाता है।
  • जहां से लेजर गई है उनके बीच वाले हिस्से को सर्जन साल्टवॉटर या स्टेराइल वॉटर से साफ करते है। इसकी मदद से लेजर से क्षतिग्रस्त त्वचा को निकाल दिया जाता है और बची हुई त्वचा को ठंडा किया जाता है।
  • त्वचा के कितने हिस्से में लेजर रिसर्फेसिंग करनी है और त्वचा कितनी गंभीर है उसके अनुसार निर्धारित किया जाता है कि त्वचा को लेजर के संपर्क में कितनी बार लाना है।
  • लेजर रिसर्फेसिंग प्रोसीजर के पूरा होने के बाद सर्जन उस हिस्से पर कुछ विशेष मलम लगाते हैं और फिर पट्टी कर दी जाती है।

इस प्रोसीजर को पूरा होने में 30 मिनट से 1 घंटे का समय लग सकता है। प्रोसीजर के दौरान आपको त्वचा में जलन, चुभन व अन्य तकलीफें महसूस हो सकती हैं। जिस त्वचा का ट्रीटमेंट किया गया है उसमें सूजन व लालिमा हो जाती है और छूने पर वह गर्म महसूस होती है।

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लेजर रिसर्फेसिंग से क्या जोखिम हो सकते हैं?

लेजर रिसर्फेसिंग से निम्न जोखिम व जटिलताएं हो सकती हैं -

  • त्वचा में संक्रमण
  • त्वचा के रंग में बदलाव होना
  • कोल्ड सोर्स
  • बार-बार मुंहासे व दाने होना
  • त्वचा पर स्कार बनना
  • पलकें बाहर की तरफ लटक जाना (एक्ट्रोपियन)
  • कॉन्टेक्ट डर्मेटाइटिस
  • त्वचा में लंबे समय तक लालिमा रहना

(और पढ़ें - डर्मेटाइटिस का इलाज)

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संदर्भ

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