पान मसाला चूना, कत्था व अन्य स्वाद वाले एजेंट के साथ 8 का मिश्रण होता है. नियमित रूप से पान मसाले के सेवन से कैंसर सहित स्पर्म काउंट कम होना, फेफड़ों से जुड़ी बीमारी व लिवर की समस्या होने की आशंका रहती है. ऐसे में पान मसाले से दूरी बनाना ही सही निर्णय है. पान मसाला खाने की आदत से कुछ घरेलू नुस्खों के जरिए छुटकारा पाया जा सकता है.
आज इस लेख में हम पान मसाला खाने के नुकसान, कैसे बनता है, छोड़ने के उपाय और फायदों के बारे में विस्तार से जानेंगे -
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- पान मसाला खाने के नुकसान
- कैसे बनता है पान मसाला?
- पान मसाला छोड़ने के उपाय
- पान मसाला छोड़ने के फायदे
- सारांश
पान मसाला खाने के नुकसान
पान मसाले के सेवन से कई तरह की शारीरिक समस्याएं हो सकती हैं. आइए, इन समस्याओं के बारे में विस्तार से जानते हैं -
ल्यूकोप्लाकिया
पान मसाला का सेवन करने से ल्यूकोप्लाकिया की समस्या हो सकती है. इसके कारण मुंह के अंदर लाल दाग, मुंह में घाव व ओरल टिश्यू में घाव जैसी परेशानी हो सकती है.
मुंह का कैंसर
पान मसाला का सबसे सेवन करने से मुंह का कैंसर होने की आशंका होती है. रिसर्च भी कहते हैं कि पान मसाला का सेवन करने से जीभ, मुंह व जबड़े के अंदर सफेद दाग बनने लगते हैं. ये धीरे-धीरे माउथ कैंसर का कारण बन सकते हैं.
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फेफड़े का कैंसर
पान मसाले का सेवन फेफड़े को भी प्रभावित कर सकता है. लंबे समय तक पान मसाला खाने से फेफड़े का कैंसर होने की आशंका बढ़ सकती है.
लिवर की परेशानी
लंबे समय तक पान मसाला का सेवन करने से लिवर रोग होने का खतरा रहता है. यह लिवर में गंदगी को बढ़ाता है, जिससे कई गंभीर समस्याएं होने का डर बना रहता है.
इन बीमारियों के अलावा, पान मसाला खाने से हाई ब्लड प्रेशर व नींद लेने में परेशानी जैसी समस्याओं का भी सामना करना पड़ सकता है.
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दांतों व मसूड़ों को नुकसान
पान मसाला का सेवन करने से दांत कमजोर हो सकते हैं. यह ओरल सबम्यूकस फाइब्रोसिस का कारण बन सकता है, जिसमें व्यक्ति अपना पूरा मुंह खोल नहीं पाता है. ज्यादा मात्रा में गुटखा या पान मसाला का सेवन करने से मुंह से बदबू व मसूड़ों में सूजन जैसी समस्याएं हो सकती हैं.
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कैसे बनता है पान मसाला?
सुपारी के टुकड़े, चूना, कत्था, इलायची, लौंग व खाने वाले केमिकल्स को एक निश्चित मात्रा में मिलाकर तैयार किया जाता है. चूंकि, हर एक कंपनी का फ्लेवर अलग-अलग होता है, तो इनके फ्लेवर एजेंट अलग-अलग हो सकते हैं.
पान मसाले का स्वाद बरकरार रखने के लिए इसमें पैराफिन वैक्स को मिलाया जाता है. पैराफिन वैक्स एक प्रकार का केमिकल होता है, जो डायबिटीज व हाथों में सुन्नपन आदि का कारण बन सकता है. इस केमिकल को मिलाने के बाद पान मसाले को सुखाकर मशीन के जरिए पाउच में पैक किया जाता है.
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पान मसाला छोड़ने के उपाय
पान मसाला चबाने की आदत छोड़ने के लिए सबसे पहले इच्छा शक्ति को मजबूत करना जरूरी है. इसके साथ ही कुछ घरेलू नुस्खों को अपनाकर भी इस लत को छोड़ा जा सकता है. आइए, विस्तार से पान मसाला छोड़ने के उपाय जानते हैं -
तुलसी व ब्राह्मी की पत्तियां
तुलसी और ब्राह्मी के पत्तों को सुबह नियमित रूप से चबाना चाहिए. तुलसी और ब्राह्मी की पत्तियों को चबाने से पान मसाला खाने की इच्छा पर काबू पाया जा सकता है. तुलसी की पत्तियां शरीर को अंदर से शुद्ध करती हैं. यह रक्त में मौजूद निकोटिन जैसे हानिकारक पदार्थ को बाहर निकालने में मददगार हैं.
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अजवाइन और मुलेठी
पान मसाला खाने की आदत को छोड़ने के लिए पान मसाला की बजाय जेब में अजवाइन के बीज और मुलेठी के छोटे-छोटे टुकड़े मिलाकर रखने चाहिए. जब भी गुटखा या पान मसाला खाने की इच्छा हो, तो इन दोनों मिश्रण को चबाकर खाने की सलाह दी जाती है. दरअसल, मुलेठी शरीर से टॉक्सिन को बाहर निकालकर निकोटिन खाने की इच्छा को कम करने में प्रभावी साबित हो सकती है.
हर्बल चाय
दिन में 1-2 बार सामान्य चाय की जगह हर्बल चाय पीने से भी पान मसाला खाने की लत कुछ कम हो सकती है. साथ ही मुंह को कभी सूखने न दें, उसे हमेशा हाइड्रेट रखें. मुंह सूखने पर पान मसाला खाने की तलब हो सकती है.
योग
रोज योग, व्यायाम व मेडिटेशन को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाएं. इससे शारीरिक इंद्रियों व मन की भावनाओं पर नियंत्रिण पान में मदद मिलती है. ऐसा करने से पान मसाला खाने की इच्छा धीरे-धीरे कम होने लगती है.
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पान मसाला छोड़ने के फायदे
पान मसाला छोड़ने से न सिर्फ शारीरिक रूप से फायदा पहुंचाता है, बल्कि ऐसा करना मानसिक रूप से भी लाभकारी है. नीचे क्रमवार तरीके से बताया गया है कि पान मसाला छोड़ने से क्या-क्या फायदे हो सकते हैं -
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सारांश
पान मसाला का सेवन करने से कैंसर, सांस से जुड़ी बीमारियां, फेफड़े खराब होने की आशंका रहती है. ऐसे में पान मसाला छोड़ने के लिए मुलेठी, अजवाइन व तुलसी का इस्तेमाल सहायक साबित हो सकता है. यदि कोई व्यक्ति इस लेख में बताए गए उपायों से पान मसाले की लत नहीं छोड़ पा रहा है, तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.




