कुछ महिलाएं पीरियड्स शुरू होने से कुछ समय पहले या फिर पीरियड्स के दौरान काफी ज्यादा थकान और ऊर्जा की कमी महसूस करती है. पीरियड्स से पहले या फिर पीरियड्स के दौरान दिखने वाले इस तरह के लक्षण को पीरियड फटीग कहा जाता है. इस समस्या के पीछे शरीर में आयरन की कमी, अधिक ब्लीडिंग होना व पूरी नींद न लेना हो सकता है. वहीं, इलाज के तौर पर डॉक्टर नॉनस्टेरॉइडल एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग्स या गर्भनिरोधक गोलियां दे सकते हैं.

आज इस लेख में आप पीरियड फटीग के लक्षण, कारण व इलाज के बारे में विस्तार से जानेंगे -

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  1. पीरियड फटीग के लक्षण
  2. पीरियड फटीग के कारण
  3. पीरियड फटीग का इलाज
  4. सारांश
पीरियड फटीग के लक्षण, कारण व इलाज के डॉक्टर

पीरियड्स फटीग को प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम (पीएमएस) का लक्षण माना जा सकता है. पीएमएस से ग्रसित महिलाओं के शरीर में कई तरह के लक्षण नजर आते हैं. यह कुछ महिलाओं को पीरियड्स के पहले या फिर पीरियड्स के दौरान इस तरह के लक्षण नजर आते हैं. ये लक्षण मासिक धर्म के समय होने वाले हार्मोनल परिवर्तनों की वजह से हो सकते हैं. कुछ पीएमएस के लक्षण, जो पीरियड्स फटीग के साथ नजर आ सकते हैं, निम्न प्रकार से हैं -

(और पढ़ें - हमेशा थकान महसूस होने का इलाज)

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पीरियड फटीग आमतौर पर मासिक धर्म के समय होने वाले हार्मोनल बदलाव की वजह से होता है. महिलाओं की ओवरी एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन का उत्पादन करती है. महिलाओं के मासिक धर्म चक्र के फर्स्ट हाफ में एस्ट्रोजन का स्तर बढ़ता है और फिर सेकेंड हाफ में कम होता है.

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जब यह कम होता है, तो सेरोटोनिन का स्तर भी बढ़ता है. यह एक मस्तिष्क केमिकल है, जो सतर्कता और मनोदशा से संबंधित होता है. इस स्थिति के परिणामस्वरूप मूड और ऊर्जा के स्तर में कमी आती है. इसके अलावा, पीरियड फटीग के कई कारण हो सकते हैं -

नींद की कमी

पीरियड्स में दर्द और मूड में उतार-चढ़ाव नींद में परेशानी उत्पन्न कर सकता है. पीरियड्स से 1 रात पहले अनिद्रा का अनुभव हो सकता है. इसकी वजह से पीरियड्स से पहले या फिर पीरियड्स के दौरान काफी ज्यादा थकान महसूस हो सकती है.

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हैवी ब्लीडिंग

पीरियड्स के दौरान हैवी ब्लीडिंग की वजह से शरीर में आयरन की कमी हो सकती है. आयरन की कमी के कारण एनीमिया हो सकता है. इसकी वजह से शरीर में काफी ज्यादा कमजोरी और थकान महसूस हो सकती है. शरीर में आयरन का स्तर कम होने से शरीर में हीमोग्लोबिन का उत्पादन भी कम होता है.

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खाने की इच्छा

पीरियड्स के दौरान खाने की क्रेविंग काफी ज्यादा होती है. इसकी वजह से कुछ लोगों को काफी ज्यादा थकान और कमजोरी महसूस हो सकती है.

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पीरियड फटीग यानि पीरियड्स में होने वाली थकान को कम करने के लिए कुछ संभावित उपचार का सहारा लिया जा सकता है, जैसे -

नॉनस्टेरॉइडल एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग

पीरियडस फटीग की परेशानी को कम करने के लिए नॉनस्टेरॉइडल एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग्स (NSAIDs), जैसे - इबुप्रोफेन लेने की सलाह दी जा सकती है. यह दवा दर्द और सूजन को कम करने में मददगार साबित हो सकती है. वहीं, अगर किसी महिला को ऐंठन की परेशानी होती है, तो एक्सपर्ट उन्हें सोने से पहले एनएसएआईडी लेने की सलाह दी जा सकती है. यह नींद को बेहतर करने में मददगार साबित हो सकती है, जो शरीर की थकान को कम कर सकती है.

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गर्भनिरोधक गोलियां

कुछ हेल्थ एक्सपर्ट्स शरीर में हार्मोन के स्तर को कंट्रोल करने के लिए गर्भनिरोधक गोलियां लेने की सलाह दे सकते हैं. ये दवाइयां नियमित रूप से या फिर सप्ताह में एक बार लेने की सलाह दी जा सकती है. डॉक्टर द्वारा सुझाए गए बर्थ कंट्रोल पिल्स को लेने से शरीर में हार्मोनल बदलाव को रोकने में मदद मिलती है, जिससे पीएमएस के लक्षणों में कमी आ सकती है.

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सप्लीमेंट्स

अमेरिकन कॉलेज ऑफ ओब्स्टेट्रिशियन एंड गायनेकोलॉजिस्ट्स का सुझाव है कि प्रतिदिन 1,200 मिलीग्राम कैल्शियम लेने से शारीरिक और मानसिक रूप से पीएमएस के लक्षणों को कम करने में मदद मिल सकती है. बस ध्यान रखें कि पहली बार सप्लीमेंट्स लेने से पहले हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह जरूर लें. खासतौर से अगर आप पहले से किसी तरह की दवा ले रहे हैं, तो एक्सपर्ट से जरूर राय लें.

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एंटीडिप्रेसेंट

कुछ हेल्थ एक्सपर्ट पीरियड फटीग या फिर पीएमएस के मानसिक और शारीरिक लक्षणों को कम करने के लिए कुछ सेरोटोनिन रीपटेक इनहिबिटर नामक एंटीडिप्रेसेंट लिख सकते हैं. इससे पीरियड फटीग के लक्षण कम होते हैं. साथ ही यह शरीर को थकान और कमजोरी से दूर रखने में मददगार होता है.

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पीरियड फटीग के दौरान शरीर में काफी ज्यादा थकान, पेट में दर्द व ब्रेस्ट में सूजन जैसे लक्षण महसूस हो सकते हैं. यह परेशानी अधिकतर महिलाओं को शरीर में हार्मोनल बदलाव की वजह से होता है. पीरियड फटीग की समस्या को कम करने के लिए हेल्थ एक्सपर्ट कुछ दवाओं को लेने की सलाह दे सकते हैं. साथ ही इस बात का ध्यान रखने की जरूरत होती है कि पीरियड फटीग की परेशानी ज्यादा होने पर तुरंत एक्सपर्ट से सलाह लेनी चाहिए.

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