सेरोटोनिन एक रसायन है, जो शरीर में विभिन्न प्रकार के कार्यों के लिए आवश्यक होता है। इसे "खुश बनाने वाला रसायन" भी कहा जाता है, क्योंकि यह आपको अच्छा महसूस कराने और आपके मूड को खुशनुमा बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देता है। सेरोटोनिन का वैज्ञानिक नाम 5-हाइड्रोक्सीट्रीप्टामाइन (5-hydroxytryptamine) या 5-एचटी (5-HT) है। यह मुख्य रूप से मस्तिष्क, आंत और प्लेटलेट्स में पाया जाता है।
सेरोटोनिन का उपयोग तंत्रिका कोशिकाओं के बीच संदेशों को भेजने के लिए किया जाता है। यह "स्मूथ मसल्स" नमक मांसपेशियों के एक खास परकार को सक्रिय भी करता है। अलावा यह आपकी भूख, भावनाओं और याददाश्त आदि कार्यों के लिए भी जरूरी माना जाता है। सेरोटोनिन मूड को अच्छा बनाने के लिए भी जरूरी होता है। दूसरी तरफ, अगर इसके स्तर में कमी आ जाए तो आपको अवसाद होना शुरू हो जाता है। आगे विस्तार से बताया गया है कि सेरोटोनिन क्या है, इसके फायदे, कार्य और सेरोटोनिन सिंड्रोम क्या है।
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- सरोटोनिन क्या है? - Serotonin kya hai in hindi
- सेरोटोनिन के कार्य - Serotonin ke karya in hindi
- सेरोटोनिन और मानसिक स्वास्थ्य - Serotonin aur mansik swasthya in hindi
- सेरोटोनिन का सामान्य स्तर क्या है? - Serotonin ka normal level in hindi
- सेरोटोनिन सिंड्रोम क्या है? - Serotonin syndrome kya hai in hindi
- सारांश
सरोटोनिन क्या है? - Serotonin kya hai in hindi
सेरोटोनिन तंत्रिका कोशिकाओं से निर्मित कैमिकल है। यह आपकी तंत्रिका कोशिकाओं के बीच संकेत भेजने का काम करता है। सेरोटोनिन मुख्य रूप से पाचन तंत्र में पाया जाता है, हालांकि यह प्लेटलेट्स और केंद्रीय तंत्रिका तंत्र में भी मौजूद होता है।
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सेरोटोनिन आवश्यक एमिनो एसिड ट्रीप्टोफैन (tryptophan) से बना होता है। आप अपने भोजन द्वारा इस एमिनो एसिड को प्राप्त कर सकते हैं और आमतौर पर यह ड्राई फ्रूट, पनीर और मीट जैसे खाद्य पदार्थों में पाया जाता है। ट्रीप्टोफैन की कमी के कारण शारीर में सेरोटोनिन के स्तर में भी कमी आ जाती है। इसके परिणामस्वरूप आपको मनोदशा (मूड) संबंधी विकार जैसे चिंता या अवसाद हो सकते हैं ।
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सेरोटोनिन के कार्य - Serotonin ke karya in hindi
सेरोटोनिन आपकी भावनाओं और आपके शरीर के सभी हिस्सों को प्रभावित करता है। सेरोटोनिन को प्राकृतिक रूप से मूड को नियंत्रित करने वाला माना जाता है। यह रसायन सोने, खाने और पचाने में मदद करता है। इसके साथ ही सेरोटोनिन निम्न शारीरिक कार्यों में मदद करता है:
- अवसाद को कम करना (और पढ़ें - अवसाद के घरेलू उपाय)
- चिंता को कम करना (और पढ़ें - चिंता खत्म करने के लिए योगासन)
- घाव तेजी से भरना (और पढ़ें - घाव ठीक करने के उपाय)
- उल्टी आने का कारण (और पढ़ें - उल्टी रोकने के उपाय)
- हड्डीयों को स्वस्थ बनाना (और पढ़ें - हड्डियों को मजबूत करने के उपाय)
सेरोटोनिन आपके शरीर में विभिन्न कार्यों में क्या भूमिका अदा करता है:
- आंतों को सक्रिय करना : सेरोटोनिन मुख्य रूप से आपके पेट और आंतों में पाया जाता है। यह आपकी आंतों के कार्य को सुचारू और नियंत्रित करने में मदद करता है। (और पढ़ें - आंतों में सूजन का इलाज)
- मूड (मनोदशा) : मस्तिष्क में मौजूद सेरोटोनिन चिंता, आनंद और मूड को नियंत्रित करने का कार्य करता है। इस रसायन का स्तर कम होने का सीधा संबंध अवसाद से होता है और दवा के माध्यम से सेरोटोनिन का स्तर बढ़ने से आपकी कामोत्तेजना में कमी आ जाती है। (और पढ़ें - मूड को अच्छा बनाने के लिये सूपरफूड)
- जी मिचलाना : सेरोटोनिन की वजह से आपको जी मिचलाने की परेशानी हो सकती है। दस्त होने पर सेरोटोनिन अधिक बनता है और यह शरीर से दूषित भोजन बाहर निकालने में मदद करता है। इतना ही नहीं रक्त में सेरेटोनिन का स्तर बढ़ने से मतली को नियंत्रित करने वाला मस्तिष्क का विशेष हिस्सा उत्तेजित होता है। (और पढ़ें - गर्भावस्था में उल्टी और मतली आना)
- नींद : यह रसायन आपके सोने (नींद) और जागने की क्रिया को नियंत्रित करने वाले मस्तिष्क के हिस्से को उत्तेजित करने का कार्य करता है। (और पढ़ें - नींद की कमी का उपचार)
- रक्त का थक्का बनना : रक्त में मौजूद प्लेटलेट्स घावों को ठीक करने के लिए सेरोटोनिन को स्त्रावित करते हैं। सेरोटोनिन खून को रोकने के लिए रक्त वाहिकाओं के मार्ग को छोटा करता है। (और पढ़ें - विटामिन k की कमी से होने वाले रोग)
- हड्डियों को स्वस्थ रखने के लिए : सेरोटोनिन हड्डियों को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। लेकिन हड्डियों में सेरोटोनिन का अधिक स्तर ऑस्टियोपोरोसिस का कारण बन सकता हैं, इसकी वजह से हड्डियां कमजोर हो जाती हैं। (और पढ़ें - हड्डियों को मजबूत बनाने के लिए जूस)
- यौन गतिविधि : सेरोटोनिन का स्तर कम होने पर कामेच्छा बढ़ जाती है, जबकि सेरोटोनिन का स्तर बढ़ने से कामेच्छा कम हो जाती है।
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सेरोटोनिन और मानसिक स्वास्थ्य - Serotonin aur mansik swasthya in hindi
सेरोटोनिन स्वाभाविक रूप से आपके मनोदशा (मूड) को नियंत्रित करने में मदद करता है। सेरोटोनिन के सामान्य स्तर में आपको निम्न तरह से महसूस होता हैं:
- खुशी (और पढ़ें - खुश रहने के तरीके)
- शांति
- काम पर ध्यान केंद्रित करना
- चिंता में कमीं (और पढ़ें - चिंता दूर करने के लिए योगासन)
- भावनात्मक रूप से स्थिरता
वर्ष 2007 में हुए एक अध्ययन में अवसाद वाले लोगों के शरीर में सेरोटोनिन का निम्न स्तर देखा गया। सेरोटोनिन की कमी चिंता और अनिद्रा की समस्या से भी संबंध रखती है।
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मानसिक स्वास्थ्य और सेरोटोनिन के संबंध में शोधकर्ताओं की अलग-अलग राय हैं। पुराने अध्ययनों में शामिल कुछ शोधकर्ताओं ने सेरोटोनिन की कमी और वृद्धि से अवसाद के संबंध पर सवाल उठाएं हैं, जबकि नए शोधकर्ता इन दोनों के बीच संबंध को स्वीकार करते हैं।
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सेरोटोनिन का सामान्य स्तर क्या है? - Serotonin ka normal level in hindi
आपके खून में सेरोटोनिन का सामान्य स्तर 101-283 नैनोग्राम प्रति मिलीलीटर (एनजी/एमएल) होता है।
हालांकि, यह खून के लिए नमूनों के आधार पर थोड़ा भिन्न हो सकता है, इसलिए टेस्ट के परिणाम को सही से समझने के लिए आप अपने डॉक्टर से बात करें।
सेरोटोनिन का स्तर ज्यादा होना "कार्सिनोइड सिंड्रोम" (Carcinoid syndrome) की ओर संकेत करता है। इसमें लक्षणों का एक समूह देखने को मिलता है, जो निम्न अंगों में ट्यूमर से संबंधित होते हैं:
- छोटी आंत (और पढ़ें - पेट के कैंसर की सर्जरी)
- अपेंडिक्स
- कॉलन (Colon/ बृहदान्त्र) (और पढ़ें - बृहदान्त्र कैंसर का इलाज)
- ब्रोन्कियल ट्यूब (श्वासनलियां) (और पढ़ें - ब्रोंकाइटिस के घरेलू उपाय)
बीमारी की पहचान और उसके इलाज के लिए डॉक्टर आपको रक्त में सेरोटोनिन के स्तर के परीक्षण की सलाह देते हैं।
सेरोटोनिन सिंड्रोम क्या है? - Serotonin syndrome kya hai in hindi
कुछ ऐसी दवाएं हैं जिनको लेने की वजह से सेरोटोनिन का स्तर बढ़ सकता है और यह अतिरिक्त सेरोटोनिन आपके शरीर में इकत्रिति हो सकता है। इससे आपको "सेरोटोनिन सिंड्रोम" (Serotonin Syndrome) हो सकता है। यह सिंड्रोम आमतौर पर किसी नई दवा को लेना शुरू करने या मौजूदा दवा की खुराक को बढ़ाने से हो सकता है।
सेरोटोनिन सिंड्रोम के सामान्य लक्षणों में शामिल हैं:
- शरीर में कंपकंपी
- दस्त (और पढ़ें - दस्त रोकने के उपाय)
- सिरदर्द (और पढ़ें - सिर दर्द के घरेलू उपाय)
- किसी बात को समझने में मुश्किल होना (Confusion)
- आंख की पुतली का फैलना (dilated pupils)
- रोंगटे खड़े होना
इसके गंभीर लक्षणों में निम्न को शामिल किया जाता है:
- मांसपेशियों को मरोड़ (और पढ़ें - मांसपेशियों में ऐंठन के कारण)
- मांसपेशी का सुस्त होना (और पढ़ें - मांसपेशियों में दर्द का इलाज)
- मांसपेशियों की जकड़न (और पढ़ें - मांसपेशियों में दर्द के उपाय)
- तेज बुखार आना (और पढ़ें - बुखार भगाने के उपाय)
- दिल तेजी से धड़कना (और पढ़ें - दिल की धड़कन तेज होने का इलाज)
- हाई बीपी (और पढ़ें - bp kam karne ke upay)
- अनियमित दिल की धड़कन
- मिर्गी
ऐसे कोई लैब टेस्ट नहीं हैं जिससे सेरोटोनिन सिंड्रोम का पता लगाया जा सके। इसलिए इसका पता लगाने के लिए डॉक्टर आपसे कुछ शारीरिक क्रियाएं करवा सकते हैं।
जिन दवाओं के कारण सेरोटोनिन का स्तर बढ़ा है उनको न लेने से सेरोटोनिन सिंड्रोम के लक्षण को एक ही दिन में ठीक किया जा सकता है। इसके अलावा सेरोटोनिन के स्तर को कम करने वाली दवाओं को लेने से भी इस सिंड्रोम को दूर किया जा सकता है।
सेरोटोनिन सिंड्रोम का इलाज न किया जाए तो इससे जान भी जा सकती है।
(और पढ़ें - दवाओं की जानकारी)
सारांश
सेरोटोनिन एक न्यूरोट्रांसमीटर है जो मस्तिष्क और शरीर में कई महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाता है। यह मूड को नियंत्रित करने, भावनात्मक स्थिरता बनाए रखने, और नींद के चक्र को नियमित करने में मदद करता है। सेरोटोनिन का सही स्तर मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देता है और डिप्रेशन, एंग्जायटी जैसी समस्याओं से बचाने में सहायक होता है।



