ब्रेन एमआरआई यानी दिमाग का मैग्नेटिक रिजोनेंस इमेजिंग (MRI) टेस्ट। यह निदान का एक ऐसा तरीका है, जिसमें मैग्नेटिक फील्ड, रेडियो वेव्स और कंप्यूटर की मदद से मस्तिष्क की स्पष्ट छवियां तैयार की जाती हैं।

इस स्कैन प्रोसेस के दौरान, रोगी के चारों ओर मैग्नेटिक फील्ड बनती है। इसके बाद स्कैनर रेडियो तरंगों को भेजता है, जो शरीर में परमाणुओं के संरेखण (एलाइनमेंट) को बदल देती हैं। जब यह परमाणु दोबारा से एलाइन होते हैं, तो वे रेडियो सिग्नल भेजते हैं और स्कैनर इन तरंगों को छवियों में परिवर्तित कर देता है। कई बार छवियों की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए इस प्रोसेज में कंट्रास्ट डाई का प्रयोग किया जाता है।

ब्रेन एमआरआई की मदद से मस्तिष्क में समस्याओं का पता लगाया जा सकता है। यह मस्तिष्क के लिए सबसे संवेदनशील इमेजिंग टेस्ट में से एक है। यह मस्तिष्क में उन हिस्सों की विस्तृत (डीटेल) छवियां प्रदान कर सकता है, जो एक्स-रे या सीटी स्कैन पर अच्छी तरह से नहीं देखे जा सकते हैं।

  1. ब्रेन एमआरआई किसे नहीं कराना चाहिए? - Who cannot have a brain MRI in Hindi?
  2. दिमाग का एमआरआई क्यों किया जाता है? - Why is a brain MRI done in Hindi?
  3. ब्रेन एमआरआई से पहले की तैयारी - Brain MRI Preparation in Hindi?
  4. ब्रेन एमआरआई कैसे किया जाता है? - Dimag ka MRI kaise hota hai in Hindi?
  5. ब्रेन एमआरआई में कैसा महसूस होता है? - How will a brain MRI feel in Hindi?
  6. ब्रेन एमआरआई के परिणामों का क्या मतलब है? - Brain MRI results mean in Hindi?
  7. ब्रेन एमआरआई के जोखिम और लाभ क्या हैं? - Brain MRI risks and benefits in Hindi?
  8. ब्रेन एमआरआई के बाद क्या होता है? - What happens after a brain MRI in Hindi?
  9. कंट्रास्ट बनाम नॉन-कंट्रास्ट ब्रेन एमआरआई - Contrast vs Non-contrast brain MRI in Hindi
  10. ब्रेन एमआरआई के साथ कौन से अन्य टेस्ट किए जा सकते हैं? - Other tests that can be done with a brain MRI in Hindi?

निम्नलिखित व्यक्तियों को एमआरआई स्कैन नहीं कराना चाहिए :

  • गर्भवती महिलाएं, विशेष रूप से पहली तिमाही के दौरान
  • जिन लोगों ने शरीर में मेटल इंप्लांट कराया हो जैसे :
    • इयर इंप्लांट (आंशिक रूप से सुनने में मदद करने वाला एक डिवाइस)
    • एन्यूरिज्म क्लिप (मेटल से बनी क्लिप, जिससे धमनी विस्फार में रक्त के प्रवाह को रोका जाता है)
    • कार्डिएक डिफिब्रिलेटर (हृदय को इलेक्ट्रिकल एनर्जी भेजने वाला डिवाइस)
    • पेसमेकर (दिल की धड़कनों को ट्रैक करने के लिए छाती में लगाई जाने वाली डिवाइस) (और पढ़ें - अनियमित दिल की धड़कन का इलाज)
    • यदि रक्त वाहिकाओं में मेटल क्वॉइल लगा हो
  • शरीर में कहीं भी धातु लगा होने पर

ब्रेन एमआरआई का उपयोग अक्सर उन परिस्थितियों का पता लगाने के लिए किया जाता है, जो मस्तिष्क को प्रभावित करती हैं जैसे :

डॉक्टर निम्नलिखित लक्षणों के कारणों को निर्धारित करने के लिए भी इस टेस्ट को कराने का सुझाव दे सकते हैं :

(और पढ़ें - याददाश्त तेज करने के उपाय)

यदि डॉक्टर इस टेस्ट से पहले कुछ खाने-पीने या दवाओं के सेवन को बंद करने के लिए नहीं कहता है, तो ऐसे में अपने नियमित खानपान को बनाए रखें। टेस्ट से पहले धातु से बनी वस्तुओं को निकालने की जरूरत होती है। इसके अलावा कई बार अस्पताल या नैदानिक सेंटर से गाउन मिलता है, जिसे पहनकर जांच कराना होता है।

यदि आपको बंद स्थानों से डर लगता है, तो इस बारे में डॉक्टर को सूचित करें। वह आपको टेस्ट से पहले सेडेटिव ड्रग्स (चिंता, तनाव, दौरे, घबराहट और नींद से जुड़े विकार में दी जाने वाली दवा) दे सकते हैं। (और पढ़ें - तनाव दूर करने के लिए योग)

यदि आप गर्भवती हैं या आपको कंट्रास्ट मैटेरियल से एलर्जी की समस्या है, तो इस बारे टेस्ट से पहले रेडियोलॉजिस्ट या डॉक्टर से परामर्श करें।

एमआरआई वाले कमरे में धातु से बनी वस्तुएं न ले जाएं, क्योंकि इसकी वजह से आपको चोट लग सकती है। इन वस्तुओं में शामिल हैं :

  • मोबाइल फोन
  • इलेक्ट्रॉनिक घड़ियां
  • कलम (पेन)
  • जेब में रखे जाने वाला चाकू
  • चश्मा
  • आभूषण
  • क्रेडिट या अन्य तरह का कार्ड, जिसमें चिप लगी हो
  • बालों में लगाई जाने वाली पिन

ब्रेन एमआरआई के लिए निम्नलिखित प्रक्रिया को ध्यान में रखा जाता है :

  • सबसे पहले आपको स्कैनिंग टेबल पर लेटने के लिए कहा जाएगा, इस दौरान टेक्नीशियन आपको लेटने में मदद कर सकते हैं। इसके बाद वे आपके सिर के चारों ओर प्लास्टिक की बनी डिवाइस लगाएंगे।
  • यदि कंट्रास्ट डाई लगाने की आवश्यकता होती है, तो इसे बांह में इंजेक्शन के माध्यम से लगाया जाता है। बता दें, शरीर के अंदर की संरचनाओं की विस्तृत या स्पष्ट छवियों (फोटो) को देखने के लिए कई बार डॉक्टर या रेडियालॉजिस्ट एक विशेष डाई का प्रयोग करते हैं। 
  • अब स्‍कैन टेबल धीरे-धीरे मशीन के अंदर जाएगी। मशीन के इस हिस्से को गैंट्री कहा जाता है, यह दिखने में सुरंगनुमा होता है।
  • टेक्नोलॉजिस्ट दूसरे कमरे से स्कैनर को संचालित (ऑपरेट) करेंगे और आपके सिर की छवियां लेंगे।
  • स्कैनर के अंदर स्पीकर लगा होता है, जिसके माध्यम से रेडियोलॉजिस्ट दूसरे कमरे से मरीज से बात करता है।
  • इस प्रक्रिया के दौरान यदि कोई विशेष समस्या होती है तो ऐसे में आप एक विशेष बटन दबा सकते हैं।
  • स्कैनिंग प्रोसस के दौरान बहुत शोर होगा, जिससे बचने के लिए आपको एक हेडसेट दिया जाएगा।
  • टेस्ट के दौरान बिल्कुल हिलना-डुलना नहीं चाहिए, क्योंकि हल्की सी गतिविध करने पर फोटो की गुणवत्ता (क्वॉलिटी) बिगड़ सकती है।

टेस्ट में आमतौर पर 45 मिनट या इससे कम या ज्यादा भी लग सकते हैं।

इस प्रक्रिया के दौरान दर्द नहीं होता है। हालांकि, लंबे समय तक एक ही पोजीशन में रहने की वजह से कुछ लोग असहज महसूस कर सकते हैं।

इस दौरान आपको रुक-रुक कर क्लिक, भिनभिनाने या खटखटाहट जैसी आवाज आ सकती है। टेक्नीशियन आपको शोर से बचने के लिए हेडसेट दे सकते हैं।

टेस्ट के बाद, आप उस हिस्से में गर्मी महसूस कर सकते हैं, जिस हिस्से की स्कैनिंग हुई है।

यदि कंट्रास्ट डाई इंजेक्ट किया जाता है, तो टेस्ट के बाद ठंड लगने, सिरदर्द, मुंह में धातु का स्वाद आना या मतली जैसी समस्या हो सकती है। हालांकि, ये प्रभाव आमतौर पर केवल कुछ ही समय तक रहता है।

(और पढ़ें - सिरदर्द का घरेलू उपचार)

ब्रेन एमआरआई के माध्यम से निम्नलिखित स्थितियों का निदान किया जा सकता है :

(और पढ़ें - ब्रेन स्ट्रोक होने पर क्या करें)

ब्रेन एमआरआई के जोखिम निम्नलिखित हैं :

  • चूंकि इस प्रोसेस के दौरान उच्च तीव्रता में मैग्नेट का इस्तेमाल होता है, ऐसे में यदि कोई मेडिकल डिवाइस इंप्लांट कराई हो, तो उसके खराब होन का जोखिम होता है।
  • दुर्लभ मामलों में, रोगी में कंट्रास्ट डाई की वजह से एलर्जी हो सकती है।
  • किडनी से जुड़ी गंभीर समस्या वाले लोगों में कंट्रास्ट डाई का उपयोग हानिकारक हो सकता है।

एमआरआई के लाभ निम्नलिखित हैं :

  • यह गैर-अकाम्रक प्रक्रिया है, जिसमें रडिएशन का जोखिम नहीं है।
  • दिमाग के चित्र अच्छी गुणवत्ता के साथ तैयार होते हैं, जो अन्य इमेजिंग टेस्ट की तुलना में बेहतर है।
  • यह असामान्यताओं का पता लगाता है
  • शुरुआती अवस्था में ही स्ट्रोक का पता चल सकता है।

टेस्ट के बाद आप सामान्य आहार लेने के साथ सामान्य गतिविधियों में शामिल हो सकते हैं। हालांकि, यदि कंट्रास्ट डाई का उपयोग किया जाता है, तो खुजली, सूजन, चकत्ते या सांस लेने में कठिनाई जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। यदि इंजेक्शन वाली जगह पर दर्द या सूजन पाते हैं, तो इस बारे में डॉक्टर से परामर्श करें। यदि वे आपको सेडिटिव ड्रग्स देते हैं, तो आपको तब तक आराम करने के लिए कहा जाएगा, जब तक कि इसके प्रभाव बंद न हो जाएं।

(और पढ़ें - सांस लेने में तकलीफ हो तो क्या करें)

ब्रेन एमआरआई से प्राप्त होने वाली छवियों की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए कंट्रास्ट डाई का उपयोग किया जा सकता है। डाई को आमतौर पर कुछ स्थितियों जैसे कि ट्यूमर और सेरेब्रल एब्सेस के निदान के लिए सुझाया जाता है। हालांकि, यह एन्यूरिज्म जैसी स्थितियों के निदान के लिए आवश्यक नहीं है।

कंट्रास्ट डाई की वजह से कई बार एलर्जी जैसी समस्या देखी जा सकती है, जबकि नॉन-कंट्रास्ट एमआरआई में इस तरह का जोखिम नहीं होता है। (और पढ़ें - एलर्जी की आयुर्वेदिक दवा क्या है)

कंट्रास्ट एमआरआई के बाद, किसी भी दुष्प्रभाव के बारे में जानने के लिए कुछ देर तक रोगी की निगरानी करनी पड़ती है। हालांकि, आप नॉन-कंट्रास्ट एमआरआई के बाद सीधे घर जा सकते हैं।

कंट्रास्ट एमआरआई किडनी की समस्याओं वाले लोगों के लिए जोखिम भरी हो सकती है, जबकि नॉन-कंट्रास्ट एमआरआई में ऐसा नहीं होता है।

ब्रेन एमआरआई के साथ निम्नलिखित टेस्ट कराने के लिए कहा जा सकता है :

  • लंबर पंचर
  • नर्व फंक्शन स्टडी
  • कैरोटिड अल्ट्रासाउंड
  • सेरेब्रल एंजियोग्राफी
  • इकोकार्डियोग्राम
  • सीटी स्कैन

ध्यान रखना चाहिए कि इन टेस्ट के परिणाम रोगी के नैदानिक स्थितियों से सह-संबद्ध यानी जुड़े होने चाहिए। ऊपर मौजूद जानकारी शैक्षिक दृष्टिकोण से दी गई है और यह किसी भी डॉक्टर द्वारा सुझाई गई मेडिकल सलाह का विकल्प नहीं है।

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संदर्भ

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