myUpchar प्लस+ के साथ पूरेे परिवार के हेल्थ खर्च पर भारी बचत

प्रोलैक्टिन एक हार्मोन होता है जो मस्तिष्क में स्थित पिट्यूटरी ग्रंथि के द्वारा बनाया जाता है। जब कोई महिला गर्भवती होती है या जब शिशु को जन्म देती है, तो उनके प्रोलैक्टिन हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है। प्रोलैक्टिन का स्तर बढ़ने से महिलाओं के स्तनों में दूध बनने लगता है। यदि आप गर्भवती नहीं हैं और यहां तक कि अगर आप पुरुष हैं, तो भी प्रोलैक्टिन का स्तर बढ़ जाना संभव होता है। 

(और पढ़ें - माँ का दूध बढ़ाने के तरीके)

यह हार्मोन पुरुषों व महिलाओं दोनों के प्रजनन स्वास्थ्य के लिए जरूरी होता है। किसी व्यक्ति के खून में प्रोलैक्टिन के स्तर की कम या ज्यादा मात्रा उसकी प्रजनन क्षमता को प्रभावित भी कर सकती है। इस बात की स्पष्ट जानकारी नहीं है कि पुरुषों में प्रोलैक्टिन के मुख्य काम क्या होते हैं। हालांकि प्रोलैक्टिन परीक्षण का उपयोग पुरुषों और महिलाओं दोनों में यौन संतुष्टि को मापने के लिए किया जाता है। हार्मोन के कारण होने वाली अन्य समस्याओं का पता लगाने के लिए भी प्रोलैक्टिन परीक्षण की मदद ली जा सकती है। 

खून के सेंपल में प्रोलैक्टिन के स्तर की जांच करने के बाद डॉक्टर समस्या के लिए संभव इलाज का सुझाव दे सकते हैं। 

(और पढ़ें - यौन शक्ति बढ़ाने के उपाय)

  1. प्रोलैक्टिन परीक्षण क्या होता है? - What is Prolactin Test in Hindi?
  2. प्रोलैक्टिन परीक्षण क्यों किया जाता है - What is the purpose of Prolactin Test in Hindi
  3. प्रोलैक्टिन परीक्षण से पहले - Before Prolactin Test in Hindi
  4. प्रोलैक्टिन परीक्षण के दौरान - During Prolactin Test in Hindi
  5. प्रोलैक्टिन परीक्षण के बाद - After Prolactin Test in Hindi
  6. प्रोलैक्टिन परीक्षण के क्या जोखिम होते हैं - What are the risks of Prolactin Test in Hindi
  7. प्रोलैक्टिन परीक्षण के परिणाम का क्या मतलब होता है - What do the results of Prolactin Test mean in Hindi
  8. प्रोलैक्टिन परीक्षण कब करवाना चाहिए? - When to get tested with Prolactin Test in Hindi

प्रोलैक्टिन परीक्षण क्या है?

यह टेस्ट खून में प्रोलैक्टिन नामक हार्मोन के स्तर की जानकारी देता है। प्रोलैक्टिन परीक्षण की मदद से पता लगाया जाता है कि कहीं खून में प्रोलैक्टिन का स्तर सामान्य से ऊपर या नीचे तो नहीं है। 

(और पढ़ें - खून की कमी)

प्रोलैक्टिन परीक्षण क्यों किया जाता है?

इस टेस्ट का उपयोग निम्न स्थितियों का पता लगाने और उनको मैनेज करने के लिए किया जाता है:

प्रोलैक्टिन परीक्षण​ करने से पहले क्या किया जाता है?

प्रोलैक्टिन टेस्ट​ करवाने से पहले आपको कोई विशेष प्रकार की तैयारी करवाने की आवश्यकता नहीं होती है। टेस्ट करवाने के लिए आपको लैब या अस्पताल में अपने खून का सेंपल देना पड़ता है। 

कुछ गर्भनिरोधक गोलियांहाई ब्लड प्रेशर या डिप्रेशन को रोकने वाली दवाएं प्रोलैक्टिन परीक्षण​ के रिजल्ट में गड़बड़ी कर सकती हैं। अगर आप इनमें से कोई भी दवा यहां तक कि अगर आप किसी भी प्रकार की दवाएं खा रहे हैं, टेस्ट करवाने से पहले ही डॉक्टर को इस बारे में बता देना चाहिए। तनाव बढ़ना, नींद से जुड़ी समस्याएं या फिर टेस्ट से पहले अधिक कठोर व्यायाम करने से भी टेस्ट का रिजल्ट प्रभावित हो सकता है। 

(और पढ़ें - ज्यादा नींद आना)

प्रोलैक्टिन परीक्षण​ कैसे किया जाता है?

प्रोलैक्टिन परीक्षण को सामान्य ब्लड टेस्ट की तरह ही किया जाता है। इस टेस्ट को अस्पताल या लेबोरेटरी में किया जाता है और यह कुछ ही मिनटों में हो जाता है। टेस्ट को करने के लिए आपकी नस से खून का सेंपल निकाला जाता है, खासतौर पर खून, आपकी बाजू की नस से ही निकाला जाता है।

सबसे पहले जहां से सेंपल निकालना होता है उस जगह को एंटिसेप्टिक के साथ साफ किया जाता है। उसके बाद नस में सुई लगाई जाती है और खून को सुई से जुड़े सीरिंज या शीशी में भर लिया जाता है। सुई लगने के दौरान कुछ लोगों को चुभन तो कुछ लोगों को हल्का सा दर्द महसूस होता है और बाद में कुछ समय के लिए त्वचा पर निशान भी पड़ सकता है।

आप मासिक धर्म के दौरान भी किसी भी समय प्रोलैक्टिन टेस्ट करवा सकते हैं। प्रोलैक्टिन हार्मोन का स्तर दिनभर बदलता रहता है। हालांकि नींद के दौरान या नींद से उठने के तुरंत बाद प्रोलैक्टिन का स्तर अधिक होता है। इसलिए प्रोलैक्टिन टेस्ट को आमतौर पर आपके उठने के तीन से चार घंटों के बाद किया जाता है।

(और पढे़ें - मासिक धर्म के दौरान दर्द)

प्रोलैक्टिन परीक्षण के बाद क्या किया जाता है?

सेंपल के लिए खून निकालने के बाद आपकी नस में से सुई को निकाल लिया जाता है और उस जगह पर रुई का टुकड़ा या बैंडेज लगा दी जाती है। डॉक्टर आपको सुई वाली जगह पर कुछ देर के लिए हल्का सा दबाव देकर रखने के लिए भी कह सकते हैं। खून निकालने के तुरंत बाद कोई कठोर व्यायाम नहीं करना चाहिए। जहां पर सुई लगी थी यदि वहां पर आपको दर्द, सूजन या लालिमा महसूस हो रही है या फिर वहां से कोई तरल निकल रहा है तो तुरंत इस बारे में डॉक्टर को बताएं।

(और पढ़ें - व्यायाम करने का सही समय)

प्रोलैक्टिन परीक्षण के क्या जोखिम होते हैं?

प्रोलैक्टिन परीक्षण में कुछ प्रकार की जटिलताएं होने का जोखिम भी होते हैं। खून निकालने के बाद सुई वाली जगह पर नीला निशान पड़ जाता है। सुई निकालने के तुरंत बाद कुछ मिनट तक उस जगह पर हल्का सा दबाव रखने से निशान पड़ने की संभावनाएं कम हो जाती हैं। खून निकालने के बाद आपको सिर घूमने या बेहोशी जैसा महसूस हो सकता है। 

बहुत ही कम मामलों में टेस्ट होने के बाद नस में सूजन आ जाती है, इस समस्या को फिलीबाइटिस कहा जाता है। फिलीबाइटिस को ठीक करने के लिए सूजन ग्रस्त नस की किसी गर्म वस्तु से सिकाई करें। 

यदि आपको खून संबंधी कोई विकार है तो सुई निकालने के बाद आपका खून लगातार बहता रह सकता है। इसके अलावा “एस्पिरिन” (Aspirin) या “वारफेरिन” (Warfarin) जैसी खून को पतला करने वाली दवाएं भी खून बहने का कारण बन सकती हैं। यदि आप ऐसी किसी भी प्रकार की दवा खा रहे हैं, तो परीक्षण से पहले ही डॉक्टर को इस बारे में बता दें। 

(और पढ़ें - खून का थक्का जमना)

प्रोलैक्टिन परीक्षण के रिजल्ट का क्या मतलब होता है?

खून में प्रोलैक्टिन की सामान्य मात्रा निम्न होती है:

  • पुरुष: 2 से 8 नैनोग्राम प्रति मिलीलीटर (ng/mL)
  • महिलाएं जो गर्भवती नहीं हैं: 2 से 29 नैनोग्राम प्रति मिलीलीटर
  • गर्भवती महिलाएं: 10 से 209 नैनोग्राम प्रति मिलीलीटर

खून में प्रोलैक्टिन का सामान्य से अधिक स्तर - 

यदि आपके प्रोलैक्टिन का स्तर सामान्य सीमा से कम आता है तो जरूरी नहीं कि इसका मतलब यही होता है कि आपको किसी प्रकार की समस्या है। यदि आप टेस्ट करवाने से तुरंत पहले कुछ खाकर जाते हैं या फिर टेस्ट के दौरान आप अत्यधिक तनाव में हैं तो भी आपके प्रोलैक्टिन का स्तर बढ़ सकता है। 

साथ ही अलग-अलग लेबोरेटरी के अनुसार प्रोलैक्टिन के स्तर की सामान्य सीमा भी अलग-अलग हो सकती है। 

यदि आपके प्रोलैक्टिन का स्तर अधिक है (सामान्य से 1000 गुना अधिक) तो यह आप में “प्रोलैक्टिनोमा” (Prolactinoma) होने  का संकेत हो सकता है। प्रोलैक्टिनोमा एक पिट्यूटरी ग्रंथि में एक ट्यूमर होता है, यह कैंसर युक्त नहीं होता और इसका इलाज दवाओं किया जा सकता है। ऐसी स्थिति होने पर डॉक्टर आपको एमआरआई स्कैन करवाने का सुझाव दे सकते हैं। 

(और पढ़ें - ब्रेन ट्यूमर का इलाज)

खून में प्रोलैक्टिन का स्तर सामान्य से कम होना - 

यदि आपके प्रोलैक्टिन हार्मोन का स्तर सामान्य से कम हो गया है तो इसका मतलब हो सकता है कि आपकी पिट्यूटरी ग्रंथि पूरी तरह से काम नहीं कर पा रही है। इस स्थिति को “हाइपोपिट्यूटरिज्म” (Hypopituitarism) कहा जाता है। प्रोलैक्टिन के निम्न स्तर में आमतौर पर इलाज करवाने की आवश्यकता नहीं पड़ती। 

कुछ दवाएं भी हैं जो प्रोलैक्टिन के स्तर को कम कर सकती हैं, जैसे:

  • डोपामाइन (Dopamine), ये दवाएं सदमा से ग्रस्त लोगों को दी जाती है। 
  • लेवाडोपा (Levodopa), इस दवा का इलाज पार्किंसंस रोग के मरीज़ों के लिए किया जाता है
  • अरगट अल्कालॉएड डेरिवेटिव्स (Ergot alkaloid derivatives), गंभीर सिर दर्द का इलाज करने के लिए इस दवा का इस्तेमाल किया जाता है। 

(और पढ़ें - थायराइड के लक्षण)

प्रोलैक्टिन परीक्षण कब करवाना चाहिए?

यदि आपको निम्न में से कोई लक्षण महसूस होता है, तो डॉक्टर प्रोलैक्टिन टेस्ट करवाने का सुझाव दे सकते हैं:

महिलाओं में - 

पुरुषों में - 

पुरुषों व महिलाओं दोनों में होने वाली समस्याएं - 

(और - दूर दृष्टि दोष)

प्रोलैक्टिन परीक्षण की जांच का लैब टेस्ट करवाएं

Prolactin

20% छूट + 10% कैशबैक

LH,FSH,Prolactin

20% छूट + 10% कैशबैक
और पढ़ें ...

References

  1. MedlinePlus Medical Encyclopedia: US National Library of Medicine; Prolactin blood test
  2. ReproductiveFacts.org [Internet]. American Society for Reproductive Medicine; Hyperprolactinemia (High Prolactin Levels)
  3. Copyright © South Tees Hospitals NHS Foundation Trust. National Health Service. UK; Prolactin
  4. Practice Committee of American Society for Reproductive Medicine. Current evaluation of amenorrhea.. Fertil Steril. 2008 Nov;90(5 Suppl):S219-25. PMID: 19007635
  5. Janet A. Schlechte. The Macroprolactin Problem. The Journal of Clinical Endocrinology & Metabolism, Volume 87, Issue 12, 1 December 2002, Pages 5408–5409.
  6. National Institute of Diabetes and Digestive and Kidney Diseases [internet]: US Department of Health and Human Services; Prolactinoma