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कैंसर कई तरह का होता है व आज के समय में इसके मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। इसके प्रकोप से युवा भी अछूते नहीं हैं। कैंसर में कोलन यानि आंत का कैंसर भी बड़ी तेजी से लोगों को अपना शिकार बना रहा है। 

आंत के कैंसर पर हाल ही में एक शोध किया गया है, जिसमें यह जानने की कोशिश की गई है कि क्या ज्यादा एंटीबायोटिक लेने से कोलन कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।

एक नए अध्ययन के अनुसार, जब हम कुछ विशेष प्रकार की एंटीबायोटिक दवाएं कई बार या लंबे समय तक लेते हैं, तो ऐसे में आपको कोलन कैंसर (आंत का कैंसर) का खतरा हो सकता है। शोधकर्ताओं ने पाया कि जैसे-जैसे लोगों में एंटीबायोटिक का उपयोग बढ़ा, उनमें आंत के कैंसर का खतरा भी बढ़ता गया। विशेष रूप से, यह जोखिम एनारोबिक बैक्टीरिया (जो ऑक्सीजनयुक्त वातावरण में विकसित होता है) को खत्म करने के लिए इस्तेमाल होने वाली एंटीबायोटिक दवाओं से जुड़ा था। इनमें पेनिसिलिन और सेफलोस्पोरिन जैसी सामान्य दवाएं शामिल हैं।

यह निष्कर्ष एंटीबायोटिक दवाओं और आंत के कैंसर के बीच संबंध को दिखाते हैं, लेकिन कोलन कैंसर विशेषज्ञ के अनुसार, इस संबंध का कारण अब तक स्पष्ट नहीं हो पाया है और ऐसा हो सकता है कि एंटीबायोटिक सीधा कोलन कैंसर पर प्रभाव नहीं डालती हों। 

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न्यूयॉर्क शहर के मेमोरियल स्लोन केटरिंग कैंसर सेंटर में कोलोन कैंसर सर्जन डॉ. इम्मानोइल पपोउ का कहना है कि, यह जोखिम उन लोगों में सबसे ज्यादा था, जो एंटीबायोटिक दवाओं का उपयोग लंबे समय से (30 से 60 दिन या इससे अधिक) कर रहे थे।

इसके अलावा उन्होंने कहा कि "जिन लोगों पर परीक्षण किया गया था, शोधकर्ताओं को उनकी डाइट और एक्सरसाइज रूटीन के बारे में कोई जानकारी नहीं थी और यह चीजें ध्यान में रखनी जरूरी थीं क्योंकि ये कारक कोलन कैंसर के जोखिम को प्रभावित कर सकते हैं। इस स्थिति में कई प्रश्नों का जवाब नहीं मिल पाया है।" पपोउ ने कहा, "एंटीबायोटिक दवाओं का उपयोग लंबे समय तक करने के कारण कोलन कैंसर होने की पुष्टि को लेकर और अधिक शोध किए जाने की आवश्यकता है।"

बल्टीमोर, मेरीलैंड (अमेरिका) में स्थित जॉन्स हॉपकिंस विश्वविद्यालय में मेडिकल प्रोफेसर व वरिष्ठ शोधकर्ता डॉ. सिंथिया सियर्स ने गट माइक्रोबायोम के माध्यम से बताया कि एंटीबायोटिक्स कोलन कैंसर के जोखिम को कैसे प्रभावित करती हैं। गट माइक्रोबायोम का मतलब कोलन में प्राकृतिक रूप से इकट्ठा होने वाले बैक्टीरिया और अन्य माइक्रोब्स से है।

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हाल के शोध में यह सुझाव दिया गया कि शरीर में मौजूद जीवाणुओं के संतुलन का स्वास्थ्य पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। सियर्स के अनुसार, गट माइक्रोबायोम में गड़बड़ी आने पर कैंसर बढ़ाने वाले बैक्टीरिया का विकास हो सकता है। शोध में कहा गया है कि कुछ बैक्टीरिया जैसे कि ई कोलाई (E. coli) कुछ मामलों में आंत के कैंसर का कारण बन सकता है। 

सियर्स ने आगे कहा कि "हद से ज्यादा एंटीबायोटिक का प्रयोग करना किसी बड़ी समस्या का रूप ले सकता है। इस विषय में डॉक्टर और मरीजों दोनों को ही शिक्षित करने की जरूरत है। इसका मतलब है कि सर्दी जुकाम जैसे वायरल संक्रमण के लिए एंटीबायोटिक्स नहीं लेनी चाहिए। उनके अनुसार एंटीबायोटिक वायरस की जगह बैक्टीरिया को टारगेट करती हैं। इसलिए संभव हो तो एंटीबायोटिक को लंबे समय तक लेने से बचना चाहिए। यह रिपोर्ट गट पत्रिका में 21अगस्त, 2019 को ऑनलाइन प्रकाशित हुई थी। 

यह निष्कर्ष मध्यम और वृद्ध वर्ग के 1,66,000 से अधिक मरीजों से 1989 और 2012 के बीच एकत्र की गई जानकारी के आधार पर निकाला गया है। इनमें से लगभग 29,000 लोगों में कभी न कभी कोलन या रेक्टल कैंसर पाया गया था।

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