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कई बार आपके साथ भी ऐसा होता होगा ना कि बिस्तर पर जाने के घंटों बाद भी नींद नहीं आती और आप करवट बदलते रहते हैं। कभी लगता है कि ठंड लग रही है, कभी गर्मी लग रही है, कभी तकिया सही नहीं है, लेकिन सारी चीजें सही करने के बाद भी नींद का कुछ पता नहीं होता। यह तो हम सभी जानते हैं कि रोजाना कम से कम 7 घंटे की लगातार और चैन की नींद बेहद जरूरी है। ताकि हमारा शरीर और दिमाग सही तरीके से कार्य कर सकें। अगर शरीर को पर्याप्त नींद न मिले तो सेहत से जुड़ी कई तरह की समस्याएं हो सकती हैं, जिसमें संज्ञानात्मक क्रियाओं पर पड़ने वाला असर भी शामिल है।

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कभी-कभार बीच रात में पानी पीने के लिए या टॉइलेट के लिए उठना सामान्य सी बात है, लेकिन अगर रोजाना आपके साथ यही हो कि बीच रात में आपकी नींद खुल जाए और फिर गहरी नींद न आए तो इसकी वजह से नींद की कमी की समस्या हो सकती है। अगर किसी व्यक्ति को बिस्तर पर जाने के बाद नींद आने में या फिर एक बार सो जाने के बाद गहरी नींद लेने या फिर सोते रहने में समस्या महसूस हो रही हो तो इसके कई कारण हो सकते हैं। लिहाजा समस्या का कारण पता करना जरूरी है कि आखिर किस वजह से बार-बार बीच रात में आपकी नींद खुल जाती है।

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इस आर्टिकल में हम आपको उन 7 सामान्य कारणों के बारे में बता रहे हैं जो बीच रात में आपकी नींद खुलने की वजह बन सकते हैं।

  1. बीच रात में नींद खुलने का कारण है देर शाम की कॉफी
  2. बीच रात में नींद खुलने का कारण है अल्कोहल
  3. बीच रात में नींद खुलने का कारण है स्लीप एपनिया
  4. तनाव की वजह से भी बीच रात में खुल जाती है नींद
  5. पोस्ट ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर भी है नींद खुलने का कारण
  6. बीच रात में नींद खुलने का कारण है मेनोपॉज
  7. डायबिटीज की वजह से भी रात में खुल सकती है नींद
  8. बेहतर नींद के लिए टिप्स
  9. बीच रात में क्यों खुल जाती है नींद, ये हैं 7 कारण के डॉक्टर

कॉफी का संबंध सतर्कता से है क्योंकि इसमें मौजूद कैफीन तंत्रिका तंत्र को उत्तेजित कर आपको चौकस रखने का काम करता है। कॉफी, एक साइकोऐक्टिव पदार्थ है (मूड और बाकी मानसिक प्रक्रियाओं को प्रभावित करने वाला) जिसका दुनियाभर में सबसे ज्यादा सेवन किया जाता है। अगर आप भी ऑफिस में थकान भरे दिन के बाद देर शाम एक गर्म कॉफी पी लेते हैं तो यह शरीर की थकान उतारने के साथ ही बॉडी क्लॉक को भी डिस्टर्ब करने का काम करता है। नींद पर कैफीन का क्या असर होता है यह सिर्फ इस बात पर निर्भर नहीं करता कि आपने सोने से पहले कितने कैफीन का सेवन किया है बल्कि इस बात पर भी निर्भर करता है कि आपने दिनभर में कितनी मात्रा में कैफीन का सेवन किया है खासतौर पर शाम के समय।

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इससे बचने के लिए क्या करें

  • जहां तक संभव हो कैफीन से परहेज करें- इसमें कॉफी के साथ ही एनर्जी ड्रिंक और सॉफ्ट ड्रिंक जैसी चीजें भी शामिल हैं- खासकर शाम और रात के समय। आप चाहें तो कुछ दिनों तक कॉफी के सेवन और नींद के पैटर्न के बीच क्या संबंध है इस पर नजर रखकर दिन में आखिरी कप कॉफी कब पीनी है, इसका एक टाइम भी सेट कर सकते हैं।

बहुत से लोगों का ऐसा मानना है कि रात में सोने से पहले अगर अल्कोहल का छोटा ड्रिंक लिया जाए तो नींद आने में मदद मिलती है। इसमें कोई शक नहीं कि अल्कोहल, अवसादक (डिप्रेसेंट) होता है और इसलिए इसके सेवन से व्यक्ति को ऊंघाई आने लगती है और इसलिए जल्दी सोने में मदद मिलती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि अल्कोहल के सेवन के बाद नींद को बढ़ावा देने वाले केमिकल एडिनोसिन का उत्पादन शरीर में बढ़ जाता है। हालांकि, यह केमिकल जितनी जल्दी बढ़ता है उतनी ही तेजी से कम भी हो जाता है और इसलिए व्यक्ति की नींद पूरी होने से पहले ही बीच रात में नींद खुल जाती है।

अल्कोहल के सेवन के बाद अच्छी और गहरी नींद न आने का एक और कारण ये है कि यह आरइएम स्लीप को ब्लॉक कर देता है जिसे आमतौर पर नींद के सबसे स्वास्थ्यकर प्रकार के तौर पर देखा जाता है। आरइएम स्लीप में कमी की वजह से बीच रात में मदहोशी में व्यक्ति की नींद खुल जाती है।

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क्या करें

  • सीमित मात्रा में अल्कोहल का सेवन करें- डॉक्टरों का सुझाव है कि पुरुषों को रोजाना 2 छोटी ड्रिंक और महिलाओं को 1 छोटी ड्रिंक की लिमिट को सेट कर लेना चाहिए और इससे अधिक का सेवन बिलकुल नहीं करना चाहिए।
  • जहां तक संभव हो देर शाम में या रात के समय ड्रिंक करने से बचें।

स्लीप एपनिया नींद से जुड़ी एक गंभीर बीमारी है जिसमें मुंह और कंठ के ऊत्तक वायुमार्ग को बंद कर देते हैं जिससे सोते वक्त श्वसन क्रिया में रुकावट आने लगती है। ऐसे में आपका मस्तिष्क तुरंत आपको जगा देता है ताकि आप फिर से दोबारा सही तरीके से सांस ले पाएं और इस वजह से बीच रात में आपकी नींद खुल जाती है। इसका सबसे असरदार इलाज ये है कि आप एक ऐसी ब्रीदिंग मशीन लगाकर सोएं जो आपके वायुमार्ग को खुला रखने में आपकी मदद करे।

क्या करें
अगर आपको निम्नलिखित में से कोई भी लक्षण खुद में नजर आए तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें:

  • आपके साथ कई बार ऐसा हुआ है जब नींद में सोते वक्त आपकी सांस रुक गई हो
  • दम घुटने या हांफने की वजह से अचानक नींद खुल गई हो
  • पार्टनर से आपको पता चलता है कि आप बहुत तेज खर्राटे लेते हैं (और पढ़ें - खर्राटे रोकने के घरेलू उपाय)
  • 7 से 8 घंटे बिस्तर पर आराम करने के बाद भी आपको थकान महसूस होती है और दिन के समय नींद आती रहती है

अगर आपको किसी बात का स्ट्रेस है तो इसका भी आपकी नींद पर सीधा असर पड़ सकता है, लेकिन कैसे और क्यों इसका स्पष्ट कारण कई बार पता नहीं चल पाता है। कई बार तो बेहद साधारण सी चीजें जैसे- घर शिफ्ट करना भी आपके तनाव का कारण हो सकता है जिसकी वजह से नींद की कमी होने लगती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि जब हम तनाव में होते हैं तो शारीरिक और मनोवैज्ञानिक उत्तेजना की वजह से शरीर और दिमाग रिलैक्स नहीं हो पाता और बिस्तर में जाने के बाद भी या तो नींद नहीं आती और अगर आ भी जाती है तो गहरी नींद नहीं आती और बीच रात में नींद खुल जाती है।

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इससे बचने के लिए क्या करें

  • शरीर और दिमाग दोनों को रिलैक्स करने के लिए मेडिटेशन करें। इन दिनों कई ऐप्स भी मौजूद हैं तो तनाव को कम करने में आपकी मदद कर सकते हैं।
  • आप चाहें तो दिन के समय कुछ शारीरिक क्रियाएं और एक्सरसाइज कर सकते हैं लेकिन शाम के समय या रात के समय वर्कआउट न करें क्योंकि इससे भी नींद में रुकावट आ सकती है।

अगर हाल के दिनों में आप किसी तरह के ट्रॉमा या सदमे से गुजरे हों तो इसका भी चैन से सोने या गहरी नींद पर असर पड़ता है। पीटीएसडी यानी पोस्ट ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर का अनुभव करने वाले लोग अक्सर उस घटना के बारे में सोचते रहते हैं, उन्हें बुरे सपने आते हैं जिसका उनकी नींद पर सीधा असर पड़ता है। पीटीएसडी की समस्या सैनिकों के अलावा कार दुर्घटना में बचने वाले लोग, रेप पीड़िता, घरेलू हिंसा का शिकार हुए लोग और अब कोविड-19 के कुछ मरीजों में भी देखने को मिल रहा है। (और पढ़ें - हर 7 में से 1 व्यक्ति  है तनावग्रस्त, इस लिस्ट में आप भी तो नहीं

जिन लक्षणों को आपको नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, वे हैं:

  • भावनात्मक सुन्नता महसूस होना और उन जगहों, लोगों और गतिविधियों से परहेज करना जो उस हादसे या सदमे की याद दिलाते हों
  • नींद आने में या चीजों पर फोकस करने में दिक्कत महसूस होना
  • बहुत जल्दी गुस्सा आना या चिड़चिड़ापन महसूस होना (और पढ़ें- गुस्सा कैसे कम करें)

अगर आप महिला हैं और आपकी उम्र 40 साल से अधिक है और बीच रात में बहुत अधिक पसीना निकलने की वजह से आपकी नींद खुल जाती है तो आप इसके लिए मेनोपॉज या रजोनिवृत्ति को दोष दे सकती हैं। इस दौरान शरीर में मौजूद हार्मोन्स में काफी उतार-चढ़ाव होता है जिसकी वजह से मेनोपॉज से जुड़े हॉट फ्लैश और रात के समय पसीना निकलने जैसी समस्याएं होती हैं। इसकी वजह से न सिर्फ आपको असहजता महसूस होती है बल्कि स्लीप साइकिल भी प्रभावित होता है। अगर आपको खुद में ये लक्षण दिख रहे हों तो गाइनैकॉलजिस्ट से संपर्क करें।

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क्या करें

  • सोने से पहले ठंडे पानी से नहाएं। अगर बीच रात में पसीना निकलने की वजह से नींद खुल जाए तो अपनी कलाई पर ठंडा पानी डालें
  • अगर संभव हो तो बिस्तर के पास ही पंखा लगाकर रखें और अपने बेडरूम को ठंडा रखने की कोशिश करें

अगर भारत के 7 करोड़ 70 लाख लोगों की तरह आपको भी डायबिटीज की समस्या है तो हो सकता है कि इन निम्नलिखित कारणों की वजह से आपकी भी बीच रात में नींद खुल जाती हो:

  • रात में कई घंटे तक भोजन न करने की वजह से ब्लड शुगर लो हो जाता है जिससे भूख लगती है और नींद खुल जाती है। जिन लोगों को रात्रि संबंधी हाइपोग्लाइसीमिया की समस्या हो वे पसीने की वजह से भी रात में जग जाते हैं।
  • रात में कई बार पेशाब करने के लिए उठना भी डायबिटीज के मरीजों में अनियंत्रित ब्लड शुगर का संकेत है।
  • पेरिफेरल न्यूरोपैथी और रेस्टलेस लेग्स सिंड्रोम (डायबिटीज से संबंधित समस्याएं) की वजह से भी अक्सर हाथ और पैर में सुन्नता, सनसनाहट या तेज दर्द महसूस होता है जिसकी वजह से बीच रात में नींद खुल जाती है।

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क्या करें

  • अपने ब्लड शुगर लेवल को मॉनिटर करें और दवाइयों के साथ ही सही समय पर भोजन करके डायबिटीज को कंट्रोल में रखें
  • अगर नींद की समस्या फिर भी जारी रहे तो डॉक्टर से संपर्क करें

शारीरिक और मानसिक- दोनों ही तरह की सेहत बनी रहे इसके लिए अच्छी तरह से सोना और नींद लेना बेहद जरूरी है। अगर आपको नींद आने में दिक्कत महसूस हो रही हो तो अपने रोजाना के सोने का एक रूटीन बनाएं और उसे फॉलो करें। आप चाहें तो अच्छी नींद के लिए आयुर्वेद से जुड़े कुछ टिप्स या फिर इन चीजों को फ़ॉलो कर सकते हैं:

  • सोने से ठीक पहले भारी भोजन या उत्तेजकों का सेवन करने से बचें
  • सोने से ठीक पहले गर्म पानी से नहाना भी शरीर को रिलैक्स करने में मदद करता है
  • आप चाहें तो सोने से पहले मन को शांत करने वाला संगीत भी सुन सकते हैं
  • जहां तक संभव हो अतिरिक्त इलेक्ट्रॉनिक सामानों को बेडरूम से बाहर कर दें और सोने से कम से कम 30 मिनट पहले हर तरह के इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस का इस्तेमाल बंद कर दें
  • कमरे में भारी पर्दे लगाएं ताकि रोशनी न आए और अगर नाइट लैंप यूज कर रहे हों तो उसकी भी रोशनी मद्धम कर दें
Dr. Siddharth Rawat

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References

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  3. Christopher Drake, PhD, Gary Richardson, MD, Timothy Roehrs, PhD, Holly Scofield, BA, Thomas Roth, PhD Vulnerability to Stress-related Sleep Disturbance and Hyperarousal Sleep, Volume 27, Issue 2, March 2004, Pages 285–291
  4. Marie Bruyneel Sleep disturbances in menopausal women: Aetiology and practical aspects Maturitas, Volume 81, Issue 3, 2015, Pages 406-409
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