सेक्स के बारे में जब भी चर्चा होती है, तो हम मास्टरबेशन, इंटरकोर्स व इजैक्युलेशन जैसे शब्दों के बारे में बात करते हैं, लेकिन सेक्स से जुड़े हेल्थ कंडीशन के बारे में अभी भी कई विषय ऐसे हैं, जिन्हें जानना और समझना जरूरी है. इसलिए आज इस लेख में हम पायोस्पर्मिया के बारे में समझेंगे, क्योंकि यह कंडीशन पुरुषों के लिए गंभीर भी हो सकती है.
- पायोस्पर्मिया क्या है?
- क्या पायोस्पर्मिया गंभीर समस्या है?
- क्या पायोस्पर्मिया सामान्य है?
- पायोस्पर्मिया के लक्षण क्या हैं?
- पायोस्पर्मिया के कारण
- पायोस्पर्मिया का निदान
- पायोस्पर्मिया का इलाज
- पायोस्पर्मिया की समस्या दूर रहने के लिए क्या करें?
- डॉक्टर से कब संपर्क करें?
- अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- सारांश
पायोस्पर्मिया क्या है?
पायोस्पर्मिया ऐसी स्थिति है, जिसकी वजह से वीर्य में मौजूद वाइट ब्लड सेल्स की संख्या असामान्य रूप से अधिक हो जाती है. वीर्य एक तरल पदार्थ की तरह होता है, जो ऑर्गेज्म के दौरान पुरुष के पेनिस से डिस्चार्ज होता है. प्रोटीन, विटामिन और मिनरल से बने तरल पदार्थ वीर्य में मौजूद होते हैं, जो शुक्राणु को ऊर्जा प्रदान करने में सहायक होते हैं.
रिसर्च के अनुसार, वाइट ब्लड सेल्स (ल्यूकोसाइट्स) इम्यून सिस्टम का हिस्सा होता है, जो इंफेक्शन से लड़ने में मददगार होते हैं. वहीं, वाइट ब्लड सेल्स रिएक्टिव ऑक्सीजन स्पीशीज़ (आरओएस) रिलीज करते हैं, जो अधिक शक्तिशाली होते हैं और यही संक्रमण पैदा करने वाले जीवों को नष्ट करने में भी सहायक होते हैं. हालांकि, आरओएस स्पर्म के साथ-साथ हेल्दी टिशू को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं. आरओएस की वजह से स्पर्म मेम्ब्रेन को नुकसान पहुंच सकता है, स्पर्म की गतिविधि पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है और यह स्पर्म के डीएनए को नुकसान पहुंचा सकता है.
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क्या पायोस्पर्मिया गंभीर समस्या है?
यदि आप बायोलॉजिकल संतान चाहते हैं, तो पायोस्पर्मिया की स्थिति गंभीर साबित हो सकती है, क्योंकि इसका असर प्रजनन क्षमता पर पड़ सकता है. वहीं, असिम्प्टोटिक पायोस्पर्मिया का प्रजनन क्षमता पर असर नहीं पड़ता है. असिम्प्टोटिक पायोस्पर्मिया का मतलब होता है कि आपके ब्लड में वाइट ब्लड सेल्स लेवल ज्यादा हैं. 5% से भी कम लोग जिनमें फर्टिलिटी की समस्या होती हैं, उन्हें पायोस्पर्मिया हो सकता है.
क्या पायोस्पर्मिया सामान्य है?
रिसर्च के अनुसार सीमेन में वाइट ब्लड सेल्स की थोड़ी मात्रा होना सामान्य है. अगर किसी को पायोस्पर्मिया की समस्या है, तो इसका मतलब है कि वीर्य में वाइट ब्लड सेल्स की मात्रा उच्च है यानी प्रति 1 मिलीलीटर (एमएल) वीर्य में 1 मिलियन से अधिक वाइट ब्लड सेल्स. ऐसे में इसके लक्षणों को समझना जरूरी है.
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पायोस्पर्मिया के लक्षण क्या हैं?
पायोस्पर्मिया की समस्या होने पर इसके लक्षण निम्नलिखित हो सकते हैं -
- बुखार आना.
- सूजन आना.
- पेशाब करते समय दर्द या बेचैनी महसूस होना.
- पीला वीर्य आना.
पायोस्पर्मिया से पीड़ित कुछ लोगों में ये लक्षण नजर नहीं भी आ सकते हैं.
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पायोस्पर्मिया के कारण
पायोस्पर्मिया के कारणों में शामिल हो सकते हैं -
- संक्रमण की समस्या.
- मूत्रमार्ग में सूजन होने की समस्या.
- प्रोस्टेट में सूजन की समस्या होना.
- ऑटोइम्यून रोग होना.
- मूत्रमार्ग के सिकुड़ की समस्या होना.
- यौन संचारित संक्रमण (एसटीआई), जिसमें हर्पीस, गोनोरिया और क्लैमाइडिया की समस्या होना.
- अंडकोष की नसों में सूजन की समस्या होना.
- सिस्टमेटिक इलनेस यानी ऐसी बीमारी जिसका असर पूरे शरीर पर नकारात्मक पड़ सकता है.
- बार-बार स्खलन की समस्या होना.
- तम्बाकू उत्पाद और शराब का सेवन करना.
इन ऊपर बताई गई स्थितियों में पायोस्पर्मिया की समस्या शुरू हो सकती है. इसके अलावा, कुछ अन्य कारण भी हो सकते हैं -
- ई. कोली
- माइकोप्लाज्मा
- यूरियाप्लाज्मा
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पायोस्पर्मिया का निदान
पायोस्पर्मिया का निदान निम्नलिखित तरह से किया जाता है -
- पेशेंट की मेडिकल हिस्ट्री समझकर.
- सेक्शुअल हेल्थ और उनसे जुड़े लक्षणों को जानकार.
- शारीरिक जांच.
- यूटीआई टेस्ट.
- जननांग अंगों का एक्स-रे, एमआरआई या सीटी स्कैन.
- यूरिन फ्लो टेस्ट.
- यूरिन टेस्ट.
मरीज की समस्या के आधार पर इनमें से कोई भी टेस्ट करने की सलाह दे सकते हैं.
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पायोस्पर्मिया का इलाज
पायोस्पर्मिया का इलाज इसके कारणों पर निर्भर करता है. डॉक्टर आवश्यकता के अनुसार पायोस्पर्मिया के इलाज के लिए एंटीबायोटिक दवाएं एवं ओवर-द-काउंटर मिलने वाली दवाएं नॉनस्टेरॉइडल एंटी-इंफ्लेमेटरी दवा लेने के लिए कह सकते हैं. इसके अलावा, डॉक्टर पेशेंट की मेडिकल हिस्ट्री को ध्यान में रखकर अन्य दवाएं भी लेने की सलाह दे सकते हैं.
नोट: पायोस्पर्मिया की समस्या को दूर करने के लिए ओवर-द-काउंटर दवाओं का सेवन अपनी मर्जी से न करें, सिर्फ डॉक्टर से ही सलाह लें.
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पायोस्पर्मिया की समस्या दूर रहने के लिए क्या करें?
पायोस्पर्मिया की समस्या से बचने के लिए निम्नलिखित बातों का ध्यान रखें -
- सेक्स के दौरान कंडोम का इस्तेमाल करें.
- अगर STI की समस्या हो तो पार्टनर के साथ शरीर संबंध न बनाएं.
- STI की जांच समय-समय पर करवाते रहें.
- तंबाकू या इससे बने उत्पादों का सेवन न करें.
- मारिजुआना का सेवन न करें.
- शराब का सेवन बिल्कुल न करें.
नोट: पायोस्पर्मिया संक्रामक रोग नहीं है, लेकिन इसके कारण होने वाले कुछ संक्रमण संक्रामक हो सकते हैं. पायोस्पर्मिया का कारण बनने वाले किसी भी संक्रमण का इलाज किया जा सकता है. यदि एसटीआई के कारण पायोस्पर्मिया होता है, तो आपको और आपके पाटर्नर को डॉक्टर से इलाज करवाना चाहिए. ध्यान रखें कि सेक्शुअली ट्रांसमिटेड इंफेक्शन होने की स्थिति में दोनों पार्टनर को डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.
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डॉक्टर से कब संपर्क करें?
निम्नलिखित स्थितियों में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए -
- पायोस्पर्मिया के लक्षण नजर आने पर.
- किसी भी एक पाटर्नर को यह समस्या होने पर.
- महिला को गर्भधारण करने 1 वर्ष से ज्यादा का वक्त लग रहा हो.
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
अपने सवालों के जवाब यहाँ पाएं।
पायोस्पर्मिया क्या है?
पायोस्पर्मिया वह स्थिति है जब पुरुष के वीर्य में वाइट ब्लड सेल्स की मात्रा असामान्य रूप से बढ़ जाती है। यह कोशिकाएँ संक्रमण से लड़ती हैं, लेकिन अधिक संख्या में होने पर शुक्राणु को नुकसान पहुंचा सकती हैं और प्रजनन क्षमता घटा सकती हैं।
क्या यह सामान्य बात है?
थोड़ी मात्रा में वाइट ब्लड सेल्स वीर्य में होना सामान्य है, लेकिन जब एक मिलिलीटर वीर्य में एक मिलियन से ज्यादा कोशिकाएँ हों, तो इसे असामान्य माना जाता है। यह स्थिति फर्टिलिटी पर असर डाल सकती है।
पायोस्पर्मिया होने का असर क्या होता है?
इससे शुक्राणु की गतिशीलता और DNA को नुकसान हो सकता है, जिससे गर्भधारण की संभावना कम हो जाती है। हालांकि, अगर कोई लक्षण नहीं हैं तो असर सीमित रहता है।
सारांश
पायोस्पर्मिया की समस्या होने पर डॉक्टर से बात करना बेहतर विकल्प है, क्योंकि डॉक्टर मरीज की मेडिकल कंडीशन और शारीरिक अवश्यकताओं को ध्यान में रखकर ही दवा देते हैं, ताकि मरीज को बेहतर लाभ मिल सके.
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