कार्डियोमायोप्लास्टी एक सर्जरी प्रोसीजर है, जिसे हार्ट फेलियर के इलाज के लिए किया जाता है। पहले इसे “डायनेमिक कार्डियोमायोप्लास्टी” के रूप में किया जाता था, जिसमें पीठ या पेट की मांसपेशी को निकालकर उसे हृदय के चारों और लपेट दिया जाता था। लेकिन अब इसे “सेलुलर कार्डियोमायोप्लास्टी” के रूप में किया जाता है, जिसमें हृदय के क्षतिग्रस्त हिस्से में इंजेक्शन की मदद से कोशिकाएं (सेल्स) डाली जाती हैं। हार्ट फेलियर ऐसी स्थिति है, जिसमें हृदय शरीर के सभी हिस्सों में पर्याप्त रूप से रक्त पंप नहीं कर पाता है। वैसे तो हार्ट फेलियर की स्थिति में हार्ट ट्रांसप्लांट सर्जरी को अधिक महत्व दिया जाता है। लेकिन हृदय प्रत्यारोपण के लिए व्यक्ति को ढूंढने और अन्य मानदंडों को पूरा करने में होने वाली समस्याओं के कारण कई बार कार्डियोमायोप्लास्टी सर्जरी करने पर विचार किया जा सकता है।

कार्डियोमायोप्लास्टी से पहले डॉक्टर आपको कुछ परीक्षण करवाने के लिए कह सकते हैं, जिनकी मदद से आपकी स्वास्थ्य संबंधी सारी जानकारियां ली जाती हैं।

कार्डियोमायोप्लास्टी सर्जरी करने में सिर्फ 15 मिनट का ही समय लगता है। सर्जरी के बाद जब आपको अस्पताल से छुट्टी मिल जाती है, तो आपको घर पर विशेष देखभाल करने की जरूरत होती है। आपको समय पर सभी दवाएं लेने और नियमित रूप से डॉक्टर से जांच करवाते रहने की सलाह दी जाती है, ताकि आपके शरीर को जल्द से जल्द स्वस्थ होने में मदद मिले।

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  1. कार्डियोमायोप्लास्टी क्या है - What is Cardiomyoplasty in Hindi
  2. कार्डियोमायोप्लास्टी किसलिए की जाती है - Why is Cardiomyoplasty done in Hindi
  3. कार्डियोमायोप्लास्टी से पहले - Before Cardiomyoplasty in Hindi
  4. कार्डियोमायोप्लास्टी के दौरान - During Cardiomyoplasty in Hindi
  5. कार्डियोमायोप्लास्टी के बाद - After Cardiomyoplasty in Hindi
  6. कार्डियोमायोप्लास्टी की जटिलताएं - Complications of Cardiomyoplasty in Hindi
  7. कार्डियोमायोप्लास्टी के डॉक्टर

कार्डियोमायोप्लास्टी किसे कहते हैं?

कार्डियोमायोप्लास्टी हार्ट फेलियर का इलाज करने के लिए की जाने वाली एक सर्जिकल प्रक्रिया है। हार्ट फेलियर को कंजेस्टिव हार्ट फेलियर भी कहा जाता है। इस स्थिति में हृदय शरीर में रक्त को पर्याप्त रूप से पंप नहीं कर पाता है। यह स्थिति धीरे-धीरे गंभीर होने में कई साल लग जाते हैं और इसी प्रकार आपकी शारीरिक गतिविधियां कम होती रहती हैं। हार्ट फेलियर की स्थिति का इलाज करने के लिए मुख्य रूप से हार्ट ट्रांसप्लांट सर्जरी को ही चुना जाता है। हालांकि, हार्ट डोनर आसानी से न मिल पाने के कारण और अन्य कई ऐसे मानदंड पूरे न हो पाने के कारण हार्ट ट्रांसप्लांट सर्जरी करना थोड़ा मुश्किल हो जाता है। ऐसी स्थितियों में ही कार्डियोमायोप्लास्टी सर्जरी को चुना जाता है।

कार्डियोमायोप्लास्टी की शुरुआती सर्जरी प्रोसीजर में पेट या पीठ के किसी हिस्से से मांसपेशी निकाली जाती थी और उसे हृदय के चारों ओर लपेट दिया जाता था, इस प्रक्रिया को डायनेमिक कार्डियोमायोप्लास्टी कहा जाता है। इस प्रक्रिया में मांसपेशी को हृदय के चारों ओर लपेटने के बाद हृदय को काम करने में मदद मिलती थी। हालांकि, अब इस प्रक्रिया को नहीं किया जाता है, क्योंकि नई तकनीकों की तुलना में इससे कम लाभ प्राप्त होते हैं। इसकी जगह पर अब सेलुलर कार्डियोमायोप्लास्टी सर्जरी की जाती है। सेलुलर कार्डियोमायोप्लास्टी में हृदय के क्षतिग्रस्त हिस्से में कुछ विशेष प्रकार की कोशिकाओं का इंजेक्शन लगाया जाता है, जिन्हें स्टेम सेल्स भी कहा जाता है। स्टेम सेल्स को इंजेक्शन के अलावा किसी अन्य तरीके से भी दिया जा सकता है। ये कोशिकाएं हृदय की कार्य क्षमता को बढ़ाती हैं और हार्ट फेलियर के लक्षणों को कम करती हैं।

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कार्डियोमायोप्लास्टी क्यों की जाती है?

यदि आपको हार्ट फेलियर के लक्षण महसूस हो रहे हैं और किसी कारण से हार्ट ट्रांसप्लांट सर्जरी संभव नहीं है, तो कार्डियोमायोप्लास्टी सर्जरी की जा सकती है। हार्ट फेलियर के लक्षणों में निम्न को शामिल किया जा सकता है -

कार्डियोमायोप्लास्टी किसे नहीं करवानी चाहिए?

निम्न कुछ स्थितियों के बारे में बताया गया है, जिनमें कार्डियोमायोप्लास्टी नहीं की जाती है और अगर करनी जरूरी है, तो विशेष देखभाल करते हुए की जाती है -

  • यदि हृदय की मांसपेशियां 5 मिमी से भी पतली हैं, तो सेलुलर कार्डियोमायोप्लास्टी सर्जरी को न करने पर विचार किया जा सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि मांसपेशी अधिक पतली होने पर उसमें छिद्र होने का खतरा अधिक बढ़ जाता है।
  • यदि किसी कारण से आप एमआरआई स्कैन नहीं करवा सकते हैं, तो हो सकता है आपकी कार्डियोमायोप्लास्टी सर्जरी न की जाए। ऐसा इसलिए क्योंकि इस सर्जरी प्रोसीजर को करते समय एमआरआई स्कैन की मदद पड़ती है।
  • यदि आपके गुर्दे खराब हैं और आपको किडनी डायलिसिस की जरूरत है तो भी कार्डियोमायोप्लास्टी नहीं की जा सकती है।

इसके अलावा कुछ अन्य स्थितियां भी हैं, जिनके कारण कार्डियोमायोप्लास्टी न करने की सलाह दी जा सकती है। इनमें निम्न शामिल हैं -

  • रक्त संबंधी विकार
  • पहले या हाल ही में हुआ कैंसर
  • पहले हृदय की कई सर्जरी हुई होना
  • लेफ्ट वेंट्रिकल एन्यूरिज्म
  • प्रीऑपरेटिव स्टेरॉयड थेरेपी
  • वाल्व संबंधी रोग जिनमें सर्जरी की जरूरत पड़े
  • लगातार 6 दिनों से कोरोनरी संबंधी कोई गंभीर रोग होना

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कार्डियोमायोप्लास्टी सर्जरी से पहले क्या तैयारी करें?

कार्डियोमायोप्लास्टी सर्जरी से कुछ दिन पहले आपको अस्पताल बुलाया जाएगा और आपके कुछ विशेष टेस्ट किए जाएंगे, जैसे -

सर्जरी से कुछ दिन पहले ही डॉक्टर आपको निम्न की सलाह दे सकते हैं -

  • आपसे आपके स्वास्थ्य संबंधी पिछली सभी जानकारियां ली जाएंगी। यदि हाल ही में आपको कोई रोग हुआ है या फिर आप किसी दीर्घकालिक रोग से ग्रस्त हैं, तो डॉक्टर को इस बारे में बता दें। यदि आपको किसी भी चीज से एलर्जी है, तो भी डॉक्टर को आप इस बारे में बता सकते हैं।
  • यदि आप किसी भी प्रकार की कोई दवा, हर्बल उत्पाद, विटामिन, मिनरल या कोई अन्य सप्लीमेंट ले रहे हैं, तो डॉक्टर को इस बारे में बता दें। एस्पिरिन, आईबुप्रोफेन व वारफेरिन जैसी दवाएं और कुछ प्रकार के विटामिन रक्त को पतला करते हैं, डॉक्टर सर्जरी से कुछ दिन पहले इनका सेवन बंद करने की सलाह दे सकते हैं।
  • यदि आप धूम्रपान, शराब या कोई अन्य नशा करते हैं, तो इस बारे में डॉक्टर को बता दें। डॉक्टर सर्जरी से कुछ दिन पहले और बाद तक इन्हें छोड़ने की सलाह दे सकते हैं, ऐसा इसलिए क्योंकि ये सर्जरी के बाद आपके ठीक होने की प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं।
  • सर्जरी वाले दिन आपको खाली पेट रहने की सलाह दी जाती है। खाले पेट रहने के लिए आपको ऑपरेशन वाले दिन से पहली आधी रात के बाद कुछ भी न खाने या पीने की सलाह दी जा सकती है।
  • ऑपरेशन वाले दिन अस्पताल आने से पहले आपको सभी आभूषण व गैजेट आदि को घर पर ही रखकर आने को कहा जाता है और ढीले-ढाले कपड़े पहनने की सलाह दी जाती है।
  • आपको अपने साथ किसी करीबी रिश्तेदार या मित्र को लाने की सलाह दी जाती है, ताकि वह सर्जरी से पहले के कार्यों में आपकी मदद कर सके और सर्जरी के बाद आपको घर ले जाए।

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कार्डियोमायोप्लास्टी सर्जरी कैसे की जाती है?

इस सर्जरी प्रक्रिया में सर्जन हृदय की क्षतिग्रस्त हुई कोशिकाओं को बदलने के लिए कुछ विशेष प्रकार की स्टेम सेल कोशिकाओं का इंजेक्शन लगाते हैं, जैसे एम्ब्रियोनिक बोन मेरो या स्केलेटल मसल सेल्स।

जब आप ऑपरेशन के लिए अस्पताल पहुंच जाते हैं, तो मेडिकल स्टाफ आपको एक विशेष ड्रेस पहनने के लिए देते हैं, जिसे हॉस्पिटल गाउन कहा जाता है। सर्जरी के दौरान आपको दवाएं व अन्य आवश्यक द्रव देने के लिए आपकी बांह में सुई लगाकर, उसमें इंट्रावेनस लाइन शुरू कर दी जाती है। आपको जनरल एनेस्थीसिया का इंजेक्शन लगा दिया जाता है, जिसकी मदद से आप गहरी नींद में सो जाते हैं और आपको सर्जरी के दौरान कुछ भी महसूस नहीं होता है। यदि सर्जरी वाले स्थान पर बाल हैं, तो उन्हें शेव कर दिया जाता है और एंटीसेप्टिक की मदद से उस हिस्से को साफ कर दिया जाता है। इसकी मदद से संक्रमण होने का खतरा कम हो जाता है।

इसके बाद कार्डियोमायोप्लास्टी सर्जरी के दौरान हृदय में स्टेम सेल डालने की दो अलग-अलग प्रक्रियाओं में से एक का चुनाव किया जाता है, जिनमें निम्न शामिल हैं -

एपिकार्डियल ओर एंडोवैस्कुलर डिलीवरी एप्रोच

इस सर्जिकल प्रक्रिया को कन्वेश्नल या मिनी-थोराएक्टोमी मेथड से किया जा सकता है, जो निम्न के अनुसार हैं -

  • सर्जन छाती की हड्डी के ऊपर एक चीरा लगाते हैं, जिसकी मदद से वह हिस्सा दिखने लगता है जिसमें इंजेक्शन लगाया जाना है।
  • इसके बाद हृदय की मांसपेशी में कई इंजेक्शन लगाए जाते हैं, जिनमें कोशिकाओं युक्त एक विशेष घोल होता है।
  • अधिकतम संख्या में इन कोशिकाओं को हृदय के क्षतिग्रस्त हिस्से के आस-पास डाला जाता है और कुछ मात्रा में क्षतिग्रस्त हिस्से में डाली जाती हैं।
  • हर एक इंजेक्शन लगने के बाद सर्जन उस हिस्से को उंगली की मदद से हल्का-हल्का दबाते हैं, ताकि कोशिकाओं युक्त घोल में रिसाव न रहे।
  • जब सभी इंजेक्शन लग जाते हैं, तो चीरे को बंद करके टांके लगा देते हैं।

कैथीटर-बेस्ड सेल इंप्लांटेशन

इस प्रक्रिया में एक पतली ट्यूब (कैथीटर) की मदद से हृदय में कोशिकाएं पहुंचाई जाती है। कैथीटर हृदय में सही जगह पर लगा है या नहीं इसकी पुष्टि करने के लिए एमआरआई स्कैन की मदद ली जा सकती है। कैथीटर-बेस्ड सेल इंप्लांटेशन के दौरान हृदय में कोशिकाएं डालने के लिए निम्न प्रक्रियाओं की मदद ली जा सकती है -

  • इंट्राकोरोनरी एप्रोच -
    इसमें हृदय की किसी रक्त वाहिका तक कोशिकाएं पहुंचाने के लिए एक कैथीटर का इस्तेमाल किया जाता है। यह रक्त वाहिका हृदय के क्षतिग्रस्त हिस्से तक कोशिकाओं को पहुंचा देती है। इस प्रक्रिया में विशेष प्रकार की कोशिकाओं का इस्तेमाल किया जाता है, जैसे बोन मेरो और ब्लड प्रोजेनिटर सेल्स आदि।
     
  • इंट्रामायोकार्डियल एप्रोच -
    इसमें कैथीटर या इंजेक्शन की मदद से कोशिकाओं को हृदय की मांसपेशियों में इंजेक्ट किया जाता है।
     
  • इंट्रावेनस एप्रोच -
    इस प्रक्रिया में नस में सुई लगाकर कैथीटर से जोड़ दिया जाता है और फिर नस में ही कोशिकाएं डाली जाती हैं। बाद में ये कोशिकाएं नस से हृदय तक पहुंच जाती हैं।

हृदय के अंदर सेल्स इंजेक्ट करने की प्रक्रिया में लगभग 15 मिनट का समय लगता है। सर्जरी के बाद जब आपको होश आता है, तो आपको आपकी नाक में एक ट्यूब लगी मिलती है। यह ट्यूब आपको ऑक्सीजन देने के लिए होती है। सर्जरी के बाद होने वाले दर्द को नियंत्रित करने के लिए आपको कुछ दर्द निवारक दवाएं दी जा सकती हैं। सर्जरी के बाद आपको तरल पदार्थ दिए जा सकते हैं। कार्डियोमायोप्लास्टी के बाद दो हफ्तों तक वेंट्रिकुलर एरिद्मिया (दिल की धड़कन असामान्य होना) होने का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए डॉक्टर सर्जरी के बाद आपके स्वास्थ्य की करीब से देखभाल करते हैं।

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कार्डियोमायोप्लास्टी के बाद की देखभाल?

ऑपरेशन के बाद आपको कुछ दिनों तक रिकवरी रूम में शिफ्ट कर दिया जाता है। आपको कितने दिन तक अस्पताल में भर्ती रखना है, यह आपके स्वास्थ्य पर निर्भर करता है। जब आपको अस्पताल से छुट्टी दी जा रही होती है, तो घर पर निम्न देखभाल करने की सलाह दी जाती है -

घाव की देखभाल

  • घाव वाली जगह पर किसी प्रकार की क्रीम, मलहम या अन्य दवाएं न लगाएं
  • सर्जरी के दौरान लगभग छह हफ्तों तक घाव को गीला न होने दें
  • नहाना या शॉवर लेना शुरू करने से पहले डॉक्टर से अनुमति ले लें
  • सर्जरी वाले हिस्से को सूखा व साफ रखें
  • ढीले-ढाले व आरामदायक कपड़े पहनें

दवाएं

  • सर्जरी के बाद आपको कुछ दिन तक दर्द व अन्य तकलीफ हो सकती हैं, जिनके लिए डॉक्टर दर्द निवारक दवाएं देते हैं।
  • ऑपरेशन के बाद आपको कुछ समय तक एंटी एरिदमिक दवाएं दी जा सकती हैं, जो हृदय की असामान्य धड़कनों को नियंत्रित रखते हैं।

शारीरिक गतिविधियां

  • डॉक्टर आपको कुछ विशेष एक्सरसाइज करना सिखा सकते हैं, जिनकी मदद से आपको सर्जरी के बाद जल्दी ठीक होने में मदद मिलेगी।
  • अधिक भारी वस्तुएं न उठाएं, ऐसा करने से सर्जरी के बाद लगाए गए टांके हिल सकते हैं और सर्जरी के घाव पर दबाव पड़ सकता है।
  • ऑपरेशन के 6 से 12 हफ्तों के बाद आपको अपनी दिनचर्या के सामान्य कार्य करने की सलाह दी जा सकती है।
  • सर्जरी के बाद चलने या सार्वजनिक यातायात साधनों से यात्रा करने से पहले डॉक्टर से अनुमति ले लें।

डॉक्टर को कब दिखाएं?

यदि कार्डियोमायोप्लास्टी के बाद आपको निम्न में से कोई भी लक्षण महसूस हो रहा है, तो जल्द से जल्द डॉक्टर से इस बारे में बात कर लेनी चाहिए -

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कार्डियोमायोप्लास्टी से क्या जोखिम हो सकते हैं?

कार्डियोमायोप्लास्टी से होने वाले कुछ जोखिम व जटिलताएं सर्जरी के दौरान इस्तेमाल की गई स्टेम सेल के प्रकार पर निर्भर करते हैं, जिनमें निम्न शामिल हैं -

  • एरिद्मिया
  • सर्जरी वाले हिस्से पर स्थायी निशान (स्कार) बनना
  • ट्यूमर विकसित होना
  • कई जगह पर इंजेक्शन लगाने के कारण वेंट्रिकुलर फट जाना

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Dr. Peeyush Jain

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कार्डियोलॉजी
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