डायबिटीज होने पर व्यक्ति में ब्लड शुगर का स्तर बढ़ जाता है. जब ब्लड शुगर का स्तर अधिक होता है, तो व्यक्ति को कई परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है. यह डायबिटिक कोमा का कारण बन सकता है. दरअसल, जब ब्लड शुगर का स्तर अधिक होता है, तो व्यक्ति को बार-बार पेशाब आता है. इसकी वजह से व्यक्ति डिहाइड्रेट होने लगता है. डिहाइड्रेशन डायबिटिक कोमा का मुख्य कारण बन सकता है. डायबिटिक कोमा आमतौर पर टाइप 2 डायबिटीज वाले लोगों को अधिक प्रभावित करता है. इसके अलावा, यह बुजुर्गों, लंबे समय से बीमार लोगों में भी डायबिटिक कोमा आम होता है.
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आज इस लेख में आप डायबिटिक कोमा के लक्षण, कारण और इलाज के बारे में विस्तार से जानेंगे -
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- डायबिटिक कोमा क्या होता है?
- डायबिटिक कोमा के लक्षण
- डायबिटिक कोमा के कारण
- डायबिटिक कोमा का इलाज
- डायबिटिक कोमा से कैसे बचें?
- सारांश
डायबिटिक कोमा क्या होता है?
डायबिटिक कोमा जानलेवा हो सकता है. अगर किसी को डायबिटीज है, तो खतरनाक रूप से हाई ब्लड शुगर या लो ब्लड शुगर डायबिटिक कोमा का कारण बन सकता है. डायबिटीज कोमा तब हो सकता है, जब रक्त शर्करा का स्तर बहुत अधिक हो जाता है या बहुत कम हो जाता है. इस स्थिति में व्यक्ति का शरीर काफी डिहाइड्रेट हो जाता है. अगर डायबिटिक कोमा का समय पर इलाज नहीं किया जाता है, तो व्यक्ति की मृत्यु भी हो सकती है.
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डायबिटिक कोमा के लक्षण
डायबिटिक कोमा हाई ब्लड शुगर और लो ब्लड शुगर दोनों स्थितियों में हो सकता है. इसलिए, इसके लक्षण स्थितियों पर ही निर्भर करते हैं. अगर किसी के ब्लड शुगर का स्तर अधिक रहता है, तो वह डायबिटिक कोमा में निम्न लक्षणों का अनुभव कर सकता हैं -
- बार-बार प्यास लगना
- बार-बार पेशाब आना
- धुंधला दिखना
- थकान या कमजोरी
- सिरदर्द
- मतली और उल्टी
- सांस लेने में कठिनाई
- पेट में दर्द
- सांसों से बदबू आना
- मुंह ड्राई होना
अगर किसी का ब्लड शुगर का स्तर बहुत कम हो गया है, तो इस स्थिति में भी डायबिटीज कोमा हो सकता है, जिसके लक्षण निम्न प्रकार से हो सकते हैं -
- चिंता
- थकान
- उनींदापन
- कमजोरी
- पसीना आना
- भूख लगना
- त्वचा पर झुनझुनापन महसूस होना
- चक्कर आना
- बोलने में कठिनाई होना
- भ्रम होना
- बेहोशी
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डायबिटिक कोमा के कारण
डायबिटिक कोमा कई कारणों की वजह से हो सकता है. जब डायबिटीज रोगियों में ब्लड शुगर का स्तर अधिक होता है, तो इससे व्यक्ति की स्थिति खराब हो जाती है. डायबिटीज की वजह से होने वाली समस्याएं कोमा का कारण बन सकती हैं. इनमें शामिल हैं -
डायबिटिक कीटोएसिडोसिस
शरीर में केटोन्स नामक ब्लड एसिड का स्तर अधिक होने पर डायबिटिक कीटोएसिडोसिस की समस्या होती है. यह स्थिति तब विकसित होती है जब शरीर पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन का उत्पादन नहीं कर पाता है. इंसुलिन, ग्लूकोज को कोशिकाओं में प्रवेश करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. ग्लूकोज, मांसपेशियों और अन्य टिश्यू के लिए ऊर्जा का प्रमुख स्रोत होता है. पर्याप्त इंसुलिन के अभाव में शरीर फ्यूल के रूप में फैट का इस्तेमाल करना शुरू कर देता है. इस प्रक्रिया के कारण रक्त में कीटोन्स नामक ब्लड एसिड बढ़ने लगते हैं. समय पर इसकी पहचान और इलाज न हो पाने के कारण डायबिटिक कीटोएसिडोसिस की स्थिति हो सकती है, जिससे डायबिटिक कोमा जैसी स्थिति हो सकती है.
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डायबिटिक हाइपरोस्मोलर सिंड्रोम
अगर ब्लड शुगर लेवल 600 mg/dL या 33.3 mmol/L से ऊपर चला जाता है, तो इस स्थिति को डायबिटिक हाइपरोस्मोलर सिंड्रोम कहा जाता है. जब ब्लड शुगर अधिक होता है, तो अतिरिक्त शुगर रक्त से मूत्र में चला जाता है. इससे ऐसी प्रक्रिया ट्रिगर होती है, जो शरीर से बड़ी मात्रा में तरल पदार्थ खींचती है. अगर इसका इलाज न किया जाए, तो इससे जानलेवा डिहाइड्रेशन और डायबिटिक कोमा का सामना करना पड़ सकता है.
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हाइपोग्लाइसीमिया
दिमाग को काम करने के लिए ग्लूकोज की जरूरत होती है. गंभीर हाइपोग्लाइसीमिया यानी ब्लड शुगर का स्तर ज्यादा कम होने पर मरीज बेहोश हो सकता है. कम ब्लड शुगर की समस्या अधिक इंसुलिन या पर्याप्त भोजन न करने के कारण हो सकती है. जरूरत से ज्यादा व्यायाम करने या शराब पीने से भी ऐसा हो सकता है, जिस कारण डायबिटिक कोमा जैसी स्थिति हो सकती है.
डायबिटिक कोमा के अन्य कारण निम्न प्रकार से हो सकते हैं -
- डिहाइड्रेशन
- संक्रमण
- हार्ट अटैक
- किडनी फेलियर
- कुछ दवाइयां (मूत्रवर्धक, दिल की दवाएं या स्टेरॉयड)
- खून का बहना
- अल्सर
- खून का थक्का बनना
- अनियंत्रित रक्त शर्करा
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डायबिटिक कोमा का इलाज
डायबिटिक कोमा में व्यक्ति को आपातकालीन चिकित्सा उपचार की जरूरत होती है. डायबिटिक कोमा का इलाज ब्लड शुगर के स्तर पर ही निर्भर करता है -
- अगर किसी के ब्लड शुगर का स्तर अधिक होता है, तो लिक्विड डाइट लें. इसके साथ ही डॉक्टर मरीज को पोटेशियम, सोडियम या फॉस्फेट सप्लीमेंट भी लेने की सलाह दे सकते हैं. ये कोशिकाओं को सही ढंग से चलाने में मदद करते हैं.
- अगर किसी का रक्त शर्करा का स्तर बहुत कम है, तो डॉक्टर उसे ग्लूकागन इंजेक्शन लगा सकते हैं. इससे ब्लड शुगर तेजी से बढ़ेगा. इससे डायबिटिक कोमा के लक्षणों में आराम मिलेगा. ग्लूकागन इंजेक्शन तब दिया जाता है, जब ब्लड शुगर का स्तर 70 mg/dL से कम होता है. इस स्थिति में डॉक्टर ब्लड शुगर को बढ़ाने के लिए इंट्रावेनस डेक्सट्रोज भी दे सकते हैं. ब्लड शुगर कम होने पर व्यक्ति को इंसुलिन नहीं देना चाहिए.
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डायबिटिक कोमा से कैसे बचें?
डायबिटिक कोमा से बचना आसान है. इसके लिए कुछ बातों को ध्यान में रखना जरूरी होता है -
- ब्लड शुगर के स्तर को सामान्य रखने की कोशिश करें.
- इसके लिए डाइट का खास ख्याल रखें.
- फिजिकली रूप से एक्टिव रहें यानी रोजाना एक्सरसाइज करें.
- योग और प्राणायाम भी जरूर करना चाहिए.
- तनाव मुक्त रहने की कोशिश करें.
- रात को पूरी नींद लें, लेकिन अधिक नींद लेने से भी बचें.
- रोजाना 8-10 गिलास पानी जरूर पिएं. इससे शरीर दिनभर हाइड्रेट रहेगा.
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सारांश
डायबिटिक कोमा एक मेडिकल इमरजेंसी है. अगर किसी का ब्लड शुगर का स्तर अधिक या कम रहता है, तो उसे यह समस्या हो सकती है. यह समस्या उन लोगों में अधिक देखने को मिलती है, जिनमें ब्लड शुगर का स्तर नियंत्रण में नहीं रहता है. यह जानलेवा हो सकती है. इसलिए, अगर आपको हाई या लो ब्लड शुगर के साथ ही कमजोरी, हाई फीवर, सिरदर्द, बेचैनी, बोलने में दिक्कत जैसे लक्षणों का अनुभव हो, तो इन्हें बिल्कुल भी नजरअंदाज न करें. इन स्थितियों में तुरंत डॉक्टर से कंसल्ट करें.
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डायबिटिक कोमा के लक्षण, कारण व इलाज के डॉक्टर
Dr. Narayanan N K
एंडोक्राइन ग्रंथियों और होर्मोनेस सम्बन्धी विज्ञान
16 वर्षों का अनुभव
Dr. Tanmay Bharani
एंडोक्राइन ग्रंथियों और होर्मोनेस सम्बन्धी विज्ञान
15 वर्षों का अनुभव
Dr. Sunil Kumar Mishra
एंडोक्राइन ग्रंथियों और होर्मोनेस सम्बन्धी विज्ञान
23 वर्षों का अनुभव








