ब्रेस्ट ऑग्मेंटेशन एक सर्जरी प्रोसीजर है, जिसे स्तनों का आकार बढ़ाने के लिए किया जाता है। यह सर्जरी उन महिलाओं के लिए की जाती है, जो अपने स्तनों के छोटे आकार से खुश नहीं है। इसके अलावा यदि किसी महिला के ब्रेस्ट में ट्यूमर या सिस्ट था, जिसकी सर्जरी के बाद स्तन का आकार छोटा पड़ गया है, तो उसके लिए भी ब्रेस्ट ऑग्मेंटेशन सर्जरी करवानी पड़ सकती है। इस सर्जरी में स्तन पर कई जगह पर चीरे लगाए जाते हैं, जिसमें इंप्लांट और फैटी टिश्यू डाले जाते हैं। स्तनों का आकार बढ़ाने की सर्जरी से कुछ सामान्य जोखिम हो सकते हैं जैसे संक्रमण और हीमेटोमा

इसमें लगाए गए इंप्लांट स्थायी नहीं होते हैं, इन्हें कुछ साल बाद बदलना पड़ता है। इसलिए ब्रेस्ट ऑग्मेंटेशन सर्जरी के बाद आपको नियमित रूप से डॉक्टर से जांच करवाने और किसी भी प्रकार की समस्या का संकेत महसूस होने पर डॉक्टर को इस बारे में बताने की सलाह दी जाती है।

कुछ मामलों में ब्रेस्ट ऑग्मेंटेशन सर्जरी पुरुषों के लिए भी की जा सकती है, ताकि उनके सीने की रूपरेखा में सुधार किया जा सके।

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  1. ब्रेस्ट ऑग्मेंटेशन क्या है - What is Breast augmentation in Hindi
  2. ब्रेस्ट ऑग्मेंटेशन किसलिए की जाती है - Why is Breast augmentation done in Hindi
  3. ब्रेस्ट ऑग्मेंटेशन से पहले - Before Breast augmentation in Hindi
  4. ब्रेस्ट ऑग्मेंटेशन के दौरान - During Breast augmentation in Hindi
  5. ब्रेस्ट ऑग्मेंटेशन के बाद - After Breast augmentation in Hindi
  6. ब्रेस्ट ऑग्मेंटेशन की जटिलताएं - Complications of Breast augmentation in HIndi

स्तनों का आकार बढ़ाने की सर्जरी किसे कहते हैं?

ब्रेस्ट ऑग्मेंटेशन को “ऑग्मेंटेशन मैमोप्लास्टी” भी कहा जाता है, यह स्तनों का आकार बढ़ाने के लिए की जाने वाली एक सर्जरी प्रोसीजर है। इस प्रोसीजर में स्तनों में इंप्लांट लगाए जाते हैं या फिर शरीर के किसी अन्य हिस्से से ऊतकों को निकाल कर लगा दिया जाता है। शरीर के किसी अन्य हिस्से से फैटी ऊतकों को स्तनों में लगाने के प्रोसीजर को “फैट ट्रांसफर ब्रेस्ट ऑग्मेंटेशन” कहा जाता है। इस सर्जरी प्रोसीजर से स्तनों के आकार को बढ़ाने व दोनों स्तनों को एक सामान बनाने में मदद मिलती है।

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स्तनों का आकार बढ़ाने की सर्जरी क्यों की जाती है?

ब्रेस्ट ऑग्मेंटेशन सर्जरी आमतौर पर निम्न स्थितियों में की जाती है -

  • स्तनों के आकार व फैलाव में वृद्धि करने के लिए
  • शरीर का वजन कम होने, गर्भावस्था के बाद या फिर उम्र बढ़ने के बाद स्तनों के आकार में वृद्धि करने के लिए
  • दोनों स्तनों के आकार व आकृति को सामान्य बनाने के लिए
  • यदि छोटे स्तनों के कारण आपमें आत्मविश्वास की कमी है, तो भी यह सर्जरी की जा सकती है
  • यदि एक या दोनों स्तन लंबी आकृति के हैं या फिर स्तन पूरी तरह से विकसित नहीं हुए हैं
  • स्तन से ट्यूमर या सिस्ट निकालने की सर्जरी के बाद, स्तनों के आकार को सामान्य बनाने के लिए

इसके अलावा कुछ पुरुष भी अपनी छाती के आकार को बढ़ाने के लिए ब्रेस्ट ऑग्मेंटेशन सर्जरी करवा सकते हैं। यदि किसी पुरुष की छाती में मांसपेशियां नहीं हैं या फिर सीने संबंधी कोई अन्य विकृति है, तो उसे सुधारने के लिए भी ब्रेस्ट ऑग्मेंटेशन सर्जरी की जा सकती है।

स्तनों का आकार बढ़ाने की सर्जरी किसे नहीं करवानी चाहिए?

कुछ स्थितियां हैं जिनमें ब्रेस्ट ऑग्मेंटेशन सर्जरी न करवाने की सलाह दी जाती है -

ब्रेस्ट ऑग्मेंटेशन सर्जरी की मदद से लटकते हुए स्तनों को भी ठीक किया जा सकता है। इस सर्जरी की मदद से स्तनों को एक नई आकृति दी जाती है, जिससे वे भरे हुए व जवान दिखाई देते हैं।

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स्तनों का आकार बढ़ाने की सर्जरी से पहले क्या तैयारी की जाती है?

सर्जरी से पहले ही डॉक्टर आपको प्रोसीजर से संबंधी सभी जानकारियां दे देते हैं और यदि आपको इससे संबंधित कोई भी संदेह है, तो इस दौरान आप डॉक्टर से पूछ सकते हैं।

सर्जरी से पहले कुछ विशेष तैयारियां की जा सकती हैं, जिनमें निम्न शामिल हैं -

  • आपका ब्लड टेस्ट व अन्य कुछ परीक्षण किए जा सकते हैं, जिनकी मदद से अंदरूनी रोगों का पता चलता है
  • यदि आप किसी भी प्रकार की दवा, हर्बल उत्पाद, विटामिन या मिनरल आदि ले रहे हैं, तो डॉक्टर को इस बारे में बता दें। डॉक्टर कुछ दवाओं को सर्जरी से कुछ दिन पहले व बाद तक न लेने की सलाह देते हैं, जिनमें आमतौर पर रक्त पतला करने वाली दवाएं शामिल हैं जैसे एस्पिरिन, वारफेरिन, आइबुप्रोफेन और विटामिन ई आदि।
  • यदि आप धूम्रपान या शराब का सेवन करते हैं, तो सर्जरी से कुछ दिन पहले और बाद तक इनका सेवन बंद करने की सलाह भी दी जा सकती है। ऐसा इसलिए क्योंकि इनका सेवन करने से सर्जरी के दौरान आपको कई जटिलताएं हो सकती हैं और सर्जरी के बाद स्वस्थ होने की गति भी धीमी पड़ जाती है।

यदि आपको निम्न में से भी कोई समस्या है, तो भी सर्जरी से पहले ही डॉक्टर को इस बारे में बता देना चाहिए -

  • किसी दवा को लेने या अन्य किसी रोग के कारण प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर होना
  • स्वास्थ्य संबंधी कोई समस्या जिससे घाव भरने की गति धीमी हो गई हो या फिर स्तनों में ब्लड सप्लाई प्रभावित हो गई हो
  • कोई मानसिक रोग हो जैसे डिप्रेशन आदि। ऐसी स्थितियों में डॉक्टर मानसिक रोगों के लक्षणों में सुधार होने की प्रतीक्षा करते हैं।
  • आपको अस्पताल में अपने साथ किसी करीबी रिश्तेदार या मित्र को लाने की सलाह दी जाती है, ताकि सर्जरी से पहले व बाद के कार्यों में आपको मदद मिल सके।

जब ऑपरेशन के लिए आप अस्पताल पहुंच जाते हैं, तो आपको एक सहमति पत्र दिया जाता है, जिस पर हस्ताक्षर करके आप सर्जन को सर्जरी करने की अनुमति देते हैं। हालांकि, सहमति पत्र पर हस्ताक्षर करने से पहले उसे एक बार अच्छे से पढ़ लेना चाहिए।

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स्तनों का आकार बढ़ाने की सर्जरी कैसे की जाती है?

ब्रेस्ट ऑग्मेंटेशन की सटीक सर्जिकल प्रक्रिया उपयोग में लाए जाने वाले इंप्लांट के प्रकार पर निर्भर करती है। इसमें इस्तेमाल किए जाने वाले इंप्लांट अलग-अलग प्रकार के होते हैं, जो आकार, आकृति, संरचना और पोजीशन आदि के अनुसार तैयार किए गए होते हैं। इन इंप्लांट की सतह चिकनी या खुरदरी हो सकती है और इनमें अंदर सेलाइन जेल या सिलिकॉन भरा हो सकता है।

इसके अलावा जो इंप्लांट पुरुषों के लिए बनाए होते हैं, वे कोहेसिव सिलिकॉन जेल या सॉलिड, प्लायबल या सिलिकॉन पॉलीमर से बने होते हैं। ये इंप्लांट आकृति में आमतौर पर अंडाकार या आयताकार होते हैं। हालांकि, इन इंप्लांट को सर्जरी के दौरान काटकर नई आकृति भी दी जा सकती है।

यदि स्तनों में इंप्लांट लगाया जाना है, तो ब्रेस्ट ऑग्मेंटेशन सर्जरी को निम्न तरीके से किया जाता है -

  • सबसे पहले आपको जनरल या लोकल एनेस्थीसिया का इंजेक्शन लगाया जाता है। जनरल एनेस्थीसिया से आप गहरी नींद में सो जाते हैं और लोकल एनेस्थीसिया से सिर्फ वह हिस्सा सुन्न होता है, जिसकी सर्जरी की जानी है।
  • इसके बाद स्तन में एक चीरा लगाया जाता है, जिसके अंदर से स्तन में इंप्लांट डाला जाता है। इंप्लांट डालने के लिए लगाया गया चीरा आमतौर पर तीन अलग-अलग जगह पर हो सकता है, जो इस प्रकार है -
    • पेरिएरिओलर इन्सिजन (निप्पल के पास)
    • ट्रांसेजिलरी इन्सिजन (कांख के पास)
    • इन्फ्रामैमरी इन्सिजन (स्तन के निचले हिस्से में)
  • इंप्लांट को आमतौर पर स्तनों के ऊतकों के नीचे या फिर छाती की मांसपेशियों के नीचे या ऊपर लगाया जाता है। आपके लिए कौन से इंप्लांट का इस्तेमाल करना है और उसे कहां लगाना है, यह सब सर्जन स्थितियों के अनुसार तय करते हैं।

यदि ब्रेस्ट ऑग्मेंटेशन में फैट ग्राफ्टिंग करनी है, तो सर्जरी प्रोसीजर कुछ इस प्रकार हो सकती है -

  • इसमें सर्जन लिपोसक्शन प्रक्रिया से शरीर के किसी अन्य हिस्से से वसा निकालते हैं, जिनमें मुख्यत: जांघ, पेट और कमर के एक तरफ का हिस्सा आदि शामिल है।
  • इसके बाद स्तन में कई चीरे लगाए जाते हैं और फिर इन चीरों के माध्यम से इस वसा को इंजेक्ट किया जाता है।

यदि पुरुषों की स्तनों का आकार बढ़ाने की सर्जरी की जानी है, तो उसकी प्रोसीजर कुछ इस प्रकार होती है -

  • इसमें आपकी कांख के आसपास 4 से 6 सेंमी लंबा चीरा लगाया जाता है।
  • इस चीरे के माध्यम से एक विशेष उपकरण को छाती में डाला जाता है, ताकि इंप्लांट लगाने के लिए पेक्टोरेल्स में जगह बनाई जा सके।
  • इसके बाद इंप्लांट को डाल दिया जाता है और चीरे को बंद करके टांके लगा दिए जाते हैं।

ब्रेस्ट ऑग्मेंटेशन सर्जरी को पूरा होने में 45 से 90 मिनट तक का समय लग जाता है। प्रोसीजर के बाद ड़ॉक्टर निम्न प्रक्रियाएं करते हैं -

  • आपको ऑपरेशन थिएटर से रिकवरी रूम में शिफ्ट कर दिया जाएगा, जहां आपके शारीरिक संकेतों की जांच की जाएगी।
  • सर्जरी वाले हिस्से में ड्रेनेज ट्यूब लगाई गई होती है, ताकि सर्जरी के बाद यदि उस जगह पर द्रव बनता है, तो वह साथ ही साथ निकलता रहे।
  • घाव को ढकने और स्तनों को सहारा देने के लिए भी पट्टी की जा सकती है
  • सर्जरी के बाद देखभाल करने से संबंधित कुछ विशेष दिशा-निर्देश दिए जा सकते हैं।
  • सर्जरी के बाद होने वाले दर्द को नियंत्रित करने के लिए दर्द निवारक दवाएं दी जाती हैं। सर्जरी के बाद संक्रमण होने का खतरा भी बढ़ सकता है, जिनके लिए कुछ प्रकार की एंटीबायोटिक दवाएं भी दी जा सकती हैं।

सर्जरी के कुछ घंटे बाद जब एनेस्थीसिया का असर खत्म हो जाता है, तो आपको अस्पताल से छुट्टी दी जा सकती है। ब्रेस्ट ऑग्मेंटेशन सर्जरी में लगाए गए इंप्लांट आमतौर पर स्थायी नहीं होते हैं, इन्हें कुछ साल बाद बदलना या निकालना पड़ता है। हालांकि, चीरे के निशान पड़ जाते हैं जो धीरे-धीरे कम होते रहते हैं।

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स्तनों का आकार बढ़ाने की सर्जरी के बाद क्या देखभाल की जाती है?

ब्रेस्ट ऑग्मेंटेशन सर्जरी के बाद आपको निम्न देखभाल करने की सलाह दी जाती है -

  • सर्जरी के बाद आपको लगभग पांच दिन तक दर्द महसूस हो सकता है, जबकि सूजन व लालिमा कुछ हफ्तों तक भी रह सकती है।
  • कुछ समय बाद स्तनों से पट्टी उतार दी जाती है, जिसके बाद आप ब्रा पहन सकती हैं।
  • आपको सर्जरी वाला हिस्सा साफ रखने की सलाह दी जाती है, ताकि संक्रमण न फैल पाए। हालांकि, डॉक्टर आपको कुछ दिनों तक नहाने या शॉवर लेने से मना कर सकते हैं। क्योंकि गीला होने पर घाव के ठीक होने की गति धीमी पड़ जाती है।
  • सर्जरी के बाद पहले कुछ हफ्तों तक आपको किसी भी प्रकार की एक्सरसाइज या अधिक मेहनत वाली शारीरिक गतिविधि करने से मना किया जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि इनसे छाती की मांसपेशियों पर दबाव पड़ता है। हालांकि, जब सर्जरी के टांके खुल जाते हैं, तो डॉक्टर आपको एक विशेष क्रीम या लोशन देते हैं, जिनसे घाव पर हल्की मालिश करनी होती है, ताकि घाव को सूखने से बचाया जा सके।
  • लंबे समय तक देखभाल करने के रूप में डॉक्टर आपको इंप्लांट को सुरक्षित रखने के तरीके सिखाएंगे और साथ ही आपको समय-समय पर मैमोग्राम (स्तनों का एक्स रे) और अन्य टेस्ट करवाने की सलाह देते हैं।

सर्जरी के बाद अधिकतर महिलाओं की सुंदरता के साथ-साथ उनका आत्मविश्वास भी बढ़ जाता है। यदि आप पहले अपने स्तनों के छोटे आकार से संतुष्ट नहीं थे, तो इस सर्जरी से आप खुद को आकर्षक महसूस कर पाती हैं।

डॉक्टर को कब दिखाएं?

स्तनों का आकार बढ़ाने की सर्जरी के बाद यदि आपको निम्न में से कोई भी लक्षण महसूस हो रहा है, तो डॉक्टर से संपर्क कर लेना चाहिए -

  • निप्पल से द्रव का रिसाव होना (और पढ़ें - स्तन से पानी आने के लक्षण)
  • सर्जरी वाले हिस्से में संक्रमण (लालिमा, चकत्ते, जलन व दर्द होना)
  • इंप्लांट के आसपास की त्वचा में गड्ढे (डिंपल) दिखाई देना
  • स्तन में चोट लगना
  • इंप्लांट टूट जाना
  • इंप्लांट की पोजीशन में बदलाव होना
  • स्तन में गांठ बनना

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स्तनों का आकार बढ़ाने की सर्जरी से क्या जोखिम हो सकते हैं?

ब्रेस्ट ऑग्मेंटेशन सर्जरी से निम्न जोखिम व जटिलताएं हो सकती हैं -

  • सर्जरी वाले घाव में संक्रमण होना, जिससे स्तनों के आसपास सूजन, लालिमा व जलन जैसे लक्षण विकसित हो जाते हैं और आपको बुखार भी हो जाता है
  • इंप्लांट के आसपास रक्त जमा होना, जिसे हीमेटोमा कहा जाता है। यह सर्जरी के बाद या फिर स्तन में चोट लगने के कारण भी हो सकता है।
  • दोनों स्तनों का आकार या आकृति समान्य न होना
  • कुछ स्थितियो में प्रतिरक्षा प्रणाली इंप्लांट के चारों तरफ कठोर ऊतक से एक कैप्सूल नुमा संरचना बना देती है, जिससे स्तन कठोर बन जाते हैं, इस स्थिति को कैप्सूलर कॉन्ट्रैक्चर कहा जाता है
  • स्तन सुन्न पड़ना
  • किसी दुर्घटना के कारण इंप्लांट क्षतिग्रस्त होना
  • घाव के ठीक होने की प्रक्रिया धीमी पड़ जाना
  • स्तनों के आस-पास की त्वचा संकुचित व पतली पड़ना
  • लिम्फ नोड्स में सूजन या आकार बढ़ना
  • एनाप्लास्टिक लार्ज सेल लिम्फोमा होने का खतरा बढ़ जाना, जो लिम्फोमा और ब्रेस्ट कैंसर का एक दुर्लभ प्रकार है
  • इंप्लांट लीक होना
  • कैंसर आदि का पता लगाने के लिए मैमोग्राम ठीक से न करवा पाना

उपरोक्त कोई भी समस्या होने के कारण ऑपरेशन को फिर से करवाने की आवश्यकता पड़ना

(और पढ़ें - लिंफोमा का इलाज)

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संदर्भ

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