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पैराथायराइड ग्रंथि निकालने की सर्जरी को पैराथायराइडेक्टॉमी कहा जाता है, जो आमतौर पर ओवरएक्टिव या अंडरएक्टिव पैराथायराइड का इलाज करने के लिए की जाती है। पैराथायराइड ग्रंथियां गर्दन में थायराइड ग्रंथि के पीछे स्थित होती हैं। इन ग्रंथियों से निकलने वाले हार्मोन रक्त में कैल्शियम के स्तर को नियंत्रित करते हैं। यदि कोई पैराथायरायड ग्रंथि ट्यूमर या अन्य किसी कारण से ओवरएक्टिव हो जाती है, तो उससे रक्त में कैल्शियम का स्तर बढ़ जाता है।

सर्जरी से पहले आपको कुछ टेस्ट करवाने को कहा जा सकता है, जिससे सर्जन यह पता लगाते हैं कि आप सर्जरी के लिए कितने फिट हैं। यह सर्जरी जरनल एनेस्थीसिया का इंजेक्शन लगाकर की जाती है और इस प्रोसीजर को पूरा होने में लगभग एक घंटे का समय लग सकता है। अधिकतर मामलों में आप सर्जरी वाले दिन ही अस्पताल से छुट्टी लेकर घर जा सकते हैं। हालांकि, डॉक्टर आपको एक या दो हफ्ते बाद फिर से बुला सकते हैं, ताकि सर्जरी के बाद आपके स्वास्थ्य की जांच की जा सकते।

(और पढ़ें - थायराइड का ऑपरेशन कैसे होता है)

  1. पैराथायराइडेक्टॉमी क्या है - What Is Parathyroidectomy in Hindi
  2. पैराथायराइडेक्टॉमी क्यों की जाती है - Why is parathyroidectomy recommended in Hindi
  3. पैराथायराइडेक्टॉमी से पहले की तैयारी - Preparations before parathyroidectomy in Hindi
  4. पैराथायराइडेक्टॉमी कैसे की जाती है - How is parathyroidectomy done
  5. पैराथायराइडेक्टॉमी के बाद की देखभाल - Care for yourself after parathyroidectomy?
  6. पैराथायराइडेक्टॉमी की जटिलताएं - Possible complications/risks of parathyroidectomy?

पैराथायराइड ग्लैंड छोटी-छोटी चार ग्रंथियां हैं, जो गर्दन में थायराइड ग्रंथि के पीछे स्थिति होती हैं। ये ग्रंथियां पैराथायराइड हार्मोन (PTH) बनाती हैं, जो रक्त में कैल्शियम के स्तर को नियमित बनाए रखता है। कुछ स्थितियों में ये ग्लैंड ओवरएक्टिव हो जाती हैं, जिसका मतलब है कि ये सामान्य से अधिक पीटीएच बनाने लगी हैं और इसके परिणामस्वरूप रक्त में कैल्शियम का स्तर अधिक हो जाता है। रक्त में कैल्शियम का स्तर असाधारण रूप से बढ़ने की स्थिति को ही हाइपरपैराथायरायडिज्म कहा जाता है। पैराथायराइडेक्टॉमी की मदद से एक या अधिक ओवर एक्टिव ग्लैंड्स को निकाल दिया जाता है। हाइपरपैराथायरायडिज्म का इलाज करने का एकमात्र तरीका पैराथायराइडेक्टॉमी सर्जरी ही है।

हालांकि, यदि आपके रक्त में कैल्शियम का स्तर इतना अधिक नहीं है या फिर आपको कोई ऐसी बीमारी है जिससे पैराथायराइडेक्टॉमी सर्जरी करवाने से गंभीर जोखिम हो सकते हैं। इन स्थितियों में सर्जन सर्जरी करने से मना कर सकते हैं और इसकी जगह पर दवाएं शुरू कर दी जाती हैं। पैराथायराइडेक्टॉमी प्रोसीजर के दौरान या तो आपकी गर्दन में चीरा लगाकर या मुंह के अंदर से सर्जिकल उपकरण ग्रंथियों तक पहुंचाए जाते हैं।

(और पढ़ें - हाइपोपैराथायरायडिज्म का इलाज)

यदि आपके शरीर में हाइपरपैराथायरायडिज्म से संबंधित निम्न लक्षण दिखाई दे रहे हैं, तो डॉक्टर पैराथायराइडेक्टॉमी करवाने की सलाह दे सकते हैं -

जब ब्लड कैल्शियम टेस्ट का स्तर >10.0 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर और साथ ही पीटीएच लेवल भी बढ़कर >55 पिकोग्राम प्रति मिलीलीटर हो जाता है, तो यह पैराथायराइडेक्टॉमी सर्जरी की आवश्यकता का संकेत देता है। हालांकि, कई बार थायजिड डाईयुरेटिक्स जैसी दवाओं का अधिक इस्तेमाल भी पीटीएच और ब्लड कैल्शियम स्तर को बढ़ा सकता है जिससे हाइपरपैराथायरायडिज्म जैसे लक्षण महसूस होने लगते हैं। इसलिए यदि आप ये दवाएं ले रहे हैं, तो डॉक्टर को इनके बारे में अवश्य बताएं।

जिन लोगों के शरीर में गंभीर लक्षण नहीं हैं, उनके कैल्शियम स्तर की लगातार निगरानी की जाती है। ऐसे मरीजों में पैराथायराइडेक्टॉमी सर्जरी आमतौर पर निम्न लक्षण विकसित होने के बाद की जाती है -

  • हड्डी टूटना
  • समय से पहले ही हड्डियां पतली पड़ना
  • ऑस्टियोपोरोसिस (हड्डियां कमजोर होना)
  • गुर्दे की कार्यक्षमता कमजोर पड़ना
  • 24 घंटे की यूरिन कैल्शियम वैल्यू >400 एमजी होना
  • कैल्शियम का स्तर सामान्य स्तर (अधिकतम) से 1 ऊपर हो जाना
  • उम्र 50 साल से अधिक हो जाना

पैराथायराइडेक्टॉमी सर्जरी किसे नहीं करवानी चाहिए?

पैराथायराइडेक्टॉमी सर्जरी आमतौर प्राइमरी हाइपरपैराथायरायडिज्म हरेडिट्री हाइपरपैराथायरायडिज्म (जन्मजात) से ग्रस्त लोगों के लिए की जाती है। यदि इन रोगों से ग्रस्त किसी व्यक्ति को फैमिलियल हाइपोकैल्सीयूरिक हाइपरकैल्सीमिया है, उन्हें हाइपरपैराथायरायडिज्म नहीं करवानी चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि फैमिलियल हाइपोकैल्सीयूरिक हाइपरकैल्सीमिया एक आनुवंशिक रोग है, जिसके कारण रक्त में कैल्शियम असाधारण रूप से बढ़ जाता है।

(और पढ़ें - ऑस्टियोपोरोसिस का आयुर्वेदिक इलाज)

सर्जरी से एक या दो हफ्ते पहले डॉक्टर आपके कुछ विशेष टेस्ट करते हैं और साथ ही साथ आपका शारीरिक परीक्षण भी किया जाता है। आपसे आपके स्वास्थ्य से संबंधित पिछली सभी जानकारियां पूछी जाती हैं और यदि आपने हाल ही में कोई दवा ली है या फिर वर्तमान में भी ले रहे हैं, तो इस बारे में भी आपसे पूछा ज सकता है। पैराथायराइडेक्टॉमी से पहले आमतौर पर निम्न टेस्ट किए जाते हैं -

  • दो बार ब्लड टेस्ट किया जाता है, ताकि रक्त में कैल्शियम के स्तर की पुष्टि की जा सके। यदि रक्त में कैल्शियम का स्तर अधिक दिखाई देता है, तो इसके बाद रक्त में पीटीएच लेवल की जांच की जाती है।
  • आपके हृदय व फेफड़ों की कार्य क्षमता की जांच करने के लिए ईकेजी और चेस्ट एक्स रे आदि किया जाता है
  • एनेस्थीजियोलॉजिस्ट आपके शरीर की जांच करेंगे और साथ ही आपसे स्वास्थ्य संबंधी पिछली जानकारी लेंगे ताकि आपके शरीर के अनुसार उचित एनेस्थीसिया दवा चुनी जा सके
  • इसके अलावा अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन और सेस्टामिबी स्कैन जैसे इमेजिंग टेस्ट भी किए जा सकते हैं, जिनकी मदद से पैराथायराइड ग्रंथि के आकार का पता लगाया जाता है
  • यूरिनलिसिस और बोन डेंसिटी स्कैन की आवश्यकता भी पड़ सकती है।
  • लेरिन्जोस्कोप नामक ऊपरकरण की मदद से आपकी वोकल कॉर्ड (स्वर रज्जु) की जांच भी की जाती है।
  • सर्जरी से कुछ दिन पहले आपको कुछ दवाएं (यदि आप ले रहे हैं) बंद करने को कहा जा सकता है, इनमें आमतौर पर ब्लड प्रेशर की दवाएं, रक्त पतला करने वाली दवाएं, डायबिटीज की दवाएं और नॉन स्टेरॉयडल एंटी इंफ्लेमेटरी ड्रग आदि शामिल हैं। इसके अलावा यदि आप किसी भी प्रकार का सप्लीमेंट जैसे विटामिन, आयरन या मल्टीविटामिन आदि ले रह हैं या फिर कोई हर्बल उत्पाद का सेवन कर रहे हैं, तो डॉक्टर को उस बारे में अवश्य बता दें।

आपको सर्जरी से कम से कम 2 दिन पहले ही अस्पताल में भर्ती कर लिया जाता है। ऑपरेशन से पहली रात के बाद आपको कुछ भी खाने या पीने को नहीं दिया जाता है। हालांकि, यदि डॉक्टर आपको कोई दवा देते हैं, तो उसे पानी की सिर्फ एक घूंट के साथ लेने की सलाह दी जाती है। आपको एक सहमति पत्र भी दिया जाता है, जिसपर हस्ताक्षर करके आप सर्जन को सर्जरी करने की अनुमति दे देते हैं। इस सहमति पत्र को एक बार अच्छे से पढ़ व समझ लेना चाहिए।

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जब आप सर्जरी के लिए अस्पताल में भर्ती हो जाते हैं, तो आपको एक विशेष ड्रेस पहनने के लिए दी जाती है जिसे हस्पिटल गाउन कहा जाता है। सर्जरी शुरू करने से पहले आपको जनरल एनेस्थीसिया दे दी जाती है, जिससे आपको प्रोसीजर के दौरान दर्द या कोई भी तकलीफ नहीं हो पाती हैं।

 पैराथायराइडेक्टॉमी सर्जरी की प्रोसीजर आमतौर पर दो प्रकार की होती हैं -

  • ट्रेडिशनल थायरेडेक्टॉमी -
    सबसे पहले सर्जन गर्दन में एक छोटा सा चीरा लगाते है और फिर मांसपेशियों की पतली सतह को एक तरफ कर दिया जाता है। पैराथायराइड ग्रंथि तक पहुंच कर उसकी जांच की जाती है और ग्रंथि के प्रभावित हिस्से को निकाल दिया जाता है। इसके बाद मांसपेशियों की सतह को वापस उसकी जगह पर लाया जाता है और फिर त्वचा टांके या विशेष गोंद के साथ बंद कर दिया जाता है।
     
  • स्कारलेस थायरेडेक्टॉमी -
    इसे ट्रांसोरल थायरेक्टॉमी भी कहा जाता है, जो कि एक नई प्रोसीजर है। इसमें निचले होठ के नीचे तीन छोटे-छोटे छिद्र बनाए जाते हैं, जिनके भीतर से कैमरा व अन्य सर्जिकल उपकरण अंदर डाले जाते हैं। इसके बाद बाहर से ही मॉनिटर करते हुए उपकरणों की मदद से प्रभावित पैराथायराइड ग्रंथि के प्रभावित हिस्से को निकाल दिया जाता है। इस सर्जरी प्रोसीजर से कोई निशान (स्कार) नहीं बनता है, क्योंकि इसमें लगाया गया चीरा काफी छोटा होता है।

सर्जरी के दौरान आप गहरी नींद में होते हैं और जब बाद में जब आपको होश आता है तो उस समय आप रिकवरी रूम में होते हैं। इस दौरान आपको ऑक्सीजन मास्क और बांह में इंट्रावेनस लाइन लगी होती है। जब आप पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ पीने लग जाते हैं, तो इंट्रावेनस लाइन को हटा दिया जाता है। जब तक आप अस्पताल में रहेंगे एक नर्स आपके सभी शारीरिक संकेतों की करीब से निगरानी करती है, ताकि शरीर में किसी भी प्रकार के बदलाव या प्रभाव आदि का पता लगाया जा सके।

आपको सबसे पहले पानी और फिर धीरे-धीरे अन्य तरल पदार्थ (जैसे फलों के रस आदि) देने शुरू किए जाएंगे और बाद में हल्के खाद्य पदार्थ दिए जाते हैं। यदि आपको स्वास्थ्य संबंधी कोई अन्य समस्या नहीं है और सर्जरी के बाद आपके शरीर पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ता है तो आपको उसी दिन घर जाने के लिए छुट्टी दी जा सकती आपको है।

सर्जरी के बाद जब आपको घर पर जाने के लिए छुट्टी दी जा रही होती है, तो इस दौरान डॉक्टर आपको घर पर कम से कम दो या तीन दिनों तक आराम करने की सलाह देते हैं। पैराथायराइडेक्टॉमी सर्जरी के बाद अधिकतर लोग लगभग दो हफ्तों में स्वस्थ हो जाते है और अपनी रोजाना के सामान्य कार्य शुरू कर देते हैं। हालांकि, आपको सर्जरी के बाद कुछ समय तक विशेष देखभाल देने की सलाह दी जाती है, जिनमें निम्न शामिल है -

  • शारीरिक गतिविधियां -
    सर्जरी के बाद डॉक्टर आपको कुछ समय के लिए थोड़ी बहुत हल्की शारीरिक गतिविधियां करने की सलाह देते हैं। हालांकि, आपको अधिक मेहनत वाले काम, एक्सरसाइज, भारी वजन उठाना और दौड़ना आदि गतिविधियों से परहेज रखने को कहा जाता है। सोते समय आपको अपना सिर हृदय के स्तर से ऊंचाई पर रखने को कहा जाता है, ताकि सर्जरी के घाव में सूजन न हो पाए। ऐसा करने के लिए आप सोते समय सिर के नीचे तकिये लगा सकते हैं।
     
  • घाव की देखभाल -
    सर्जरी के बाद लगभग 48 घंटों तक घाव को गीला न होने दें। आप घाव को ढीला कपड़ा बांधकर ढक कर रख सकते हैं, ताकि वह धूल-मिट्टी के आदि के संपर्क में न आए। डॉक्टर से पूछे बगैर किसी प्रकार की दवा, क्रीम या लोशन का आदि का इस्तेमाल न करें। डॉक्टर जो दवाएं व क्रीम आदि देते हैं, सिर्फ उन्हीं का इस्तेमाल करें।
     
  • आहार -
    सर्जरी के बाद कितने दिनों तक आपको कैसा आहार खाना है आदि के बारे में डॉक्टर से अच्छे से समझ लें। जब तक हो सके तले हुए, अधिक मसालेदार या सख्त खाद्य पदार्थ न खाएं। छुट्टी के समय आपको विटामिन और कैल्शियम आदि के सप्लीमेंट भी दिए जा सकते हैं।
     
  • दर्द का निवारण -
    डॉक्टर आपको दर्द कम करने के लिए कुछ विशेष दवाएं दे सकते हैं। इसके अलावा आपको कोई भी ऐसी गतिविधि करने से मना किया जाता है, जिससे दर्द बढ़ता हो।

सर्जरी के बाद आपको नियमित रूप से ब्लड टेस्ट करवाने पड़ते हैं, ताकि आपके रक्त में कैल्शियम के स्तर को निगरानी में रखा जा सके। आपके ब्लड टेस्ट के रिजल्ट्स के अनुसार आपको कई बार कैल्शियम सप्लीमेंट्स लेने की सलाह दी जा सकती है।

डॉक्टर को कब दिखाएं?

ऑपरेशन के बाद यदि आपको निम्न में से कोई भी समस्या हो रही है, तो डॉक्टर को दिखा लेना चाहिए -

  • तेज बुखार होना
  • सर्जरी वाली जगह से रक्त या अन्य कोई द्रव निकलना
  • गंभीर दर्द होना
  • मांसपेशियों में ऐंठन, हाथ व पैरों के आस-पास की त्वचा में झुनझुनी व सुन्न होना (रक्त में कैल्शियम की कमी के लक्षण)

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पैराथायराइडेक्टॉमी सर्जरी करवाने के बाद निम्न जटिलताएं होने का खतरा बढ़ जाता है -

  • ओवरएक्टिव या बढ़ी हुई ग्रंथि का पता न लगा पाना
  • रक्त में कैल्शियम का स्तर लगातार कम रहना
  • आवाज में कुछ बदलाव हो जाना (जैसे गला बैठना)
  • रक्त के थक्के बनना या रक्तस्राव होना
  • गले में दर्द
  • सर्जरी के दौरान भोजन नली (इसोफेगस) या फिर श्वासनली (ट्रेकिया) में क्षति होना
  • सर्जरी वाले हिस्सा आपस में चिपक जाना या स्कार ऊतक बन जाना, जिसके लिए फिर से सर्जरी की आवश्यकता पड़ना
  • घाव में संक्रमण होना
  • टांग या फेफड़ों में रक्त का थक्का बनना

(और पढ़ें - टांके की देखभाल कैसे करें)

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संदर्भ

  1. Oxford University Hospitals [internet]: NHS Foundation Trust. National Health Service. U.K.; Parathyroidectomy
  2. Cleveland Clinic [Internet]. Ohio. US; Parathyroid Surgery
  3. Johns Hopkins Medicine [Internet]. The Johns Hopkins University, The Johns Hopkins Hospital, and Johns Hopkins Health System; Parathyroidectomy
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  6. Medical College of Wisconsin [Internet]. Wisconsin. US; Before and After Parathyroid Surgery
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  9. Genetics and Rare Diseases Information Center [internet]. National Center for Advancing Translational Sciences. National Institute of Health: US National Library of Medicine. US Department of Health and Human Services; Familial hypocalciuric hypercalcemia
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