परिचय:

प्रोटीन खून में पाया जाने वाला एक पदार्थ है, जो खून के माध्यम से ही आपके पूरे शरीर में सर्कुलेट होता हैं और शरीर में तरल का संतुलन बनाने में मदद करता हैं। यह खुद ही एक प्रकार का प्रोटीन होता है, जिसे लिवर द्वारा बनाया जाता है। गौरतलब है कि एल्बुमिन खून में सबसे अधिक मात्रा में पाया जाने वाला प्रोटीन होता है। 

एल्बुमिन भी शरीर में तरल पदार्थों का संतुलन बनाए रखने में मदद करता है। यह रक्त वाहिकाओं में अधिक रिसाव होने से रोकथाम करता है। इसके अलावा यह ऊतकों को स्वस्थ बनाने और महत्वपूर्ण हार्मोन व पोषक तत्वों को शरीर में पहुंचा कर शरीर के बढ़ने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है । 

जब किसी समस्या के कारण लिवर की एल्बुमिन बनाने की क्षमता प्रभावित हो जाती है, तो एल्बुमिन का स्तर कम या बहुत अधिक कम हो जाता है। इसके अलावा प्रोटीन का अवशोषण बढ़ने, प्लाज्मा की मात्रा बढ़ने या किडनी संबंधी समस्याओं के कारण प्रोटीन कम होने लगना आदि जैसी समस्याओं के परिणामस्वरूप भी एल्बुमिन का स्तर कम होने लगता है।

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  1. एल्बुमिन टेस्ट क्या होता है? - What is Albumin Test in Hindi?
  2. एल्बुमिन टेस्ट क्यों किया जाता है - What is the purpose of Albumin Test in Hindi
  3. एल्बुमिन टेस्ट से पहले - Before Albumin Test in Hindi
  4. एल्बुमिन टेस्ट के दौरान - During Albumin Test in Hindi
  5. एल्बुमिन टेस्ट के क्या जोखिम होते हैं - What are the risks of Albumin Test in Hindi
  6. एल्बुमिन टेस्ट के परिणाम का क्या मतलब होता है - What do the results of Albumin Test mean in Hindi

एल्बुमिन ब्लड टेस्ट क्या है?

एल्बुमिन टेस्ट एक सामान्य ब्लड टेस्ट होता है, जिसकी मदद से खून में उपस्थित एल्बुमिन नामक प्रोटीन की मात्रा की जांच की जाती है। ऑपरेशन, खुला घाव या जलने आदि से शरीर में एल्बुमिन का स्तर कम होने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।

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यदि इस टेस्ट के रिजल्ट में एल्बुमिन का स्तर कम पाया जाता है, तो यह लिवर या किडनी संबंधी रोगों का संकेत दे सकता है। एल्बुमिन का कम स्तर मरीज में पोषक तत्वों की कमी होने का भी संकेत दे सकता है। 

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एल्बुमिन टेस्ट क्यों किया जाता है?

एक स्वस्थ लिवर व्यक्ति द्वारा खाए गए भोजन से प्रोटीन को अवशोषित करता है। जब लिवर ठीक रूप से काम ना कर पाए, तो एल्बुमिन का उत्पादन कम हो जाता है और इस कारण से एल्बुमिन का स्तर कम होने लगता है। 

यदि आपके डॉक्टर को यह संदेह रहा है, कि आपको कोई ऐसी समस्या है जो आपके लिवर के कार्यों को प्रभावित करती है, जैसे लिवर रोग। ऐसे में डॉक्टर एल्बुमिन टेस्ट कर सकते हैं। 

लिवर रोगों से संबंधित कुछ लक्षण:

कुछ प्रकार की मेडिकल स्थितियों की जांच करने के लिए भी डॉक्टर एल्बुमिन टेस्ट कर सकते हैं, जैसे क्रॉनिक अग्नाशयशोथ या किडनी संबंधी रोग आदि। इस टेस्ट का रिजल्ट यह भी बताता है, कि स्थिति में कुछ सुधार हो रहा है या फिर वह और भी बदतर होती जा रही है।

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एल्बुमिन टेस्ट करवाने से पहले क्या करें?

एल्बुमिन टेस्ट से पहले आपको कोई विशेष तैयारी करने की जरूरत नहीं पड़ती। हालांकि, यदि आपके डॉक्टर एल्बुमिन टेस्ट के साथ-साथ कुछ और टेस्ट भी करने वाले हैं, तो उन टेस्ट के अनुसार डॉक्टर आपको टेस्ट से कुछ घंटे पहले कुछ भी खाने या पीने से मना कर सकते हैं। 

यदि आप कुछ दवाएं लेते हैं, तो डॉक्टर उनमें से कुछ प्रकार की दवाओं को कुछ समय के लिए छोड़ने या उनकी खुराक कम करने के लिए कह सकते हैं। डॉक्टर आमतौर पर इन दवाओं को छोड़ने या कम करने के लिए कहते हैं:

यदि आप किसी प्रकार की दवाएं लेते हैं, टेस्ट करवाने से एक दो दिन पहले ही डॉक्टर को इस बारे बता देना चाहिए। बिना डॉक्टर की सलाह के किसी भी दवा को बंद या उसकी खुराक कम नहीं करनी चाहिए। 

इसके अलावा एल्बुमिन टेस्ट से पहले आपको कोई अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत नहीं है। 

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एल्बुमिन टेस्ट के दौरान - During Albumin Test in Hindi

एल्बुमिन टेस्ट के दौरान क्या किया जाता है?

एल्बुमिन टेस्ट करने की प्रक्रिया सामान्य खून टेस्ट करने की प्रक्रिया के समान होती है। इसमें टेस्ट  करने के लिए खून का सेंपल निकाला जाता है।

सबसे पहले डॉक्टर उस क्षेत्र को एंटीसेप्टिक के द्वारा साफ करते हैं, जहां से खून निकाला जाना है। उसके बाद आपकी बाजू के ऊपरी हिस्से पर एक पट्टी बांध दी जाती है, जिससे नसों में खून का बहाव बंद होने के कारण वे फूलने लग जाती हैं। ऐसा होने पर वे स्पष्ट रूप से दिखाई देने लग जाती और उनमें आसानी से सुई लग जाती है।

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डॉक्टर आमतौर पर नस में सुई लगाकर खून का सेंपल निकालते हैं। नस में सुई लगाने के बाद सेंपल के लिए निकाले जाने वाले खून को एक शीशी या ट्यूब में भरा जाता है। जब नस में सुई लगाई और निकाली जाती है इस दौरान आपको हल्की सी चुभन भी महसूस हो सकती हैं। इस टेस्ट को करने के लिए लगभग 5 मिनट का ही समय लगता है। 

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एल्बुमिन टेस्ट के क्या जोखिम होते हैं?

इस टेस्ट को करने के लिए थोड़ी सी मात्रा में खून का सेंपल चाहिए होता है। इसलिए इस टेस्ट प्रक्रिया से बहुत ही कम जोखिम जुड़े हैं। जहां पर सुई लगी होती है, कुछ लोगों की त्वचा वहां से नीली पड़ जाती है। खून निकालने से जुड़े कुछ सामान्य जोखिम, जैसे:

जिन लोगों को कुछ अंदरुनी बीमारियां हैं, उनको सुई लगने के कारण शरीर में कुछ विपरीत रिएक्शन हो सकते हैं। यदि आपको कोई ऐसी समस्या है, जो अधिक खून बहने का कारण बन सकती है तो विशेष रूप से डॉक्टर को इस समस्या के बारे में बता देना चाहिए, जैसे खून का थक्का जमने का विकार। खून को पतला करने वाले दवाएं (Blood thinner) भी अधिक खून बहने का खतरा बढ़ा सकती है। 

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एल्बुमिन टेस्ट के परिणाम का क्या मतलब होता है - What do the results of Albumin Test mean in Hindi

एल्बुमिन टेस्ट के रिजल्ट का क्या मतलब होता है?

एल्बुमिन टेस्ट एक ऐसा टेस्ट है, जो अक्सर एक ही समय पर कई टेस्टों के साथ किया जाता है। यह निर्धारित करने के लिए की आपको कोई अंदरुनी समस्या है या नहीं, डॉक्टर एक साथ इन सभी टेस्टों के रिजल्ट के बारे में समझा सकते हैं। 

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खून में एल्बुमिन का सामान्य स्तर आमतौर पर 3.4 से 5.4 ग्राम प्रति डेसीलीटर होता है। यदि आपके एल्बुमिन का स्तर सामान्य से कम है, तो यह इन समस्याओं का संकेत दे सकता है:

यदि आपके डॉक्टर को लगता है कि लिवर संबंधी रोगों के कारण आपके एल्बुमिन के स्तर में कमी हुई है। तो ऐसे में वे एल्बुमिन के स्तर का कारण बनने वाली लिवर की बीमारी का पता लगाने के लिए अन्य टेस्ट भी कर सकते हैं। लिवर के रोगों में मुख्य रूप से हेपेटाइटिस, सिरोसिस और हेप्टोसेलुलर नेक्रोसिस आदि शामिल हैं। 

यदि एल्बुमिन का स्तर सामान्य से अधिक है तो वह शरीर में पानी की कमी या गंभीर दस्त लगने का संकेत देता है। (और पढ़ें - दस्त रोकने के घरेलू उपाय)

जब टेस्ट का रिजल्ट आता है, तो डॉक्टर रिपोर्ट पढ़ेंगे और फिर रिजल्ट के बारे में मरीज को समझाएंगे। एल्बुमिन का सामान्य स्तर हर लैब के अनुसार अलग-अलग निर्धारित किया जा सकता है। टेस्ट के रिजल्ट की रिपोर्ट पढ़ कर ही डॉक्टर यह निर्धारित करने में सक्षम हो पाते हैं कि, एल्बुमिन का स्तर सामान्य है या फिर कम या ज्यादा है।

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