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पोटैशियम टेस्ट क्या है?

पोटैशियम टेस्ट को सीरम पोटैशियम टेस्ट या के प्लस (K+) टेस्ट भी कहा जाता है। यह सीरम में पोटैशियम के स्तर का पता लगाता है, सीरम खून में पाया जाने वाला एक द्रव होता है। यह टेस्ट सामान्य मेटाबोलिक टेस्ट के रूप में किया जाता है। पोटैशियम का अधिकतर भाग लगभग 90% तक कोशिकाओं में पाया जाता है, लेकिन इसकी कुछ मात्रा खून में भी पाई जाती है। पोटैशियम आहार के कई स्रोतों में पाया जाता है जैसे दूध, मछली, सब्जियां, दालें, फल, नट्स और बीजों में।

यह खनिज हमारे शरीर में कई महत्वपूर्ण कार्य करने में मदद करता है, जैसे:

  • पोषक तत्त्व का कोशिकाओं के अंदर जाना
  • कोशिकाओं से अपशिष्ट पदार्थों को निकालना
  • नसों और मांसपेशियों में संपर्क
  • शरीर के द्रवों में संतुलन बनाए रखना
  • दिल की कार्य प्रक्रिया को स्वस्थ रूप से बनाए रखना

एल्डोस्टेरोन हार्मोन शरीर में पोटैशियम के स्तर को नियंत्रित करता है। पोटैशियम टेस्ट मेडिकल स्थतियों की जांच करने के लिए किया जाता है, क्योंकि पोटैशियम के सामान्य स्तर में बदलाव अन्य समस्याओं का संकेत दे सकते हैं।

(और पढ़ें - पोटैशियम की कमी से होने वाले रोग)

  1. पोटैशियम टेस्ट क्यों किया जाता है - What is the purpose of Potassium test in Hindi
  2. पोटैशियम टेस्ट से पहले - Before Potassium test in Hindi
  3. पोटैशियम टेस्ट के दौरान - During Potassium test in Hindi
  4. पोटैशियम टेस्ट के परिणाम और नॉर्मल रेंज - Potassium test result and normal range in Hindi

पोटैशियम टेस्ट किसलिए किया जाता है?

यह टेस्ट किडनी रोगों का परीक्षण करने और उन पर निरंतर नजर रखने के लिए किया जाता है, क्योंकि यह पोटैशियम के असामान्य स्तर का कारण बनने वाली एक आम स्थिति है। पोटैशियम टेस्ट करवाने की सलाह उन लोगों को भी दी जाती है, जिनमें हाइपोकलेमिया (पोटैशियम की कमी) या हाइपरकलेमिया (पोटैशियम की अधिकता) के लक्षण दिखाई देते हैं।

हाइपोकलेमिया के सामान्य लक्षण हैं:

(और पढ़ें - कब्ज का घरेलू उपचार)

 हाइपरकलेमिया से जुड़े लक्षण हैं:

(और पढ़ें - थकान का घरेलू इलाज)

इसकी सलाह उन लोगों को भी दी जाती है जिन्हें मेटाबॉलिक एसिडोसिस होता है, जिसका कारण अनियंत्रित डायबिटीज और अत्यधिक उल्टी होना होता है।

कभी-कभी लकवा से ग्रस्त मरीजों को भी पोटैशियम टेस्ट करवाने की सलाह दी जा सकती है।

(और पढ़ें - डायबिटीज में परहेज)

पोटैशियम टेस्ट की तैयारी कैसे करें?

इस टेस्ट के लिए किसी भी विशेष तैयारी की आवश्यकता नहीं होती। लेकिन अगर आप कोई भी दवाई जैसे विटामिन या हर्ब्स ले रहे हैं, तो उस के बारे में डॉक्टर को सूचित करें। ऐसा इसलिए क्योंकि ये टेस्ट के परिणाम पर प्रभाव डाल सकती हैं। कुछ दवाएं जो की टेस्ट के परिणाम पर प्रभाव डालती हैं और पोटैशियम के स्तर को बढ़ाती हैं वो है, नॉन-स्टेरॉयडस एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग्स, पेनिसिलिन, ग्लूकोज, डाईयुरेटिक।

कुछ दवाएं जो खून में पोटैशियम का स्तर बढ़ा देती हैं वो हैं, हिस्टामिन, हेपरिन, एपिनेफ्रीन, आइसोनाइजिड और एमिनोकैपरोइक अम्ल। कुछ दवाएं जो खून में पोटैशियम का स्तर कम कर देती हैं, उनमें एमिनोसैलिसिलिक एसिड, इन्सुलिन, पेनिसिलिन जी, कार्बेनिसिलिन और एमफोटेरिसिन हैं। 

डॉक्टर टेस्ट से पहले दवाएं बंद करने के लिए भी कह सकते हैं। लेकिन कोई भी दवाई बिना डॉक्टर की सलाह के बंद न करे।

(और पढ़ें - आयरन स्टडी टेस्ट)

पोटैशियम टेस्ट कैसे किया जाता है?

हाथ की नस में सुई लगाकर ब्लड सैंपल ले लिया जाता है। हाथ में सुई लगाने से हल्का सा दर्द या चुभन महसूस हो सकती है। टेस्ट के बाद कुछ समय के लिए घबराहट हो सकती है। ब्लड सैंपल लेने से संबंधित कुछ समस्याएं भी विकसित हो सकती हैं, जिनमें ज्यादा खून बहना, हल्का सा चक्कर आना, त्वचा के अंदर खून का जमना (हीमेटोमा) और सुई से संक्रमण आदि शामिल हैं।

(और पढ़ें - जिंक यूरिन टेस्ट)

पोटैशियम टेस्ट के परिणाम और नॉर्मल रेंज

सामान्य परिणाम: 
पोटैशियम के नॉर्मल रेंज 3.7 से 5.2 mmol/L हैं। 

असामान्य परिणाम:
पोटैशियम के सामान्य स्तर से अधिक या कम स्तर कुछ विशेष स्थितियों को दिखाते हैं। हाइपरकलेमिया निम्न कारणों से हो सकता है:

  • आहार में पोटैशियम की अधिक मात्रा ले लेना
  • कोई विशेष प्रकार की दवा लेना
  • लाल रक्त कोशिकाओं का नष्ट होना 
  • रक्त चढ़ाना
  • श्वसन अम्लरक्तता (रेस्पिरेट्री एसिडोसिस)
  • मेटाबॉलिक एसिडोसिस
  • किडनी फेलियर (और पढ़ें - किडनी रोग में परहेज)
  • हाइपरक्लेमिक पीरियॉडिक पैरालिसिस, एक अनुवांशिक समस्या जिसमें मांसपेशियां कमजोर पड़ जाती हैं और पोटैशियम स्तर में वृद्धि होती है।
  • उतकों में होने वाली क्षति

बहुत ही कम मामलों में कभी हाइपरएल्डोस्टेरोनिज्म (एल्डोस्टेरोन हार्मोन की अधिकता) के कारण हाइपरकलेमिया हो पाता है।

हाइपोकलेमिया निम्न कारणों से हो सकता है:

  • उल्टी या गंभीर रूप से दस्त लगना (और पढ़ें - दस्त का घरेलू इलाज)
  • दवाएं जैसे फ्युरोसेमाइड, हाइपोक्लोरोथायजाइड और इंडेपैमाइड 
  • आहार में पोटैशियम की पर्याप्त मात्रा ना ले पाना
  • रीनल आर्टरी स्टेनोसिस, ऐसी स्थिति जिसमें किडनी तक रक्त पहुंचाने वाली धमनियां संकुचित हो जाती है। 
  • हाइपोकलेमिक पीरियॉडिक पैरालिसिस, स्थिति जिसमें मांसपेशियों में अत्यधिक कमजोरी होती है और पोटैशियम स्तर भी कम हो जाता है। (और पढ़ें - मांसपेशियों की कमजोरी का इलाज)

कभी-कभार, कुशिंग सिंड्रोम और रीनल ट्यूबलर एसिडोसिस से भी हाइपोकलेमिया की स्थिति पैदा हो जाती हैं।

कभी-कभी ब्लड सैंपल लेने के लिए नस नहीं मिल पाती है और कई जगह सुई लगानी पड़ती है, जिसके परिणामस्वरूप ऊतक क्षतिग्रस्त हो जाते हैं। ऊतक क्षतिग्रस्त होने पर लाल रक्त कोशिकाएं नष्ट होने लग जाती हैं और परिणामस्वरूप अधिक मात्रा में पोटाशियम स्रावित होने लग जाता है। इस के कारण भी टेस्ट के रिजल्ट में उच्च पोटाशियम का गलत परिणाम दिख सकता है।

(और पढ़ें - प्रोटीन सी टेस्ट)

संदर्भ

  1. National Health Service [Internet]. UK; Potassium test.
  2. David B. Mount. Disorders of Potassium Balance . Elsevier, February 23, 2017 [Internet]
  3. University of Rochester Medical Center Rochester, NY. [Internet] Potassium
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  6. National Center for Advancing and Translational Sciences. Hyperkalemic periodic paralysis. Genetic and Rare Diseases Information Center
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