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पीठ पर निकलने वाले दाने आमतौर पर उम्र के साथ होने वाले कुछ सामान्य बदलावों का संकेत होते हैं, जो अक्सर अपने आप ठीक हो जाते हैं। हालांकि, कुछ मामलों में इनका इलाज करना मुश्किल हो जाता है। साथ ही साथ कई बार ये फफोलों का रूप ले लेते हैं, जिससे दर्दनाक स्थिति पैदा हो जाती है।

पीठ पर दाने निकलना ही इसका सबसे मुख्य लक्षण होता है। हालांकि, दानों के कई प्रकार हो सकते हैं जैसे सफेद मुंह वाले, काले मुंह वाले और बिना मुंह वाले दाने आदि। इसके अलावा इस स्थिति के साथ कुछ अन्य लक्षण भी देखे जा सकते हैं जैसे पीठ की त्वचा में खुजली, सूजन और लालिमा होना आदि। मुख्य रूप से हार्मोन व प्यूबर्टी से संबंधी बदलावों के कारण पीठ पर दाने निकलने लगते हैं। हालांकि, कुछ प्रकार के बैक्टीरियल इन्फेक्शन इस स्थिति को बदतर बना सकते हैं।

ज्यादातर मामलों में डॉक्टर पीठ पर निकले दानों को देखकर ही स्थिति का पता लगा लेते हैं। हालांकि, यदि डॉक्टर को लगता है कि स्थिति गंभीर है, तो वे कुछ प्रकार के लैब टेस्ट और इमेजिंग स्कैन करवाने की सलाह भी दे सकते हैं। परीक्षण के परिणाम के अनुसार ही इसका इलाज शुरू किया जाता है। डॉक्टर द्वारा इलाज शुरू करने से पहले कुछ घरेलू इलाज करने की सलाह दी जाती है। यदि घरेलू इलाज और सामान्य दवाओं से आराम न हो पाए तो डॉक्टर मेडिकल दवाएं लिखते हैं। मेडिकल दवाओं में टॉपिकल और ओरल दोनों प्रकार की दवाएं शामिल होती हैं।

(और पढ़ें - स्किन इन्फेक्शन का इलाज)

  1. पीठ पर दाने होना क्या है - What is Back acne in Hindi
  2. पीठ पर दाने के लक्षण - Back acne Symptoms in Hindi
  3. पीठ पर दाने के कारण - Back acne Causes in Hindi
  4. पीठ पर दाने होने से बचाव - Prevention of Back acne in Hindi
  5. पीठ पर दाने का परीक्षण - Diagnosis of Back acne in Hindi
  6. पीठ पर दाने का इलाज - Back acne Treatment in Hindi
  7. पीठ पर दाने की जटिलताएं - Back acne Risks & Complications in Hindi
  8. पीठ पर दाने के डॉक्टर

पीठ पर दाने होना क्या है - What is Back acne in Hindi

कुछ लोगों में चेहरे पर दाने निकलने के साथ-साथ पीठ पर दाने निकलने की समस्याएं भी हो सकती हैं। ये दाने कभी-कभी दर्दनाक फफोले भी बन जाते हैं। फफोले बनने के बाद ये दाने कई बार फूट जाते हैं और कुछ मामलों में बिना फूटे ही ठीक हो जाते हैं। दाने निकलने पर पीठ को छूने पर दर्द होता है और प्रभावित त्वचा गर्म भी रहती है।

पीठ पर निकलने वाले दानों की गंभीरता के अनुसार उन्हें विभिन्न श्रेणियों में रखा जाता है। ग्रेड 1 में सामान्य दर्दरहित दाने निकलते हैं जबकि ग्रेड 4 में गंभीर फफोले बन जाते हैं, जिन्हें छूने पर दर्द और बढ़ जाता है। ये फफोले फूट कर घाव का रूप धारण कर सकते हैं।

(और पढ़ें - घाव भरने का घरेलू इलाज)

पीठ पर दाने के लक्षण - Back acne Symptoms in Hindi

पीठ पर होने वाले दानों के लक्षण उनकी गंभीरता पर निर्भर करते हैं। ये पूरी तरह से दर्दरहित भी हो सकते हैं और इनमें गंभीर सूजन, जलन, लालिमा व दर्द जैसे लक्षण भी देखे जा सकते हैं। ज्यादातर मामलों में सिस्टिक एक्ने में ही गंभीर लक्षण देखे जाते हैं, जिनके कारण त्वचा पर खरोंच जैसे निशान होने लग सकते हैं।

पीठ पर दाने निकलने पर सामान्य तौर पर विकसित होने वाले लक्षण -

  • धब्बे बनना पीठ पर दानों का सबसे मुख्य लक्षण होता है। इस असामान्यता के कारण ये स्पष्ट दिखते हैं और इन्हें कोई भी देख सकता है।
  • ये दाने पीठ पर होने के साथ-साथ चेहरे और नितम्बों पर भी विकसित हो सकते हैं।

इसके अलावा पीठ पर दाने होने के साथ-साथ कुछ अन्य लक्षण भी हो सकते हैं, जो इनके प्रकार के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं।

सूजन व लालिमा युक्त दानों में होने वाले लक्षण -

  • इसमें पीठ पर लाल रंग की फुन्सियां निकलने लगती हैं। ये दाने हल्के भी हो सकते हैं और इनसे गंभीर स्थिति भी पैदा हो सकती है।
  • इनसे पीठ पर गहरे दाग व धब्बे बनने लग जाते हैं।
  • पीठ पर बने दानों में सूजन के साथ-साथ पपड़ी भी आ सकती है।

पीठ पर होने वाली सूजन व लालिमा युक्त दानों में निम्न हो सकते हैं -

  • पैप्युल - ये लाल रंग के ऊफरे हुऐ दाने होते हैं, इनका आकार छोटा या बड़ा हो सकता है।
  • पस्टल - ये लाल, उभरे हुऐ और सफेद मुंह वाले होते हैं।
  • सफेद गांठ और सिस्ट - ये सामान्य दाने या मुंहासे से आकार में बड़े होते हैं और यह त्वचा की गहराई से विकसित होने लगते हैं। ये गंभीर स्थितियों में होते हैं और सामान्य दानों के मुकाबले काफी कम मामलों में देखे गए हैं।

बिना सूजन व लालिमा वाले दानों से जुड़े लक्षण -

  • पीठ पर होने वाले दाने, जिनमें सूजन व लालिमा नहीं होती, उन्हें कोमेडॉनल एक्ने कहा जाता है। इनसे किसी प्रकार के धब्बे नहीं बनते हैं।
  • ये दाने त्वचा की सतह से ऊभरे हुऐ होते हैं, लेकिन इनमें किसी प्रकार की खुजली आदि नहीं होती।
  • पीठ पर ये दाने इतनी आसानी से नहीं दिखते हैं, इनसे त्वचा खुरदरी हो जाती है।

बिना सूजन व लालिमा वाले दानों में निम्न शामिल हैं -

  • काले मुंह वाले मुंहासे
  • सफेद मुंह वाले दर्द रहित दाने
  • बिना मुंह वाले दाने
  • बहुत छोटे आकार के दाने, जिन्हें देखा न जा सके, ये आमतौर पर त्वचा के छिद्र रुकने के कारण होते हैं।

डॉक्टर को कब दिखाएं?

पीठ पर होने वाले दाने आमतौर पर अपने आप ठीक हो जाते हैं। यदि ये दाने अधिक गंभीर हो गए हैं या फिर 1 महीने तक इनमें कोई सुधार नहीं आया है, तो किसी अच्छे त्वचा विशेषज्ञ (डर्मेटोलॉजिस्ट) को दिखा लेना चाहिए।

डर्मेटोलॉजिस्ट द्वारा इलाज शुरू करने पर आठ हफ्तों के भीतर असर दिखाना शुरू होता है। हालांकि, यह समस्या पूरी तरह से ठीक होने में 3 से 8 महीने का समय लग सकता है।

(और पढ़ें - पिंपल हटाने के घरेलू उपाय)

पीठ पर दाने के कारण - Back acne Causes in Hindi

पीठ पर दाने होने के कई कारण हो सके हैं, इसलिए इलाज करने के लिए इनके सटीक कारणों का पता लगाना जरूरी होता है। शरीर में सीबम नाम का एक तेल बनता है, जो बालों के कूपों से जुड़ी ग्रंथियों द्वारा बनाया जाता है। सीबम बालों और आसपास की त्वचा में नमी लाने का काम करता है।

जब अतिरिक्त मात्रा में सीबम बनने लगता है और डेड स्किन सेल भी बनने लगते हैं, ऐसे में दाने निकलने लगते हैं। इनके कारण त्वचा के छिद्र रुकने लगते हैं और उनमें बैक्टीरिया बनने लग जाते हैं। जब बाल के कूपों के आसपास की त्वचा में सूजन आने लगती है, तो सफेद मुंह वाले दाने बनने लगते हैं। जब रुके हुऐ छिद्र हवा के संपर्क में आते हैं, तो काले मुंह वाले दाने बनने लगते हैं। पीठ पर दाने होने के सबसे सामान्य कारण निम्न हो सकते हैं -

  • हार्मोन -
    किशोरावस्था में अक्सर हार्मोन के स्तरों में उतार-चढ़ाव होते रहते हैं और हार्मोन संबंधी कई असामान्यातएं हो जाती हैं। इसके परिणामस्वरूप भी पीठ पर दाने की समस्या हो सकती है। महिलाओं में प्यूबर्टी के बाद भी पीठ पर दाने निकल सकते हैं, ऐसा मासिक धर्म और गर्भावस्था के दौरान देखा जा सकता है।
     
  • दवाएं -
    कुछ विशेष प्रकार की दवाएं लेने के साइड इफेक्ट के रूप में भी पीठ पर दाने हो सकते हैं। इन दवाओं में मुख्य रूप से एंटीडिप्रेसेंट्स (अवसाद कम करने वाली) दवाएं शामिल हैं।
     
  • पसीना -
    ज्यादा पसीना आना भी पीठ पर दाने होने जैसी समस्याएं पैदा कर सकता है। यदि आपने तंग कपड़े पहने हैं या आपके कपड़ों से हवा नहीं गुजर पा रही है, तो पीठ पर दाने निकल सकते हैं।
     
  • आनुवंशिक -
    यदि परिवार में पहले एक या अधिक लोगों को पीठ पर दाने हो चुके हैं, तो आपको भी यह समस्या होने का खतरा है।

कुछ अध्ययनों के अनुसार कई ऐसे प्रकार के खाद्य पदार्थ भी हैं, जो पीठ पर पिंपल निकलने का कारण बन सकते हैं। अमेरिकन एकेडमी ऑफ डर्मेटोलॉजी के द्वारा किए गए कुछ अध्ययनों में पाया गया कि कुछ कार्बोहाइड्रेट्स युक्त खाद्य पदार्थ पीठ पर दाने निकलने का कारण बन सकते हैं। इनमें मुख्य रूप से सफेद ब्रेड और आलू के चिप्स आदि शामिल हैं, इनसे शरीर में शुगर का स्तर बढ़ जाता है, जिससे पीठ पर दाने निकलने लगते हैं।

कुछ लोगों में दूध व उससे बने उत्पादों का सेवन करने से भी पीठ पर दाने निकलने जैसी समस्याएं हो सकती है।

पीठ पर दाने होने से बचाव - Prevention of Back acne in Hindi

पीठ पर पिंपल निकलने के कुछ मामले ऐसे होते हैं, जिनकी रोकथाम नहीं की जा सकती है। हालांकि, कुछ मामलों की रोकथाम सामान्य बातों को ध्यान में रखकर की जा सकती है। खेलते व व्यायाम करते समय अधिक टाइट फिटिंग वाले कपड़े न पहनें। ऐसा करने से पसीना अंदर ही रहता है, जिससे त्वचा के छिद्र बंद होने लगते हैं। इसके अलावा कुछ अन्य टिप्स भी हैं, जिनकी मदद से पीठ पर दाने होने से बचाव किया जा सकता है -

  • यदि आपको खेल या जिम के दौरान पसीना आ जाता है, तो उसे सूखने के बाद तुरंत धो लें।
  • पीठ पर अधिक कठोर साबुन का इस्तेमाल न करें और बेहतर होगा किसी त्वचा विशेषज्ञ से अच्छे साबुन का सुझाव लें।
  • प्रभावित त्वचा को ना रगड़ें और ना ही किसी ब्रश आदि का इस्तेमाल करें।
  • कमर पर हुए दानों को नोचें नहीं, ऐसा करने से ये फैल जाते हैं और त्वचा पर स्थायी निशान भी पड़ जाते हैं।
  • यदि आपकी कमर पर दाने निकलने शुरू हो गए हैं, तो उन्हें सीधे धूप के संपर्क में ना लाएं।
  • सोने के लिए नरम बिस्तर का उपयोग करें, क्योंकि अधिक सख्त या खुरदरे बिस्तर से भी दाने क्षतिग्रस्त हो सकते हैं।

(और पढ़ें - धूप से जली त्वचा का इलाज)

पीठ पर दाने का परीक्षण - Diagnosis of Back acne in Hindi

पीठ पर निकलने वाले दानों की पहचान करने के लिए ज्यादातर मामलों में किसी विशेष परीक्षण की जरूरत नहीं पड़ती है। इसे सामान्य रूप से देखकर भी इसकी जांच की जा सकती है। हालांकि, ऐसी बहुत सारी बीमारियां हैं जो देखने में पीठ पर निकलने वाले दानों के जैसी प्रतीत होती हैं। इन बीमारियों के बीच के अंतर को स्पष्ट करने के लिए कुछ विशेष टेस्ट भी किए जा सकते हैं, जिनमें मुख्य रूप से लैब टेस्ट और इमेजिंग स्कैन आदि शामिल हैं।

लैब टेस्ट -

पीठ पर निकलने वाले दानों का परीक्षण करने के लिए वैसे तो किसी लैब टेस्ट की आवश्यकता नहीं होती है। हालांकि, यह पता लगाने के लिए लैब टेस्ट किए जा सकते हैं कि यह कोई संक्रमण तो नहीं है। कुछ मामलों में डॉक्टर पिंपल को हल्के से खुरच कर इसका सैंपल ले सकते हैं।

इसके अलावा कुछ प्रकार के ब्लड टेस्ट भी किए जा सकते हैं, जिनमें हार्मोन व अन्य इन्फेक्शन की जांच की जाती है। ब्लड टेस्ट की मदद से महिलाओं में गर्भावस्था और टेस्टोस्टेरोन के स्तर की जांच भी की जा सकती है।

इमेजिंग टेस्ट -

पीठ प दानों का परीक्षण करने के लिए आमतौर पर इमेजिंग परीक्षणों की आवश्यकता नहीं पड़ती है। हालांकि, इन पिंपल से जुड़ी ऐसी कई स्थितियां हो सकती हैं जैसे अंडाशय में ट्यूमर, ओवेरियन सिस्ट और एड्रिनल ट्यूमर आदि की जांच करने के लिए इमेजिंग टेस्टों की आवश्यकता पड़ती है। इमेजिंग परीक्षणों में मुख्य रूप से एक्स-रे, सीटी स्कैन और एमआरआई आदि शामिल हैं।

पीठ पर दाने का इलाज - Back acne Treatment in Hindi

पीठ पर निकलने वाले दाने आमतौर पर उम्र संबंधी बदलावों की असामान्यता होते हैं, जो कुछ समय बाद ठीक हो जाते हैं। यदि एक महीने तक भी इसमें कोई सुधार नहीं हो रहा है या फिर स्थिति नियमित रूप से गंभीर होती जा रही है, तो ऐसी स्थिति में कुछ ओटीसी दवाओं या घरेलू उपायों का इस्तेमाल किया जाता है। यदि इनसे भी कोई आराम न मिले तो डॉक्टर स्थिति की जांच करके उसके अनुसार इलाज शुरू करते हैं। पीठ पर निकलने वाले दानों के लिए लगाने और खाने दोनों प्रकार की दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है।

टॉपिकल दवाएं -

लगाने वाली दवाओं जैसे क्रीम व मलम आदि को टॉपिकल मेडिसिन कहा जाता है। लगाने वाली दवाओं की मदद से सामान्य से गंभीर मुहासों का इलाज किया जाता है। टॉपिकल दवाओं के विभिन्न प्रकार हो सकते हैं, जिनमें रंगहीन जेल, विभिन्न रंगों की क्रीम और मेडिकेटेड पैड आदि शामिल हैं।

डॉक्टर के द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली टॉपिकल दवाओं में निम्न शामिल हो सकता है -

  • एजेलैक एसिड -
    यह दवा बैक्टीरिया की संख्या कम करने के काम आती है। साथ ही साथ एजेलैक एसिड दवाएं त्वचा की रंगत को बरकरार रखने में मदद करती हैं, जिससे अन्य दवाओं से होने वाली पिगमेंटेशन जैसी समस्याओं से बचाव रहता है।
     
  • टॉपिकल रेटिनोइड -
    ये सिंथेटिक विटामिन ए से बनी होती हैं और इनमें रेटिन-ए माइक्रो (ट्रेटिनोइन), टैजोरैक (टैजारोटीन) व रेटिनोइ जैसा कंपाउंड एडापेलीन (डिफ्फेरिन नामक ब्रांड के अंतर्गत आता है) आदि शामिल हैं। ये तीव्रता के साथ त्वचा से पपड़ी उतारते हैं और छिद्र को खोलकर रखते हैं, ऐसे में पिंपल निकलने से बचाव हो जाता है।
     
  • टॉपिकल एंटीबायोटिक -
    क्रीम, जेल व मलम के रूप में मिलने वाली एंटीबायोटिक दवाएं दाने में मौजूद बैक्टीरिया से सीधे संपर्क में आकर उन्हें क्षति पहुंचाती हैं। इसमें आमतौर पर क्लिंडामाइसिन और एरिथ्रोमाइसिन दवाओं का इस्तेमाल अधिक किया जाता है।
     
  • बेन्जोइल पेरोक्साइड -
    यह दवा लगाने से प्रभावित त्वचा में नमी कम हो जाती है और पपड़ी उतरने लगती है। इसके परिणामस्वरूप बैक्टीरिया कम होने लगते हैं और पिंपल ठीक होने लगते हैं।

कई बार इनमें से दो या अधिक दवाओं का संयोजन करके भी इलाज के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है, जो विशेष रूप से स्थिति के कारण पर निर्भर करता है।

ओरल दवाएं -

ओरल दवाएं शरीर के अंदर से काम करती हैं। खाने की दवाएं आमतौर पर तब ही लिखी जाती हैं, जब स्थिति अधिक गंभीर हो। इसके अलावा यदि टॉपिकल दवाएं काम नहीं कर पा रही हों, तो भी ओरल दवाएं दी जा सकती हैं।

डॉक्टर द्वारा निर्धारित की गई ओरल दवाओं में निम्न शामिल हो सकती हैं -

  • एंटीबायोटिक -
    इन दवाओं का इस्तेमाल अधिक लंबे समय तक नहीं किया जाता है। कम शक्तिशाली एंटीबायोटिक दवाओं को 3 से 6 महीने से अधिक समय तक इस्तेमाल नहीं किया जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि लंबे समय तक इनका इस्तेमाल करने से बैक्टीरिया पर इनका असर होना बंद हो जाता है। अमरीकन एकेडमी ऑफ डर्मेटोलॉजी के अनुसार लंबे समय तक लगातार एंटीबायायोटिक दवाएं लेने से बचना चाहिए।
     
  • आइसोट्रेटिनोइन -
    टॉपिकल रेटिनोइड की तरह यह दवा भी विटामिन ए के सिंथेटिक रूप से बनी होती है। यह पीठ पर होने वाले दानों के लिए सबसे प्रभावी दवा मानी जाती है। हालांकि, इस दवा के कोर्स के दौरान महिलाओं को यह ध्यान रखना बेहद जरूरी है कि वे गर्भधारण न करें, क्योंकि यह दवा जन्म संबंधी दोष का कारण बन सकती है। मार्केट में आइसोट्रेटिनोइन के कई ब्रांड मौजूद हैं, लेकिन स्थिति के अनुसार ही डॉक्टर उनका चुनाव करते हैं।
     
  • हार्मोन ट्रीटमेंट -
    गर्भनिरोधक गोलियां और कैरोस्पिर (स्पिरोनोलैक्टोन) आदि को पीठ पर दाने के लिए प्राथमिक उपाचरों में नामांकित नहीं किया जाता है। लेकिन यह उन महिलाओं का इलाज करने के लिए उचित विकल्प हो सकता है, जिन्हें पीठ पर दाने के साथ-साथ हार्मोन संबंधी विकार हैं या फिर मासिक धर्म संबंधी समस्याएं हो रही हैं।

आइसोट्रेटिनोइन के ठीक से काम न कर पाने पर डॉक्टर इसके साथ-साथ कुछ अन्य ओरल दवाएं व क्रीम आदि भी दे सकते हैं।

पीठ पर दाने की जटिलताएं - Back acne Risks & Complications in Hindi

पीठ पर दाने होने से कोई गंभीर जटिलता नहीं होती है, क्योंकि यह थोड़े समय बाद अपने आप ठीक हो जाते हैं या फिर इनके लिए सामान्य इलाज की जरूरत पड़ती है।

हालांकि, यदि समय पर इसकी देखभाल न की जाए और जरूरत पड़ने पर इलाज न शुरू किया जाए तो इन दानों में संक्रमण हो सकता है। दानों में संक्रमण होने से वे घाव में बदल जाते हैं और गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है।

Dr. Ragini Puvvala

Dr. Ragini Puvvala

डर्माटोलॉजी

Dr. Priyanka Mutyala

Dr. Priyanka Mutyala

डर्माटोलॉजी

Dr. Siva Subramanian

Dr. Siva Subramanian

डर्माटोलॉजी

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