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सेक्स दरअसल एक ऐसा विषय है जिस पर हम सार्वजनिक मंचों पर या अनुभवी लोगों के साथ बातचीत करने में हिचकिचाते हैं। इसी हिचक के चलते आज दुनिया में सिगरेट, शराब, जुए की ही तरह सेक्स का व्यसन भी गंभीर रूप ले चुका है। हालात की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने इसे मनोरोग की श्रेणी में रख दिया है। दुनिया में बलात्कार, यौन शोषण के बढ़ते मामलों और कम उम्र के बच्चों के भी इसके शिकार होने के कारण वाकई स्थिति चिंताजनक ही कही जाएगी। सेक्स एडिक्शन दिमाग की सोचने की क्षमता को भी बुरी तरह से प्रभावित करता है और शिकार व्यक्ति को दिन-रात और कुछ सूझता ही नहीं। यह मनोरोग है जिसका इलाज कराना जरूरी है।

सेक्स ​की लत को चिकित्सीय भाषा में "हाइपरसेक्सुएलिटी" या "हाइपरसेक्सुएलिटी संबंधी विकार" कहते हैं। इसमें व्यक्ति हमेशा सेक्स की कल्पनाएं करता है या कोई न कोई यौन सम्बन्धी व्यवहार करता है। मरीज के लिए इन कल्पनाओं या व्यव्हार को नियंत्रित कर पाना बेहद मुश्किल होता है, जिसकी वजह से उसको कई तरह की परेशानियां होने लगती हैं, जैसे कि स्वास्थ्य, नौकरी, रिश्तों और जिदंगी में नकारात्मक प्रभाव पड़ना।

सेक्स की लत में कई तरह की यौन गतिविधियां शामिल हो सकती हैं। हस्तमैथुन, एक से अधिक लोगों के साथ सेक्स, अश्लील साहित्य (पोर्नोग्राफी) पढ़ना और पैसे देकर सेक्स करने आदि जैसी गतिविधियां सेक्स की लत का हिस्सा होती हैं।

यौन सम्बन्धी व्यवहार या आदतों को सेक्स की लत तब कहा जाता है, जब ये आदतें

  • आपके जीवन का एक बड़ा हिस्सा बन जाती हैं
  • आपके नियंत्रण से बाहर होने लगती हैं 
  • आपके और अन्य लोगों के लिए हानिकारक साबित होती हैं

इस समस्या की गंभीरता को देखते हुए आपको आगे सेक्स की लत के लक्षण, सेक्स की लत के कारण, सेक्स की लत के इलाज और सेक्स की लत के बचाव के बारे में विस्तार से बताया जा रहा है।

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  1. सेक्स की लत क्या होती है?
  2. क्या सेक्स की लत बाकी लतों जैसी होती है?
  3. किसे ज़्यादा होती है सेक्स की लत?
  4. क्या इसे मानसिक बीमारी माना जाता है?
  5. इसका इलाज कैसे होता है?
  6. क्या ये लत पूरी तरह खत्म हो सकती है?
  7. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
  8. सारांश
यौन रोग के डॉक्टर

सेक्स की लत, या यौन व्यसन, दरअसल एक ऐसी स्थिति है जब किसी व्यक्ति का ध्यान हर समय सेक्स, पोर्न, या यौन कल्पनाओं में डूबा रहता है — इतना कि वह चीज़ उसके जीवन पर हावी हो जाती है। यानी इंसान चाहे भी तो अपने विचार या व्यवहार को कंट्रोल नहीं कर पाता। इससे उसके रिश्ते, काम, मानसिक सेहत और रोज़मर्रा की ज़िंदगी सब कुछ बिगड़ने लगता है।

ऐसे लोग बार-बार सेक्स करने या पोर्न देखने की इच्छा पर काबू नहीं रख पाते। ये काम अपने आप में बुरे नहीं हैं, लेकिन जब यही चीज़ आपकी ज़िंदगी को चलाने लगे — तब ये “लत” बन जाती है।

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हाँ, बिल्कुल। जिस तरह शराबी या ड्रग्स लेने वाला व्यक्ति “बस एक बार और” के लालच में रहता है, वैसे ही सेक्स की लत वाले व्यक्ति को भी अंदर से एक ज़बरदस्त खिंचाव महसूस होता है। उसे लगता है कि जब तक वो ये काम नहीं करेगा, तब तक सुकून नहीं मिलेगा।
भले ही उसे पता हो कि इससे रिश्ते बिगड़ रहे हैं, करियर पर असर पड़ रहा है, फिर भी वो खुद को रोक नहीं पाता।

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अध्ययनों के मुताबिक, लगभग 3 से 10 प्रतिशत लोग इससे प्रभावित होते हैं। यह पुरुषों में महिलाओं के मुकाबले ज़्यादा आम है। ज़्यादातर लोगों में यह आदत 18 साल की उम्र के आसपास शुरू होती है, लेकिन वे आमतौर पर 35-40 की उम्र तक इलाज के लिए सामने नहीं आते।
अक्सर ऐसे लोगों को अन्य मानसिक समस्याएँ भी होती हैं, जैसे डिप्रेशन, चिंता, या कभी-कभी बाइपोलर डिसऑर्डर।

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इस पर अभी भी बहस जारी है। कुछ एक्सपर्ट्स इसे एक “मानसिक विकार” मानते हैं, जबकि कुछ कहते हैं कि सेक्स अपने आप में बुरा नहीं, बस उसका “कंट्रोल खो देना” असली समस्या है।

सेक्स की लत के लक्षण क्या हैं?

अगर आपको या किसी जानने वाले को ये बातें महसूस होती हैं, तो ये लक्षण हो सकते हैं:

  • दिन का ज़्यादातर समय सेक्स या पोर्न सोचने में जाता है।
  • बार-बार हस्तमैथुन या पोर्न देखना।
  • कई बार सेक्स के लिए पैसे खर्च करना, स्ट्रिप क्लब या डेटिंग ऐप्स पर ज़्यादा समय बिताना।
  • जोखिम भरे सेक्स में शामिल होना या साथी बदलते रहना।
  • शर्म, अपराधबोध या खुद से नफरत जैसा महसूस होना — पर फिर भी खुद को रोक न पाना।

इसके नतीजे क्या हो सकते हैं?

सेक्स की लत इंसान की ज़िंदगी को कई तरह से नुकसान पहुंचाती है:

  • रिश्तों में दरार, पार्टनर से दूरी या झगड़े।
  • काम पर ध्यान न दे पाना, करियर पर असर।
  • आर्थिक नुकसान, क्योंकि कई बार लोग यौन सेवाओं पर पैसे खर्च करते हैं।
  • मानसिक तनाव, अपराधबोध, और डिप्रेशन।
  • कभी-कभी यौन संक्रमण (STI) या अवांछित गर्भावस्था का खतरा भी।

ये लत क्यों लगती है?

इसका कोई एक कारण नहीं है। कुछ आम वजहें हैं:

  • दिमाग में डोपामिन जैसे “मूड रसायनों” का असंतुलन।
  • बचपन का कोई ट्रॉमा या भावनात्मक कमी।
  • नशे की लत या कुछ दवाओं का साइड इफ़ेक्ट।
  • अकेलापन, तनाव, या आत्मसम्मान की कमी।

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सेक्स की लत का इलाज भी बाकी लतों की तरह होता है — यानी दवा, थेरेपी और सपोर्ट ग्रुप के साथ।

1. दवाएं:
कई बार डॉक्टर एंटीडिप्रेसेंट या ऐसी दवाएं देते हैं जो दिमाग के उन रसायनों को संतुलित करती हैं जो इच्छा को बढ़ाते हैं। अगर कोई दूसरी मानसिक बीमारी भी हो, तो उसी के हिसाब से दवा दी जाती है।

2. थेरेपी (मनोचिकित्सा):
यह सबसे असरदार तरीका है। एक काउंसलर या साइकॉलजिस्ट व्यक्ति की सोच और व्यवहार समझकर उसे ट्रिगर से दूर रहना सिखाता है।
कॉग्निटिव बिहेवियर थेरेपी (CBT) जैसी तकनीकें बहुत मदद करती हैं।

3. सपोर्ट ग्रुप्स:
जैसे शराब की लत वाले लोगों के लिए “Alcoholics Anonymous” होते हैं, वैसे ही सेक्स एडिक्शन वालों के लिए भी “Sex Addicts Anonymous” जैसे ग्रुप्स होते हैं, जहाँ लोग खुलकर अपनी बात साझा करते हैं और एक-दूसरे की मदद करते हैं।

सेक्स की लत का “इलाज” नहीं बल्कि “मैनेजमेंट” होता है। यानी अगर इंसान चाहे, तो इसे पूरी तरह कंट्रोल में रखा जा सकता है।

ज़रूरत होती है ईमानदारी, धैर्य और लगातार कोशिश की।

इसे रोकने के कुछ आसान तरीके

  • अपने ट्रिगर्स पहचानें – जैसे अकेलापन, स्ट्रेस या बोरियत।
  • पोर्न साइट्स या डेटिंग ऐप्स से दूरी बनाएं।
  • समय को प्रोडक्टिव चीज़ों में लगाएँ — जैसे एक्सरसाइज़, योग, या हॉबीज़।
  • शराब या नशे से दूर रहें।
  • ज़रूरत हो तो मनोचिकित्सक या काउंसलर की मदद लें।

याद रखिए

सेक्स की लत कोई शर्म की बात नहीं, बल्कि एक मानसिक स्थिति है — जैसे किसी को डिप्रेशन या चिंता होती है। अगर आप या आपका कोई जानकार इससे जूझ रहा है, तो मदद लें। इलाज और सही मार्गदर्शन से पूरी ज़िंदगी दोबारा संतुलित और खुशहाल बनाई जा सकती है।

अपने सवालों के जवाब यहाँ पाएं।

क्या सेक्स एडिक्शन वास्तव में एक मेडिकल समस्या है?

हाँ, शोधों के अनुसार इसे अब एक व्यवहारिक या मानसिक स्वास्थ्य विकार के रूप में पहचाना जा रहा है। यह उतना ही वास्तविक है जितना डिप्रेशन या नशे की लत।

सेक्स की लत और अधिक सेक्स चाहने में क्या फर्क है?

अधिक इच्छा सामान्य है, लेकिन जब यह नियंत्रण से बाहर हो जाए, रोज़मर्रा के कामों में बाधा डालने लगे, और अपराधबोध या तनाव पैदा करे — तब यह लत कहलाती है।

क्या सेक्स लत सिर्फ पुरुषों में होती है?

 नहीं, महिलाओं में भी यह समस्या देखी जाती है, हालांकि समाज में शर्म और कलंक के कारण वे खुलकर इस बारे में बात नहीं कर पातीं।

क्या इसका इलाज संभव है?

बिलकुल। सही थेरेपी (जैसे CBT या माइंडफुलनेस), दवाएं और सपोर्ट सिस्टम के ज़रिए व्यक्ति धीरे-धीरे नियंत्रण पा सकता है। कुछ शोधों के अनुसार, लगातार 3–6 महीने की थेरेपी से 60% से अधिक मरीजों में सुधार पाया गया।

क्या सेक्स की लत दोबारा लौट सकती है?

हाँ, अगर व्यक्ति फिर से ट्रिगरिंग स्थिति में आ जाए या इलाज बीच में छोड़ दे। इसलिए दीर्घकालिक निगरानी और थेरेपी जारी रखना ज़रूरी है।

सेक्स की लत एक ऐसी मानसिक परेशानी है जिसमें व्यक्ति अपने यौन विचारों या इच्छाओं पर नियंत्रण नहीं रख पाता। यह सिर्फ ज़्यादा सेक्स चाहने से अलग होती है, क्योंकि इसमें दिमाग बार-बार उसी सुख की तलाश में रहता है, जैसे कोई नशा करता है। रिसर्च में पाया गया है कि यह समस्या डोपामिन के असंतुलन और भावनात्मक खालीपन से जुड़ी होती है। इससे व्यक्ति के रिश्ते, काम और मानसिक शांति पर बुरा असर पड़ता है। अच्छी बात यह है कि यह इलाज योग्य है। मनोचिकित्सा, योग, ध्यान और सपोर्ट ग्रुप की मदद से व्यक्ति धीरे-धीरे नियंत्रण पा सकता है और सामान्य जीवन जी सकता है।

Dr. Hakeem Basit khan

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सेक्सोलोजी
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