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बच्चों के कान में दर्द होने की समस्या बेहद ही आम है। अकसर बच्चे अपने माता पिता से कान में दर्द होने की शिकायत करते हैं। बच्चों के कान का दर्द उनके कान में होने वाले संक्रमण की ओर संकेत करता है। पांच साल से कम आयु के करीब 40 प्रतिशत बच्चों को कान में दर्द की समस्या होती ही हैं।

संक्रमण के अलावा कान में दर्द होने के कई अन्य कारण भी होते हैं। लेकिन संक्रमण को इसकी मुख्य वजह माना जाता है। ऐसे में बच्चों को इलाज की जरूरत होती है। साथ ही बच्चों के कान में दर्द को ठीक करने के लिए कई तरह के घरेलु उपायों को भी अपनाया जा सकता है।

(और पढ़ें - बच्चों की देखभाल कैसे करें)

इस लेख में आपको बच्चों के कान में दर्द के बारे में बताया गया है। साथ ही आपको बच्चों के कान में दर्द के लक्षण, बच्चों के कान में दर्द के कारण, बच्चों के कान में दर्द से बचाव और बच्चों के कान में दर्द का इलाज आदि विषयों के बारे में विस्तार से बताया गया है।

(और पढ़ें - शिशु टीकाकरण चार्ट)

  1. बच्चों के कान में दर्द के लक्षण - Baccho ke kaan me dard ke lakshan
  2. बच्चों के कान में दर्द के कारण व जोखिम कारक - Baccho ke kaan me dard ke karan aur jokhim karak
  3. बच्चों का कान में दर्द से बचाव - Baccho ka kaan me dard se bachav
  4. बच्चों के कान में दर्द का इलाज - Baccho ke kaan me dard ka ilaj
  5. बच्चों के कान में दर्द का घरेलू उपाय - Baccho ke kaan me dard ka gharelu upay

व्यस्कों में होने वाले कान में दर्द के लक्षण को आसानी से पहचाना जा सकता है। इस दौरान व्यस्कों को कान में दर्द होता है, कान से द्रव निकलने लगता है और उनको कम सुनाई देता है। लेकिन बच्चों में कान दर्द के लक्षण अधिक व्यापक स्तर पर दिखाई देते हैं। इस समस्या में होने वाले लक्षण निम्नलिखित हैं।

  • कान खींचना:
    कान में दर्द होने पर गंभीर स्थिति से परेशान होकर बच्चे अपने कान खींचने लगते हैं। (और पढ़ें - कान के दर्द के लिए क्या करें)
     
  • बुखार आना:
    कई बार बिना किसी अन्य समस्या से कान का दर्द बच्चों में बुखार की वजह भी बन जाता है। बच्चों के कान में संक्रमण की वजह से होने वाले बुखार में बच्चे के शरीर का तापमान 100.4 डिग्री फारेनहाइट (38 डिग्री सेल्सियस) से अधिक हो जाता है।
     
  • बच्चे को भूख कम लगना:
    कान के यूस्टेचियन ट्यूब (Eustachian tube: अंदरुनी कान की नली) में सूजन की वजह से कान के मध्य हिस्से पर तेज दबाव पड़ता है और हल्का हल्का दर्द होने लगता है। इस स्थिति में बच्चे को खाने में रुचि नहीं रहती और उसकी भूख भी कम हो जाती है। (और पढ़ें - भूख न लगने का इलाज)
     
  • जी मिचलाना और उल्टी आना:
    कान के अंदरुनी दबाव के कारण दो से तीन साल के बच्चों को लगातार जी मिचलाने और उल्टी आने जैसा अनुभव होता है। (और पढ़ें - खून की उल्टी का इलाज)
     
  • सुनने में परेशानी आना:
    कान के मध्य हिस्से में संक्रमित द्रव इकट्ठा होने से आवाज बच्चों के अंदरुनी कान तक नहीं पहुंच पाती है। इसकी वजह से बच्चे को सुनने में परेशानी आती है और वह किसी भी बात पर जल्द प्रतिक्रिया नहीं दे पाता है।
     
  • सोते समय परेशानी होना:
    कान में तेज दर्द के कारण बच्चे को सोने में परेशानी होती है और वह चिड़चिड़ा हो जाता है। (और पढ़ें - नवजात शिशु को सुलाने के तरीके)
     
  • कान से द्रव आना:
    कान दर्द में बच्चे के कान से पीला या सफेद रंग का द्रव निकलता है, जो कान में पस होने की ओर इशारा करता है।    

(और पढ़ें - कान के रोग का इलाज)

बच्चों में कान दर्द के निम्नलिखित कारण हो सकते हैं:

  • बाहरी वस्तु का कान में जाना:
    अक्सर बच्चे किसी भी चीज को मुंह, कान और नाक में डाल लेते हैं। बच्चे के द्वारा किसी बाहरी वस्तु को कान में डालना भी कान में दर्द की वजह बनता है। (और पढ़ें - बच्चों को सिखाएं अच्छी सेहत के लिए अच्छी आदतें)
     
  • सर्दी जुकाम:
    सर्दी जुकाम बच्चों के कान में संक्रमण की मुख्य वजह होता है। सर्दी जुकाम का वायरस पस के साथ बच्चे के कान के अंदरुनी हिस्से (Eustachian tube) से होता हुआ मध्य हिस्से में पहुंच जाता है और संक्रमण का कारण बनता है। (और पढ़ें - सर्दी जुकाम में क्या खाएं)
     
  • कान में मैल होना:
    कई बार कान में अधिक मात्रा में मैल बनने से या कान का मैल ज्यादा अंदर जाने के कारण बच्चों को कान में दर्द महसूस होने लगता है। इससे बच्चे के कान में घंटी बजने की तरह आवाज होने लगती है और उसको तेज दर्द का अनुभव होता है। (और पढ़ें - बच्चों के दांत निकलने की उम्र)
     
  • साइनोनैजल इन्फेक्शन:
    साइनस के संक्रमण को साइनसाइटिस (sinusitis) कहा जाता है। इसकी वजह से यूस्टेचियन ट्यूब में सूजन आ जाती, जिससे मध्य कान में दबाव बढ़ने लगता है। (और पढ़ें - साइनस के घरेलू उपाय)
     
  • मध्य कान में संक्रमण:
    बच्चे के मध्य कान में वायरल और बैक्टीरियल संक्रमण होना भी कान में तेज दर्द की वजह बनता है।
     
  • कान के दबाव में बदलाव होना:
    कान के दबाव में बदलाव के कारण भी बच्चे को कान में दर्द महसूस होता है। ऊंची जगह पर जाने से इस दबाव में बदलाव आता है, जैसे – हवाई यात्रा के समय आदि। (और पढ़ें - कान में खुजली का इलाज)

बच्चों के कान में दर्द के जोखिम कारक

कान मे दर्द की मुख्य वजह संक्रमण होता है और निम्नलिखित स्थितियों में बच्चे को कान में दर्द का जोखिम बढ़ जाता है।

  • निर्धारित समय से पहले जन्म लेने वाले शिशु:
    डॉक्टर बताते हैं कि जो बच्चे गर्भावस्था के निश्चित समय से पहले जन्म लेते हैं उनको मध्य कान में संक्रमण होने की संभावना अधिक होती है। प्रतिरोधक क्षमता का धीमी गति से विकास होना इसकी मुख्य वजह होता है।
     
  • घूम्रपान व प्रदूषण वाले वातावरण में रहना:
    धूम्रपान वाले माहौल और वाहनों से निकलने वाले धुएं के अधिक संपर्क में आने वाले बच्चों को कान का संक्रमण होने का खतरा ज्यादा होता है। (और पढ़ें - बच्चे की उम्र के अनुसार लंबाई और वजन का चार्ट)
     
  • डे केयर में रहना:
    शहरी माहौल में अधिकतर बच्चे स्कूल के बाद डे केयर में ही अपना ज्यादातर समय व्यतीत करते हैं, डे केयर को क्रेच भी कहा जाता है। ऐसे बच्चों को सर्दी जुकाम और गले का संक्रमण होने का जोखिम अधिक होता है। सर्दी जुकाम और गले का संक्रमण, दोनों ही तरह की समस्याएं कान में संक्रमण का कारण बनती हैं।     

(और पढ़ें - गले में दर्द का इलाज)

बच्चे की जीवनशैली में थोड़े से बदलाव से आप बच्चे का कान दर्द से बचाव कर सकते हैं। बच्चों में कान के दर्द से बचाव करने के लिए आप निम्नलिखित उपाय अपना सकते हैं:

  • बच्चे के कान को किसी तेज धारदार चीज से साफ ना करें और बच्चा भी ऐसा न करे इस बात का ध्यान रखें। (और पढ़ें - डायपर रैश का उपचार)
  • लेटे हुए बच्चे को बोतल से दूध ना पिलाएं और ना ही उसको खाना खिलाना चाहिए, क्योंकि ऐसा करने से बच्चे को कान का इंफेक्शन हो सकता है। (और पढ़ें -  बच्चे को बोतल से दूध पिलाने के फायदे)
  • घर के अंदर और बाहर खेलते समय बच्चा कई बार धूल और दूषित चीजों को भी छू लेता है। ऐसे में आप बच्चे को खाना खाने से पहले हाथ धोने की अच्छी आदत सिखाएं।
  • स्विमिंग करते समय बच्चे के कान को सुरक्षित रखने के लिए उसके कान में इयर प्लग (कान में पानी जाने से बचाने वाला यंत्र) लगाएं। (और पढ़ें - स्विमिंग के दौरान बरतें सावधानी)
  • बच्चे को बार-बार होने वाली खांसी और सर्दी जुकाम को अनदेखा न करें। (और पढ़ें - बच्चों की खांसी का इलाज)
  • बच्चे को नियमित रूप से फ्लू व अन्य बीमारियों से बचाव के लिए टीके लगाएं। इससे बच्चे के मध्य कान में होने वाले संक्रमण की संभावना कम हो जाती है।
  • जन्म के बाद शिशु को नियमति रूप से स्तनपान कराएं। मां के दूध से बच्चे को एंटीबॉडीज मिलते हैं, जो कई तरह के बैक्टीरियल और वायरल संक्रमण से उसका बचाव करते हैं।

(और पढ़ें - शिशु का रंग गोरा करने के उपाय)

बच्चों में होने वाले कान दर्द का इलाज उनके कारणों के आधार पर किया जाता है। यदि बच्चे के कान में दर्द किसी बीमारी जैसे सर्दी जुकाम, साइनस या अन्य किसी कारण से हो रहा है, तो इन समस्याओं का इलाज करते ही बच्चे का कान दर्द अपने आप ही ठीक हो जाता है। जबकि कान दर्द की मुख्य वजह बनने वाले संक्रमण के इलाज की आवश्यकता होती है। इसके लिए डॉक्टर निम्नलिखित इलाज के सुझाव दे सकते हैं।

  • दर्द निवारक दवाएं:
    बच्चे के कान में होने वाला हल्का संक्रमण भी सामान्यतः तेज दर्द की वजह होता है। इस स्थिति में डॉक्टर बच्चे के दर्द को कम करने के लिए इब्रुफिन और पैरासिटामोल देने की सलाह देते हैं। इससे संक्रमण के कारण बच्चे को होने वाला बुखार भी कम हो जाता है। लेकिन इन दवाओं की अधिक मात्रा बच्चे को देने से पहले डॉक्टर से अवश्य ही सलाह ले लेनी चाहिए। (और पढ़ें - पेन किलर के फायदे)
     
  • कुछ समय रुकना:
    कई बार बच्चे के कान में हल्का संक्रमण या दर्द होने पर डॉक्टर किसी भी तरह की दवा नहीं देते हैं। इस स्थिति में डॉक्टर एक से दो सप्ताह तक संक्रमण खुद ठीक होने का इंतजार करते हैं। इस प्रक्रिया में शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली पर भरोसा किया जाता है कि वह संक्रमण को स्वंय ठीक कर देगी। (और पढ़ें - बच्चों की इम्यूनिटी कैसे बढ़ाएं)
     
  • एंटीबायोटिक्स:
    यदि बच्चे के कान का इंफेक्शन गंभीर हो तो डॉक्टर एंटीबायोटिक्स दवाएं देते हैं। इसके अलावा बच्चे को 102 डिग्री या उससे अधिक बुखार होने और 48 घंटों से अधिक समय तक कान में हल्का या गंभीर दर्द होने पर भी बच्चों को एंटीबायोटिक दवाएं दी जाती हैं। 6 महीनों से कम आयु के बच्चों के मध्य कान में होने वाले गंभीर दर्द के दौरान उनको सबसे पहले एंटीबायोटिक दवाएं ही दी जाती हैं।

(और पढ़ें - बच्चों के बुखार का इलाज)

अगर बच्चा लगातार रोता है और थका हुआ दिखाई देता है तो उसके कान में संक्रमण हो सकता है। बच्चे को होने वाले कान के दर्द में निम्नलिखित घरेलु उपचार अपनाए जा सकते हैं।

  • बच्चे के कान पर गर्म सिकाई करें। (और पढ़ें - बच्चों को मोटा करने के उपाय)
  • या बच्चे के कान की ठंडी सिकाई कर सकते हैं।
  • तुलसी का पौधा भारत के अधिकतर घरों में पाया जाता है। इसमें कई तरह के औषधिय गुण मौजूद होते हैं। तुलसी के पत्तों के अर्क की कुछ बूंदे बच्चे के कान में डालने से कान दर्द में आराम मिलता है। (और पढ़ें - तुलसी के तेल के फायदे)
  • कान दर्द में ऑलिव ऑयल (जैतून का तेल) को भी प्रभावी घरेलू उपचार माना जाता है। इसका उपयोग करने के लिए आप थोड़ा सा तेल लेकर हल्का गुनगुना कर लें और इसको रूई की सहायता से बच्चे के प्रभावित कान के बाहर व अंदर लगाएं।  (और पढ़ें - बच्चों के पेट में कीड़े का इलाज)
बच्चों के कान दर्द के अन्य घरेलू उपाय
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