मरास्मस - Marasmus in Hindi

Dr. Anurag Shahi (AIIMS)MBBS,MD

March 28, 2022

March 28, 2022

मरास्मस
मरास्मस

मरास्मस रोग ऐसी स्थिति है, जिसमें मरीज कुपोषण का शिकार हो सकता है. वैसे तो यह किसी भी आयु वर्ग के लोगों को प्रभावित कर सकता है, लेकिन बच्चों में मरास्मस रोग अधिक देखने को मिलता है. श्वसन नली में इंफेक्शन व मानसिक रूप से विकास न होने इसके कुछ लक्षण हैं. यह रोग पोषक तत्वों की कमी के कारण होता है.

आज इस लेख में हम मरास्मस रोग के लक्षण, कारण, निदान व इलाज के बारे में चर्चा करेंगे -

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क्या है मरास्मस रोग? - What is Marasmus in Hindi

पोषक तत्वों की कमी से होने वाली एक गंभीर हेल्थ कंडीशन को मरास्मस रोग कहते हैं. शरीर में प्रोटीन और फैट जैसे जरूरी तत्वों की कमी से यह रोग होता है. ड्राई स्किन, बहुत कम वजन व कमजोरी इस रोग के लक्षण हैं. इस प्रकार की समस्या ज्यादार विकासशील देशों में देखने को मिलती है. गंभीर मामलों में ये रोग जानलेवा भी साबित हो सकता है. संतुलित खान-पान और कुछ जरूरी पोषक तत्व से भरपूर डाइट से इस रोग को ठीक किया जा सकता है.

मरास्मस के लक्षण - Marasmus Symptoms in Hindi

इस रोग का सबसे मुख्य लक्षण कम वजन होना है. इसके अलावा, कम मसल्स मास को भी इस रोग का लक्षण माना गया है. इसके अलावा, निम्न लक्षण भी नजर आ सकते हैं -

  • क्रोनिक डायरिया
  • रेस्पिरेटरी इंफेक्शन
  • बौद्धिक विकास में रुकावट
  • बच्चे के शारीरिक विकास में बाधा आना
  • जरूरत से ज्यादा चिड़चिड़ापन होना
  • बहुत गुस्सा आना
  • उम्र से अधिक बड़ा दिखना
  • लो एनर्जी लेवल
  • रूखी त्वचा
  • आंखों में सूखापन

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मरास्मस के कारण - Marasmus Causes in Hindi

मरास्मस रोग होने के पीछे मुख्य कारण निम्न प्रकार से हैं -

  • मालन्यूट्रिशन यानी शरीर को पर्याप्त रूप से पोषक तत्व न मिलना इस रोग की मुख्य वजह है.
  • जिन्हें प्रोटीन, कैलोरीकार्बोहाइड्रेट्स पर्याप्त रूप से नहीं मिल पाते, वो इसकी चपेट में आते हैं
  • शरीर में आयरन, आयोडीन, जिंकविटामिन-ए की कमी से भी ये रोग हो सकता है.
  • जो महिलाएं अपने बच्चे को पर्याप्त स्तनपान नहीं करा पाती है, उन बच्चों को भी यह रोग हो सकता है.
  • वायरस या बैक्टीरिया के चलते भूख में आई कमी के कारण भी मरास्मस रोग हो सकता है.
  • जिन क्षेत्रों में मेडिकल सुविधाएं पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं होती हैं, वहां भी इस रोग के उत्पन्न होने के आशंका अधिक बढ़ जाती है.

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मरास्मस का निदान - Diagnosis of Marasmus in Hindi

डॉक्टर फिजिकल एग्जामिन के द्वारा इस रोग की पहचान कर सकते हैं. बच्चे की हाइट और वजन से भी यह पता किया जा सकता है कि उसे यह रोग है या नहीं. इस रोग का पता लगाने के लिए निम्न टेस्ट किए जाते हैं, जो इस प्रकार हैं -

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मरास्मस का इलाज - Marasmus Treatment in Hindi

मरास्मस रोग का इलाज निम्न तरीकों से किया जा सकता है -

रिससिटेशन व स्टेबलाइजेशन

  • इस इलाज में इंफेक्शन और डिहाइड्रेशन को दूर किया जाता है. शरीर से डिहाइड्रेशन को दूर करने के लिए लिक्विड सब्सटेंस को इंजेक्शन से नर्व्स के रास्ते दिया जा सकता है. 
  • ब्लड संबंधित बीमारी हाइपोवोलेमिया में नर्व्स के रास्ते ब्लड की कमी पूरी की जा सकती है.
  • अगर शरीर का तापमान नॉर्मल से कम होता है, तो रोगी को गरम कमरे में रखा जा सकता है.
  • एंटीबायोटिक दवाओं के जरिए शरीर से इंफेक्शन को कम किया जा सकता है.
  • रोगी को उम्र के मुताबिक डाइट देने के लिए चार्ट और समय तय किया जा सकता है.

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न्यूट्रिशनल रिहैबिलिटेशन

रोगी की बॉडी में इलेक्ट्रोलाइट असंतुलित होने पर न्यूट्रिशनल रिहैबिलिटेशन की प्रक्रिया शुरू की जाती है. इसमें पर्याप्त कैलोरी की मात्रा वैक्सीनेशन और फिजिकल एक्टिविटी का ध्यान किया जाता है. इस प्रोसेस में 15 से 20 दिन लग सकते हैं. यह पूरा प्रोसीजर रोगी की स्थिति व आयु जैसे फैक्टर्स पर आधारित है. साथ ही उन फैक्टर्स के आधार पर भी तय होता है कि रोगी को कब और कितनी डाइट देनी है.

सारांश – Summary

बच्चे को सही न्यूट्रिएंट्स और डाइट न मिलने पर मरास्मस रोग हो सकता है. इससे कमजोर व चिड़चिड़ापन हो सकता है. रोग की जांच स्टूल टेस्ट, इलेक्ट्रोलाइट टेस्ट से की जाती है. रिससिटेशन व स्टेबलाइजेशन और न्यूट्रिशनल रिहैबिलिटेशन की प्रक्रिया इस रोग का इलाज हैं.



मरास्मस के डॉक्टर

Dt. Manjari Purwar Dt. Manjari Purwar पोषणविद्‍
11 वर्षों का अनुभव
Dt. Akanksha Mishra Dt. Akanksha Mishra पोषणविद्‍
8 वर्षों का अनुभव
Surbhi Singh Surbhi Singh पोषणविद्‍
22 वर्षों का अनुभव
Dt. Avni Kaul Dt. Avni Kaul पोषणविद्‍
8 वर्षों का अनुभव
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