पेशाब न रोक पाना एक आम समस्या है, इसमें बार-बार पेशाब निकल जाने की समस्या होती है। यह स्थिति मूत्राशय प्रभावित होने की वजह से होती है। यह अपने आप में कोई बीमारी नहीं है, लेकिन यह किसी अंतर्निहित स्वास्थ्य स्थिति का लक्षण हो सकती है। उदाहरण के लिए, महिलाओं में गर्भावस्था जबकि पुरुषों में प्रोस्टेट बढ़ना

यह लक्षण अचानक से महसूस होता है। कभी-कभी इन लक्षणों से जल्द राहत मिल सकती है, जबकि कई बार यह समस्या लंबे समय तक प्रभावित कर सकती है। पेशाब न रोक पाने के चार प्रकार हैं :

  • स्ट्रेस इंकॉन्टिनेंस : व्यायाम करते हुए, खांसते, हंसते और छींकते समय पेशाब न रोक पाना
  • ओवरफ्लो इंकॉन्टिनेंस : मूत्राशय के पूरी तरह से खाली न होने की वजह से पेशाब निकल जाना, मूत्राशय का इसकी क्षमता से ज्यादा भर जाना और पेशाब टपकना
  • अर्ज इंकॉन्टिनेंस : अचानक पेशाब लगना और इस दौरान वॉशरूम न इस्तेमाल कर पाना
  • मिक्स्ड इंकॉन्टिनेंस : अर्ज और स्ट्रेस इंकॉन्टिनेंस के कॉम्बिनेशन की वजह से पेशाब का रिसाव होना

अस्थायी या एक्यूट यूरीनरी इंकॉन्टिनेंस (पेशाब न रोक पाना) के कुछ सामान्य कारणों में मूत्र पथ के संक्रमण (यूटीआई), मानसिक भ्रम, गर्भावस्था, गंभीर रूप से कब्ज और मूत्राशय पर दबाव पड़ना आदि शामिल हैं।

(और पढ़ें - कब्ज का घरेलू उपाय क्या है)

क्रोनिक यूरीनरी इंकॉन्टिनेंस के कारणों में पेल्विक ऑर्गन यानी श्रोणि के अंगों को नुकसान पहुंचना, रीढ़ की हड्डी की चोट, तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करने वाली बीमारियां (जैसे स्ट्रोक), पुरुषों में प्रोस्टेट बढ़ना, मूत्राशय में ऐंठन, मूत्राशय को नियंत्रित करने वाले हिस्से का कमजोर होना और अल्जाइमर रोग शामिल हैं।

पेशाब न रोक पाने के लिए पारंपरिक रूप से ली जाने वाली दवाएं मूत्राशय के कार्य को बेहतर बनाने, मूत्राशय की मांसपेशियों को आराम देने और मूत्राशय में मांसपेशियों की ऐंठन को रोकने में मदद करती हैं। इसके इलाज के लिए दवाओं के अलावा सर्जरी, बोटोक्स इंजेक्शन और ब्लैडर नर्व-सिमुलेटिंग टेक्नीक जैसे तरीकों का उपयोग किया जाता है।

पेशाब न रोक पाने के होम्योपैथिक उपचार में बेलाडोना, नक्स वोमिका, सेपिया ऑफिसिनेलिस, कॉस्टिकम, बेन्जोइकम एसिडम, सैबल सेरुलता, थायरॉयडिनम, पल्सेटिला प्रेटेंसिस, यूपेटोरियम पर्प्यूरम और फेरम फॉस्फोरिकम जैसे उपचार शामिल हैं। होम्योपैथिक डॉक्टर व्यक्तिगत लक्षणों, मानसिक और शारीरिक विशेषताओं के आधार पर उपाय निर्धारित करता है। यही वजह है कि यदि दो व्यक्तियों में एक जैसी बीमारी या लक्षण है, तो उनके लिए एक जैसे उपाय नहीं होते हैं।

(और पढ़ें - पेशाब रोकने के फायदे)

  1. पेशाब न रोक पाने की होम्योपैथिक दवा - Homeopathic medicines for Urine Incontinence in Hindi
  2. पेशाब न रोक पाने के लिए होम्योपैथिक दवाएं और उपचार कितने प्रभावी हैं - How effective are homeopathic medicines for Urine Incontinence in Hindi
  3. पेशाब न रोक पाने के लिए होम्योपैथी के अनुसार आहार और जीवन शैली में बदलाव - Diet according to homeopathy for Urine Incontinence in Hindi
  4. पेशाब न रोक पाने के लिए होम्योपैथिक दवा और उपचार के जोखिम - Side effects of homeopathic medicine for Urine Incontinence in Hindi
  5. पेशाब न रोक पाने के लिए होम्योपैथिक उपचार से संबंधित टिप्स - Tips related to homeopathic treatment for Urinary incontinence in Hindi
  6. पेशाब न रोक पाने की होम्योपैथिक दवा और इलाज के डॉक्टर

नीचे कुछ होम्योपैथिक उपाय दिए गए हैं, जो पेशाब न रोक पाने की स्थिति में प्रयोग किए जाते हैं :

बेलाडोना
सामान्य नाम :
डेडली नाइटशेड
लक्षण : बेलाडोना को बच्चों के लिए अच्छा माना जाता है। यह उपाय उन लोगों के लिए सबसे उपयुक्त है, जो चिंता या भय का अनुभव करते हैं। यह यूरीनरी इंकॉन्टिनेंस की स्थिति में सुधार करता है। इसके अलावा बेलाडोना का उपयोग निम्नलिखित लक्षणों से राहत प्रदान करने के लिए भी किया जाता है :

  • एक्यूट यूरीनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन
  • लगातार और बहुत ज्यादा पेशाब
  • बिना किसी ​बीमारी के पेशाब में खून
  • ऐसा अनुभव होना जैसे मूत्राशय के अंदर कोई कीड़ा सा घूम रहा हो
  • वेसिकल (मूत्राशय में त्रिकोण-आकार वाला हिस्सा) में संवेदनशीलता
  • प्रोस्टेट बढ़ना (और पढ़ें - प्रोस्टेट बढ़ने की होम्योपैथिक दवा)

यह लक्षण दोपहर में, लेटने के बाद, शोर में और झटकों (शेकिंग) के बाद खराब हो जाते हैं। सेमी-इरेक्ट पोजीशन में लक्षणों में सुधार होता है।

(और पढ़ें - पेशाब में खून आने की होम्योपैथिक दवा)

नक्स वोमिका
सामान्य नाम :
पॉइजन-नट
लक्षण : यह उपाय उन लोगों में अच्छा काम करता है जो पतले, चिड़चिड़े, एक्टिव और नर्वस होते हैं, अत्यधिक प्रतिक्रियाशील स्वभाव के होते हैं और आसानी से जिन्हें सर्दी लग जाती है। नक्स वोमिका मूत्राशय में जलन को कम करके पेशाब न रोक पाने का इलाज करने में मदद करता है। यह निम्नलिखित लक्षणों को भी दूर करने में मदद करता है :

यह लक्षण कुछ भी खाने के बाद, सुबह, सूखे और ठंडे मौसम में और मानसिक थकान के बाद बदतर हो जाते हैं। जबकि शाम में, आराम करने या झपकी लेने के बाद और नम व उमसभरे मौसम में यह बेहतर हो जाते हैं।

सेपिया ऑफिसिनेलिस
सामान्य नाम :
इंकी जूस ऑफ कटलफिश 
लक्षण : यह उपाय ब्रुनेट्स (ऐसी महिलाएं, जिनके बाल भूरे हैं) और उन लोगों के लिए सबसे उपयुक्त है, जिनमें आसानी से सर्दी लगने की प्रवृत्ति होती है, भले वे गर्म स्थान पर रह रहे हों। यह रात में अनैच्छिक रूप से पेशाब रिसने को कम करके यूरीनरी इंकॉन्टिनेंस के इलाज में मदद करता है। सेपिया ऑफिसिनेलिस का उपयोग निम्नलिखित लक्षणों को कम करने में किया जाता है :

  • क्रोनिक सिस्टाइटिस (बार-बार मूत्राशय का संक्रमण)
  • पेशाब में चिपचिपापन
  • पेशाब में लाल रंग
  • प्यूबिस (कूल्हे की हड्डी का एक भाग) के ऊपर भारी महसूस होना
  • धीरे-धीरे पेशाब होना

यह लक्षण पसीना आने, कपड़े धोने, दोपहर और शाम के समय, बाईं ओर लेटने और उमस भरे मौसम में खराब हो जाते हैं। जबकि गर्म बिस्तर पर लेटने, नींद लेने, गर्म सिकाई, व्यायाम करने, स्ट्रेचिंग और ठंडे पानी से नहाने के बाद लक्षणों में सुधार होता है।

(और पढ़ें - पेशाब में दर्द का इलाज)

कॉस्टिकम
सामान्य नाम :
हैनिमैन टिंक्चुरा एक्रिस साइन कैली
लक्षण : यह उपाय उन लोगों में कारगर है, जिनका रंग साफ है, त्वचा पीली और दिखने में अस्वस्थ है। आमतौर पर ऐसे लोगों के चेहरे पर मस्से होते हैं और मांसपेशियों में दर्द व जलन होती है। अक्सर सर्जरी के बाद मरीज मूत्राशय को आंशिक या पूरी तरह से खाली करने में असमर्थ हो जाता है, ऐसे में कॉस्टिकम इस स्थिति को नियंत्रित करके यूरीनरी इंकॉन्टिनेंस का ट्रीटमेंट करता है। यह निम्नलिखित लक्षणों में भी फायदेमंद है :

  • खांसने या छींकने पर अनैच्छिक रूप से पेशाब निकल जाना (और पढ़ें - छींक रोकने के घरेलू उपाय)
  • पेशाब लगना महसूस न होना
  • धीमे पेशाब होना

यह लक्षण साफ मौसम या सूखे और ठंडे मौसम में बदतर हो जाते हैं। जबकि बिस्तर पर महसूस होने वाली गर्मी से, उमस भरे और बारिश के मौसम में इनसे राहत मिलती है।

बेंजॉइकम एसिडम
सामान्य नाम :
बेंजॉइक एसिड
लक्षण : यह उपाय मूत्र असंयमिता से संबंधित लक्षणों को कम करके और रीनल इंसफिशिएंसी (शरीर से गंदगी को निकालने में किडनी सक्षम न होना) और हाई यूरिक एसिड का इलाज करता है। यह निम्नलिखित लक्षणों में भी लाभदायक है :

यह लक्षण खुली हवा में कुछ समय रहने से बिगड़ जाते हैं।

पल्सेटिला प्रेटेंसिस
सामान्य नाम :
विंड फ्लावर
लक्षण : पल्सेटिला प्रैटेंसिस उन लोगों के लिए उपयुक्त है, जो खुली हवा में रहने की इच्छा जताते हैं, भले बाहर ठंडा मौसम हो। यह उपाय पेशाब करने की तेज इच्छा को कम करके मूत्र असंयमिता का इलाज करने में मदद करता है। यह निम्नलिखित लक्षणों का भी प्रबंधन करता है:

  • पेशाब करने के बाद मूत्राशय में ऐंठन और दर्द (और पढ़ें - प्रेगनेंसी में यूरिन इन्फेक्शन के लक्षण)
  • रात में गैस पास करते समय या खांसते समय अनैच्छिक रूप से पेशाब निकल जाना
  • पेशाब के दौरान और बाद में मूत्रमार्ग खुलने वाली जगह पर जलन

यह लक्षण शाम, वसायुक्त भोजन करने, गर्म कमरे में रहने और दर्द वाले हिस्से के बल लेटने या बाईं ओर लेटने के बाद खराब हो जाते हैं। ठंडे खानपान के बाद, ठंडी सिकाई और खुली हवा में समय बिताने पर लक्षण बेहतर होते हैं।

सबल सेरूलता
सामान्य नाम :
सॉ पैल्मेटो
लक्षण : यह उपाय उन लोगों में अच्छा असर करता है, जो गिरने से डरते हैं। यह पेशाब करने में कठिनाइयों और प्रोस्टेट बढ़ना जैसी समस्याओं को नियंत्रित करके मूत्र असंयमिता का इलाज करता है। यह निम्नलिखित लक्षणों में भी प्रभावी है :

  • प्रोस्टेट ग्रंथि से जुड़ी समस्याएं
  • एपिडिडीमाइटिस (अंडकोष के पीछे सूजन)
  • रात में बार-बार पेशाब करने की जरूरत लगना
  • बिस्तर गीला कर देना
  • स्फिंक्टर मांसपेशियों में कमजोरी
  • लंबे समय से गोनोरिया
  • प्रोस्टेट बढ़ने के साथ सिस्टाइटिस

फेरम फास्फोरिकम
सामान्य नाम :
फॉस्फेट ​ऑफ आयरन
लक्षण : इस उपाय का उपयोग निम्नलिखित लक्षणों के प्रबंधन के लिए किया जाता है :

  • दिन में अनैच्छिक रूप से पेशाब होना
  • खांसते समय पेशाब होना
  • पॉल्यूरिया (असामान्य रूप से ज्यादा मात्रा में पेशाब करना)
  • मूत्राशय के ऊपरी हिस्से में दर्द

यह लक्षण शाम 4 से 6 बजे के बीच, दाहिनी ओर लेटने और रात में बढ़ जाते हैं। ठंडी सिकाई से लक्षणों में सुधार होता है।

यूपेटोरियम पर्प्यूरियम
सामान्य नाम :
क्वीन ऑफ मीडो
लक्षण : यह उपाय प्रोस्टेट बढ़ने और मूत्राशय के बेस (आधार) पर जलन को कम करके मूत्र असंयमिता का इलाज करता है। यह मूत्र में अतिरिक्त प्रोटीन स्तर को कम करता है और निम्नलिखित लक्षणों को भी प्रबंधित करने में भी मदद करता है :

  • मूत्र में दूधिया रंग या खून दिखना
  • किडनी में लगातार और तेज दर्द
  • पेशाब करते समय मूत्रमार्ग में जलन
  • पेशाब करते समय असहज और दर्द
  • लगातार पेशाब करने की इच्छा, लेकिन बहाव सही न होना

थायरायडिनम
सामान्य नाम :
ड्राइड थायराइड ग्लैंड ऑफ दि शीप
लक्षण : यह उपाय उन युवाओं के लिए असरदार है, जो अन्डीसेंडेड टेस्टिकल जैसी स्थिति से जूझ रहे हैं। इसके अलावा यह निम्नलिखित लक्षणों में भी असरदार है :

  • पेशाब में प्रोटीन और शुगर
  • मूत्रमार्ग में जलन
  • बच्चों में बेडवेटिंग (बिस्तर गीला करना) जो चिड़चिड़े होते हैं और नर्वस महसूस करते हैं
  • शरीर में यूरिक एसिड की मात्रा बढ़ना

(और पढ़ें - यूरिक एसिड के घरेलू उपाय)

हिस्टीरिया, कैथेटर का उपयोग, मूत्राशय को नियंत्रित करने वाले हिस्से में कमजोरी और पाचन गड़बड़ी सहित विभिन्न स्थितियों की वजह से होने वाले यूरीनरी इंकॉन्टिनेंस को कम करने में होम्योपैथिक दवाओं को सहायक माना जाता है। हालांकि, इस मामले में पर्याप्त स्टडी नहीं हुई है।

एक शोध में ऐसे मरीजों को शामिल किया गया था, जो रीढ़ की हड्डी की चोट और यूटीआई की वजह से लोअर यूरीनरी ट्रैक्ट डिस्फंक्शन (निचले मूत्र पथ का सही से कार्य न करना) से जूझ रहे थे। इन लोगों को यूरोलॉजिकल ट्रीटमेंट के साथ-साथ होम्योपैथिक उपाय दिए गए।

(और पढ़ें - रीढ़ की हड्डी की चोट का प्राथमिक उपचार)

इन रोगियों में बुखार, मूत्राशय की क्षमता में कमी, मूत्राशय में दर्द और मूत्र असंयमिता जैसे लक्षण थे। 15 महीने के बाद, तीन रोगियों में यूटीआई की आवृत्ति कम हो गई और पांच रोगी पूरी तरह से यूटीआई से मुक्त हो गए। शोध से पता चला कि होम्योपैथिक उपचार यूटीआई को रोकने में प्रभावी हैं।

(और पढ़ें - बुखार की आयुर्वेदिक दवा)

होम्योपैथी के संस्थापक डॉ. हैनीमैन के अनुसार, होम्योपैथिक उपचार के दौरान आहार और जीवनशैली में कुछ जरूरी बदलाव करने से ट्रीटमेंट सटीक और तेज होता है। ऐसा इसलिए क्योंकि होम्योपैथिक उपचार पतले व घुलनशील रूप में तैयार किए जाते हैं, ऐसे में आसानी से बाहरी कारक इनके असर को प्रभावित कर सकते हैं। आइये जानते हैं कि इन जरूरी बदलावों के बारे में :

क्या करना चाहिए

  • एक्यूट यूरीनरी इंकॉन्टिनेंस के मामले में, गर्मियों के मौसम में लेनिन और सूती कपड़े पहनें और सुविधा के अनुसार कमरे के तापमान को एडजस्ट करें।
  • क्रोनिक यूरीनरी इंकॉन्टिनेंस के मामले में, सक्रिय जीवनशैली अपनाएं और स्वस्थ भोजनपौष्टिक भोजन लें।
  • अपने शरीर और दिमाग को शांत रखें।

क्या नहीं करना चाहिए

  • एक्यूट यूरीनरी इंकॉन्टिनेंस के मामले में जहां साफ सफाई न हो वहां न रहें।
  • क्रोनिक यूरीनरी इंकॉन्टिनेंस के मामले में हर्बल टी, औषधीय मसाले से युक्त चीजें, कॉफी और खुशबूदार पेय लेने से बचें।
  • अधिक मीठा, नमक या मसालायुक्त भोजन न करें। (और पढ़ें - मसालेदार खाने के नुकसान)
  • उन सब्जियों और जड़ी-बूटियों को खाने से बचें, जिनमें औषधीय गुण हैं।
  • लेटते समय किताबें न पढ़ें।
  • गुस्सा या अति-उत्साहित न होने पाएं।

(और पढ़ें - गुस्सा कैसे कम करें)

होम्योपैथिक उपचार यदि किसी होम्योपैथिक डॉक्टर के अनुसार लिया जाए, तो आमतौर पर इसके दुष्प्रभाव देखने को नहीं मिलते हैं। इसका कारण यह है कि होम्योपैथिक डॉक्टर व्यक्तिगत लक्षणों, मानसिक और शारीरिक विशेषताओं के आधार पर उपाय निर्धारित करते हैं। यही वजह है कि यदि दो व्यक्तियों में एक जैसी बीमारी या लक्षण हैं, तो उनके लिए एक जैसे उपाय नहीं होते हैं। इन उपायों को बेहद कम मात्रा में लेने की जरूरत होती है और चूंकि इन्हें प्राकृतिक सोर्स से तैयार किया जाता है, ऐसे में कोई साइड इफेक्ट भी देखने को नहीं मिलता है।

(और पढ़ें - पेशाब में पस आने का कारण)

मूत्र असंयमिता यानी पेशाब न रोक पाना ज्यादातर लोगों (चाहे वह युवा हो या बूढ़े) के लिए एक शर्मनाक स्थिति हो सकती है। यह यूटीआई, प्रोस्टेट बढ़ने और गर्भावस्था सहित कई अंतर्निहित स्वास्थ्य स्थितियों की वजह से हो सकता है। इसका इलाज मूत्राशय की कार्यक्षमता में सुधार करके और मूत्राशय की मांसपेशियों में ऐंठन की रोकथाम करके किया जाता है। इसके अलावा सर्जरी या बोटोक्स इंजेक्शन का भी इस्तेमाल किया जाता है।

होम्योपैथिक दवाएं निर्धारित करने से पहले मरीज की उम्र, मेडिकल और फैमिली हिस्ट्री भी देखी जाती है, ताकि उसकी वर्तमान शारीरिक और मानसिक स्थिति के अनुसार, सही उपाय का निर्धारण किया जा सके। पारंपरिक दवाओं की तरह इसके कोई दुष्प्रभाव नहीं है और इन्हें पारंपरिक दवाओं के साथ भी लिया जा सकता है।

(और पढ़ें - बार-बार पेशाब आने के घरेलू उपाय)

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संदर्भ

  1. MedlinePlus Medical Encyclopedia: US National Library of Medicine; Urinary incontinence
  2. Contact Us The National Institute of Diabetes and Digestive and Kidney Diseases Health Information Center. Definition & Facts for Bladder Control Problems (Urinary Incontinence). USA; [internet]
  3. Oscar E. Boericke. Urinary Flow. Médi-T; [lnternet]
  4. Jürgen Pannek et al. Usefulness of classical homoeopathy for the prevention of urinary tract infections in patients with neurogenic bladder dysfunction: A case series. Year : 2014, Volume : 8, Issue : 1, Page : 31-36
  5. William Boericke. Homoeopathic Materia Medica. Kessinger Publishing: Médi-T 1999, Volume 1
  6. Hahnemann Samuel. Repertotium Homeopathicum. Médi-T; [internet]
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