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पेशाब में खून आने की समस्‍या को हेमाट्यूरिया भी कहते हैं। पेशाब में खून आना किडनी या मूत्र मार्ग से जुड़ी किसी समस्‍या का संकेत हो सकता है। ग्रॉस हेमाट्यूरिया में पेशाब में खून की मात्रा अधिक होती है, जिसको आंखों द्वारा स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है, जबकि माइक्रोस्कोपिक हेमाट्यूरिया में खून की मात्रा बहुत कम होती है, जिसको देखने के लिए माइक्रोस्कोप की आवश्यकता होती है।

निम्‍न स्थितियों में हेमाट्यूरिया होने का खतरा रहता है :

पेशाब में खून आने के कई कारण हो सकते हैं जैसे कि कठिन व्‍यायाम, महिलाओं में मासिक धर्म, चोट, वायरल संक्रमण, सेक्‍स या मूत्र मार्ग में संक्रमण। कुछ अन्‍य गंभीर स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याओं की वजह से भी पेशाब में खून आ सकता है, जैसे कि :

  • पॉलीसिस्टिक किडनी रोग (किडनी में सिस्ट बनना)
  • सिकल सेल रोग (अनुवांशिक रक्त विकार)
  • किडनी या मूत्राशय कैंसर
  • खून के थक्‍के से संबंधित विकार
  • किडनी, पुरुषों में प्रोस्‍टेट या मूत्र मार्ग के किसी भी हिस्‍से में सूजन या दिक्‍कत

पेशाब में खून आने की वजह से पेशाब का रंग महरून, गुलाबी, लाल या गहरा मटमैला आता है। कुछ फूड कलर की वजह से भी पेशाब का रंग लाल हो सकता है। इसलिए पेशाब में खून की मौजूदगी की पुष्टि करने के लिए डॉक्‍टर यूरिन का सैंपल लेकर उसकी जांच करेंगे।

पेशाब में खून आने के कारण के आधार पर ही ट्रीटमेंट दी जाएगी। जैसे कि मूत्र मार्ग में संक्रमण के इलाज के लिए एंटीबायोटिक दवाएं। पेशाब में खून आने की समस्‍या को नियंत्रित करने के लिए एलोपैथी के साथ ही होम्‍योपैथिक ट्रीटमेंट भी ली जा सकती है।

चूंकि, एलोपैथी ट्रीटमेंट शुरू करने से पहले कल्‍चर रिजल्‍ट (खून में बैक्‍टीरिया या अन्‍य किसी बाहरी तत्‍व की जांच के लिए टेस्‍ट) का इंतजार करना पड़ता है, लेकिन तब तक लक्षणों को कम करने के लिए होम्‍योपैथी उपचार शुरू किया जा सकता है।

होम्‍योपैथिक ट्रीटमेंट पहले संक्रमण को कम करने का काम करती है और फिर व्‍यक्‍ति की सेहत में सुधार लाती है।

होम्‍योपैथिक दवाएं जैसे कि कैंथेरिस वेसिकैटोरिया, नुक्‍स वोमिका और सर्सापैरिल्ला ऑफिसिनेलिस मूत्र मार्ग में संक्रमण पर कार्य करती हैं। लाइकोपोडियम क्‍लैवेटम, पल्‍सेटिला प्रेटेंसिस, कॉस्टिकम और बेलाडोना मूत्राशय में पथरी के इलाज में उपयोगी हैं। लाइकोपोडियम क्‍लैवेटम और पल्‍सेटिला प्रेटेंसिस प्रोस्‍टेट के बढ़ने की स्थिति में भी असरकारी हैं।

हेमाट्यूरिया के इलाज में एकोनिटम नैपेल्लस, एपिस मेलिफिका, अर्निका मोंटाना, बेलाडोना, बर्बेरिस वल्गैरिस, कैनाबिस सैटाइवा, कैन्थरिस वेसिकेटोरिया, कार्बोलिकम एसिडम, इक्विसेटम हाइमेल, एरिजरन कैनाडेंस, लाइकोपोडियम क्‍लैवेटम, फॉस्‍फोरस, सर्सापैरिल्ला ऑफिसिनेलिस, सेनेसियो ऑरियस, नुक्‍स वोमिका और नाइट्रिकम एसिडम जैसी कुछ दवाएं भी उपयोगी हैं।

  1. पेशाब में खून आने की होम्योपैथिक दवा - Urine me blood aane ki homeopathic dawa
  2. होम्योपैथी में हेमाट्यूरिया के लिए खान-पान और जीवनशैली में बदलाव - Homeopathy me Haematuria ke liye khan pan aur jeevan shaili me badlav
  3. यूरिन में खून आने की होम्योपैथी दवा कितनी लाभदायक है - Peshab me khoon aane ki homeopathic dava kitni faydemand hai
  4. पेशाब में खून आने के होम्योपैथिक इलाज के नुकसान और जोखिम कारक - Urine me khoon aane ke homeopathic ilaj ke nuksan aur jokhim karak
  5. यूरिन में खून आने के होम्योपैथिक उपचार से जुड़े अन्य सुझाव - Peshab me khoon aane ke homeopathic upchar se jude anya sujhav

पेशाब में खून आने के लिए इस्तेमाल होने वाली होम्योपैथिक दवाएं इस प्रकार हैं :

  • एकोनिटम नैपेल्लस (Aconitum Napellus)
    सामान्‍य नाम :
    मॉन्‍कसहुड (Monkshood)
    लक्षण : ये दवा प्रमुख तौर पर बेचैनी के इलाज में उपयोगी है। सूजन के कारण बुखार, आंतरिक अंगों में जलन का अहसास, झुनझुनाहट और सुन्‍नता एवं इंफ्लूएंजा के इलाज में एकोनिटम नैपेल्‍लस उपयोगी है।
    ये दवा उन लक्षणों के इलाज में उपयोगी है जो पीरियॉडिक (लक्षणों के थोड़ी-थोड़ी देर में आने की प्रवृत्ति) नहीं होते हैं लेकिन प्रभावित अंग के कार्य में गड़बड़ी पैदा करते हैं।
    इस दवा से नीचे बताए गए अन्‍य लक्षणों का इलाज भी किया जा सकता है :
    • लाल, गर्म, कम पेशाब आना और पेशाब में दर्द होना
    • कम पेशाब आना और पेशाब में खून आना
    • बेचैनी के साथ यूरिनरी रिटेंशन (मूत्राशय पूरी तरह से खाली न होना)
    • बेचैनी और पसीना आने के साथ ज्‍यादा पेशाब आना

शाम और रात के समय, तंबाकू, धूम्रपान, शुष्‍क और ठंडी हवा में लक्षण और बढ़ जाते हैं जबकि खुली हवा में लक्षण बेहतर होते हैं।

  • एपिस मेलिफिका (Apis Mellifica)
    सामान्‍य नाम :
    हनी-बी (The Honey-Bee)
    लक्षण : मधुमक्‍खी के डंक मारने जैसे लक्षणों को एपिस मेलिफिका से ठीक किया जा सकता है। इसके अलावा लाल, गुलाबी रंगत, शरीर के कई हिस्‍सों में सूजन, गर्मी और हल्‍का-सा स्‍पर्श भी सहन न कर पाने का इलाज भी इस दवा से किया जा सकता है।
    एपिस मेलिफिका निम्‍न लक्षणों के इलाज में भी दी जाती है :
    • जीभ, चेहरे और वल्‍वा में सूजन और लालिमा
    • गुदा का खुला महसूस होना, बिना इच्‍छा के मल आना जिसमें खून आ सकता है और दर्दरहित हो सकता है
    • पेशाब करते समय जलन और चुभने वाला दर्द
    • मूत्र असंयमिता के साथ गाढ़े रंग का और कम पेशाब आना

गर्म कमरे, छूने, दबाव और दाईं करवट लेटने पर लक्षण बढ़ जाते हैं जबकि ठंडे पानी से नहाने, बिना कपड़ों के और खुली हवा में जाने पर लक्षण कम होते हैं।

  • अर्निका मोंटाना (Arnica Montana)
    सामान्‍य नाम :
    लेपर्ड बेन (Leopard’s bane)
    लक्षण : गंभीर चोट या दबाव जैसी घातक स्थितियों में अर्निका मोंटाना सबसे बेहतर रहती है। इन स्थितियों में पेशाब में खून आता है। इस दवा से जिन लोगों को फायदा होता है, उनमें नीचे बताए गए लक्षण भी दिखते हैं :
    • त्‍वचा पर नील पड़ने और ब्‍लीडिंग
    • नसों में रक्‍त प्रवाह कम होने
    • रूमेटिज्‍म खासतौर पर कमर और कंधों की मांसपेशियों में
    • चोट के कारण शरीर की गुहाओं में खूजन जमना और थक्‍के बनना
    • इंफ्लूएंजा
    • गाढ़े लाल रंग का पेशाब आना और पेशाब करते समय दर्द होना

हल्‍का-सा छूने, आराम करने, वाइन पीने, बारिश और ठंडे मौसम में व चलने पर लक्षण गंभीर हो जाते हैं। लेटने या सिर को झुकाकर रखने पर लक्षणों में सुधार आता है।

  • बेलाडोना (Belladonna)
    सामान्‍य नाम :
    डेडली नाइटशेड (Deadly nightshade)
    लक्षण : बेलाडोना तंत्रिका तंत्र पर बेहतर कार्य करती है, इसलिए ये दौरे पड़ने, अंगों के फड़कने, अत्‍यधिक उत्‍साहित होने और दर्द के इलाज में प्रभावशाली है।
    त्‍वचा का गर्म-लाल होना, चेहरे पर लालिमा, मिर्गी और ग्रेव्‍स डिजीज (थायराइड ग्रंथि बहुत अधिक मात्रा में थायराइड हार्मोन बनाने लग जाती है) के इलाज में भी उपयोगी है। इस दवा से अन्‍य निम्‍न लक्षणों को भी ठीक किया जा सकता है :
    • चेहरे का रंग नीला लाल पड़ने के साथ आंख की पुतलियों का चौड़ा होना
    • नाक से खून आना
    • दांत पीसना
    • गले में कसाव महसूस होना
    • दस्‍त में हरे रंग का मल आना
    • यूरिनरी रिटेंशन के साथ एक्‍यूट यूरिनरी इंफेक्‍शन (मूत्र मार्ग में घातक संक्रमण)
    • कम लेकिन गाढ़े रंग का गंदा पेशाब आना, जिसमें फास्‍फेट की मात्रा अधिक हो
    • रोग लक्षण के बिना ही हेमाट्यूरिया
    • तेज बुखार

छूने और शोर में, दोपहर में और लेटने पर लक्षण बढ़ जाते हैं। कमर को सहारा देकर बैठने पर लक्षणों में सुधार आता है।

  • बर्बेरिस वल्‍गैरिस (Berberis Vulgaris)
    सामान्‍य नाम :
    बरबेरी
    लक्षण : ये दवा नसों से संबंधित तंत्र और पेल्विक (पेट और जांघों के बीच का हिस्‍सा) हिस्‍से में सूजन पर तेज असर करती है।
    इस दवा का इस्‍तेमाल पथरी, गुर्दे से जुड़ी समस्‍याएं, लिवर से पित्त रस का प्रवाह बढ़ाने और आर्थराइटिस के मरीजों में मूत्राशय से संबंधित परेशानियों को नियंत्रित करने में भी किया जाता है।
    जिन लोगों को इस दवा से लाभ होता है, उनमें निम्‍न लक्षण महसूस किए जाते हैं :
    • पेशाब में खून आने के साथ किडनी में सूजन
    • पेशाब करते समय जलन और दर्द होना
    • पेशाब गाढ़ा और लाल आना
    • पेशाब करने के बाद जांघों और कूल्‍हों के साइड वाले हिस्‍से में दर्द
    • बार-बार पेशाब आना

खड़े होने और चलने पर लक्षण गंभीर हो जाते हैं।

  • सर्सापैरिल्ला ऑफिसिनेलिस (Sarsaparilla Officinalis)
    सामान्‍य नाम :
    स्‍माइलैक्‍स (Smilax)
    लक्षण : ये दवा आमतौर पर मूत्रमार्ग में पथरी अटकने के दौरा उठने वाले तेज दर्द, यौन संचारित रोग के कारण हड्डियों में दर्द, मूत्राशय से जुड़े लक्षणों, फोड़े और एक्जिमा में उपयोगी है। सर्सापैरिल्ला से लाभ पाने वाले लोगों में निम्‍न लक्षण भी महसूस किए जा सकते हैं :
    • डिप्रेशन के कारण दर्द
    • मुंह में दवा जैसा स्‍वाद आने के साथ जीभ सफेद होना और प्‍यास में कमी आना
    • पेशाब कम आना और पेशाब में खून आना
    • पेशाब करने के बाद तेज दर्द होना
    • मूत्राशय का कमजोर और फूलना
    • पतला पेशाब आना

ये लक्षण रात के समय, मासिक धर्म से पहले और पेशाब करने के बाद बढ़ जाते हैं। जम्‍हाई लेने से भी लक्षण बदतर हो जाते हैं।

  • नुक्‍स वोमिका (Nux Vomica)
    सामान्‍य नाम :
    पॉइजन नट (Poison-nut)
    लक्षण : नुक्‍स वोमिका से जिन लोगों को फायदा होता है वो पतले, परेशान रहने वाले और एक्टिव होते हैं एवं अधिक मानसि‍क कार्य करते हैं। ऐसे लोगों में निम्‍न लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं :

खाना खाने के बाद (खासतौर पर मसालेदार खाना), मानसिक थकान होने, शुष्‍क और ठंडे मौसम में लक्षण और बढ़ जाते हैं। कुछ देर सोने और बारिश के मौसम में लक्षणों में सुधार आता है।

  • कैन्थरिस वेसिकेटोरिया (Cantharis Vesicatoria)
    सामान्‍य नाम :
    स्पेनिश फ्लाई (Spanish fly)
    लक्षण : इस दवा को बहुत ज्‍यादा सूजन, प्रलाप (उलझन महसूस करना), विकृत यौन व्‍यवहार और हाइड्रोफोबिया (पानी से डर) के लक्षणों के लिए उपयोगी माना जाता है। ये चिड़चिड़ापन, आंतों के निचले हिस्‍से में सूजन, हेमरेज (धमनी फटने के कारण ब्‍लीडिंग) और जलने वाले दर्द में भी उपयोगी है। इस दवा से निम्‍न लक्षणों को भी नियंत्रित किया जा सकता है :
    • बार-बार पेशाब करने की इच्‍छा होना
    • पेट, पाचन और लिवर से जुड़ी परेशानियां जो कि कॉफी पीने के बाद बढ़ जाएं
    • अचानक बेहोशी
    • नेफ्राइटिस (किडनी में सूजन) के साथ पेशाब में खून आना
    • पेशाब जैली की तरह और बूंद-बूंद आना

छूने, पेशाब करने या ठंडा पानी या कॉफी पीने पर लक्षण बदतर हो जाते हैं।

  • लाइकोपोडियम क्‍लैवेटम (Lycopodium Clavatum)
    सामान्‍य नाम :
    क्‍लब मॉस (Club moss)
    लक्षण : ये दवा आमतौर पर पेट और मूत्र मार्ग से जुड़ी परेशानियों के लिए दी जाती है। मांसपेशियों में कमजोरी, कुपोषण और लिवर के कार्य में गड़बड़ी आने के इलाज में भी ये दवा असरकारी है। इस दवा से लाभ पाने वाले लोगों में अन्‍य निम्‍न लक्षण भी दिखाई देते हैं :
    • गर्म पेय पदार्थ पीने का मन करना
    • अधिकतर लक्षण दाईं ओर दोपहर 4 बजे से रात के 8 बजे दिखते हैं
    • किडनी से जुड़ी समस्‍या के साथ कमर दर्द और पेशाब में लाल पदार्थ आना
    • अकेलेपन का डर, शक करना
    • जीभ पर सूखापन, सूजन और जीभ फटने के साथ जीभ पर छाले होना
    • पेट फूलना
    • पेशाब धीरे आना
    • पेशाब करने से पहले कमर दर्द जो कि पेशाब करने के बाद कम हो जाए
    • साइटिका, अधिकतर दाईं ओर
    • दोपहर 3 से 4 बजे बुखार के साथ ठंड लगना

दाईं करवट लेटने, गर्म हवा, कुछ गर्म लगाने पर लक्षण और बढ़ जाते हैं। आधी रात के बाद, चलने पर, बिना कपड़ों के, ठंड लगने या गर्म खाद्य या पेय पदार्थ लेने पर लक्षणों में सुधार आता है।

  • फास्फोरस (Phosphorus)
    सामान्‍य नाम :
    फास्फोरस (Phosphorus)
    लक्षण : इस दवा से जिन स्थितियों को ठीक किया जाता है वे ज्यादातर पतले, लंबे, कम चौड़ी छाती वाले होते हैं, जिनमें नसों की कमजोरी रहती है।
    ये दवा श्‍लेष्‍मा झिल्लियों में सूजन, नसों और रीढ़ की हड्डी, लकवा, हड्डियों को क्षति, मेटाबोलिक गड़बड़ी (चयापचय से जुड़ी), लिवर डिजेनरेशन (धीरे-धीरे लिवर को नुकसान पहुंचना) और हेमरेज जैसे लक्षणों में उपयोगी हो सकती है।
    अन्‍य लक्षणों के लिए भी इस दवा का इस्‍तेमाल किया जा सकता है, जैसे कि :
    • लीवर सिरोसिस
    • स्‍कर्वी
    • अचानक बेहोशी के साथ पसीना आना
    • सुनने में दिक्‍कत
    • बदबूदार मल के साथ पाद आना और मल त्‍याग के बाद कमजोरी बढ़ जाना

गर्म चीज खाने, थकान, मौसम बदलने, शाम के समय, सीढियां चढ़ने पर लक्षण और खराब हो जाते हैं। अंधेरे, दाईं करवट लेटने, खुली हवा, ठंडे पानी और सोने पर लक्षणों में आराम मिलता है।

  • इक्विसेटम हाइमेल (Equisetum Hyemale)
    सामान्‍य नाम :
    स्‍काउरिंग-रश (Scouring-rush)
    लक्षण : ये दवा प्रमुख तौर पर मूत्राशय पर असर करती है। व्‍यापक रूप से इस दवा का इस्‍तेमाल पेशाब निकलने (इच्‍छा के बिना) और पेशाब करने पर दर्द होने के लिए किया जाता है। इस दवा से जिन लोगों को फायदा होता है, उनमें निम्‍न लक्षण भी महसूस किए जाते हैं :
    • मूत्रमार्ग में तेज दर्द, जो कि पेशाब करने पर भी ठीक न हो
    • बार-बार पेशाब आने के साथ पेशाब करना बंद करने तक दर्द बढ़ना
    • पेशाब करते समय मूत्रमार्ग में जलन वाला दर्द
    • बच्‍चों और बुजुर्ग महिलाओं में मूत्र असंयमिता
    • बूंद-बूंद कर के पेशाब आना

दाईं करवट लेटने या बैठने, चलने पर, दबाव बनाने या छूने पर लक्षण बढ़ जाते हैं। दोपहर और लेटने पर लक्षणों में आराम मिलता है।

  • एरिजरन कैनाडेंस (Erigeron Canadense)
    सामान्‍य नाम :
    फ्लीबेन (Fleabane)
    लक्षण : मूत्राशय या गर्भाशय में ब्‍लीडिंग के साथ पेशाब करने में दर्द के इलाज के लिए इस दवा को चुना जा सकता है। इस दवा से अन्‍य लक्षणों को भी ठीक किया जा सकता है, जैसे कि :
    • पेशाब में अत्‍यधिक चमकीला लाल खून आना
    • ल्‍यूकोरिया (सफेद पानी आना) के साथ यूरिन रिटेंशन

बाईं करवट लेटने पर लक्षण और बढ़ जाते हैं।

होम्‍योपैथिक दवाओं की बहुत कम खुराक इस्‍तेमाल की जाती है। इसलिए आहार में मौजूद किसी भी चीज में औषधीय गुण होने से होम्‍योपैथी दवाओं के प्रभाव पर असर पड़ सकता है। उपचार के दौरान होम्‍योपैथिक चिकित्‍सक आहार और जीवनशैली से जुड़ी कुछ बातों का ध्‍यान रखने के लिए कहते हैं, जैसे कि:

क्‍या करें

  • रोज हल्‍के व्‍यायाम करें
  • पौष्टिक और संतुलित आहार लें
  • गंदगी और कीचड़ वाली जगहों पर जाने से बचें। ये होम्‍योपैथिक दवाओं के प्रभाव में रुकावट पैदा कर सकती हैं
  • गंभीर मामलों में डॉक्‍टर होम्योपैथिक दवाओं के प्रभाव में बाधा डालने वाले किसी भी प्रकार के आहार के बिना रोगी की इच्छाओं को पूरा करने की सलाह देते हैं

क्‍या न करें

  • कॉफी, हर्बल चाय या बियर और औषधीय तत्‍वों से युक्‍त शराब का सेवन न करें
  • गर्म मौसम में बहुत ज्‍यादा गरमाई और टाइट कपड़े न पहनें
  • अत्‍यधिक मानसिक थकान न लें और बहुत ज्‍यादा उत्‍साहित करने वाली भावनाओं से भी दूर रहें

किडनी से जुड़े विकार सबसे आम स्वास्थ्य समस्याओं में से एक हैं। किडनी रोग का एलोपैथी उपचार बहुत मुश्किल और महंगा होता है। इसकी वजह से मरीज किडनी रोग के इलाज के अन्‍य विकल्‍पों के बारे में सोचने लगता है।

इस मामले में होम्‍योपैथिक दवाएं सबसे बेहतर विकल्‍प हैं और भारत एवं अमेरिका की 50 फीसदी आबादी इसी चिकित्‍सा पर निर्भर करती है। वैज्ञानिक प्रमाण भी हैं जो पेशाब में खून आने के इलाज में होम्‍योपैथिक दवाओं को असरकारी दिखाते हैं।

(और पढ़ें - हेमाट्यूरिया टेस्ट क्यों किया जाता है)

उदाहरण के तौर पर, एक मामले के अध्‍ययन में पूरी जांच करने के बाद बाइलेटरल किडनी मास (किडनी के दोनों तरफ मास) के मरीज को एंटीमोनियम क्रूडम दी गई। उपचार के बाद मरीज को फ्लैंक (कूल्‍हों और आंतों के बीच में साइड वाला हिस्‍सा) में दर्द, गंभीर रिटेंशन और पेशाब में खून आने से राहत मिली।

इस अध्‍ययन के अनुसार होम्‍योपैथी किडनी कैंसर जैसी स्थितियों के इलाज में प्रभावशाली हो सकती है, जबकि इन स्थितियों में सिर्फ सर्जरी, कीमोथेरेपी और रेडिएशन थैरेपी ही विकल्‍प रह जाते हैं।

होम्‍योपैथिक ट्रीटमेंट में हर मरीज के लिए विशेष तौर पर दवा तैयार की जाती है जिससे मरीज न केवल लंबा जीवन जीता है, बल्कि उसके जीवन की गुणवत्ता (जिसमें हाइपरटेंशन, एनीमिया या वजन घटने की समस्‍या न हो) भी बेहतर होती है।

होम्‍योपैथिक दवाओं को प्राकृतिक तत्‍वों से बनाया जाता है जो कि बहुत पतली होती हैं, इसलिए इनके कोई हानिकारक प्रभाव नहीं होते हैं। अगर कोई दुष्‍प्रभाव हो भी तो सिरदर्द, चक्‍कर आने या दस्‍त जैसे कुछ लक्षणों में हल्‍की-सी वृद्धि होती है।

शिशु, बच्‍चों, गर्भवती और स्‍तनपान करवाने वाली महिलाओं के लिए भी होम्‍योपैथिक दवा को सुरक्षित माना जाता है। ये दवाएं एलोपैथी दवाओं के असर को भी प्रभावित नहीं करती है और इस प्रकार अतिरिक्‍त उपचार के तौर पर होम्‍योपैथी ट्रीटमेंट लिया जा सकता है। हालांकि, होम्‍योपैथिक चिकित्‍सक की देखरेख में ही दवा लेना बेहतर और सुरक्षित होता है।

होम्‍योपैथिक चिकित्‍सा में न केवल लक्षणों का इलाज किया जाता है, बल्कि मरीज की संपूर्ण सेहत में सुधार लाया जाता है। हालांकि, सभी तरह के ट्रीटमेंट की जगह होम्‍योपैथी नहीं ले सकती हैं, लेकिन मूत्राशय से जुड़ी कई स्थितियों (जिनमें पेशाब में खून आता है) के इलाज में सबसे पहले होम्‍योपैथी का इस्‍तेमाल किया जा सकता है। कोई भी दवा लेने से पहले होम्‍योपैथी चिकित्‍सक से परामर्श जरूर करें।

और पढ़ें ...

References

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  4. William Boericke. Homoeopathic Materia Medica. Kessinger Publishing: Médi-T 1999, Volume 1
  5. Harvard Medical School. Blood in the Urine in Men. Cambridge, Massachusetts; [Internet]
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