स्किन ग्राफ्टिंग एक ऐसी सर्जरी तकनीक है, जिसमें शरीर के किसी हिस्से की क्षतिग्रस्त त्वचा को एक स्वस्थ त्वचा के साथ बदल दिया जाता है। इस सर्जरी प्रोसीजर को आमतौर पर त्वचा जलना या त्वचा कैंसर आदि मामलों में किया जाता है। नई लगाई गई त्वचा को ग्राफ्ट कहा जाता है, जिसे शरीर के किसी अन्य हिस्से से लिया जाता है। हालांकि, यदि आपको इस दौरान कोई संक्रमण है या फिर कोई अन्य स्थिति है, जिससे जटिलताएं हो सकती हैं तो यह सर्जरी नहीं की जा सकती है।

सर्जरी से पहले कुछ टेस्ट किए जा सकते हैं, जिससे पता चलता है कि आप इस सर्जरी के लिए शारीरिक रूप से फिट हैं या नहीं। साथ ही आपका शारीरिक परीक्षण व स्वास्थ्य संबंधी पिछली जानकारियां ली जाती हैं। इस सर्जरी में ग्राफ्ट प्राप्त करने के तरीके अलग-अलग हो सकते हैं, जो आवश्यकता पर आधारित होते हैं। स्किन ग्राफ्टिंग सर्जरी में आमतौर पर एक से तीन घंटे का समय लगता है। इस सर्जरी में दो घाव बनते हैं, एक जहां से ग्राफ्ट प्राप्त किया गया था और दूसरा जहां लगाया गया था। सर्जरी के बाद आपको दोनों घावों की ध्यानपूर्वक देखभाल करने की सख्त सलाह दी जाती है। जब तक सर्जरी के घाव पूरी तरह से ठीक नहीं हो जाते हैं, तब तक आपको कोई भी ऐसी शारीरिक गतिविधि नहीं करनी चाहिए, जिसमें अधिक मेहनत लगती हो।

स्किन ग्राफ्टिंग सर्जरी से कुछ जोखिम व जटिलताएं भी हो सकती हैं, जैसे सर्जरी वाले स्थान से अधिक रक्तस्राव होना, संक्रमण या सूजन आदि। आपको अस्पताल से छुट्टी मिलने के एक हफ्ते बाद फिर से अस्पताल बुलाया जाता है, ताकि यह पता लगाया जाए कि आप सर्जरी के बाद सामान्य रूप से स्वस्थ हो रहे हैं और कोई जटिलता विकसित नहीं हुई है। हालांकि, यदि आपको सर्जरी के बाद स्वास्थ्य से संबंधी कोई भी समस्या जैसे बुखार, उल्टी और मतली आदि महसूस हो रहे हैं, तो डॉक्टर से बात कर लेनी चाहिए।

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  1. स्किन ग्राफ्टिंग क्या है - What is Skin grafting in Hindi
  2. स्किन ग्राफ्टिंग किसलिए की जाती है - Why is Skin grafting done in Hindi
  3. स्किन ग्राफ्टिंग से पहले - Before Skin grafting in Hindi
  4. स्किन ग्राफ्टिंग के दौरान - During Skin grafting in Hindi
  5. स्किन ग्राफ्टिंग के बाद - After Skin grafting in Hindi
  6. स्किन ग्राफ्टिंग की जटिलताएं - Complications of Skin grafting in Hindi

स्किन ग्राफ्टिंग किसे कहते हैं?

स्किन ग्राफ्टिंग एक सर्जरी प्रोसीजर है, जिसमें शरीर के किसी क्षतिग्रस्त हिस्से की त्वचा को स्वस्थ त्वचा के साथ बदला जाता है। इस प्रोसीजर में स्वस्थ त्वचा शरीर के किसी अन्य हिस्से से ली जाती है, जैसे नितंब, जांघ और बांहों के ऊपरी हिस्से से त्वचा को निकालना। जिस जगह से स्वस्थ त्वचा को निकाला गया है, उसे “डॉनर साइट” कहा जाता है और जहां त्वचा को लगाया गया है उसे “रिसिप्टेंट साइट” कहा जाता है। क्षतिग्रस्त त्वचा की जगह पर लगाने के लिए निकाले गए स्वस्थ त्वचा के टुकड़े को “ग्राफ्ट” और जब ग्राफ्ट को प्राप्त कर लिया जाता है तो उसे “ऑटोग्राफ्ट” कहा जाता है। हालांकि, कुछ मामलों में स्वस्थ स्किन को शरीर से अलग किसी स्रोत से लिया जाता है, जिनमें निम्न शामिल है -

  • ऑलोग्राफ्ट - इसमें त्वचा को किसी अन्य मानव स्रोत से लिया जाता है, जैसे मृत मानव शरीर।
  • सिंथेटिक - यह मानव निर्मित/कृत्रिम ऊतकों से बनी होती है।
  • जेनोग्राफ्ट - इसमें त्वचा को पशुओं के शरीर से लिया जाता है
  • इसोग्राफ्ट - इसमें त्वचा को एक समान जुड़वा से लिया जाता है।

यदि त्वचा के किसी घाव को छिपाने के लिए ग्राफ्ट किया जा रहा है, तो यह सिर्फ कुछ ही समय के लिए होता है। इसके अलावा यदि त्वचा का कोई हिस्सा कैंसरग्रस्त हो गया है या किसी अन्य कारण से त्वचा नष्ट हो गई है, तो उसे बदलने के लिए की गई स्किन ग्राफ्टिंग स्थायी होती है। यदि त्वचा को आपके शरीर के अलावा किसी अन्य स्रोत से लिया जा रहा है, तो ग्राफ्टिंग सिर्फ तब तक के लिए होती है जब तक आपकी त्वचा वापस विकसित नहीं हो जाती। इसमें ग्राफ्ट को एक सतह के रूप में इस्तेमाल किया जाता है, जो अंदरूनी अंगों और रोगाणुओं के बीच में अवरोध उत्पन्न करती है, त्वचा के तापमान को बनाए रखती है और शरीर के आवश्यक द्रवों को बहने से रोकती है।

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स्किन ग्राफ्टिंग सर्जरी क्यों की जाती है?

स्किन ग्राफ्टिंग को आमतौर पर निम्न स्थितियों में किया जाता है -

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स्किन ग्राफ्टिंग सर्जरी किसे नहीं करवानी चाहिए?

निम्न स्थितियों में आपको स्किन ग्राफ्ट सर्जरी नहीं करवानी चाहिए -

  • यदि आपके शरीर में कोई संक्रमण है
  • यदि कैंसर को पूरी तरह से निकाला नहीं गया है

इसके अलावा कुछ ऐसी स्थितियां भी हैं, जिनमें स्किन ग्राफ्टिंग करवाई जा सकती है, लेकिन बहुत ध्यानपूर्वक करना पड़ता है -

  • एंटीकॉएग्युलेंट दवाएं लेना, जिससे सर्जरी के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव की दिक्कत हो सकती है
  • कोर्टिकोस्टेरॉयड दवाएं लेना, जिससे घाव के ठीक होने की प्रक्रिया प्रभावित होती है और परिणामस्वरूप ऊतक नष्ट होने लगते हैं
  • धूम्रपान करना, इससे भी सर्जरी के बाद घाव ठीक होने की प्रक्रिया धीमी पड़ जाती है
  • कुपोषण, इससे सर्जरी के बाद कई जटिलताएं हो सकती हैं
  • रक्तस्राव संबंधी विकार, इससे सर्जरी के दौरान व बाद में रक्त बहने से रोकने में कठिनाई हो सकती है।

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स्किन ग्राफ्टिंग से पहले क्या तैयारी की जाती है?

सर्जरी से पहले कुछ तैयारियां की जा सकती हैं, जैसे -

  • यदि आप किसी भी प्रकार की कोई दवा, विटामिन, मिनरल या अन्य कोई सप्लीमेंट लेते हैं, तो इस बारे में डॉक्टर को बता दें। डॉक्टर आपको इनमें से कुछ दवाओं को एक निश्चित समय के लिए बंद या उनकी खुराक में कुछ बदलाव कर सकते हैं। इनमें आमतौर पर रक्त को पतला करने वाली दवाएं होती हैं, जैसे एस्पिरिन, वारफेरिन और विटामिन ई आदि।
  • यदि आप सिगरेट या शराब पीते हैं, तो इस बारे में डॉक्टर को बता दें। डॉक्टर आपको कुछ दिन इनका सेवन बंद करने की सलाह दे सकते हैं, क्योंकि इनसे सर्जरी के बाद घाव के ठीक होने की प्रक्रिया प्रभावित हो जाती है।
  • यदि आपको एलर्जी या स्वास्थ्य संबंधी कोई अन्य समस्या है जैसे डायबिटीज तो डॉक्टर को इस बारे में बता दें। यदि आपको कोई हार्ट डिवाइस (जैसे पेसमेकर) या अन्य कोई उपकरण लगा है, तो इस बारे में भी डॉक्टर को अवश्य बता दें।
  • सर्जरी से पहले कुछ शारीरिक परीक्षण किए जाएंगे, जिनमें आपकी त्वचा की करीब से जांच की जाएगी और आपके स्वास्थ्य से जुड़ी पिछली सारी जानकारियां भी प्राप्त की जाएंगी। कुछ टेस्ट भी किए जा सकते हैं, जैसे ब्लड टेस्ट, यूरिन टेस्ट, लंग फंक्शन टेस्ट, हार्ट स्ट्रेस टेस्ट और चेस्ट एक्स रे आदि।
  • डॉक्टर आपको सर्जरी से कम से कम तीन महीने पहले ही आपके शारीरिक वजन को सामान्य बना कर रखने की सलाह देते हैं और साथ ही आपको नियमित रूप से संतुलित आहार लेने की सलाह दी जा सकती है।
  • यदि सर्जरी से कुछ दिन पहले आपको खांसी, बुखार या जुकाम जैसे लक्षण होने लगते हैं, तो डॉक्टर को इस बारे में बता देना चाहिए। ऐसे में डॉक्टर आपके फिर से स्वस्थ होने तक सर्जरी को कुछ दिन तक टाल सकते हैं।
  • सर्जरी के लिए आपको खाली पेट आने की सलाह दी जाती है। इसके लिए आपको ऑपरेशन वाले दिन से पहली आधी रात के बाद कुछ भी न खाने या पीने की सलाह दी जाती है।
  • आपको अपने साथ अस्पताल में किसी करीबी रिश्तेदार या मित्र को लाने की सलाह दी जाती है, ताकि सर्जरी से पहले और बाद के कार्यों में आपको मदद मिल सके।
  • जब आप ऑपरेशन के लिए अस्पताल पहुंचते हैं, तो आपको सहमति पत्र दिया जाता है, जिसपर हस्ताक्षर करके आप सर्जन को सर्जरी करने की अनुमति दे देते हैं।

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स्किन ग्राफ्टिंग कैसे की जाती है?

जब आप ऑपरेशन के लिए अस्पताल पहुंच जाते हैं, तो मेडिकल स्टाफ आपको पहनने के लिए एक विशेष ड्रेस देते हैं जिसे “हॉस्पिटल गाउन” कहा जाता है।

आपकी बांह या हाथ की नस में सुई लगाकर इंट्रावेनस लाइन शुरू कर दी जाती है, जिसकी मदद से आपको सर्जरी के दौरान दवाएं व अन्य आवश्यक द्रव दिए जाते हैं। इसके बाद आपको एनेस्थीसिया का इंजेक्शन लगा दिया जाता है, जिससे आप सर्जरी के दौरान गहरी नींद में सो जाते है और आपको कुछ महसूस नहीं होता है।

स्किन ग्राफ्टिंग सर्जरी को पूरा होने में आमतौर पर एक से तीन घंटे का समय लगता है, जिसका प्रोसीजर कुछ इस प्रकार है -

  • सबसे पहले उस हिस्से को साफ किया जाता है, जहां पर ग्राफ्ट लगाना है और यदि उस जगह पर स्कार ऊतक बना हुआ है तो उसे भी निकाल दिया जाता है।
  • इसके बाद त्वचा के उस हिस्से को साफ किया जाता है, जहां से ग्राफ्ट लेना है।
  • ग्राफ्ट के लिए टेम्पलेट या पैटर्न तैयार किया जाता है और डोनर साइट पर इसे बनाया जाता है।
  • पैटर्न तैयार होने के बाद विशेष उपकरणों की मदद से ग्राफ्ट को निकाला जाता है।
  • डोनर साइट से ग्राफ्ट को निम्न तकनीकों की मदद से निकाला जाता है -
    • फुल थिकनेस ग्राफ्ट -
      इसमें त्वचा को पूरी मोटाई के साथ निकाला जाता है जिसमें एपिडर्मिस व डर्मिस दोनों परतें शामिल होती हैं। ऐसा आमतौर पर तब किया जाता है, जब ग्राफ्ट चेहरे या गर्दन आदि पर लगाना हो। हालांकि, फुल थिकनेस ग्राफ्ट को सिर्फ छोटे भागों के लिए ही इस्तेमाल किया जा सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि जितनी बड़ी डोनर साइट होगी उसे टांकों के साथ लगाकर बंद करना उतना ही मुश्किल होगा।
       
    • स्प्लिट-थिकनेस ग्राफ्ट -
      इसमें त्वचा की सबसे ऊपरी परत (एपिडर्मिस) और मध्यम परत (डर्मिस की ऊपरी परत) को निकाला जाता है। स्प्लिट-थिकनेस ग्राफ्ट का रंग आमतौर पर अलग होता है, लेकिन इसका घाव अपेक्षाकृत जल्दी ठीक होता है। इस तकनीक का इस्तेमाल आमतौर पर किसी बड़े हिस्से में ग्राफ्ट लगाने के लिए किया जाता है, विशेष तौर पर जहां पर फुल-थिकनेस ग्राफ्ट संभव न हो।
       
    • कम्पोजिट ग्राफ्ट -
      कम्पोजिट ग्राफ्ट में त्वचा के साथ-साथ वसा, कार्टिलेज व अन्य ऊतक भी शामिल होते हैं। इस ग्राफ्टिंग तकनीक को विशेष हिस्सों के लिए इस्तेमाल किया जाता है, जैसे नाक या कान आदि। इन हिस्सों की संरचना जटिल होती है और इनमें त्वचा के साथ-साथ कार्टिलेज की ग्राफ्टिंग करने की भी आवश्यकता पड़ जाती है।
  • इसके बाद सर्जन ग्राफ्ट को रिसिप्टेंट साइट पर सही से लगा देते हैं और उसे टांके लगाकर आस-पास की त्वचा से जोड़ दिया जाता है।
  • इसके बाद सर्जरी के दोनों घावों पर पट्टी कर दी जाती है। यदि ग्राफ्ट को आपकी टांग या बांह पर लगाया गया है, तो प्लास्टर भी किया जा सकता है।

आपको रिकवरी रूम में शिफ्ट कर दिया जाएगा और दर्द को कम करने के लिए आपको दर्द निवारक दवाएं दे दी जाएंगी। सर्जरी के बाद आपको एक या दो दिन अस्पताल में भर्ती रहना पड़ सकता है। यदि आपकी फुल-थिकनेस ग्राफ्ट तकनीक से सर्जरी हुई है, तो आपको एक या दो हफ्तों तक भी अस्पताल रहना पड़ सकता है।

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स्किन ग्राफ्टिंग सर्जरी के बाद क्या देखभाल की जाती है?

जब आप सर्जरी के बाद घर पहुंच जाते हैं, तो आपको निम्न बातों का ध्यान रखने की सलाह दी जाती है -

  • सर्जरी के बाद आपको कुछ दिन के लिए दर्द रह सकता है, जिसके लिए डॉक्टर दर्द निवारक दवाएं दे सकते हैं। इन दवाओं को डॉक्टर की सलाह के अनुसार लेना चाहिए।
  • स्किन ग्राफ्टिंग के बाद आपको संक्रमण होने का खतरा हो सकता है, जिसके लिए डॉक्टर आपको कुछ प्रकार की एंटीबायोटिक दवाएं दे सकते हैं।
  • आपको सर्जरी वाले हिस्से को किसी भी प्रकार की चोट लगने से बचाने की सख्त सलाह दी जाती है। (और पढ़ें- चोट की सूजन का इलाज)
  • जब तक आपके सर्जरी वाले घाव पूरी तरह से ठीक नहीं हो जाते हैं, तब तक आपको कोई व्यायाम, स्ट्रेचिंग एक्टिविटी या अन्य कोई भी शारीरिक गतिविधि नहीं करनी चाहिए।
  • यदि आपको आवश्यक लगता है, तो डॉक्टर कुछ एक्सरसाइज करवाने की सलाह भी दे सकते हैं।
  • शरीर के जिस हिस्से से ग्राफ्ट लिया गया है, उसे दिनभर ऊपर उठाकर रखें ताकि वहां पर सूजन न होने पाए।
  • स्किन ग्राफ्टिंग सर्जरी के कुछ मामलों के बाद आपको छड़ी या वॉकर की आवश्यकता पड़ सकती है।
  • यदि ग्राफ्ट शरीर के ऊपरी हिस्से से लिया गया है, तो भारी वजन नहीं उठाना चाहिए।
  • यदि डॉक्टर आपको अनुमति न दें, तो खुद पट्टी न बदलें सिर्फ डॉक्टर से ही बदलवाएं।
  • आपको घाव को गंदा होने, पसीने या पानी से गीला होने से बचाने की सलाह दी जाती है। ऐसा होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
  • डॉक्टर खुद साफ कपड़े से घाव को सुखा सकते हैं या आपको ऐसा करने का तरीका सिखा सकते हैं।
  • सर्जरी के दोनों घावों को सूरज के संपर्क से दूर रखें, ऐसा करने से ठीक होने की प्रक्रिया धीमी पड़ जाती है। यदि आपके डॉक्टर अनुमति दें तो सनस्क्रीन का इस्तेमाल कर सकते हैं। (और पढ़ें - धूप से जली त्वचा के लक्षण)
  • जब स्किन ग्राफ्टिंग सर्जरी के दोनों घाव ठीक हो जाते हैं, उसके बाद भी डॉक्टर कुछ महीनों तक इनपर विशेष लोशन व तेल आदि की हल्की मालिश करने की सलाह देते हैं।

डॉक्टर को कब दिखाएं?

यदि आपको निम्न में से कोई भी लक्षण महूसस हो रहा है, तो डॉक्टर से इस बारे में बात कर लेनी चाहिए -

  • तेज बुखार
  • सर्जरी के घाव से अनियंत्रित रक्तस्राव होना, जो दबाव देने पर भी बंद न हो रहा हो
  • लगातार दर्द बढ़ना, जो दर्द निवारक दवाओं से भी कम नहीं हो रहा हो
  • सर्जरी के आस-पास की त्वचा में लालिमा व गर्म होना
  • पट्टी ढीली पड़ना
  • मतली और उल्टी
  • सर्जरी वाले दोनों या किसी एक घाव से किसी प्रकार का द्रव बहना और बदबू आना
  • घाव में सूजन होना
  • लगाया गया ग्राफ्ट बाहर निकला हुआ प्रतीत होना

(और पढ़ें - घाव की मरहम पट्टी कैसे करें)

स्किन ग्राफ्टिंग सर्जरी से क्या जोखिम हो सकते हैं?

स्किन ग्राफ्टिंग से निम्न जोखिम व जटिलताएं विकसित हो सकती हैं -

  • एनेस्थीसिया के एलर्जी होना
  • त्वचा की रूपरेखा में कोई सुधार न होना
  • ग्राफ्ट का कोई हिस्सा या पूरा ही ग्राफ्ट नष्ट हो जाना
  • सर्जरी के घाव से सूजन, लालिमा व रक्तस्राव हो जाना
  • सर्जरी के घाव में संक्रमण
  • ग्राफ्ट व आसपास की त्वचा के रंग में बदलाव होना
  • स्कार ऊतक बनना
  • ठीक होने की प्रक्रिया धीमी पड़ना
  • रिसिप्टेंट साइट पर बाल न आना
  • त्वचा के नीचे रक्त जमा होना (हीमेटोमा) या फिर सेरोमा
  • टांग में ब्लड क्लॉट बनना
  • अन्य सर्जरी प्रोसीजर करवाने की आवश्यकता पड़ना

(और पढ़ें - बैक्टीरियल संक्रमण का इलाज)

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संदर्भ

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