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बच्चे के विकास में दूध के दांत निकलना एक अहम प्रक्रिया होती है। अपने नन्हे बच्चे के मुंह में छोटे-छोटे दांत निकलते हुए देखना हर माता-पिता के लिए काफी आकर्षक होता है। बेशक यह एक खुशी का पल हो, लेकिन माता-पिता को हमेशा चिंता रहती है कि उनके बच्चे के दांत कैसे बढ़ेंगे, बच्चे के दांत निकलते समय उनको क्या करना चाहिए या क्या नहीं, आदि।

कई बार बच्चे के दांत समय पर न निकलने से भी माता-पिता को चिंता होने लगती है। लेकिन यह चिंता की बड़ी वजह नहीं होती है, क्योंकि बच्चे के दांत निकलना काफी हद तक माता-पिता के दांतों की स्थिति पर निर्भर करती है। अगर माता-पिता के दांत निकलने में देरी हुई हो, तो बच्चे के दांत भी देरी से निकलने की संभावनाएं बढ़ जाती है।

यदि एक साल का होने के बाद भी बच्चे के दांत न आए, तो यह बच्चे में दांतों का देर से निकलना माना जाता है। इस दौरान आपको दांतों के विशेषज्ञ से मिलकर बच्चे के दांतों का देर से निकलने की वजह को जानकर, उसको दूर करना चाहिए।

(और पढ़ें - बच्चों के दांत निकलना)

  1. बच्चों में दांत निकलने की सही उम्र - Bachon me dant nikalne ki sahi umar
  2. दांत देर से निकलने के कारण - Dant der se nikalne ke karan
  3. बच्चों में दांत देरी से निकलने का इलाज - Bacho me dant deri se nikalne ka ilaj
  4. बच्चों के दांत देर से निकलने से संबंधित जोखिम कारक - Bacho ke dant der se nikalne se jude jokhim karak
  5. बच्चे के दांत देरी से निकलने का बचाव कैसे करें - Bache ke dant der se nikalne ka bachav kaise kare
  6. बच्चो के दांत निकलने में देरी के डॉक्टर

बच्चों में दांत निकलना

सबसे पहले बच्चे के निचले जबड़े में दांत आना शुरू होते हैं। इसमें बच्चे के आगे के दो दांत (Central incisors: सेंट्रल इनसाइजर्स) पहले निकलते हैं, जिसके बाद ऊपरी जबड़े के सामने के दो दांत (Upper central incisors: अपर सेंट्रल इनसाइजर्स) आते हैं। इसके बाद ऊपरी जबड़े के ही दो अन्य दांत आते हैं, जो पहले से आए हुए दांतों के दोनों तरफ निकलते हैं (upper lateral incisors: अपर लेट्रल इनसाइजर्स), इन दांतों के आने के बाद निचले जबड़े में आए दांतों के दोनों तरफ दो अन्य दांत (lower lateral incisors: लोअर लेट्रल इनसाइजर्स) आना शुरू होते हैं।

(और पढ़ें - अकल दाढ़ में दर्द का इलाज)

इसके बाद बच्चे के मुंह के ऊपरी और निचले हिस्से के दाढ़ के दांत (Upper and lower first molars: अपर व लोअर फर्स्ट मोलर्स) निकलना शुरू होते हैं। दांतों के निकलने की प्रक्रिया में इसके बाद पहले से आए हुए आगे के दांतों और दाढ़ के बीच की जगह को भरने के लिए अन्य दांत (Canines: कैनाइन) आते हैं और सबसे आखिर में जबड़े के अंतिम दाढ़ (second molars: सेकंड मोलर) निकलते हैं।     

ऊपरी हिस्से के दांत   निकलने का समय (महिनों में)
सेंट्रल इनसाइजर्स  10 (8-12)
लेट्रल इनसाइजर्स   11 (9-13)
कैनाइन 19 (16-22)
फर्स्ट मोलर 16 (13-19)
सेकंड मोलर 29 (25-33)

 

निचले हिस्से के दांत  निकलने का समय (महिनों में)
सेंट्रल इनसाइजर्स 8 (6-10)
लेट्रल इनसाइजर्स 13 (10-16)
कैनाइन   20 (17-23)
फर्स्ट मोलर 16 (14-18)
सेकंड मोलर  27 (23-31)

 

व्यस्कों में दांत निकलना
कुछ समय के बाद बच्चे के दूध के दांत टूटकर स्थायी दांत आते हैं। इस प्रक्रिया में सबसे पहले नीचे के दाढ़ के दांत (first molar: फर्स्ट मोलर) टूटकर नए आते हैं। इसके बाद निचले जबड़े के सामने के दांत (lower incisors), फिर ऊपरी जबड़े के सामने के दांत (upper incisors), जिसके बाद निचले व ऊपरी जबड़े के सामने वाले दांत के बगल के दांत (lower lateral and upper lateral incisors) टूटकर नए निकलते हैं। इनके बाद में निचले जबड़े के दाढ़ व आगे के दांतों की जगह को भरने वाले दांत (cannies) टूटकर निकलते हैं। कुछ यही प्रक्रिया अन्य दांतों के लिए भी होती है, जिसको आगे ग्राफ के माध्यम से समझाने का प्रयास किया गया है।

(और पढ़ें - शिशु का टीकाकरण चार्ट)

ऊपरी हिस्से के दांत  निकलने का समय (साल में)
सेंट्रल इनसाइजर्स  7-8
लेट्रल इनसाइजर्स  8-9
कैनाइन     11-12
फर्स्ट प्रीमोलर 10-11
सेकंड प्रीमोलर 10-12
फर्स्ट मोलर 6-7
सेकंड मोलर 12-13
थर्ड मोलर 17-21

 

निचले हिस्से के दांत निकलने का समय (साल में)
सेंट्रल इनसाइजर्स 6-7
लेट्रल इनसाइजर्स  7-8
कैनाइन 9-10
फर्स्ट प्रीमोलर 10-12
सेकंड प्रीमोलर  11-12
फर्स्ट मोलर 6-7
सेकंड मोलर  11-13
थर्ड मोलर 17-21


 

छोटे बच्चों के दांत देर से निकलने के कारण - Chote bacho ke dant der se nikalne ke karan

बच्चों के दांत निकलना अन्य कारकों की मुकाबले अनुवांशिकता से संबंधित होते हैं। दांत निकलने का समय या उसमें देरी होना, परिवारिक कारकों पर निर्भर करता है। बच्चों में दूध के दांत निकलने में देरी के सामान्य (General) और अन्य कारण (local) होते हैं, जिनकों निम्नतः विस्तार से बताया जा रहा है।

दांत देरी से निकलने के सामान्य कारण

  • अनुवांशिकता
    बच्चों में दांत आने का तरीका और समय माता-पिता से प्राप्त अनुवांशिक स्थिति पर निर्भर करता है। इस वजह से ही कई बच्चों के दांत जल्दी, कई के सामान्य समय में तो कई बच्चों के दांत देरी से निकलते हैं। (और पढ़ें - नवजात शिशु व बच्चों की देखभाल)
     
  • पोषक तत्व
    किसी भी कारण से पोषक तत्वों की कमीं बच्चों के संपूर्ण विकास में बाधा उत्पन्न करती है। इस वजह से बच्चे का विकास धीमी गति से होता है और उसके दांत निकलने में भी देरी होती है।
    विटामिन ए और विटामिन डी बच्चों की हड्डियों और दांतों के बनने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं, जबकि इनकी कमी से दांत और हड्डियां प्रभावित होती हैं। (और पढ़ें - पोषण की कमी का इलाज)
     
  • हार्मोनल विकार (Endocrine disorders: एंडोक्राइन विकार)
    बच्चे के विकास में उसके शरीर के हार्मोन का स्तर सही होना बेहद जरूरी होता है। लेकिन थायराइड, पैराथायराइड और पिट्यूटरी ग्रंथि में विकार या दोष होने से हार्मोन का उत्पादन व उसका जारी होना प्रभावित हो जाता है। इस वजह से भी बच्चों के दांत निकलने में देरी होती है। (और पढ़ें - हार्मोनल असंतुलन का उपचार)
     
  • बीमारी होना
    कुछ बीमारियां जैसे एचआईवी, किडनी रोग, कैंसर, एनीमिया या धातु संबंधी विषाक्ता आदि बच्चों के विकास और रोग प्रतिरोधक क्षमता पर वितरीत प्रभाव उत्पन्न करते हैं, जिसकी वजह से बच्चे के दांत देर से निकलते हैं। (और पढ़ें - एनीमिया का घरेलू उपाय
     
  • दवाइयां
    लंबे समय तक कीमोथेरेपी करवाना या दौरे व मिर्गी की दवाएं लेने से शरीर में बदलाव होते हैं जिसकी वजह से दांत और शारीरिक विकास प्रभावित होता है।

बच्चों के दांत देरी से निकलने के अन्य कारणों में जन्म के समय बच्चे का वजन कम होना, किसी व्यक्ति के द्वारा बच्चे के पास धूम्रपान करना, या विकास संबंधी कोई दोष, आदि को शामिल किया जाता है। 

बच्चों के दांत देरी से निकलने के मसूड़ों से संबंधित कारक (local factors)

  • प्रभावित दांत (Impacted teeth)
    जो दांत जबड़ों में कम जगह या सही स्थिति में न होने के कारण बाहर नहीं आ पाते हैं, उनको प्रभावित दांत (impacted teeth) कहा जाता है। इन दांतों का बाहर न आ पाना भी दांत देरी से निकलने का कारण होता है। (और पढ़ें - बच्चे की उम्र के अनुसार लंबाई और वजन का चार्ट)
     
  • मसूडों का मोटा होना
    कई बार मसूड़ों के ऊतक अधिक मोटे हो जाते हैं, जिनको फाइब्रोसिस (fibrosis) और हाइपरप्लासिया (hyperplasia) कहा जाता है। इस वजह से दांतों को बाहर निकलने में मुश्किल होती है। (और पढ़ें - सिस्टिक फाइब्रोसिस का इलाज)
     
  • एक जगह पर दो दांत निकलना
    एक दांत की जगह पर दो दांत निकलना, जिसकी वजह से जबड़े में दांत निकलने की जगह कम हो जाती है। ऐसा होने पर दांत निकलने में देरी होती है। (और पढ़ें - बच्चों को सिखाएं अच्छी सेहत के लिए अच्छी आदतें)
     
  • चोट लगाना
    मसूड़ों में दांत निकलने की जगह पर सर्जरी, दुर्घटना या जबड़े में चोट के कारण दांत निकलने वाली हड्डी को नुकसान होने की वजह से भी दांतों के निकलने में देरी हो सकती है। इस वजह से बच्चे के दांतों का विकास रूक सकता है। (और पढ़ें - चोट लगने पर क्या करें)
     
  • एंकीलोसिस (Ankylosis)
    इसमें दांत के चारों ओर की हड्डी या दांतों की जड़ के पास की हड्डी कठोर हो जाती है, जिसकी वजह से दांत आने की प्रक्रिया रूक जाती है। (और पढ़ें - नवजात शिशु के दस्त का इलाज)
     
  • दांत का अन्य स्थान से निकलना (Ectopic eruption)
    निर्धारित जगह की अपेक्षा दांत किसी अन्य जगह से निकलने को एटोपिक इरप्सन (Ectopic eruption) कहा जाता है। दांत निकलते समय एक ओर झुक जाना या उसकी जगह में परिवर्तन की वजह से ऐसा होता है। (और पढ़ें - मसूड़ों से खून आने का उपचार)
     
  • ओडोनटोजिनिक ट्यूमर (Odontogenic tumors)
    यह ट्यूमर दांतों की कलियों की परत में होता है। कई बार दांत के चारों ओर ट्यूमर विकसित हो जाता। इस तरह का ट्यूमर संबंधित दांत को बाहर आने नहीं देता और इसकी वजह से भी दांत निकलने में देरी होती है। (और पढ़ें - नवजात शिशु के पेट में दर्द)
     
  • रेडिएशन से नुकसान होना
    किसी थेरेपी की रेडिएशन के संपर्क में आना या किसी रेडिएशन थेरेपी के दौरान अचानक से रेडिएशन की मात्रा बढ़ जाने से बच्चे के विकास में बाधा आती है और इसकी वजह से बच्चे के दांत देरी से निकलते हैं। (और पढ़ें - दांतों में कीड़ें का इलाज)
     
  • तालू का कटा होना
    इस स्थिति में बच्चे के तालू और होंठ कटे होते हैं। तालू के कटने की वजह से बच्चे के दांत को नुकसान होता है और वह सही जगह से नहीं निकल पाते हैं।

(और पढ़ें - फांक होंठ और फांक तालु के लक्षण)

बड़े बच्चों के दांत देरी से निकलने के कारण - Bade bachon ke dant deri se nikalne ke karan

ऊपर बताए गए कारणों के अलावा स्थाई दांतों के देरी से निकलने के अन्य कारण हो सकते हैं। इन कारणों को नीचे विस्तार से बताया जा रहा है।

  • दूध के दांतों का जल्द टूटना
    यदि आपके बच्चे के दूध के दांत निर्धारित या सामान्य समय से जल्दी टूट जाते हैं, तो दांत टूटने और नए स्थायी दांत आने के बीच का समय लंबा हो जाएगा और इसकी वजह से आपको ऐसा लगता है कि स्थायी दांतों के निकलने में देरी हो रही है। (और पढ़ें - शिशु का वजन कैसे बढ़ाएं)

    दूध के दांतों के जल्दी टूटने से हुई खाली जगह को आसपास के दांत घेरने लगते हैं, जिसकी वजह से स्थायी दांत को बाहर आने में जगह नहीं मिल पाती है। ऐसे में दांत मसूड़ों के अंदर ही रहा जाता है और इसकी वजह से भी दांत निकलने में देरी होती है। (और पढ़ें - दांत का मैल का इलाज)
     
  • दूध के दांत न टूटना
    दूध के दांत न टूटने की स्थिति में जब नए स्थायी दांत उस जगह पर आना शुरू करते हैं तो वह पुराने दांत की जड़ों को कमजोर करते हैं। यदि किसी कारण वश वह दूध के दांत की जड़ों को कमजोर नहीं कर पाते हैं तो बाहर निकल नहीं पाते हैं। इस वजह से भी दांत निकलने में देरी होती है। (और पढ़ें - पायरिया का इलाज)
     
  • बच्चों की खराब आदतें
    कुछ बच्चे दांत निकलते समय हाथ, जीभ या अन्य किसी वस्तु से लगातार दांत को छूते रहते हैं। इस वजह से दूध के दांतों की पोजीशन बदल जाती है, जिसके कारण स्थायी दांत आने में बाधा हो सकती है।

(और पढ़ें - मसूड़ों में सूजन)

यदि पारिवारिक स्थितियों के आधार पर बच्चे के दांत देरी से निकलते हैं, तो ऐसे में इलाज की जरूरत नहीं होती है। हालांकि, अन्य चिकित्सीय स्थितियों व कारकों की वजह दांत देरी से आने पर इलाज किया जाता है। देरी से दांत निकलने के इलाज को निम्न तरह से बताया गया है।

  1. ऑपरेशन कराना
    दूध के जो दांत नहीं टूटते हैं उनको निकलवाना।
    जो नया दांत निकलने वाला हो उसके ऊपर से सख्त मसूड़ों के ऊतकों को हटाना।
    कटे हुए तालू का ऑपरेशन करवाना। (और पढ़ें - शिशु को सर्दी जुकाम होना)
     
  2. दांतों में तारों की मदद से उपचार
    इस उपचार में दंत चिकित्सक नए दांत के ऊपर से मूसड़ों को हटाते है और दांत को किसी तार से बांधते हैं। तार को लगातार टाइट करने से कुछ समय के बाद दांत बाहर आने लगता है। इस विधि को ट्रेक्सन (Traction) कहा जाता है। (और पढ़ें - बच्चों में भूख ना लगने के कारण और उनका आयुर्वेदिक समाधान)
     
  3. रोगों का इलाज करना
    कुपोषण, एनीमिया, एचआईवी-एड्स, किडनी रोग, आदि अंतर्निहित चिकित्सीय स्थितियों का उपचार या नियंत्रण शामिल होता है।

(और पढ़ें - दाँत निकलते समय होने वाले दर्द का इलाज)

दांत देर से निकलने को लंबे समय तक अनदेखा करना कई तरह के जोखिम कारकों की वजह बन सकता है। दांत देरी से निकलने के कुछ जोखिम कारकों को निम्नलिखित बताया जा रहा है।

  • दूध के दांतों का देर से आना, बच्चे के स्थायी दांत देरी से निकलने की वजह होता है। दांत निकलना बच्चे के चेहरे और जबड़े के विकास से संबंधित होता है। चेहरे और जबड़े के विकास में असामान्य वृद्धि भी दांतों के देरी से निकलने की वजह हो सकती है। (और पढ़ें - नवजात शिशु की कब्ज का इलाज)
     
  • दूध के दांतों का देरी से टूटना, उनके बाद आने वाले नए स्थायी दांतों को रोकता है। इस तरह दूध के दांत न टूटने और नए स्थायी दांतों के आने से दांतों में समस्याएं हो जाती हैं जैसे दांतों का टेढ़ा-मेढ़ा होना। (और पढ़ें - बच्चों की सेहत के इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज)
     
  • अधिक दांत, बच्चे के दांतों में जल्द कैविटी और मसूड़ों के रोग होने का कारण होता है।
     
  • स्थायी दांतों के देरी से निकलने के कारण दांतों के खाली हिस्से में बदलाव हो सकता है। नए स्थायी दांत देरी से आने की वजह से अन्य दांत खाली जगह को घेर लेते हैं। ऐसे में दांतों का कम होना और उनके बीच अधिक जगह की वजह से चेहरे अलग दिखने लगता है। (और पढ़ें - डाउन सिंड्रोम का इलाज)
     
  • अगर स्थायी दांत समय पर नहीं निकलते हैं तो इससे जबड़े का विकास प्रभावित होता है। ऐसे में दांतों की संख्या के मुताबिक जबड़ा नहीं बढ़ पाता है।
     
  • जबड़े का सही विकास न हो पाने के कारण बच्चे के चेहरे में भी बदलाव हो जाता है, और ऐसे में आत्मविश्वास में कमी की वजह से बच्चा समाज के लोगों से मेल-जोल नहीं बना पाता है। (और पढ़ें - बच्चों की मालिश कैसे करें)
     
  • आने वाला नया दांत हड्डी में फंस सकता है और वह इस वजह से बाहर नहीं आता है। कई बार यह प्रभावित दांत चारों ओर से ऊतकों से घिर जाता है और इसमें द्रव बनने लगता है। इसकी वजह से अंदरूनी फोड़ा हो जाता है। फोड़े के कारण मुंह के प्रभावित हिस्से में सूजन आ जाती है और नए दांत आने के स्थान को परिवर्तन हो सकता है। इस स्थिति में फोड़े के इलाज के लिए ऑपरेशन किया जाता है।

(और पढ़ें - दांत के फोड़े का इलाज)

बच्चे के दांत देरी से आने के कई कारक जैसे – अनुवांशिकता, रोग और चिकित्सीय स्थिति आदि से बचाव करना मुश्किल होता है। हालांकि निम्नलिखित कुछ उपायों की मदद से आप बच्चे के दांतों के देरी से निकलने से बचाव कर सकते हैं।

  • बच्चे को उचित पोषण प्रदान करें। इससे बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता में बढ़ोतरी होती है। इससे न सिर्फ बच्चे का संक्रमण से बचाव होता है बल्कि वह इनको फैलाने वाले बैक्टीरिया से लड़ने के लिए भी सक्षम हो जाता है। (और पढ़ें - बैक्टीरियल संक्रमण का इलाज)
     
  • अगर बच्चे के दूध के दांत एक साल तक न आएं, बच्चे के नए स्थायी दांतों को आने में छह महीनों से ज्यादा की देरी हो या दूध के दांत समय पर न टूटे, तो ऐसी स्थिति में आपको तुरंत अपने डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
     
  • यदि नए दांतों के निकलने का समय होने पर भी दूध के दांत न टूटे तो ऐसे में आप डॉक्टर के पास जाकर बच्चे के दूध के दांतों को निकलवा सकते हैं। (और पढ़ें - बच्चे को मिट्टी खाने की आदत)
     
  • बच्चे की देखभाल करते समय उसको बुरी आदतों से दूर रखें, जैसे अंगूठे और उंगलियों को मुंह में डालना या चूसना, बड़े बच्चों के द्वारा पेंसिल मुंह में डालना, होठों को काटना व चूसना आदि। यह सभी आदतों के कारण बच्चे के दांतों की दिशा में परिवर्तन हो सकता है। (और पढ़ें - बच्चों की इम्यूनिटी कैसे बढ़ाएं)
     
  • बच्चे को दिन में दो बार सही तरह से दांतों की सफाई करने (ब्रश करने) का तरीका सिखाएं। दूध के दांतों और व्यस्कों के दांतों को ब्रश करने के तरीका अलग-अलग होता है। आप अपने दंत चिकित्सक से दांतों को साफ करने का सही तरीका सीख सकते हैं। इससे बच्चों के दूध के दांत जल्दी टूटने और कैविटी लगने से बचाव होता है। (और पढ़ें - नवजात शिशु के कफ को दूर करने के घरेलू नुस्खें

बच्चे अक्सर अपने माता-पिता और आसपास के बच्चों की नकल करते हुए कई चीजों को सीखते हैं। इसलिए आप इस बात का ध्यान रखें कि बच्चा आपसे सभी अच्छी आदतों को सीख सकें। इससे बच्चे के संपूर्ण विकास में मदद मिलती है।  

Dr. Vivek Kumar Athwani

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संदर्भ

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