परिचय

गेहूं खाने से भी कुछ लोगों को काफी परेशानी होने लगी है। जिन लोगों को पेट में दर्द और पेट फूलना जैसी समस्याएं होती हैं, वे अक्सर इसे भी गेंहू से होने वाली एलर्जी के लक्षण समझ लेते हैं। ऐसी स्थिति में ब्रैड, पास्ता व पिज्जा आदि जैसी चीजें खाना बंद कर देते हैं। लेकिन आहार में किसी भी प्रकार का परिवर्तन लाने से पहले यह पता लगा लेना चाहिए कि यदि इन सभी लक्षणों के पीछे का कारण गेहूं है, तो इससे कौन सा रोग हुआ है, एलर्जी, सीलिएक रोग या ग्लूटेन सेंसिटीविटी। मेडिकल जांच के बाद ही डॉक्टर यह पता कर पाते हैं कि मरीज को सिर्फ गेंहूं से ही एलर्जी हो रही है या फिर अन्य अनाज भी एलर्जी का कारण बन रहे हैं।

गेहूं से एलर्जी बचपन में होने वाली फूड एलर्जी का एक आम प्रकार है, हालांकि यह वयस्क व्यक्तियों को भी हो सकती है। जिस व्यक्ति को गेंहू से एलर्जी होती है, उसका शरीर गेहूं में मौजूद प्रोटीन के प्रति एंटीबॉडी तैयार कर लेता है। ऐसा होने पर मरीज को गेहूं से बने उत्पाद खाने पर एलर्जी हो जाती है।

गेहूं से होने वाली एलर्जी सीलिएक रोग के समान नहीं होती है।

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  1. गेहूं से एलर्जी के लक्षण क्या हैं - Wheat Allergy Symptoms in Hindi
  2. गेहूं से एलर्जी के कारण व जोखिम कारक - Wheat Allergy Causes & Risk Factors in Hindi
  3. गेहूं से एलर्जी के बचाव - Prevention of Wheat Allergy in Hindi
  4. गेहूं से एलर्जी का परीक्षण - Diagnosis of Wheat Allergy in Hindi
  5. गेहूं से एलर्जी का इलाज - Wheat Allergy Treatment in Hindi
  6. गेहूं से एलर्जी क्या है - What is Wheat Allergy in Hindi

गेहूं की एलर्जी से क्या लक्षण होते हैं?

गेहूं से होने वाली एलर्जी के लक्षण हल्के जैसे हीव्स या फ्लू से लेकर गंभीर जैसे एनाफिलेक्सिस आदि हो सकते हैं। गेहूं से होने वाली एलर्जी अप्रत्याशित (कभी भी हो जाना) होती है और गेहूं की छोटी सी मात्रा से भी इसके लक्षण शुरू हो जाते हैं। 

गेहूं की एलर्जी से कई प्रकार के लक्षण पैदा हो सकते हैं,  जो शरीर के विभिन्न अंगों के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं:

ऊपरोक्त कई लक्षणों के साथ बुखार भी महसूस होता है। एनाफिलेक्सि के कुछ गंभीर मामलों में बिगड़ती हुई स्थिति के दौरान लोगों को अक्सर अत्यंत भय व खलबली महसूस होती है।

गेहूं की एलर्जी से होने वाले लक्षणों के अलावा मरीज को एनाफिलेक्सिस से संबंधित निम्न गंभीर लक्षण भी महसूस हो सकते है:

डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए?

यदि किसी व्यक्ति में एनाफिलेक्सिस के लक्षण दिखाई दे रहे हैं, तो यह एक आपातकालीन स्थिति होती है इसलिए जितना जल्दी हो सके एंबुलेंस को बुला लें या खुद मरीज को डॉक्टर के पास ले जाने की कोशिश करें। ऐसा इसलिए क्योंकि एनाफिलेक्सिस एक ऐसी मेडिकल समस्या है, जिसका तुरंत इलाज शुरु करना बहुत जरूरी होता है।

यदि आपको लगता है कि आपके बच्चे या किसी वयस्क को गेहूं से बने उत्पाद खाने के बाद एलर्जी होती है, तो ऐसे में डॉक्टर को दिखा लेना चाहिए।

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गेहूं से एलर्जी क्यों होती है?

गेहूं से होने वाली एलर्जी प्रतिरक्षा प्रणाली संबंधी प्रतिक्रिया होती है। जब प्रतिरक्षा प्रणाली किसी सामान्य व अच्छे पदार्थ को रोगाणु समझ लेती है, तो वह उसको क्षति पहुंचाने लग जाती है जिससे एलर्जिक रिएक्शन पैदा हो जाता है।

प्रतिरक्षा प्रणाली शरीर को रोगाणुओं, बाहरी पदार्थों और रोग पैदा करने वाली चीजों से बचाती है। इनमें बैक्टीरिया, वायरस और अन्य विषाक्त पदार्थ शामिल हैं। 

जिस व्यक्ति को गेहूं से एलर्जी है, जब भी गेहूं में मौजूद प्रोटीन उसके शरीर में जाता है, तो उसके शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली इस प्रोटीन को बैक्टीरिया जैसा कोई रोगाणु समझ कर उसे क्षति पहुंचाने लग जाती है।

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एलर्जिक पदार्थ ज्यादातर लोगों के लिए हानिकारक नहीं होते हैं, जब तक उनसे एलर्जी ना हो।

गेहूं के प्रति एलर्जिक रिएक्शन पैदा करने वाली एंटीबॉडी का नाम इम्युनोग्लोबुलिन (ige) होता है, जो गेहूं में मौजूद निम्न प्रकार के प्रोटीन के खिलाफ एलर्जी पैदा करता है:

  • एल्बुमिन
  • ग्लोबुलिन
  • ग्लियाडिन
  • ग्लूटेनिन या ग्लूटेन

कुछ लोग गेहूं में मौजूद सिर्फ एक ही प्रकार के प्रोटीन से एलर्जिक होते हैं, जबकि कुछ लोगों को एक से अधिक प्रोटीन से एलर्जी होने लग जाती है। 

ज्यादातर एलर्जिक रिएक्शन एल्बुमिन और ग्लोबुलिन के कारण होते हैं। ग्लियाडिन और ग्लूटेन से होने वाली एलर्जी के मामले अक्सर कम देखे गए हैं। ग्लूटेन एलर्जी को अक्सर सीलिएक रोग या कोई पाचन संबंधी विकार समझ लिया जाता है।

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गेहूं से एलर्जी होने का खतरा कब बढ़ता है?

कुछ कारक हैं जो गेहूं से एलर्जी होने का खतरा काफी बढ़ा देते हैं, जैसे:

  • पारिवारिक समस्या:
    यदि आपके मां-बाप को गेहूं से एलर्जी, भोजन से एलर्जी या कोई अन्य एलर्जिक समस्या है जैसे परागज ज्वर तो आपको गेहूं से एलर्जी होने का खतरा बढ़ जाता है।
     
  • उम्र:
    गेहूं से होने वाली एलर्जी आमतौर पर शिशुओं व छोटे बच्चों को अधिक होती है, क्योंकि उनकी पाचन प्रणाली व रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है। ज्यादातर मामलों में 16 साल से कम उम्र के बच्चों को गेहूं से एलर्जी होती है।

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गेहूं की एलर्जी से कैसे बचें?

गेहूं से होने वाले एलर्जिक रिएक्शन से रोकथाम करने के लिए गेहूं से बने उत्पादों का सेवन बंद करना बहुत जरूरी होता है। बाहर से लिए गए सभी प्रकार के खाद्य पदार्थों के डिब्बे पर लगी पर्ची पढ़ लेनी चाहिए और विक्रेता से उसकी सामग्री के बारे में पूछ लेना चाहिए। 

भारत समेत कई देशों में गेहूं को सबसे मुख्य अनाज के रूप में चुना गया है। गेहूं से एलर्जिक व्यक्ति काफी प्रकार के खाद्य पदार्थ खा सकते हैं, बस उनमें गेहूं नहीं होना चाहिए। गेहूं के अलावा अन्य कई अनाज है, जिनसे बने खाद्य पदार्थों को खाया जा सकता है, जैसे जौं, जई, मक्का, क्विनोआ, चावल, राई और साबूदाना आदि।

गेहूं से एलर्जिक व्यक्तियों को ऐसे खाद्य पदार्थों से बचना चाहिए, जो निम्न सूची में दिए गए है। निम्न खाद्य पदार्थों में संभावित रूप से गेहूं होती है, उनको नहीं खाना चाहिए:

  • ज्यादातर प्रकार के सिके हुऐ खाद्य पदार्थ जैसे कुकीज़, केक, बिस्किट, पेस्ट्री, चॉकलेट, वैफर और ब्रैड आदि।
  • ब्रेकफास्ट सेरियल्स (विशेष प्रकार के अनाज जिसमें अतिरिक्त पोषक तत्व शामिल किए गए हों)
  • बीयर व रूट बीयर
  • कुछ प्रकार की कॉफी, माल्टेड दूध, चॉकलेट ड्रिंक सॉस, सोया सॉस और कैचअप आदि।
  • पास्ता व नूडल्स जो गेहूं से बने हों 
  •  आइसक्रीम और आइसक्रीम कोन।

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गेहूं की एलर्जी का परीक्षण कैसे किया जाता है?

गेहूं से होने वाली एलर्जी का पता लगाने के लिए डॉक्टर सबसे पहले मरीज को महसूस हो रहे लक्षणों व मरीज के खाने-पीने की आदतों के बारे में पूछते हैं। कुछ मरीजों को साथ में एक डायरी लिखने की सलाह दी जाती है, ताकि वे जो भी खाएं और जो भी लक्षण उन्हें महसूस हो साथ ही साथ उसमें लिखते जाएं। यदि डॉक्टर को लगता है कि मरीज को गेहूं से एलर्जी होती है, तो उसकी पुष्टि करने के लिए कुछ प्रकार के स्किन टेस्ट व ब्लड टेस्ट किए जाते हैं। इस स्थिति का परीक्षण करने के लिए निम्न टेस्ट किए जा सकते हैं: 

  • स्किन टेस्ट:
    एलर्जिक पदार्थों (गेहूं में मौजूद प्रोटीन) की कुछ बूंदों को त्वचा में इंजेक्शन की मदद से डाल दिया जाता है। इन बूंदों को आमतौर पर बांह के अगले हिस्से या पीठ के ऊपरी हिस्से में डाला जाता है। इंजेक्शन लगाने के लगभग 15 मिनट बाद डॉक्टर उस जगह जांच करते हैं और एलर्जिक रिएक्शन का पता लगाते हैं।
    जहां पर इंजेक्शन लगाया गया था यदि वहां पर लाल रंग की खुजलीदार गांठ बन गई हैं, तो इसका मतलब है कि आपको उस पदार्थ यानि गेहूं में मौजूद प्रोटीन के प्रति एलर्जी हैं।
     
  • खून टेस्ट:
    यदि आपको त्वचा संबंधी कोई समस्या है या फिर आप किसी प्रकार की दवाई खाने के कारण स्किन टेस्ट नहीं करवा पा रहे हैं, तो ऐसे में ब्लड टेस्ट किया जा सकता है। खून टेस्ट की मदद से रक्त में मौजूद विशेष प्रकार के एंटीबॉडीज का पता लगता है जो एलर्जिक पदार्थों (जैसे गेहूं का प्रोटीन) के कारण बनते हैं।
     
  • फूड डायरी:
    डॉक्टर आपको कुछ निश्चित समय के लिए एक डायरी रखने की सलाह भी दे सकते हैं। ऐसा इसलिए किया जाता है, ताकि आप जो कुछ भी खाएं और आपको किस समय व क्या लक्षण महसूस हो रहे हैं आदि के बारे में आप डायरी में लिख सकें।
     
  • कुछ प्रकार के आहार छोड़ना:
    डॉक्टर आपको कुछ विशेष प्रकार के आहार ना खाने की सलाह भी दे सकते हैं, खासकर जो काफी आम एलर्जिक पदार्थ होते हैं। इसके बाद डॉक्टर आपको धीरे-धीरे वे आहार शुरू करने की सलाह देते हैं, ताकि जब भी कोई लक्षण महसूस हो उनको तुरंत ही डायरी में लिखा जा सके।
     
  • फूड चैलेंज टेस्टिंग:
    लक्षणों की निगरानी करने के दौरान डॉक्टर आपको ऐसे खाद्य पदार्थ खाने का सुझाव देते हैं, जिन पर एलर्जी का संदेह हो रहा है। निगरानी के दौरान ऐसे खाद्य पदार्थों को छोटी मात्रा में शुरू किया जाता है और फिर इसकी मात्रा को बढ़ा दिया जाता है।

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गेहूं से एलर्जी का इलाज कैसे करें?

गेहूं में मौजूद प्रोटीन से बचाव करना इस एलर्जिक रिएक्शन का इलाज करने का सबसे मुख्य तरीका है। हालांकि यह थोड़ा मुश्किल हो सकता है, क्योंकि बहुत अधिक मात्रा में ऐसे खाद्य पदार्थ मौजूद हैं, जिनमें गेहूं शामिल होता है। बाहर से लिए गए किसी भी खाद्य पदार्थ को खाने से पहले उसके पैकेट पर लगी पर्ची को ध्यानपूर्वक पढ़ लेना चाहिए।

कुछ प्रकार की दवाएं हैं, जिनको उपयोग गेहूं से होने वाली एलर्जी का इलाज करने के लिए किया जाता है: 

  • एंटिहिस्टामिन:
    यदि गेहूं से थोड़ी बहुत एलर्जी हो रही है, तो एंटिहिस्टामिन दवाओं की मदद से उनको कम किया जा सकता है। गेहूं खाने या आटा सूंघ लेने के बाद इन दवाओं को लिया जा सकता है, ये दवाएं एलर्जिक रिएक्शन के लक्षण को कम कर देती हैं और मरीज को आराम प्रदान करती हैं। किसी भी प्रकार की दवाई लेने से पहले एक बार डॉक्टर से सलाह जरूर ले लें। (और पढ़ें - स्किन एलर्जी के लक्षण)
     
  • एपिनेफ्रिन:
    एनाफिलेक्सिस जैसे गंभीर एलर्जिक रिएक्शन के लिए एपिनेफ्रिन दवा का इस्तेमाल किया जाता है। यदि आपको गेहूं से गंभीर एलर्जिक रिएक्शन होने का खतरा है, तो आपको अपने साथ कम से कम दो एपिनेफ्रिन इंजेक्शन (EpiPen, Adrenaclick व अन्य) रखने चाहिए। एनाफिलेक्सि के मरीजों को कम से कम दो एपिनेफ्रिन ऑटो इंजेक्टर रखने चाहिए, क्योंकि आपातकालीन देखभाल के उपलब्ध होने से पहले फिर से एनाफिलेक्सिस के लक्षण विकसित हो सकते हैं।

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गेहूं से एलर्जी क्या है?

गेहूं या इससे बने खाद्य पदार्थों को खाने से एलर्जी होने की स्थिति को गेहूं से एलर्जी कहा जाता है। इससे होने वाली एलर्जी सिर्फ गेहूं खाने से ही नहीं गेहूं या उसके आटे को सूंघने से भी हो जाती है।

जिन लोगों को गेहूं से एलर्जी है, उन्हें गेहूं के संपर्क में आने पर सांस लेने में दिक्कत, जी मिचलाना, हीव्स, पेट फूलना और ध्यान लगाने में कठिनाई होना आदि होता है। कुछ लोगों में गेहूं से अत्यंत गंभीर व हानिकारक एलर्जिक रिएक्शन हो जाता है, जिसे एनाफिलेक्सिस कहा जाता है।

गेहूं को खाने या सूंघने के बाद कभी-कभी कुछ ही मिनटों तो कई बार घंटों के बाद एलर्जिक रिएक्शन की शुरुआत हो जाती है।

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संदर्भ

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