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मैग्नीशियम शरीर के लिए बेहद ही उपयोगी खनिज होता है। प्रतिदिन शरीर को मैग्नीशियम की आवश्यकता होती है। कुछ अन्य खनिजों की तरह यह शरीर में नहीं बन पाता है, इसको आप मैग्नीशियम युक्त खाद्य पदार्थों से ग्रहण कर सकते हैं। यह छोटी आंतों में अवशोषित होता है और गुर्दे के माध्यम से उत्सर्जित होते हुए रक्त के स्तर को नियंत्रित करता है। जब एक वयस्क 25 ग्राम मैग्नीशियम लेता है, तो मैग्नीशियम का 60 से 65 प्रतिशत हिस्सा हड्डियों में चला जाता है, जबकि 25 प्रतिशत मांसपेशियों में और बचा हुआ ऊतकों और शरीर के तरल पदार्थों में पहुंच जाता है।

विभिन्न प्रकार के खाद्य पदार्थों में मैग्नीशियम विभिन्न रूप में मौजूद होता हैं। कई तरह की सब्जियों व सेम में यह तरल रूप में होता है, जो खाना पकाते समय कम हो जाता है। अनाजों की बाहरी परत व किटाणुओं के होने के कारण करीब 80 प्रतिशत मैग्नीशियम अनाजों से साफ करते समय हटा दिया जाता है।

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कई विकसित देशों में अनाज को प्रोसेस्ड करने के दौरान इनमें से कई पोषक तत्व नष्ट कर दिए जाते हैं, जिसमें मैग्नीशियम भी नष्ट हो जाता है। भोजन में मैग्नीशियम की कम मात्रा लेने से शरीर में इसकी कमी हो जाती है और इससे संबंधित कई रोग होना शुरू हो जाते हैं।

नीचे हम जानेंगे कि मैग्नीशियम क्या है, इसको कितनी खुराक में लिया जाना चाहिए, इसके लाभ, मैग्नीशियम किस खाद्य पदार्थ में होता है व इसकी कमी के लक्षण और नुकसान क्या होते हैं।

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  1. मैग्नीशियम युक्त आहार व स्त्रोत - Magnesium rich foods and sources in Hindi
  2. मैग्नीशियम के फायदे - Benefits of magnesium in Hindi
  3. मैग्नीशियम को रोजाना कितनी मात्रा में लेनी चाहिए? - Magnesium ko rojana kitni matra me leni chahiye
  4. मैग्नीशियम की कमी और नुकसान - Magnesium ki kami aur nuksan
  5. आपके रोज के खाने में मिलने वाला यह खनिज हृदय रोग रखे दूर
  6. दिल को सेहतमंद रखने के लिए क्‍यों जरूरी है मैग्‍नीशियम?

मैग्नीशियम प्राकृतिक रूप से प्राप्त आहार में प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। मैग्नीशियम के सर्वोत्तम स्त्रोत में निम्न आहार को शामिल किया जाता है। 

  • गहरे हरे रंग की पत्तेदार सब्जियां, जैसे - पालक व अन्य।
  • बीज, जैसे- कद्दू के बीज और तिल
  • समुद्री सिवार (समुद्र की चट्टानों पर लगे खरपतवार)।
  • सेम और दाले
  • अपरिष्कृत (Unrefined) अनाज
  • मछली, विशेष रूप से हलिबेट (Halibut) मछली।
  • दूध, दही व अन्य दुग्ध उत्पादों से।

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मैग्नीशियम के कई फायदे होते हैं। जिसमें से कुछ फायदों को नीचे बताया जा रहा है।

  1. इसमें मौजूद ग्लाइसिन तत्व की वजह से आपका मस्तिष्क शांत रहता है और मस्तिष्क की तंत्रिका तंत्र सही ढ़ंग से काम करती है।  
  2. मैग्नीशियम चिंताअनिद्रा की समस्या को दूर करता है और आपको बेहतर नींद प्रदान करता है।
  3. इसके द्वारा आपकी हड्डियां मजबूत होती है और हड्डियों को आवश्यक पोषक तत्व मिलते रहते हैं। 
    (और पढ़ें - हड्डियों को मजबूत बनाने वाले जूस)
  4. डायबिटीज होने पर यह आपके खून में मौजूद शकर्रा के स्तर को नियमित करता है और डायबिटीज के अन्य खतरों को कम कर देता है। (और पढ़ें - डायबिटीज डाइट)
  5. मैग्नीशियम अनियंत्रित हृदय दर को कम कर, इसको नियत्रिंत करने में सहायक होता है।
    (और पढ़ें - हृदय रोग का इलाज)
  6. मासिक धर्म से पूर्व होने वाली समस्याओं को भी मैग्नीशियम कम करने में सहायक होता है।

कुछ अध्ययन में पाया गया है कि मैग्नीशियम कई तरह की बीमारियों के इलाज के लिए भी उपयोगी सिद्ध होता है।

निम्न तरह की गंभीर स्थितियों में मैग्नीशियम के द्वारा, इनके जोखिम को कम किया जा सकता है।

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मैग्नीशियम को रोजाना लेने की मात्रा व्यक्ति की उम्र के अनुसार विभिन्न हो सकती है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के नियमावली के अनुसार, इसको नीचे विस्तार पूर्वक बताया जा रहा है।

उम्र मात्रा
शिशुओं 6 महीने तक  30 मिलीग्राम
7-12 महीने 75 मिलीग्राम
1-3 साल 80 मिलीग्राम
4-8 साल 130 मिलीग्राम
9-13 साल 240 मिलीग्राम
14-18 वर्ष के पुरुष 410 मिलीग्राम
14-18 वर्ष की महिलाएं  360 मिलीग्राम
19-30 वर्ष के पुरुष 400 मिलीग्राम
19-30 वर्ष की महिलाएं

310 मिलीग्राम

31 साल और उससे अधिक उम्र के वयस्क पुरुष 400-420 मिलीग्राम
31 साल और उससे अधिक उम्र की वयस्क महिलाएं 310-320 मिलीग्राम
गर्भवती महिलाएं 350-360 मिलीग्राम
स्तनपान कराने वाली महिलाएं 310-320 मिलीग्राम

(और पढ़ें -  विटामिन की कमी के लक्षण)

अपने आहार में मैग्नीशियम को शामिल न करने से आपको कई तरह की समस्याओं से गुजरना पड़ता है। नियमित रूप से मैग्नीशियम कम लेने से आपके शरीर के दैनिक कार्यों में बाधा आने लगती है। इसके कारण आपके शारीरिक कार्यों पर विपरीत प्रभाव पड़ता है और मांसपेशियों का संचालन धीमा हो जाता है। इतना ही नहीं मैग्नीशियम की कमी के कारण हृदय की नियमित दर व हार्मोन के उत्पादन पर भी दुष्प्रभाव होता है। जब आप मैग्नीशियम के स्तर को सही नहीं रख पाते हैं तो आपके गुर्दे इस स्तर को बनाए रखने में मदद करते हैं, लेकिन गुर्दे इस कार्य को अस्थायी रूप से ही कर पाते हैं। लंबे समय तक मैग्नीशियम के स्तर को पूरा न करने के कारण आप में मैग्नीशियम की कमी हो जाती है।

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इसके आलावा कुछ चिकित्सीय कारणों व दवाओं के सेवन से भी शरीर में मैग्नीशियम का स्तर अनियंत्रित व कम हो जाता है। कई विशेष तरह की बीमारियों के चलते आप मैग्नीशियम युक्त आहार का सेवन नहीं कर पाते हैं, जबकि कई बार कुछ दवाएं भी मैग्नीशियम के स्तर को कम कर देती हैं।

निम्नतः कुछ चिकित्सीय कारण बताए जा रहें हैं, जिनकी वजह से मैग्नीशियम में कमी हो जाती है।

  1. गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल रोग (Gastrointestinal disease), जैसे – इर्रिबेटल बाउल सिंड्रोम (Irritable bowel syndrome), पेट संबंधी रोग व आंतों में सूजन होना।
  2. डायबिटीज (और पढ़ें - डायबिटीज में परहेज)
  3. अग्नाशय में सूजन (Pancreatitis)
  4. थाइरोइड हार्मोन का उच्च स्तर (और पढ़ें - थायराइड में परहेज)
  5. गुर्दे का रोग
  6. अधिक मूत्र त्याग

आपकी दिनचर्या की कुछ निम्न आदतें भी मैग्नीशियम के स्तर को कम करने का काम करती है।

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मैग्नीशियम की कमी होने पर निम्न लक्षण देखें जाते हैं।

मैग्नीशियम की कमी के कारण आपको नीचे दिए गए रोग हो सकते हैं।

  • हाथ पैर सुन्न होना (Numbness)
  • झुनझुनी (Tingling)
  • मांसपेशियों में ऐंठन (Muscle cramps)
  • किसी अंग का काम न करना (Seizures)
  • व्यक्तित्व परिवर्तन (Personality changes)
  • असामान्य हृदय लय (Abnormal heart rhythm)

(और पढ़ें - विटामिन k के स्रोत)

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