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बड़ी आंत को निकालने की सर्जरी को कोलेक्टॉमी (बृहदांत्र-उच्‍छेदन) कहा जाता है। यह सर्जरी आमतौर पर बड़ी आंत से संबंधी रोगों का इलाज करने के लिए की जाती है, जैसे कोलन कैंसर, अल्सरेटिव कोलाइटिस और क्रोन रोग आदि।

कोलेक्टॉमी को ओपन या लेप्रोस्कोपी दोनों सर्जरी प्रोसीजरों की मदद से किया जाता है। कई बार इसके साथ-साथ कोलोस्टॉमी या इलियोस्टॉमी जैसी सर्जरी प्रोसीजर भी करनी पड़ सकती हैं। आंत के कैंसर से आमतौर पर पेट दर्द, शौच आने की आदतें बदल जाना, मल के साथ रक्त आना, शरीर का वजन कम होना और पेट में ऐंठन (क्रैंपिंग) होना आदि शामिल है।

कोलेक्टॉमी की किस सर्जरी प्रोसीजर का इस्तेमाल किया जाना है, वह रोग के प्रकार व गंभीरता पर निर्भर करता है। इस सर्जरी प्रोसीजर का मुख्य लक्ष्य आंत के रोगग्रस्त हिस्से को निकालना और लक्षणों को कम करना है

(और पढ़ें - पेट के कैंसर का ऑपरेशन)

  1. कोलेक्टॉमी क्यों की जाती है - Why is Colectomy done in Hindi
  2. कोलेक्टॉमी से पहले - Before Colectomy in Hindi
  3. कोलेक्टॉमी के दौरान - During Colectomy in Hindi
  4. कोलेक्टॉमी के बाद - After Colectomy in Hindi
  5. कोलेक्टॉमी की जटिलताएं - Complications of Colectomy in Hindi
कोलेक्टॉमी के डॉक्टर

कोलेक्टॉमी सर्जरी को आमतौर पर निम्न लक्षणों का इलाज करने के लिए किया जाता है -

इसके अलावा यदि आपको कोलन कैंसर के लक्षण हो रहे हैं, तो भी जल्द से जल्द रोग की पुष्टि करके कोलेक्टॉमी सर्जरी प्रोसीजर शुरू की जा सकती है -

  • शौच आने की आदत बदल जाना जैसे कब्ज, दस्त या रुक-रुक कर पतला मल आना
  • ऐसा महसूस होना जैसे आपको मलत्याग करने की आवश्यकता है, लेकिन कुछ भी बाहर न आना
  • मल के साथ खून आना
  • गुदा से खून आना
  • पेट मे ऐंठन व दर्द होना
  • कमजोरी
  • थकान
  • शरीर का वजन कम होना

कोलेक्टॉमी सर्जरी किसे नहीं करवानी चाहिए?

नीचे बताई गई कुछ परीस्थितियां हैं, जिनके कारण लेप्रोस्कोपिक कोलेक्टॉमी सर्जरी नहीं की जा सकती है -

  • मोटापा
  • पहले हुई सर्जरी के कारण उस भाग में स्कार ऊतक बन जाना
  • रक्तस्राव होना
  • लेप्रोस्कोप की मदद से डॉक्टर द्वारा अंदरूनी संरचना को ठीक से न देख पाना
  • प्रभावित हिस्से या आस-पास कोई बड़ा ट्यूमर बनना

हालांकि, ऊपर बताई गई सभी स्थितियों में कोलेक्टॉमी को ओपन सर्जरी प्रोसीजर के रूप में किया जा सकता है।

(और पढ़ें - ट्यूमर और कैंसर में क्या अंतर है)

कोलेक्टॉमी सर्जरी से कुछ दिन पहले आपको अस्पताल बुलाया जाता है और इस दौरान आपसे आपके स्वास्थ्य संबंधी पिछली सभी जानकारियां ली जाती हैं। इस दौरान आपका शारीरिक परीक्षण भी किया जाता है और साथ ही निम्न टेस्ट भी किए जा सकते हैं -

सर्जरी से पहले आपको कुछ विशेष बातों का ध्यान रखने को भी कहा जाता है, जिनमें आमतौर पर निम्न को शामिल किया जाता है -

  • यदि आप किसी भी प्रकार की दवा, हर्बल उत्पाद, विटामिन, मिनरल या अन्य कोई सप्लीमेंट ले रहे हैं, तो डॉक्टर को इस बारे में बता दें। ऐसा इसलिए क्योंकि कुछ दवाएं रक्त को पतला करने के काम करती हैं, जिन्हें सर्जरी कराने से लगभग एक हफ्ता पहले ही बंद करना पड़ता है।
  • यदि आपको किसी भी प्रकार का रोग, एलर्जी या स्वास्थ्य संबंधी कोई अन्य समस्या है, तो डॉक्टर को पहले ही इस बारे में जानकारी दे दें।
  • यदि आप धूम्रपान या शराब का सेवन करते हैं, तो ऐसे में सर्जरी के दौरान और बाद में आपके लिए कई जोखिम बढ़ सकते हैं। डॉक्टर आपको सर्जरी से कुछ दिन पहले और बाद तक यह शराब व सिगरेट न पीने की सलाह देते हैं, ताकि आप जल्द से जल्द स्वस्थ हो सकें।
  • सर्जरी से एक या दो दिन पहले आंत को खाली करना होता है, जिसके लिए डॉक्टर आपको लैक्सेटिव दवाएं देते हैं या फिर एनिमा किट का इस्तेमाल किया जाता है।
  • सर्जरी से एक दिन पहले आपको कोई भी ठोस चीज खाने से मना किया जाता है, इस दौरान आप साफ तरल पदार्थ और शोरबा आदि पी सकते हैं। वहीं सर्जरी से 12 घंटे पहले तक आपको कुछ भी खाने या पीने से मना किया जा सकता है।
  • ऑपरेशन के लिए अस्पताल जाते समय अपने किसी करीबी रिश्तेदार या मित्र को साथ ले जाएं, ताकि सर्जरी से पहले और बाद में आपको मदद मिल सके।

ऑपरेशन के लिए अस्पताल जाने से पहले आपको निम्न बातों का ध्यान रखने की सलाह दी जाती है -

  • दांतों को ब्रश कर लें और माउथवॉश के साथ कुल्ला कर लें
  • नहा लें और जांघों व पेट के आस-पास के हिस्से को एंटी-बैक्टीरियल साबुन के साथ साफ कर लें
  • ढीले-ढाले व आरामदायक कपड़े पहनें
  • किसी भी प्रकार का मेकअप न करें 
  • यदि आपने घड़ी, ब्लूटूथ, कॉन्टेक्ट लेंस, चश्मा या कोई आभूषण पहना है, तो उसे घर पर ही छोड़ दें।

(और पढ़ें - कोलन इन्फेक्शन का कारण)

जब आप ऑपरेशन के लिए अस्पताल पहुंच जाते हैं, तो आपको आपको हॉस्पिटल गाउन ड्रेस और सर्जिकल स्टॉकिंग्स पहने को दी जाती है। इसके बाद डॉक्टर आपको सर्जरी के बारे में कुछ समझाते है और फिर प्रोसीजर को शुरू कर दिया जाता है।

कोलेक्टॉमी सर्जरी की शुरूआत कुछ इस प्रकार से की जाती है -

  • नर्स आपको कुछ दवाएं देती हैं, जिससे आप ऑपरेशन थिएटर में जाने से पहले ही पूरी तरह से रिलैक्स हो जाते हैं
  • डॉक्टर आपकी बांह की नस में इंट्रावेनस सुई लगा देते हैं, जिसकी मदद से आपको सर्जरी के दौरान आवश्यक द्रव व दवाएं दी जाती हैं।
  • आपके मूत्राशय को एक यूरिनरी कैथीटर से जोड़ दिया जाता है, ताकि सर्जरी के दौरान निकलने वाला पेशाब उससे जुड़ी थैली में जमा होता रहे।
  • इसके बाद एनेस्थीजियोलॉजिस्ट आपको एनेस्थीसिया का इंजेक्शन देते हैं, जिससे आप सर्जरी के दौरान गहरी नींद में सो जाते है और आपको कुछ महसूस नहीं होता है।

जब आप गहरी नींद में सो जाते हैं, तो ऑपरेशन प्रोसीजर शुरू की जाती है -

  • ओपन सर्जरी -
    इस सर्जरी प्रोसीजर में सर्जन रोगग्रस्त कोलन के ऊपर पेट में चीरा लगाते हैं। इस चीरे के अंदर से सर्जरी के ऊपकरण अंदर डाले जाते हैं, जिनकी मदद से बड़ी आंत के रोगग्रस्त हिस्से को बाहर निकाल दिया जाता है।
     
  • लेप्रोस्कोपिक सर्जरी -
    इस सर्जरी प्रोसीजर में सर्जन एक बड़े चीरे की जगह कई छोटे-छोटे चीरे लगाते हैं। इन चीरों के माध्यम से लेप्रोस्कोप को अंदर डाला जाता है। लेप्रोस्कोप के सिरे पर कैमरा व लाइट लगी होती है, जिसकी मदद से सर्जन अंदर वाले सभी हिस्सों को बाहर मॉनिटर स्क्रीन पर देख पाते हैं। इसके बाद सर्जन सर्जरी वाले अन्य उपकरणों को अंदर डालते हैं और मॉनिटर स्क्रीन में देखते हुए रोगग्रस्त हिस्से को निकाल दिया जाता है।

जब उपरोक्त दोनों प्रोसीजरों में किसी का इस्तेमाल करके कैंसरग्रस्त कोलन को निकाल दिया जाता है, तो पेट में बचे हुए बड़ी आंत के दोनों हिस्से को आपस में जोड़ दिया जाता है, जिस प्रक्रिया को एनास्टोमोसिस कहा जाता है।

कुछ मामलों में सर्जन आंत के अंतिम हिस्से को पेट में छिद्र करके उससे जोड़ देते हैं, जिसे स्टोमा कहा जाता है। स्टोमा को कुछ समय के लिए या फिर स्थायी रूप से इस्तेमाल करने के लिए बनाया जा सकता है। ऐसी स्थिति में स्टोमा के साथ एक विशेष बैग को जोड़ दिया जाता है, जिसमें मल जमा होता रहता है। इस बैग को समय-समय पर खाली किया जाता है या फिर नए बैग से बदल दिया जाता है।

वैसे तो अधिकतर मामलों में पार्शियल कोलेक्टॉमी (हेमिकोलेक्टॉमी) और टोटल कोलेक्टॉमी ही की जाती है, हालांकि, कोलन का कौन सा हिस्सा प्रभावित हुआ है उसके अनुसार दूसरी सर्जिकल प्रोसीजर भी की जा सकती हैं, जिनमें आमतौर पर निम्न शामिल हैं -

  • लेफ्ट हेमीकोलेक्टॉमी - इस सर्जरी में कोलन के बाएं हिस्से को हटा दिया जाता है।
  • राइट हेमीकोलेक्टॉमी - इस प्रोसीजर की मदद से बड़ी आंत का दायां हिस्सा हटाया जाता है।
  • ट्रांसवर्स कोलेक्टॉमी - इसमें कोलन के बीच वाले हिस्से को हटाया जाता है, जिससे ट्रांसवर्स कोलन कहा जाता है।
  • सिगमोइड कोलेक्टॉमी - इसमें कोलन के सिगमोइड हिस्से को सर्जरी की मदद से हटाया जाता है।
  • सबटोटल कोलेक्टॉमी - इस सर्जरी प्रोसीजर में कोलन का अधिकतर हिस्सा ही निकाल दिया जाता है। और बचे हुए सिगमोइड हिस्से को छोटी आंत से जोड़ दिया जाता है।

यह सर्जरी होने में लगभग एक घंटे का समय लगता है, जिसके बाद निम्न कार्य किए जाते हैं -

  • आपको रिकवरी वार्ड में शिफ्ट कर दिया जाएगा, जहां पर नर्स आपके सभी शारीरिक संकेतों जैसे ब्लड प्रेशर, ब्लड ऑक्सीजन लेवल, हार्ट रेट व अन्य पर करीब से नजर रखती है। आपको 3 से 7 दिन बाद अस्पताल से छुट्टी मिल जाती है।
  • एनेस्थीसिया का असर कम होने के बाद आपको होश आ जाता है और कुछ समय तक आपको उलझन सी महसूस होती है। हालांकि, इस दौरान नर्स आपकी मदद करती है और आपको सभी जरूरी चीजों के बारे में बताती हैं। 
  • आपको इंट्रावेनस और नैसोगैस्ट्रिक ट्यूब लगाकर रखी जाती है। नैसोगैस्ट्रिक ट्यूब की मदद से पेट में जमा हो रहे द्रव को साथ ही साथ निकाला जाता है, ताकि यह आंत में न जा पाए।
  • यूरीनरी कैथीटर को सर्जरी के बाद 24 घंटों तक लगाकर रखा जाता है और उसके बाद निकाल दिया जाता है।
  • 24 से 48 घंटों के बाद आपको द्रव पीने की अनुमति दे दी जाती है और शुरुआत एक छोटी घूंट पानी से की जाती है।
  • सर्जरी के बाद होने वाले दर्द को कम करने के लिए दर्दनिवारक दवाएं और संक्रमण को रोकने के लिए एंटीबायोटिक दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है। यदि आपको जी मिचलाने की समस्या हो रही है, तो उसके लिए भी दवाएं दी जा सकती हैं।
  • सर्जरी वाले घाव पर पट्टी कर दी जाती है। सर्जरी के दौरान आमतौर पर ऐसे टांकों का इस्तेमाल किया जाता है जो कुछ समय बाद त्वचा में ही अवशोषित हो जाते हैं अर्थात् इन्हें निकलवाने की आवश्यकता नहीं पड़ती है। हालांकि, यदि अवशोषित होने वाले टांके नहीं हैं, तो डॉक्टर टांके निकालने के लिए कुछ समय बाद फिर से अस्पताल बुलाते हैं।

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कोलेक्टॉमी सर्जरी के बाद जब आपको अस्पताल से छुट्टी मिल जाती है, तो निम्न आपको निम्न सुझाव दिए जाते हैं -

  • घाव की देखभाल -
    जब तक टांके निकाले न जाएं घाव को गीला न होनें दें। सर्जरी होने के दो दिन बाद ही आपको नहाने की अनुमति दी जाती है। घाव से स्टेरी-स्ट्रिप्स को 10 दिन बाद उतारा जाता है। सर्जरी के बाद होने वाला स्कार ठीक होने में कम से कम 6 हफ्ते का समय लेता है। हालांकि, सर्जरी वाले हिस्से को धूप के संपर्क में न लाएं, क्योंकि इससे स्थायी निशान पड़ सकते हैं। आपको तंग कपड़े पहनने से मना किया जाता है, क्योंकि इससे घाव पर दबाव पड़ता है और व ठीक नहीं हो पाता है।
     
  • दर्द का निवारण -
    सर्जरी के बाद कुछ दिन तक दर्द रह सकता है, जिसके लिए डॉक्टर आपको दवाएं देते हैं। हालांकि, आपको डॉक्टर से पूछा बिना कोई भी बाहर से ली गई पेनकिलर या अन्य दवा नहीं लेनी चाहिए।
     
  • मलत्याग -
    सर्जरी के बाद दो हफ्तों तक आपको नरम खाद्य पदार्थ दिए जाते हैं, ताकि मल पतला रहे और मलत्याग करते समय आंतों पर अधिक दबाव न पड़े। हालांकि, डॉक्टर आपको मलत्याग करते समय जोर न लगाने की सलाह देते हैं।
     
  • आहार -
    सर्जरी के बाद डॉक्टर आपको लगभग 4 हफ्तों तक पतले व नरम आहार सेवन करने की सलाह देते हैं। इससे आपकी मलत्याग करने की प्रक्रिया भी सामान्य बनी रहती है। दिन में कम से कम 10 गिलास पानी पिएं।
     
  • शारीरिक गतिविधियां -
    ऑपरेशन के लगभग दो हफ्तों बाद आप अपनी दिनचर्या की सामान्य गतिविधियां करना शुरू कर देते हैं, जैसे चलना-फिरना आदि। यदि आपकी लेप्रोस्कोपिक सर्जरी की गई थी तो आप अपने काम पर वापस जा सकते हैं। हालांकि, जिन लोगों की ओपन सर्जरी की जाती है उनका घाव बड़ा होता है जिसे ठीक होने में 3 से 4 हफ्ते भी लग सकते हैं। जब तक डॉक्टर अनुमति न दें तब तक कोई भी अधिक मेहनत वाला काम न करें और ही अधिक भारी वस्तु उठाएं।

डॉक्टर को कब दिखाएं?

कोलेक्टॉमी सर्जरी के बाद यदि आपको निम्न में से कोई भी लक्षण महसूस होता है, तो जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क करें -

  • बार-बार उल्टी आना
  • पेट में लगातार दर्द होना
  • पेट में सूजन
  • सर्जरी वाले हिस्से में लगातार दर्द रहना और शारीरिक गतिविधि करने पर अधिक बढ़ जाना
  • तेज बुखार होना
  • घाव से बदबूदार द्रव या रक्त बहना
  • सांस फूलना

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कोलेक्टॉमी सर्जरी कराने से निम्न जोखिम व जटिलताएं हो सकती हैं -

  • निमोनिया
  • घाव में संक्रमण
  • टांग या फेफड़ों में रक्त का थक्का बनना
  • मूत्र पथ में संक्रमण (कैथीटर के कारण)
  • गुर्दे खराब होना
  • पेट में बनाए गए छिद्र (स्टोमा) से ऊतक बाहर निकलना
  • शरीर के अंदरूनी हिस्से में रक्तस्राव होना
  • पेट में स्कार ऊतक बनना जो आंत में रुकावट कर देता है
  • जहां से आंतों को जोड़ा गया था वहां से रिसाव होना
  • सर्जरी के दौरान आस-पास के अंग क्षतिग्रस्त होना

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संदर्भ

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  7. Society of American Gastrointestinal and Endoscopic Surgeons [Internet]. California. US; Colon resection surgery patient information from SAGES
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