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सफेद रक्त कोशिकाओं की मदद से शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली बैक्टीरियावायरस व संक्रमण का कारण बनने वाले अन्य रोगाणुओं से लड़ता  है। रोगाणुओं से लड़ने के लिए प्रतिरक्षा प्रणाली को सिर्फ एक ही प्रकार की सफेद रक्त कोशिकाओं की आवश्यकता नहीं पड़ती है। शरीर में प्रतिरक्षा प्रणाली से संबंधित कई प्रकार की कोशिकाएं होती हैं और प्रणाली के ठीक रूप से काम करने के लिए उनका सही मात्रा में (ना कम और ना ज्यादा) होना जरूरी होता है। 

इओसिनोफिल्स एक प्रकार की सफेद रक्त कोशिकाएं होती हैं, जो बैक्टीरियल व वायरल इन्फेक्शन से लड़ने का काम करती हैं । शरीर इओसिनोफिल कोशिकाओं को अस्थि मज्जा (बोन मेरो) में बनाता है और इन कोशिकाओं को पूरी तरह से विकसित होने में 8 दिन का समय लगता है। इओसिनोफिल्स भी अन्य प्रकार की सफेद रक्त कोशिकाओं की तरह प्रतिरक्षा प्रणाली में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। प्रतिरक्षा प्रणाली को ठीक तरीके से काम करने के लिए इओसिनोफिल्स कोशिकाओं का स्तर सामान्य रहना बहुत जरूरी होता है।

जब आपके खून में इओसिनोफिल कोशिकाओं का स्तर बढ़ सकता है, तो इस स्थिति को “ब्लड इओसिनोफिलिया” कहा जाता है। इसी तरह संक्रमण, सूजन या लालिमा से प्रभावित शरीर के ऊतकों में इन सफेद रक्त कोशिकाओं का स्तर बढ़ सकता है, इस स्थिति को “टिश्यू इओसिनोफिलिया” कहा जाता है।

(और पढ़ें - एब्सोल्यूट एओसिनोफिल काउंट टेस्ट क्या है)

  1. इओसिनोफिलिया से बचाव - Prevention of Eosinophilia in Hindi
  2. इओसिनोफिलिया का परीक्षण - Diagnosis of Eosinophilia in Hindi
  3. इओसिनोफिलिया के कारण - Eosinophilia Causes in Hindi
  4. इओसिनोफिलिया क्या है - What is Eosinophilia
  5. इओसिनोफिलिया के लक्षण - Eosinophilia Symptoms in Hindi
  6. इओसिनोफिलिया का इलाज - Eosinophilia Treatment in Hindi
  7. इओसिनोफिलिया की जटिलताएं - Eosinophilia Complications in Hindi
  8. इओसिनोफिलिया के डॉक्टर

इओसिनोफिलिया से बचाव - Prevention of Eosinophilia in Hindi

इओसिनोफिलिया की रोकथाम कैसे करें?

इओसिनोफिलिया विभिन्न समस्याओं के कारण हो सकता है और सभी कारणों की रोकथाम करना संभव नहीं है। हालांकि इओसिनोफिल्स कोशिकाओं की संख्या बढ़ने के कुछ कारण हैं, जिनसे बचाव करना संभव हो सकता है। यदि परजीवी संक्रमण या किसी प्रकार की एलर्जी के कारण इओसिनोफिलिया हुआ है, तो कुछ सामान्य बातों का ध्यान रख कर इओसिनोफिलिया से बचाव किया जा सकता है, जैसे: 

  • हाथों को अच्छे से धोना
  • स्वच्छ व सुरक्षित पानी पीना, यदि आपको लगता है कि पानी स्वच्छ नहीं है तो पीने से पहले उसे उबाल लें।
  • स्वच्छ व सुरक्षित खाद्य पदार्थ खाएं, फलों व कच्ची खाई जाने वाली सब्जियों को खाने से पहले साफ पानी से धो लें।
  • सिर्फ पाश्चराइज्ड दूध व जूस ही पिएं (पाश्चराइजेशन एक विशेष प्रक्रिया होती है, जिसकी मदद से दूध आदि के हानिकारक कीटाणुओं को मार दिया जाता है)
  • यौन संबंधी गतिविधियों में विशेष रूप से सावधानियां बरतें।
  • एलर्जी करने वाले पदार्थों से बचें।

इओसिनोफिलिया का परीक्षण - Diagnosis of Eosinophilia in Hindi

इओसिनोफिलिया का परीक्षण कैसे किया जाता है?

इओसिनोफिल्स कोशिकाओं की मात्रा सिर्फ खून में ही नहीं बढ़ती, शरीर के ऊतकों मे भी इन सफेद रक्त कोशिकाओं की मात्रा बढ़ना संभव है। इस स्थिति का परीक्षण करने के लिए डॉक्टर मरीज के शरीर से ऊतकों का सेंपल ले सकते हैं और उनकी जांच कर सकते हैं। यदि शरीर के ऊतकों में इओसिनोफिल्स कोशिकाओं की संख्या असाधारण रूप से बढ़ गई है, तो जांच करके इसका पता लगाया जा सकता है। इतना ही नहीं इओसिनोफिलिया का परीक्षण करने के लिए डॉक्टर शरीर के अन्य द्रवों की जांच भी कर सकते हैं जैसे नाक से निकलने वाले द्रव (बलगम) की जांच करना।

इओसिनोफिल्स कोशिकाओं का बढ़ा हुआ स्तर खून की जांच के दौरान मिल सकता है। इस स्थिति के कारण पर निर्भर करते हुऐ डॉक्टर पुष्टि करने के लिए कुछ अन्य टेस्ट भी कर सकते हैं, जैसे:

इओसिनोफिलिया के कारण - Eosinophilia Causes in Hindi

इओसिनोफिलिया कब होता है?

जब शरीर के किसी हिस्से में एक बड़ी मात्रा में इओसिनोफिल्स नाम की सफेद रक्त कोशिकाएं जमा हो जाती है, तो इस स्थिति में इओसिनोफिलिया हो जाता है। इसके अलावा शरीर द्वारा बहुत अधिक मात्रा में इओसिनोफिल्स सेल्स बनाना भी इओसिनोफिलिया होने का एक कारण हो सकता है। ऐसे बहुत सारे कारक होते हैं, जो इस रोग का कारण बन सकते हैं।

स्वास्थ्य संबंधी कुछ समस्याएं व रोग जो इओसिनोफिलिया का कारण बन सकते हैं, जैसे:

  • परजीवी से होने वाले संक्रमण
  • फंगल संक्रमण व इससे जुड़े अन्य रोग
  • अस्थमा
  • किसी विशेष भोजन, दवाई या पदार्थ से एलर्जी होना
  • एक्जिमा
  • एड्रिनल ग्रंथि संबंधी समस्याएं
  • त्वचा रोग व विकार
  • किसी विषाक्त पदार्थ के संपर्क में आना
  • कुछ प्रकार के ब्लड कैंसर जैसे क्रोनिक मिलॉइड ल्यूकेमिया और इओसिनोफिलिक ल्यूकेमिया
  • कुछ प्रकार के स्व प्रतिरक्षित रोग जैसे लुपस और क्रोन रोग आदि।
  • एंडोक्राइन ग्रंथि संबंधी विकार
  • कुछ प्रकार के कैंसरट्यूमर आदि।

कुछ मामलों में अस्थि मज्जा में बहुत अधिक मात्रा में इओसिनोफिल्स सेल्स बनने लग जाती हैं। इडियोपैथिक हाइपेरोसिनोफिलिक सिंड्रोम (HES) नामक एक ऐसी स्थिति है, जिसमें बहुत अधिक मात्रा में इओसिनोफिल्स कोशिकाएं बनने लग जाती हैं और अब इसके पीछे के कारण का भी पता नहीं चल पाया है। हाइपेरोसिनोफिलिक सिंड्रोम कुछ प्रकार के कैंसर के परिणामस्वरूप भी हो सकता है, जैसे बोन मेरो या लिम्फ नोड्स में कैंसर आदि।

इओसिनोफिलिया क्या है - What is Eosinophilia

इओसिनोफिलिया क्या है?

शरीर में इओसिनोफिल्स कोशिकाओं का स्तर बढ़ने की स्थिति को इओसिनोफिलिया कहा जाता है। खून में इओसिनोफिल्स की संख्या एक माइक्रोलीटर में 500 से अधिक हो जाती है, तो इस स्थिति को इओसिनोफिलिया कहा जाता है। इओसिनोफिल्स रोगों से लड़ने वाली एक प्रकार की सफेद रक्त कोशिकाएं होती हैं। इन सफेद रक्त कोशिकाओं की संख्या बढ़ना अक्सर एक एलर्जिक रिएक्शन या फिर कैंसर का संकेत देती है।

खून के अलावा इओसिनोफिल्स का स्तर शरीर के अन्य द्रवों में भी बढ़ सकता है जैसे सेरिब्रोस्पाइनल फ्लूड (CSF) और पेशाब आदि। इतना ही इन सफेद रक्त कोशिकाओं का स्तर शरीर के अन्य भागों व ऊतकों में भी बढ़ सकता है, जैसे त्वचा, फेफड़े, आंत, मूत्राशय, हृदय, लीवर, अस्थि मज्जा, मांसपेशियां और नसें आदि।

(और पढ़ें - सफेद रक्त कोशिकाएं कैसे बढ़ाएं)

इओसिनोफिलिया के लक्षण - Eosinophilia Symptoms in Hindi

इओसिनोफिलिया से क्या लक्षण होते हैं?

इओसिनोफिलिया में इओसिनोफिल्स नामक कोशिकाओं की संख्या बढ़ने के कारण शरीर में विभिन्न प्रकार के लक्षण विकसित हो जाते हैं। इस दौरान होने वाले लक्षण अक्सर इओसिनोफिलिया का कारण बनने वाली स्थितियों पर निर्भर करते हैं। 

कारणों के अनुसार इओसिनोफिलिया में निम्न प्रकार के लक्षण देखे जा सकते हैं:

  • अस्थमा के कारण इओसिनोफिलिया होना: घरघराहट, सांस फूलना और सांस लेने में दिक्कत होना।
  • परजीवी संक्रमण से इओसिनोफिलिया होना: पेट दर्द, दस्त, बुखार, खांसी और त्वचा पर चकत्ते होना।
  • किसी दवा के रिएक्शन से इओसिनोफिलिया होना: ऐसी स्थिति में सिर्फ त्वचा संबंधी लक्षण ही विकसित होते हैं जैसे त्वचा पर लाल चकत्ते हो जाना।
  • इओसिनोफिलिया से होने वाले दुर्लभ लक्षण: कुछ ऐसे लक्षण जो इओसिनोफिलिया में बहुत ही कम मामलों में दिखाई देते हैं जैसे शरीर का वजन घटना, रात को पसीना आना, लिम्फ नोड्स का आकार बढ़ना, त्वचा पर लाल चकत्ते हो जाना और नसें क्षतिग्रस्त हो जाने के कारण प्रभावित अंगों में झुनझुनी महसूस होना या सुन्न हो जाना।

डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए?

इओसिनोफिलिया का पता अक्सर तब लगता है, जब डॉक्टर किसी अन्य शारीरिक समस्या या रोग का परीक्षण करने के लिए मरीज का खून टेस्ट करते हैं। ऐसा जरूरी नहीं है कि हर बार यह अचानक से पता लगता है, लेकिन कभी-कभी यह किसी अन्य समस्या का परीक्षण करने के दौरान संयोगवश मिल जाता है।

यदि आपको निम्न में से किसी प्रकार के लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो जल्द से जल्द डॉक्टर से जांच करवा लेना चाहिए:

  • बार-बार घरघराहट होना और सांस फूलना
  • पेट दर्द, दस्त, बुखार, खांसी या त्वचा पर चकत्ते दिखाई देना
  • शरीर का कोई हिस्सा सुन्न होना या उसमें झुनझुनी जैसी सनसनी महसूस होना
  • शरीर का अपने आप वजन कम होना

इओसिनोफिलिया का इलाज - Eosinophilia Treatment in Hindi

इओसिनोफिलिया का उपचार कैसे करें?

इओसिनोफिलिया का इलाज उसका कारण बनने वाली स्थिति के अनुसार किया जाता है। इसका कारण बनने वाली स्थिति के अनुसार इसकी उपचार प्रक्रिया भी अलग-अलग हो सकती है, जैसे यदि किसी दवा या विशेष खाद्य पदार्थ के कारण यह समस्या हुई है, तो उनका सेवन बंद कर देना। इसके अलावा दवा या भोजन से होने वाले लक्षणों को कम करने के लिए विशेष प्रकार की दवाएं दी जा सकती हैं, जो लक्षणों को कम कर देती हैं जैसे एंटी इंफ्लेमेटरी (सूजन व जलन को कम करने वाली) दवाएं लेना। 

अस्थमा के कारण होने वाले इओसिनोफिलिया का इलाज करने के लिए इस्तेमाल की गई दवाओं विशेष तौर पर फूड एंड ड्रग एडमीनीस्ट्रेशन (FDA) के द्वारा स्वीकृति दी जाती है। इन दवाओं का इस्तेमाल सिर्फ अस्पताल में ही किया जाता है और जिन मरीजों को ये दवाएं दी जा रही हैं उन्हें विशेष रूप से निगरानी में रखा जाता है।

घरेलू उपचार

इओसिनोफिलिया के कुछ मामलों में लक्षणों को कम करने के लिए कुछ घरेलू उपायों का उपयोग भी किया जा सकता है, जैसे:

  • गर्म पानी में नीलगिरी के तेल की कुछ बूंदे डालकर उसकी भाप लें, ऐसा करने से नाक के अंदर जमा बलगम पतला होकर निकल जाता है। 
  • चाय में अदरक डालकर पीने से भी इओसिनोफिलिया से संबंधित लक्षणों को शांत करने में कुछ हद तक मदद मिलती है।
  • पानी में काली मिर्च का पाउडर और शहद मिला कर उसे रोजाना दिन में दो बार लें। ऐसा करने से प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत होती है और इओसिनोफिलिया के लक्षणों से लड़ने में मदद मिलती है। 
  • रोजाना पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें और शरीर में पानी की कमी ना होने दें।
  • एक गिलास पानी में दो बड़े चम्मच मेथी के बीज उबाल लें और उनसे गरारे करें।

इओसिनोफिलिया की जटिलताएं - Eosinophilia Complications in Hindi

इओसिनोफिलिया से क्या जटिलताएं होती हैं?

इओसिनोफिल्स की अधिक संख्या का इलाज करना उसके परिणाम को प्रभावित कर सकता है। कुछ गंभीर परिस्थितियों में उनका परिणाम इस बात पर भी निर्भर कर सकता है कि प्रभावित अंग कितना क्षतिग्रस्त हुआ है और मरीज इलाज के प्रति कैसी प्रतिक्रिया दे रहा है।

Dr. Abhas Kumar

Dr. Abhas Kumar

प्रतिरक्षा विज्ञान

Dr. Hemant C Patel

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Dr. Lalit Pandey

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