हाइड्रोसील को जलशीर्ष भी कहते हैं। यह एक ऐसी स्थिति है, जिसमें लिंग के नीचे मौजूद अंडकोष की थैली में तरल पदार्थ भर जाता है और इस वजह से यह थैली भारी हो जाती है। यह तरल एक या दोनों अंडकोष के आसपास भर सकता है और अंडकोष की सूजन का कारण बन सकता है। जैसा कि आप जानते हैं कि पुरुषों में लिंग के ठीक नीचे दो अंडकोष होते हैं जो कि त्वचा की एक थैली के अंदर होते हैं, इन्हें अंग्रेजी में स्क्रोटम कहते हैं।

हाइड्रोसील की समस्या वयस्क पुरुषों की तुलना में शिशुओं में ज्यादा आम है। ऐसा अनुमान है कि 10 फीसद नवजात शिशु को हाइड्रोसील होता है, यह स्थिति आमतौर पर जन्म के पहले वर्ष के अंदर बिना किसी उपचार के ठीक हो जाती है। जबकि वयस्कों की बात करें तो केवल 1% वयस्क पुरुषों में हाइड्रोसील होता है और आमतौर पर 6 महीने के अंदर यह अपने आप ठीक हो जाता है।

गर्भ में जब बच्चे का विकास हो रहा होता है उस दौरान, पेट में किडनी के पास अंडकोष का विकास होता है। इसके बाद जैसे-जैसे जन्म का समय पास आता है यह अंडकोष अपनी सामान्य पोजिशन यानी उचित स्थान पर एक टनल (सुरंग जैसा कोई रास्ता) के माध्यम से पहुंच जाते हैं। आमतौर पर, जन्म के बाद यह टनल और थैली बंद हो जाती है और द्रव अवशोषित हो जाता है। लेकिन यदि यह थैली खुली रह जाती है, तो तरल पदार्थ पेट से अंडकोष में जा सकता है, जिससे बच्चे को हाइड्रोसील हो सकता है। वयस्कों में, हाइड्रोसील तब विकसित हो सकता है जब बंद थैली फिर से खुल जाती है और तरल पदार्थ अंडकोष में रिसने लगता है। अंडकोष के आसपास की थैली की सूजन भी हाइड्रोसील का कारण बन सकती है। वयस्कों में होने वाले हाइड्रोसील के अन्य कारणों में शुक्राणु कॉर्ड का ब्लॉक होना, वंक्षण हर्निया की सर्जरी या अंडकोष या अंडकोष की थैली में संक्रमण शामिल हैं।

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वयस्कों में होने वाले हाइड्रोसील के प्राथमिक लक्षणों में अंडकोष में एक या दोनों तरफ भारीपन, अंडकोष में सूजन (जिसे आसानी से नोटिस किया जा सकता है) और प्रभावित हिस्से में असुविधा महसूस करना शामिल हैं। जलशीर्ष में आमतौर पर दर्द नहीं होता है, लेकिन अगर तरल पदार्थ की मात्रा बहुत ज्यादा है या अंडकोष के संक्रमण या मरोड़ जैसी जटिलताएं हैं, तो दर्द हो सकता है। 

(और पढ़ें - अंडकोष में दर्द का कारण)

डॉक्टर हाइड्रोसील के निदान के लिए मेडिकल हिस्ट्री और शारीरिक जांच कर सकते हैं। जटिलताओं के बारे में पता करने के लिए वे अल्ट्रासाउंड जैसे इमेजिंग टेस्ट कर सकते हैं। इसके अलावा अंतर्निहित संक्रमण का पता लगाने के लिए वे ब्लड टेस्ट और यूरिन टेस्ट कराने का भी सुझाव दे सकते हैं।

हाइड्रोसील के लिए आवश्यक विशिष्ट उपचार में सर्जरी शामिल है, जिसमें उस रास्ते को बंद कर दिया जाता है, जिससे फ्लूइड का अंडकोष की थैली में रिसाव होता है।

हालांकि, इसके वैकल्पिक उपचारों में होम्योपैथी की मदद भी ली जा सकती है। यह एक जाना-माना और व्यापक रूप से मान्यताप्राप्त चिकित्सा प्रणाली है। यह न केवल लक्षणों का प्रबंधन करता है बल्कि अंतर्निहित कारणों को भी खत्म करने में मदद करता है। होम्योपैथी उपचार का प्रयोग कई स्वास्थ्य स्थितियों के लिए व्यापक रूप से किया जाता है। हाइड्रोसील के इलाज के लिए भी होम्योपैथी दवाइयों का प्रयोग किया जा सकता है, खास बात यह है कि इन उपायों को बच्चों के साथ-साथ वयस्क भी सुरक्षित रूप से ले सकते हैं। हाइड्रोसील के उपचार के लिए आमतौर पर उपयोग किए जाने वाले उपचारों में अर्निका मोंटाना, बेर्बिस वल्गेरिस, क्लेमाटिस इरेक्टा और कोनियम मैकुलम शामिल हैं।

(और पढ़ें - अंडकोष में दर्द की होम्योपैथिक दवा)

  1. हाइड्रोसील के लिए होम्योपैथिक दवाएं - Homeopathic Medicine for Hydrocele in Hindi
  2. हाइड्रोसील के लिए होम्योपैथी के अनुसार क्या खाएं - What to eat according to homeopathy for Hydrocele in Hindi
  3. हाइड्रोसील के लिए होम्योपैथिक उपचार कितना प्रभावी है - How effective is homeopathic Medicine for Hydrocele in Hindi
  4. हाइड्रोसील के लिए होम्योपैथिक दवा के नुकसान - Side effects of homeopathic medicine for Hydrocele in Hindi
  5. हाइड्रोसील के लिए होम्योपैथिक उपचार से संबंधित टिप्स - Tips related to homeopathic treatment for Hydrocele in Hindi
  6. हाइड्रोसील का होम्योपैथिक इलाज और दवा के डॉक्टर

नीचे कुछ होम्योपैथिक दवाओं की जानकारी दी गई है, जिनका इस्तेमाल हाइड्रोसील के इलाज के लिए किया जाता है :

अर्निका मोंटाना
सामान्य नाम : लेपर्ड बेन (Leopard’s bane)
लक्षण :
इस उपाय का उपयोग अक्सर दर्द व ऐसे लक्षणों के इलाज के लिए किया जाता है, जो चोट के कारण दिखाई देते हैं। इसके अलावा यह निम्नलिखित लक्षणों के प्रबंधन में भी मदद करता है :

ऊपर दिए गए लक्षण गतिविधि करने, प्रभावित हिस्से को ​हल्के से छूने पर और नम वातावरण में रहने से खराब हो जाते हैं, जबकि सिर को नीचा रखने और लेटने पर इनमें सुधार होता है।

एब्रोटेनम
सामान्य नाम : साउदर्नवुड (Southernwood)
लक्षण :
यह उपाय बच्चों में होने वाले हाइड्रोसील के प्रबंधन में ज्यादा प्रभावी है। हालांकि, यह निम्नलिखित लक्षणों को ठीक करने में भी मदद कर सकता है :

यह लक्षण ठंडी हवा में रहने पर खराब हो जाते हैं, जबकि गतिविधि करने से इनमें सुधार होता है।

बेर्बेरिस वल्गेरिस
सामान्य नाम : बरबेरी
लक्षण :
यह उपाय मुख्य रूप से वेनस सिस्टम (नसों का ऐसा नेटवर्क जो दिल में वापस से ऑक्सीजन रहित रक्त पहुंचाने का काम करता है) पर असर करता है और अक्सर ऐसे व्यक्तियों को दिया जाता है, जिन्हें बदन दर्द होता है। इसके अलावा यह निम्नलिखित लक्षणों के उपचार के लिए भी सहायक है :

यह लक्षण चलने-फिरने और खड़े होने पर खराब हो जाते हैं।

क्लेमाटिस इरेक्टा
सामान्य नाम : वर्जिन बोवर (Virgin’s bower)
लक्षण :
यह उपाय निम्नलिखित लक्षणों में मददगार है :

  • पेट में ठंडक का एहसास
  • मल त्यागते समय और पेशाब करते समय पेट में दर्द
  • पेट के निचले हिस्से में दर्द और दबाव
  • वंक्षण ग्रंथियों में दर्द व सूजन
  • मूत्रमार्ग में चुभन महसूस करना
  • जननांग वाले हिस्से में खुजली
  • अंडकोष की थैली के दाईं तरफ आधे हिस्से में सूजन
  • अंडकोष में भारीपन महसूस होना
  • वृषण में दर्द होना
  • जांघों में दर्द जो धीरे-धीरे बढ़ता है
  • अंडकोष में दर्द के साथ सूजन व जलन
  • अंडकोष का मोटा होना
  • यौन इच्छा में कमी (और पढ़ें - कामेच्छा बढ़ाने के घरेलू उपाय)
  • स्खलन के दौरान लिंग में जलन के साथ दर्द

यह लक्षण रात में, विशेष रूप से ठंडी रात में और बिस्तर पर लेटने के दौरान लगने वाली गर्मी से खराब हो जाते हैं। खुली हवा में रहने पर इन लक्षणों में सुधार होता है।

कोनियम मैक्यूलेटम
सामान्य नाम : पॉइजन हेमलॉक
लक्षण :
इस उपाय की मदद से निम्नलिखित लक्षणों का प्रबंधन किया जाता है :

यह लक्षण मानसिक थकान, लेटने या करवट बदलने या उठने पर बढ़ जाते हैं जबकि अंधेरे में और चलने-फिरने के दौरान प्रभावित हिस्से पर दबाव पड़ने से लक्षणों से राहत मिलती है।

डिजिटलिस परप्यूरिया
सामान्य नाम : फॉक्सग्लोव
लक्षण :
यह उपाय निम्नलिखित लक्षणों से राहत दिलाने में उपयोगी है :

  • पेट में मरोड़ जैसा दर्द
  • जी मिचलाना
  • कमर में मरोड़
  • मूत्राशय के अगले सिरे की सूजन
  • मूत्रमार्ग में जलन
  • अंडकोष की थैली में तरल इकट्ठा होना
  • वृषण में तेज दर्द
  • जननांगों में सूजन (और पढ़ें - योनि में सूजन का इलाज)
  • सेक्स के बाद जननांग वाले हिस्से में कमजोरी (और पढ़ें - सेक्स पावर बढ़ाने के उपाय)

यह लक्षण तब खराब हो जाते हैं जब व्यक्ति सीधा बैठा हो, जबकि खाली पेट इन लक्षणों में सुधार होता है।

पल्सेटिला प्रेटेंसिस
सामान्य नाम : विंड फ्लावर
लक्षण :
यह उपाय निम्नलिखित लक्षणों के उपचार के लिए उपयुक्त है :

  • उल्टी
  • सीने में जलन
  • पेट में झुनझुनाहट या सिहरन
  • पेट में सूजन
  • मूत्रमार्ग से मोटा डिस्चार्ज होना
  • मूत्राशय में दबाव का एहसास होना
  • अंडकोष की थैली में खुजली और गुदगुदी सा एहसास होना
  • जननांगों में जलन
  • वृषण में सूजन
  • दर्द जो पेट से अंडकोष की तरफ बढ़ता है

यह लक्षण शाम को, कुछ खाने और बाएं तरफ लेटने से बढ़ जाते हैं। ठंडे भोजन और पेय का सेवन करने, खुली हवा में रहने और चलने-फिरने से इनमें सुधार होता है।

रोडोडेंड्रोन
सामान्य नाम : स्नो रोज
लक्षण :
यह उपाय निम्नलिखित लक्षणों के प्रबंधन के लिए उपयोगी है :

  • पसलियों के नीचे दर्द
  • बैठते समय पेडू और जांघ के बीच वाले हिस्से में दर्द
  • जी मिचलाना
  • किसी तरह के तरल पदार्थ के सेवन के बाद उल्टी आना (और पढ़ें - उल्टी रोकने के उपाय)
  • जननांगों और जांघों में दर्द
  • लिंग के नीचे धमक जैसा एहसास होना
  • वृषण में खिचाव वाला दर्द जो कि पेट और जांघों तक बढ़ता है
  • वृषण में सूजन
  • वृषण का अंडकोष की थैली से पेट और जांघ के बीच चले जाना
  • हाइड्रोसील
  • दाएं अंडकोष में दर्द, खासकर छूने पर
  • दर्द जो एक अंडकोष से दूसरे अंडकोष तक फैलता है
  • सेक्स के प्रति रुचि न होना (और पढ़ें - सेक्स के प्रति अरुचि)
  • अंडकोष का सिकुड़ना
  • दाएं अंडकोष में दर्द जो गुदा की ओर बढ़ता है (और पढ़ें - गुदा की हड्डी में दर्द का इलाज)
  • जननांगों के पास जांघों में दर्द (और पढ़ें - हैम्स्ट्रिंग की मांसपेशियों में दर्द का इलाज)

यह लक्षण रात में खराब हो जाते हैं, जबकि गर्मी और कुछ खाने के बाद बेहतर महसूस होता है।

होम्योपैथिक उपचार का इस्तेमाल इस दौर में व्यापक स्तर पर किया जा रहा है, क्योंकि यह कई स्वास्थ्य स्थितियों के लिए प्रभावी हैं। यह उपचार प्राकृतिक चीजों से तैयार किए जाते हैं, इसलिए आमतौर पर इन्हें उपयोग के लिए सुरक्षित माना जाता है। इन दवाइयों के सेवन को आसानी से दैनिक दिनचर्या में जोड़ा जा सकता है। हालांकि, होम्योपैथिक दवाएं बेहद घुलनशीन होती हैं और बाहरी कारकों की वजह से इनके कार्य या प्रभाव में बाधा आ सकती है। इसलिए, डॉक्टर आमतौर पर होम्योपैथिक दवाओं का उपयोग करते समय रोगियों को जीवन शैली में कुछ बदलाव करने की भी सलाह देते हैं। ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई बाहरी कारक इन दवाइयों के असर को प्रभावित न करें। इन जरूरी बदलावों में शामिल हैं :

क्या करना चाहिए

  • होम्योपैथिक दवाइयों के सेवन के दौरान व्यक्तिगत रूप से साफ-सफाई बनाए रखें।
  • यह भी जरूरी है कि आपके आसपास का माहौल या परिवेश साफ-सुथरा और सैनिटाइज (स्वच्छ) हो।
  • ऐसे स्वस्थ व संतुलित आहार का सेवन करें, जिसमें फाइबर और पोषक तत्व मौजूद हों।
  • एक्टिव जीवनशैली को अपनाएं, इसके लिए आप नियमित रूप से हल्का व्यायाम जैसे योग या जॉगिंग करें।
  • आरामदायक कपड़े पहनें, जिसमें से हवा पास हो सके।

क्या नहीं करना चाहिए

  • यदि आप होम्योपैथिक दवा ले रहे हैं तो ऐसे में कॉफी और चाय जैसे पेय पदार्थों का सेवन बंद कर दें।
  • अल्कोहल लेने से बचें, क्योंकि यह होम्योपैथिक दवाओं के असर में बाधा डाल सकती है।
  • ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन न करें, जिसमें चीनी और नमक का स्तर बहुत ज्यादा हो।
  • आर्टिफिशियल खुशबूदार चीजें जैसे रूम फ्रेशनर का उपयोग न करें।
  • आर्टिफिशियल टेम्परेचर कंट्रोल डिवाइसेज जैसे एसी या रूम हीटर का प्रयोग न करें।

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हाइड्रोसील के ज्यादातर मामलों का इलाज सर्जरी ​के बिना केवल होम्योपैथिक दवाओं के साथ किया जा सकता है। ये उपाय स्थिति की पुनरावृत्ति (दोबारा होने का जोखिम) को भी रोक सकते हैं। यदि उचित समय से होम्योपैथिक उपचार शुरू किया जाए, तो ऐसे में हाइड्रोसील को ठीक करने की संभावना काफी बढ़ जाती है।

जलशीर्ष से ग्रस्त पांच महीने के एक लड़के पर किए गए अध्ययन से पता चला कि होम्योपैथिक उपचार के नियमित सेवन से तीन महीने के अंदर हाइड्रोसील के लक्षणों के प्रबंधन में मदद मिली। हालांकि, हाइड्रोसील के उपचार में होम्योपैथिक उपचार की दक्षता को लेकर पर्याप्त जानकारी या सबूत की कमी है।

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यह दवाएं अनुभवी होम्योपैथिक डॉक्टर से परामर्श करने के बाद लेने पर आमतौर पर सुरक्षित मानी जाती हैं। इन उपायों को प्राकृतिक पदार्थों से तैयार किया जाता है, फिर व्यक्तिगत आवश्यकताओं के अनुरूप इन्हें घुलनशील रूप दिया जाता है। उपचार निर्धारित करने से पहले मरीज की मेडिकल हिस्ट्री पर जरूर ध्यान दिया जाता है, इससे किसी भी दुष्प्रभाव और एलर्जी के जोखिम को कम करने में मदद मिलती है।

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हाइड्रोसील एक सामान्य स्थिति (खासकर नवजात शिशुओं में) है। वयस्कों में हाइड्रोसील की समस्या चोट, संक्रमण या अंडकोष की सूजन की वजह से विकसित हो सकती है। हालांकि, हाइड्रोसील में आमतौर पर दर्द नहीं होता है, लेकिन यह परेशानी का कारण बन सकता है। यदि अंडकोष की थैली में सूजन है, तो ऐसे में कारणों का पता लगाने के लिए तत्काल उपचार की आवश्यकता होती है। परंपरागत रूप से, हाइड्रोसील का इलाज सर्जरी के माध्यम से किया जाता है, लेकिन उपचार के विकल्प के रूप में होम्योपैथी की भी मदद ली जा सकती है। यह उपचार सुरक्षित और प्रभावी माने जाते हैं। यह न केवल स्थिति से जुड़ी सूजन और परेशानी को कम करता है, बल्कि दोबारा होने के जोखिम को भी खत्म करता है। चूंकि ये उपाय प्राकृतिक पदार्थों से बने होते हैं, इसलिए डॉक्टर के मार्गदर्शन में लेने पर इन्हें सुरक्षित माना जाता है। हालांकि, हाइड्रोसील के उपचार में होम्योपैथिक दवाओं की प्रभावशीलता को साबित करने के लिए बहुत सबूत नहीं हैं।

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संदर्भ

  1. National Centre of Homeopathy. Berberis vulgaris. Mount Laural NI; [Internet]
  2. William Boericke. Homoeopathic Materia Medica. Kessinger Publishing: Médi-T 1999, Volume 1
  3. Urology Care Foundation. What are Hydroceles and Inguinal Hernias. USA; [internet]
  4. Cleveland Clinic. [Internet]. Cleveland, Ohio. https://my.clevelandclinic.org/health/diseases/16294-hydrocele-in-adults/diagnosis-and-tests
  5. Nilanjana Basu. A case of HYDROCELE. January 2017; ISSN 0974-9799
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