myUpchar प्लस+ के साथ पूरेे परिवार के हेल्थ खर्च पर भारी बचत

पेट, पाचन तंत्र का महत्‍वपूर्ण हिस्‍सा होता है। ये खाने को पोषक तत्वों में परिवर्तित करता है जिससे शरीर के विकास और स्वस्थ होने ले लिए एनर्जी मिलती है। पेट में गैस बनना जठरांत्र विकारों में सबसे सामान्य समस्याओं में से एक है।

इसकी वजह से पेट फूलने लगता है और पेट का आकार भी बढ़ जाता है। पेट में जीवाणुओं के जमने (खमीरीकरण) या अतिरिक्‍त हवा निगलने के कारण ऐसा होता है।

आंतों में सूजन या रुकावट, बैक्‍टीरिया के अधिक विकास, गुर्दे की पथरी के कारण पेट में गैस की समस्‍या हो सकती है। हालांकि, अधिकतर मामलों में पेट में गैस होने के कारण का पता नहीं चल पाता है। पेट में गैस के सामान्‍य लक्षणों में गुदा से वायु छोड़ना (फर्टिंग), डकार, पेट में सूजन और दर्द शामिल है।

(और पढ़ें - पथरी का आयुर्वेदिक इलाज)

आयुर्वेद में पेट की गैस के इलाज के लिए विभिन्‍न वायुनाशी और पाचक जड़ी बूटियों का इस्‍तेमाल किया जाता है। इन जड़ी बूटियों में हिंगु (हींग), अदरक, रसोनम (लहसुन), जीरक (जीरा), जातिफल (जायफल) शामिल है।

हर्बल मिश्रण जैसे कि देवदार व्‍यादि वटी, हिंग्वाष्टक चूर्ण और त्रिफला का इस्‍तेमाल पाचन में सुधार और पेट फूलने की समस्‍या से राहत पाने के लिए किया जाता है। आयुर्वेद में पेट की गैस के इलाज के लिए कुछ विशेष उपचारों जैसे कि सेक (सिकाई) और लेप (शरीर के प्रभावित हिस्‍से पर औषधि लगाना) के साथ पाचक पदार्थों एवं औषधि का सेवन करने की सलाह दी जाती है।

  1. पेट में गैस की आयुर्वेदिक ट्रीटमेंट से जुड़े अन्य सुझाव - Pet me gas ke ayurvedic ilaj se jude anya sujhav
  2. आयुर्वेद के दृष्टिकोण से पेट में गैस - Ayurveda ke anusar pet me gas
  3. पेट में गैस बनने का आयुर्वेदिक इलाज - Pet me gas banane ka ayurvedic ilaj
  4. पेट में गैस की आयुर्वेदिक दवा, जड़ी बूटी और औषधि - Pet me gas ki ayurvedic dawa aur aushadhi
  5. आयुर्वेद के अनुसार पेट में गैस होने पर क्या करें और क्या न करें - Ayurved ke anusar stomach gas me kya kare kya na kare
  6. पेट में गैस के लिए आयुर्वेदिक दवा कितनी लाभदायक है - Pet me gas ka ayurvedic upchar kitna labhkari hai
  7. पेट में गैस की आयुर्वेदिक औषधि के नुकसान - Stomach gas ki ayurvedic dawa ke side effects
  8. पेट में गैस की आयुर्वेदिक दवा और इलाज के डॉक्टर

पेट में गैस बनना एक सामान्‍य जठरांत्र समस्‍या है जो किसी भी उम्र में व्‍यक्‍ति को प्रभावित कर सकती है। पेट का आकार बढ़ने और पेट फूलने का संबंध पेट में गैस बनने से होता है एवं इसकी वजह से व्‍यक्‍ति को बहुत असहज महसूस होता है।

आयुर्वेद में पेट में गैस को वात विकार माना गया है। पेट में गैस के लिए आयुर्वेदिक उपचार में व्रत, शुद्धिकरण और पाचन में सुधार के नियम पर कार्य किया जाता है। पाचन प्रणाली को ठीक करने और पेट में गैस के कारण हुई असहजता से राहत दिलाने में वायुनाशक और पाचक जड़ी बूटियां असरकारी होती हैं।

(और पढ़ें - पेट फूलने पर क्या करना चाहिए)

पेट में गैस बनने पर पेट भरे होने, पेट फूलने और गैस के चलने जैसा महसूस होता है। ये जठरांत्र विकारों के सबसे सामान्‍य लक्षणों में से एक है और इसकी वजह से व्‍यक्‍ति को अत्‍यधिक असहजता महसूस होती है।

आयुर्वेद में पेट की गैस को अधमन, अफार या अफरा कहा गया है एवं इसका संबंध वात दोष से होता है। आयुर्वेदिक उपचार के अनुसार अपच, ज्‍यादा खाने या व्रत रखने के कारण पेट में गैस बनती है। इसके अलावा कब्‍ज, कोलाइटिस, आंत्र रुकावट और अमीबियासिस जैसे रोगों के लक्षण के तौर पर भी पेट में गैस हो सकती है।

पेट फूलने की समस्‍या कुछ मिनट या पूरे दिन के लिए भी हो सकती है। इसमें कभी-कभी पेट में हल्‍का दर्द उठता है तो कभी बहुत तेज दर्द महसूस होता है। इसकी वजह से पेट में ऐंठन भी हो सकती है। हाइड्रोजन, सल्‍फर और कार्बन डाइऑक्‍साइड की वजह से पाद में बदबू आती है।

आयुर्वेद में पेट की गैस के इलाज और बचाव के लिए पाचन मार्ग को साफ और पेट में स्‍वस्‍थ गट फ्लोरा (पाचन तंत्र में मौजूद गुड और बैड बैक्‍टीरिया) का निर्माण किया जाता है। पेट में गैस के इलाज के लिए एंजाइम से बने सप्‍लीमेंट, व्रत और विशिष्‍ट आयुर्वेदिक उपचार लेने की सलाह दी जाती है। वायुनाशी और पाचक जड़ी बूटियों से बने हर्बल मिश्रण भी पेट में गैस की समस्‍या से राहत दिलाले में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। 

(और पढ़ें - पाचन तंत्र के रोग)

  • पाचन
    • पाचन कर्म द्वारा कोशिकाओं और जठरांत्र दोनों ही स्‍तर पर पाचन शक्‍ति में सुधार किया जाता है। (और पढ़ें - पाचन शक्ति बढ़ाने के उपाय)
    • पाचन को बढ़ावा देने वाले पदार्थ और पाचन को उत्तेजित करने वाले रस को क्लैरिफाइड मक्‍खन (वसायुक्त मक्खन से दूध के ठोस पदार्थ और पानी को निकालने के लिए दूध के वसा को हटाना) के साथ इस्‍तेमाल कर पाचन प्रक्रिया में सुधार लाया जाता है।
    • आमतौर पर हिंगवाष्‍टक चूर्ण का इस्‍तेमाल पाचन यौगिक के रूप में किया जाता है जो पाचन एंजाइम्‍स को उत्तेजित किए बिना न पचने वाले भोजन को साफ करता है।
       
  • सेक
    • ये एक प्रकार का स्‍वेदन (पसीना निकालने की विधि) है जिसमें व्यक्ति को विषाक्‍त पदार्थों को बाहर निकालने और अकड़न, भारीपन और ठंडक से राहत दिलाने के लिए शरीर से पसीना निकाला जाता है।
    • वात दोष के असंतुलन के कारण हुए रोगों के इलाज में शुद्धिकरण की इस चिकित्‍सा की सलाह दी जाती है।
    • इस प्रक्रिया में वात दोष के उपचार के लिए गर्म कपड़े, धातु की वस्‍तु या गर्म हाथों से शरीर की सिकाई की जाती है। (और पढ़ें - वात पित्त कफ के लक्षण)
    • पेट पर तारपीन की पुल्टिस रखी जाती है। ये पेट में गैस के इलाज में विशेष तौर पर लाभकारी होती है।
       
  • लेप
    • इस प्रक्रिया में शरीर के प्रभावित हिस्‍से पर हर्बल पेस्‍ट लगाया जाता है।
    • ये पेस्‍ट वात दोष को कम करने में लाभकारी होता है और अत्‍यधिक वात या इसके असंतुलन के कारण हो रहे दर्द से राहत दिलाता है।
    • दारुशतक लेप को पेट पर लगाया जाता है। इस लेप को पाचन तंत्र के कार्य में सुधार के लिए जाना जाता है। इस तरह लेप द्वारा पेट में गैस के इलाज में मदद मिलती है। 

(और पढ़ें - पेट में इन्फेक्शन होने पर क्या करें)

पेट में गैस के लिए जड़ी बूटियां

  • हिंगु
    • हिंगु गर्म और तीखे स्‍वाद वाली जड़ी बूटी है जिसमें कृमिनाशक, ऐंठन और गैस को दूर करने वाले गुण मौजूद हैं।
    • इसका प्रयोग प्रमुख तौर पर वात दोष के इलाज में किया जाता है। हिंगु पेट फूलने, ऐंठन, गैस और दर्द जैसे लक्षणों से राहत दिलाने के लिए जानी जाती है।
    • इसमें मांसपेशियों को आराम देने की शक्‍ति होती है एवं यह नरम मांसपेशियों पर प्रभावी होती है।
    • इसके अलावा ये पेट गैस से संबंधित पेट के फूलने और जकड़न को कम करने का भी काम करती है। (और पढ़ें - पेट खराब होने पर क्या खाएं)
       
  • अदरक
    • ये जड़ी बूटी जठारांत्र मार्ग की मांसपेशियों के कार्य में सुधार कर पाचन को बेहतर करती है।
    • जीवाणु रोधी, फंगल रोधी और पेट फूलने की समस्‍या को रोकने के गुणों से युक्‍त अदरक का इस्‍तेमाल पेट की गैस से जुड़ी समस्‍याओं के उपचार में किया जाता है।
    • अदरक के सक्रिय घटक अम्‍लीय गतिशीलता (एसिड के प्रवाह) को बढ़ाते हैं और पाचन एवं अवशोषण को उत्तेजित करते हैं। इसके अलावा ये कब्‍ज और पेट फूलने की समस्‍या से भी राहत दिलाते हैं। (और पढ़ें - कब्ज का आयुर्वेदिक इलाज)
       
  • रसोनम
    • आयुर्वेद में कई रोगों के इलाज के लिए अधिकतर लहसुन के तेल और गांठ का इस्‍तेमाल किया जाता है।
    • ये ऊर्जादायक, वायुनाशक, पाचक, परजीवीरोधी, कृमिनाशक और ऐंठन को दूर करने वाले घटक के रूप में कार्य करता है।
    • जूस, अर्क, पाउडर या औषधीय तेल के रूप में रसोनम का प्रयोग कर सकते हैं।
    • इसमें पाचन मार्ग में एसीटेट और मीथेन गैस के उत्‍पादन को रोकने की क्षमता है जिससे पेट में गैस का इलाज करने में मदद मिलती है।
       
  • जातिफल
    • मसालों के परिवार से संबंधित जातिफल को बेहतरीन शामक (दर्द निवारक) के रूप में जाना जाता है।
    • ये उत्तेजक, वायुनाशक और संकुचक (शरीर के ऊतकों में संकुचन) के रूप में कार्य करता है।
    • जायफल के बीज के अर्क को जीवाणुरोधी प्रभाव के लिए जाना जाता है जोकि पेट में गैस पैदा करने वाले कई रोगों के इलाज में उपयोगी है।
    • जातिफल पेट में गैस के सामान्‍य लक्षणों जैसे कि पेट में दर्द और पेट के फूलने से राहत दिलाने में मदद करता है।
       
  • जीरक
    • जीरक में दीपक (भूख बढ़ाने वाले) और पाचन गुण मौजूद होते हैं। (और पढ़ें - भूख बढ़ाने के घरेलू उपाय)
    • वायुनाशक, ऐंठन दूर करने और उत्तेजक कार्य के कारण जीरक पेट में गैस के इलाज में उपयोगी है। 
    • जीरक का इस्‍तेमाल कई पाचन विकारों जैसे कि कोलाइटिस, पेट फूलने और दर्द से आराम पाने के लिए किया जाता है।
       

पेट में गैस के लिए आयुर्वेदिक औषधियां

  • देवदारव्‍यादि वटी
    • देवदारव्‍यादि वटी को देवदार पेड़ की जड़ और छाल के तेल से तैयार किया गया है।
    • ये औषधि गोली के रूप में उपलब्‍ध है और इसे आसानी से इस्‍तेमाल कर सकते हैं।
    • इसे असंतुलित हुए वात और कफ दोष को शांत करने के लिए जाना जाता है। ये जठरांत्र विकारों का उत्तम उपचार है।
    • ये मिश्रण पेट में गैस, कब्‍ज और कृमि (कीड़े) संक्रमण के इलाज में लाभकारी है। (और पढ़ें - पेट में कीड़े होने के लक्षण)
       
  • हिंगवाष्‍टक चूर्ण
    • हिंगवाष्‍टक चूर्ण को शुंथि (सोंठ), मारीच (काली मिर्च), पिप्‍पली, अजमोद, सैंधव लवण (सेंधा नमक), जीरक और हिंगु से तैयार किया गया है।
    • शुंथि में पाचन क्रिया को उत्तेजित करने के गुण होते हैं इसलिए ये पेट में गैस बनने से रोकने में प्रभावी है। इस मिश्रण में पाचन और दीपक गुण मौजूद होते हैं जो पाचन प्रणाली से अमा (विषाक्‍त पदार्थ) को बाहर निकालने में मदद करते हैं। इस तरह हिंगवाष्‍टक चूर्ण से वात दोष से संबंधित पेट में गैस का इलाज किया जाता है।
    • ये अग्निमांद्य (पाचन अग्‍नि को कम करना), पेट में दर्द और पेट के फूलने की दिक्‍कत से राहत दिलाता है। 
       
  • त्रिफला
    • त्रिफला तीन जड़ी बूटियों आमलकी (आंवला), विभीतकी और हरीतकी (हरड़) का मिश्रण है।
    • ये मिश्रण रेचक (मल क्रिया को नियंत्रित करने वाले), ऊर्जादायक और विषाक्‍त पदार्थों को बाहर निकालने का काम करता है इसलिए कई रोगों के इलाज में प्रथम उपचार के रूप में इस औषधि का उपयोग किया जाता है।
    • पेट में गैस के इलाज के लिए दिन में दो बार त्रिफला और त्रिकटु (तीन कषाय का मिश्रण – पिप्‍पली, शुंथि और मारीच) का काढ़ा ले सकते हैं। 

(और पढ़ें - पेट की गैस से राहत पाने के लिए जूस रेसिपी)

क्‍या करें

  • हल्‍का भोजन लें और अपने आहार में मुद्गा (मूंग दाल), पुराने शालि चावल और रसोनम को शामिल करें।
  • करावेल्‍लका (‍करेला) और शिग्रु (सहजन) जैसी सब्जियां पेट में गैस से राहत दिलाने में फायदेमंद होती हैं।
  • पेट में गैस के लक्षणों में सुधार के लिए पटोला (तोरई) के फल और पत्तियों के साथ-साथ बथुआ की पत्तियां लाभकारी रहती हैं।
  • सही मुद्रा में बैठें। (और पढ़ें - ज्यादा देर बैठने के नुकसान)

क्‍या न करें

  • तिल के बीज, शिम्बी धान्‍य (‍फलियां) और तीखा, कषाय (कसैला), रुक्ष (सूखा) और गुरु (भारी) गुण रखने वाले खाद्य पदार्थों से पेट में गैस की समस्‍या बढ़ सकती है इसलिए इन चीज़ों से दूर रहें।
  • दूध के साथ मछली जैसे खाद्य पदार्थों को एकसाथ खाने से बचें।
  • अत्‍यधिक सेक्‍स न करें। (और पढ़ें - सेक्स कब और कितनी बार करना चाहिए)
  • प्राकृतिक इच्‍छाओं (मल त्‍याग और पेशाब रोकना) और भावनाओं (दुख और गुस्‍सा) को दबाएं नहीं वरना इसकी वजह से पेट में गैस के लक्षण और ज्यादा खराब हो सकते हैं। 

आंत्र सूजन (आंतों में सूजन) के कारण हुई गैस के इलाज में देवदारव्‍यादि वटी के प्रभाव की जांच के लिए एक अध्‍ययन किया गया था। इस अध्‍ययन में शामिल 22 प्रतिभागियों को चार सप्‍ताह तक देवदारव्‍यादि वटी दी गई और हर सात दिन में इनकी स्थिति की समीक्षा की जाती थी। अधिकतर प्रतिभागियों में पेट फूलने, पेट दर्द और गैस की समस्‍या में सुधार देखा गया।

74 प्रतिभागियों पर हुए एक अन्‍य अध्‍ययन में पेट में गैस के इलाज में यवन कादि वटी के फायदों के बारे में जानकारी मिली। प्रतिभागियों को दो समूह में बांटा गया था, इसमें से एक समूह को 1 महीने तक दिन में दो बार 1 ग्राम यवन कादि वटी दी गई। वहीं दूसरे समूह को 1 महीने तक दिन में दो बार 1 ग्राम शंख वटी दी गई। स्‍टडी की रिपोर्ट के अनुसार दोनों समूहों के प्रतिभागियों में पेट में गैस के लक्षणों में महत्‍वपूर्ण सुधार पाया गया। हालांकि, यवन कादि वटी को शंख वटी से अधिक प्रभावी और लाभकारी पाया गया।

पेट से संबंधित समस्‍याओं के इलाज में त्रिफला के पारंपरिक उपयोग की पुष्टि के लिए भारत में एक अन्‍य अध्‍ययन किया गया था। त्रिफला को लैब में तैयार किया गया और इसे पेट में गैस की समस्‍या से ग्रस्‍त 160 लोगों को कुल 45 दिनों तक दिया गया। स्‍टडी की रिपोर्ट के अनुसार त्रिफला उत्तम रेचक (जुलाब) है। ये एसिडिटी को कम और पाचन क्रिया में सुधार लाता है। इससे डकार, पेट में गैस और पेट फूलने से राहत मिलती है।

(और पढ़ें - पेट गैस के लिए योग)

वैसे तो आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों और चिकित्‍सा प्रक्रियाओं का कोई विशेष हानिकारक प्रभाव नहीं होता है लेकिन फिर भी आयुर्वेदिक चिकित्‍सक से परामर्श के बाद ही इनका इस्‍तेमाल करने की सलाह दी जाती है। चिकित्‍सक आपकी प्रकृति और दोष के साथ रोग के लक्षणों के बारे में जानने के बाद आवश्‍यक सावधानियों के साथ उचित उपचार देंगे।

व्‍यक्‍ति पर किसी विशेष औषधि के प्रयोग से पहले निम्‍न सावधानियां बरतनी चाहिए:

  • हृदय रोग और हाइपरटेंशन के मरीज़ों को सेक चिकित्‍सा नहीं लेनी चाहिए। कमजोर और दुर्बल व्‍यक्‍ति को भी इस चिकित्‍सा को लेने से बचना चाहिए। (और पढ़ें - कमजोरी कैसे दूर करें)
  • पित्त दोष वाले व्‍यक्‍ति को हिंगु लेने की सलाह नहीं दी जाती है क्‍योंकि इसे पित्त बढ़ाने के लिए जाना जाता है। योग या ध्‍यान कर रहे लोगों को भी इसका सेवन करने से बचना चाहिए।
  • हाइपरएसिडिटी, अत्‍यधिक पित्त और मानसिक रूप से कमजोर व्‍यक्‍ति को रसोनम का प्रयोग सावधानीपूर्वक करना चाहिए। (और पढ़ें - याददाश्त बढ़ाने के तरीके)
Dr. Ajai Singh Chauhan

Dr. Ajai Singh Chauhan

आयुर्वेदा

Dr. Jyoti Kumbar

Dr. Jyoti Kumbar

आयुर्वेदा

Dr. Bibin M. V.

Dr. Bibin M. V.

आयुर्वेदा

और पढ़ें ...

References

  1. National Institute of Diabetes and Digestive and Kidney Diseases [internet]: US Department of Health and Human Services; Digestive Diseases
  2. Bagher Larijani. Prevention and Treatment of Flatulence From a Traditional Persian Medicine Perspective. Iran Red Crescent Med J. 2016 Apr; 18(4): e23664, PMID: 27275398.
  3. Waheed A, Sizar O. Meteorism (Tympanites). [Updated 2019 Mar 3]. In: StatPearls [Internet]. Treasure Island (FL): StatPearls Publishing; 2019 Jan-.
  4. Pallavi Kiradi. Flatulence Facts & Phytonutrient Cliches- A bird Eye view. DOI: 10.13140.
  5. National Institute of Indian Medical Heritage (NIIMH). Ādhmāna. Central Council for Research in Ayurvedic Sciences (CCRAS); Ministry of AYUSH, Government of India.
  6. Ministry of AYUSH, Govt. of India. Ayush Research Portal. [Internet]
  7. Nishant Singh. Panchakarma: Cleaning and Rejuvenation Therapy for Curing the Diseases . Journal of Pharmacognosy and Phytochemistry, Vol. 1 No. 2 2012.
  8. Hossain M.Mofazzal. On the determination of important plants for ayurvedic formulas in Bangladesh using unsupervised machine learning approach. Academia Journal of Medicinal Plants 7(2): 036-041, February 2019.
  9. Maleka Raisbhai Vhora. Management of Grahani Dosha in Children with Devadarvyadi Vati. Journal Of Research In Traditional Medicine, 2017; 3(3): 85-90.
  10. Pulok K Mukherjee. Clinical Study of 'Triphala' - A Well Known Phytomedicine from India. International Ayurvedic Medical Journal, 2006.