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डीप ब्रेन स्टिमुलेशन एक सर्जरी प्रोसीजर है, जिसमें मस्तिष्क के कुछ हिस्सों में इलेक्ट्रोड लगा दिए जाते हैं। इस सर्जरी प्रोसीजर की मदद से मस्तिष्क में हो रही असामान्य विद्युत गतिविधियों को रोका जाता है, जो न्यूरोलॉजिकल विकारों का कारण बनती हैं जैसे पार्किसन्स रोग आदि। डीप ब्रेन स्टिमुलेशन सर्जरी प्रोसीजर को डीबीएस भी कहा जाता है। डीबीएस सिस्टम कई अलग-अलग हिस्सों में बना होता है, जिनमें एक धातु की तार की मदद से इलेक्ट्रोड से पल्स जनरेटर को जोड़ा जाता है। इलेक्ट्रोड को मस्तिष्क पर और पावर जनरेटर को कॉलरबोन के नीचे छाती की चमड़ी में लगा दिया जाता है।

डीबीएस सर्जरी को दो अलग-अलग स्टेजों में किया जाता है पहली स्टेज में इलेक्ट्रोड को लगाया जाता है और दूसरी स्टेज में पल्स जनरेटर को लगाया जाता है। सर्जरी की ये दोनों स्टेज या तो एक ही दिन या फिर तीन से छह हफ्तों के बाद की जाती है। इस सर्जरी से समस्या का जड़ से इलाज नहीं होता है, लेकिन इसकी मदद से दवाओं पर निर्भरता कम हो जाती है।

सर्जरी के बाद भी आपको कई बार अस्पताल में बुलाया जाता है, जिसमें पल्स जनरेटर की प्रोग्रामिंग की जाती है।

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  1. डीप ब्रेन स्टिमुलेशन क्या है - What is Deep Brain Stimulation in Hindi
  2. डीप ब्रेन स्टिमुलेशन किसलिए की जाती है - Why is Deep Brain Stimulation done in Hindi
  3. डीप ब्रेन स्टिमुलेशन से पहले - Before Deep Brain Stimulation in Hindi
  4. डीप ब्रेन स्टिमुलेशन के दौरान - During Deep Brain Stimulation in Hindi
  5. डीप ब्रेन स्टिमुलेशन के बाद - After Deep Brain Stimulation in Hindi
  6. डीप ब्रेन स्टिमुलेशन की जटिलताएं - Complications of Deep Brain Stimulation in Hindi

डीप ब्रेन स्टिमुलेशन सर्जरी क्या है?

डीबीएस प्रोसीजर एक न्यूरोसर्जरी है, जिसमें आपके मस्तिष्क के कुछ हिस्सों में इलेक्ट्रोड को लगाया जाता है जो मस्तिष्क की विद्युत गतिविधियों में कुछ बदलाव करते हैं। यह सर्जरी आमतौर पर न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर से ग्रस्त लोगों के लिए की जाती है।

जब मस्तिष्क के किसी हिस्से में असाधारण रूप से विद्युत गतिविधियां बढ़ जाती हैं, तो कुछ प्रकार के मूवमेंट डिसऑर्डर हो जाते हैं जैसे टूरेट सिंड्रोम या पार्किंसंस रोग। ये विकार शरीर के हिलने-ढुलने की गतिविधियों को असाधारण रूप से कम या ज्यादा कर देते हैं, जिससे मांसपेशियों में अकड़न, कंपन और एक ही गतिविधि को बार-बार करने जैसे लक्षण होने लगते हैं। ये सभी समस्याएं बच्चे में या तो जन्म से ही होती है या फिर किसी अन्य समस्या के कारण होती है जैसे मस्तिष्क में संक्रमण, मस्तिष्क में चोट लगना, स्व प्रतिरक्षित रोग या कोई विशेष दवा।

मूवमेंट डिसऑर्डर की तरह ही कुछ अन्य न्यूरोलॉजिकल रोग भी मस्तिष्क में असामान्य विद्युत गतिविधियां होने के कारण विकसित होती हैं।

ऐसी स्थितियों में डीप ब्रेन स्टिमुलेशन को मस्तिष्क में लगाया जाता है, जिससे इन असामान्य विद्युत गतिविधियां को रोका जाता है और परिणामस्वरूप लक्षण नियंत्रित हो जाते हैं।

डीबीएस सिस्टम कई हिस्सों में मिलकर बना है, जिसमें निम्न शामिल है -

  • लीड्स -
    एक इंसुलेटेड तार जिसके सिरे पर इलेक्ट्रोड लगा होता है, उसको मस्तिष्क के उन हिस्सों में लगाया जाता है जिनमें विद्युत की असामान्य गतिविधियां हो रही हों।

  • एंकर -
    यह खोपड़ी पर लीड्स को स्थिर बनाता है।
     
  • इंप्लांटेबल लीड्स जनरेटर -
    एक पेसमेकर जैसा दिखने वाला उपकरण जिसे छाती की त्वचा के नीचे (कॉलरबोन के पास) लगाया जाता है।
     
  • एक्सटेंशन लीड्स -
    यह पतली इंसुलेटेड तारें होती हैं, जो उपकरणों को लीड्स से जोड़ने का काम करती हैं।
     
  • हैंड हैल्ड प्रोग्रामर डिवाइस -
    यह एक विशेष उपकरण होता है, जो मेन स्विच को चालू/बंद करने और पल्स जनरेटर द्वारा इलेक्ट्रिक सिग्नल को एडजस्ट करने का काम करता है।

इसे चालू करने पर पल्स जनरेटर लगातार इलेक्ट्रोड्स में इलेक्ट्रिक सिग्नल भेजता रहता है, जिससे मस्तिष्क के प्रभावित हिस्सों में हो रही असामान्य गतिविधियों में कुछ बदलाव किए जाते हैं। इन बदलावों से असामान्य गतिविधियों के कारण हो रहे लक्षण रुक जाते हैं।

डीबीएस से किसी स्थिति का जड़ के इलाज नहीं किया जाता है, इस सर्जरी के बाद दवाएं पहले की तुलना में अच्छे से काम कर पाती हैं और दवाएं अपेक्षाकृत कम लेनी पड़ती हैं।

(और पढ़ें - सिर की चोट के लक्षण)

डीप ब्रेन स्टिमुलेशन क्यों की जाती है?

डीबीएस सर्जरी को आमतौर पर निम्न स्थितियों से ग्रस्त लोगों के लिए किया जाता है -

  • पार्किंसंस रोग
    जिसके लक्षण कुछ इस प्रकार हैं -
  • डिस्टोनिया -
    जो लोग डिस्टोनिया से ग्रस्त हैं उनमें निम्न लक्षण देखे जा सकते हैं -
  • एसेंशियल ट्रेमोर -
    इससे ग्रस्त व्यक्ति में निम्न लक्षण हो सकते हैं -
    • सिर हिलना
    • आवाज में कंपन होना
    • आराम करने के बाद कंपन कम होना
    • एक निश्चित समय के लिए शरीर में अत्यधिक कंपन
       
  • ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर -
    ओसीडी से निम्न लक्षण हो सकते हैं -
    • रोगाणुओं या धूल आदि से दूषित या गंदा होने का डर
    • चीजों को ठीक से रखे बिना चैन न पड़ना (जैसे एक रेखा या श्रृंखला में रखना)
    • गलती करने से डरना
    • अनुचित विचार आना
    • किसी भी कार्य या गतिविधि को बार-बार करने की आवश्यकता पड़ना
       
  • एपिलेप्सी -
    इसमें लक्षण मिर्गी के प्रकार के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं -
    • सिर व अंगों को एक ही दिशा में बार-बार या झटके के साथ हिलाना
    • पलकें तीव्रता से हिलाना (फड़फड़ाना)
    • होश गुम होना
    • पूरे शरीर में अकड़न महसूस होना
    • होठों कों एक-दूसरे से दबाना

यदि किसी व्यक्ति को उपरोक्त में से कोई भी समस्या है और दवाओं से स्थिति का इलाज नहीं हो पा रहा है, तो डॉक्टर यह सर्जरी करवाने की सलाह दे सकते हैं। कुछ अन्य स्थितियां भी हैं, जिनका इलाज करने के लिए डीप ब्रेन स्टिमुलेशन सर्जरी करनी पड़ सकती है, जैसे टूरेट सिंड्रोम, लंबे समय से दर्द या गंभीर डिप्रेशन रहना।

डीप ब्रेन स्टिमुलेशन सर्जरी किसे नहीं करवानी चाहिए?

कुछ स्थितियां हैं जिनमें या तो यह सर्जरी नहीं की जाती है और यदि करनी जरूरी है तो विशेष ध्यान रखते हुए इसे किया जाता है -

  • डिमेंशिया
  • डोमिनेंट लिवोडोपा-रेसिसटैंट मोटर के लक्षण जैसे शारीरिक मुद्रा ठीक न रहना, चाल बीच में अटकना या निगलने में कठिनाई होना
  • वर्तमान में कोई गंभीर साइकियाट्रिक डिसऑर्डर होना
  • एमआरआई में कोई असामान्यता दिखाई देना

(और पढ़ें - डिमेंशिया की होम्योपैथिक दवा)

डीप ब्रेन स्टिमुलेशन सर्जरी से पहले क्या तैयारी की जाती है?

सर्जरी से पहले डॉक्टर आपको अस्पताल बुलाते हैं, जहां पर आपका शारीरिक परीक्षण किया जाता है और साथ ही कुछ टेस्ट व इमेजिंग स्कैन किए जाते हैं। इन सभी परीक्षणों से यह सुनिश्चित किया जाता है कि आपको सर्जरी से कोई फायदा मिल सकता है या नहीं। इन टेस्टों में निम्न शामिल हैं -

  • ब्लड टेस्ट
  • कुछ गतिविधियां करते हुए वीडियो रिकॉर्ड करना और फिर वीडियो देखकर जांच करना
  • न्यूरोसाइकोलॉजिकल असेसमेंट जिससे मूड, याददाश्त और सोचने की शक्ति की जांच की जाती है
  • मस्तिष्क का एमआरआई स्कैन

इसके अलावा सर्जरी की तैयारी के रूप में आपको कुछ विशेष सलाह दी जाती हैं, जिनमें निम्न शामिल हैं -

  • यदि आप किसी भी प्रकार की कोई दवा, विटामिन, मिनरल या अन्य कोई सप्लीमेंट ले रहे हैं, तो डॉक्टर को बता दें। इनमें से डॉक्टर कुछ दवाओं को न लेने की सलाह दे सकते हैं, जिनमें मुख्य रूप से रक्त पतला करने वाली दवाएं शामिल होती हैं, जैसे वारफेरिन, एस्पिरिन और आइबुप्रोफेन आदि।
  • सर्जरी के लिए आपको खाली पेट अस्पताल जाने को कहा जाता है, जिसके लिए आपको सर्जरी वाले दिन से पहली आधी रात के बाद कुछ भी खाने या पीने से मना किया जाता है।
  • ऑपरेशन के लिए अस्पताल जाते समय अपने साथ किसी करीबी रिश्तेदार या मित्र को ले जाएं, ताकि सर्जरी से पहले और बाद के कार्यों में आपको मदद मिल सके।
  • यदि आप धूम्रपान या शराब का सेवन करते हैं, तो आपको सर्जरी से कुछ दिन पहले और बाद तक इन्हें छोड़ने की सलाह दी जाती है। ऐसा इसलिए क्योंकि सिगरेट या शराब के सेवन से सर्जरी के बाद कई जटिलताएं होने का खतरा बढ़ जाता है और घाव भरने की प्रक्रिया भी धीमी पड़ जाती है। (और पढ़ें - शराब की लत के लक्षण)
  • अंत में आपको एक सहमति पत्र दिया जाता है, जिसपर हस्ताक्षर करके आप सर्जन को सर्जरी करने की अनुमति दे सकते हैं। हालांकि, सहमति पत्र पर हस्ताक्षर करने से पहले उसे एक बार अच्छे से पढ़ व समझ लेना चाहिए।

(और पढ़ें - धूम्रपान छोड़ने के घरेलू उपाय)

डीप ब्रेन स्टिमुलेशन सर्जरी कैसे की जाती है?

डीबीएस को पूरी तरह से लगाने के लिए इस सर्जरी प्रोसीजर को दो अलग-अलग स्टेजों में किया जाता है। इन स्टेजों को या तो एक ही दिन किया जाता है या फिर तीन से छह हफ्तों का अंतराल दिया जाता है। ऑपरेशन के लिए जब आप अस्पताल में भर्ती हो जाते हैं, तो आपको एक विशेष ड्रेस पहनने को दी जाती है जिसे “हॉस्पिटल गाउन” कहा जाता है। आपको विशेष स्टॉकिंग्स भी दी जाती हैं, जो रक्त के थक्के जमने से बचाती हैं।

डीप ब्रेन स्टिमुलेशन की पहले स्टेज की सर्जरी प्रोसीजर कुछ इस प्रकार है -

  • सबसे पहले खोपड़ी के चार अलग-अलग हिस्सों में लोकल एनेस्थीसिया का इंजेक्शन लगाया जाता है, जिससे वह हिस्सा पूरी तरह से सुन्न हो जाता है। इंजेक्शन लगने के बाद सिर पर स्टीरियोटैक्टिक फ्रेम लगाकर पेच लगा दिए जाते हैं, जो सर्जरी के दौरान सिर को स्थिर रखते हैं।
  • इसके बाद आपको सीडेटिव दवाएं दी जाती है, जिससे आप सर्जरी के दौरान रिलैक्स रहते हैं।
  • जब दवाएं असर शुरू कर देती हैं, तो आपका एमआरआई स्कैन किया जाता है और उसके बाद आपको ऑपरेशन थिएटर में भेज दिया जाता है।
  • खोपड़ी के जिस हिस्से में सर्जरी करनी है, वहां के बालों को शेव करके हटा दिया जाता है।
  • इसके बाद शेव वाले हिस्से में फिर से लोकल एनेस्थीसिया का इंजेक्शन लगाया जाता है और फिर खोपड़ी के एक हिस्से में एक छोटा सा छिद्र बना लिया जाता है।
  • इसके बाद सिर के कुछ विशेष हिस्सों की पहचान की जाती है, जहां पर इलेक्ट्रोड चिपकाए जाते हैं। इलेक्ट्रोड लगाकर इलेक्ट्रिकल इंपल्स पास किए जाते हैं और आपसे किसी अंग को हिलाने को कहा जाता है या फिर पूछा जाता है कि आपको क्या महसूस हो रहा है। इसकी मदद से डॉक्टर मस्तिष्क के प्रभावित हिस्से को ढूंढ लेते हैं।
  • जब सही जगह मिल जाती है, तो फिर एक धातु की छोटी सी प्लेट व पेच की मदद से इलेक्ट्रोड को खोपड़ी पर ही चिपका दिया जाता है।
  • आवश्यकता पड़ने पर सर्जरी के प्रोसीजर को फिर से भी किया जा सकता है।
  • इलेक्ट्रोड लगाने के बाद फिर से मस्तिष्क का स्कैन किया जाता है।
  • जब यह सुनिश्चित हो जाता है कि इलेक्ट्रोड सही जगह पर लगे हैं, तो सर्जन आपके सिर से फ्रेम और पेच को निकाल देते हैं।
  • इसके बाद सिर को एक प्लास्टिक पट्टी के साथ बंद कर दिया जाता है और घाव पर टांके लगा दिए जाते हैं।

इस सर्जरी प्रोसीजर को पूरा करने में दो घंटे का समय लगता है। जब आप उठते हैं, तो आपको आपकी त्वचा से एक या दो तारें निकली हुई दिखती हैं। ये तारें बाहर रखे एक उपकरण से जुड़ी होती हैं, जो मस्तिष्क की उत्तेजना की जांच करता है। यह टेस्टिंग लगभग एक हफ्ते तक की जाती है। यदि सर्जन को लगता है कि डिवाइस द्वारा दी गई स्टिमुलेशन से लक्षण कम होने में सफलता मिली है, तो सर्जरी की स्टेज 2 की जाती है। यदि स्टिमुलेशन से लक्षण कम नहीं हो पाए हैं, तो एक अन्य सर्जिकल प्रोसीजर की मदद से तारों को निकाला जाता है।

इस सर्जरी की स्टेज 2 को पूरा करने में भी कम से कम 2 से 3 घंटे का समय लगता है, जिसका प्रोसीजर कुछ इस प्रकार है -

  • आपको जनरल एनेस्थीसिया का इंजेक्शन लगाया जाता है, जिससे आप गहरी नींद में सो जाते हैं।
  • जहां पर पल्स जनरेटर लगाया गया है, उसके आधार पर त्वचा में चीरा लगाया जाता है। जनरेटर को आपकी कॉलरबोन के नीचे वाली त्वचा में या फिर पेट की त्वचा में लगाया जाता है।
  • सर्जन सिर, गर्दन और कंधे की त्वचा के नीचे एक्सटेंशन लगाते हैं और फिर उसे जनरेटर से जोड़ देते हैं। इनके एक सिरे को तारों के माध्यम से इलेक्ट्रोड से जोड़ दिया जाता है। जब कनेक्शन बन जाता है, तो चीरे को बंद कर दिया जाता है।

सर्जरी की इन दोनों स्टेजों के बाद निम्न क्रियाएं की जाती हैं -

  • सर्जरी के बाद हॉस्पिटल स्टाफ आपको रिकवरी रूम में शिफ्ट कर देते हैं। 
  • आपको इंट्रावेनस कैथेटर लगाया जाता है, जिसकी मदद से आपको दवाएं व आवश्यक द्रव दिए जाते हैं।
  • जब तक आप ठीक से सांस नहीं ले पाते हैं, तब तक आपको ऑक्सीजन मास्क दिया जाता है।
  • आपके शारीरिक संकेतों की लगातार जांच की जाती है, जैसे ब्लड प्रेशर, पल्स रेट और हार्ट रेट आदि।
  • सर्जरी के बाद आपको दर्द रह सकता है, जिसके लिए आपको दर्द निवारक दवाएं दी जाती हैं।
  • सर्जरी वाले घावों में संक्रमण होने का खतरा बढ़ जाता है, जिसके लिए आपको एंटीबायोटिक दवाएं दी जाती हैं।
  • आपको हर दो से तीन घंटों के भीतर बेड पर अपनी पोजीशन बदलने को कहा जाता है, ताकि शरीर के किसी एक हिस्से पर लंबे समय तक दबाव न रहे।
  • यदि आपका स्वास्थ्य स्थिर है, तो हॉस्पिटल स्टाफ आपको थोड़ा-बहुत चलने फिरने की सलाह देते हैं। चलने फिरने से आपके शरीर में रक्त संचरण बढ़ जाता है और घाव जल्दी ठीक होते हैं।
  • सर्जरी की दूसरी स्टेज के बाद आप खुद को बीमार महसूस करते हैं, जैसे उल्टी और मतली होना।
  • आपको सिर में नील पड़ना व सूजन की शिकायत हो सकती है, जो कुछ महीने में ठीक हो जाती है।
  • सर्जरी के बाद आपको कितने समय तक अस्पताल में रहना है, यह व्यक्ति के स्वास्थ्य पर निर्भर करता है।

इलेक्ट्रोड लगाने से लक्षणों को कुछ दिनों तक कंट्रोल करने में मदद मिलती है। इसलिए जब तक लक्षण दोबारा वापस नहीं आते हैं, तब तक जनरेटर को ऑन नहीं किया जाता है।

(और पढ़ें - सूजन कम करने के घरेलू उपाय)

डीप ब्रेन स्टिमुलेशन के बाद क्या देखभाल की जाती है?

जब आपको अस्पताल से छुट्टी मिल जाती है, तो घर पर आपको निम्न देखभाल करने की सलाह दी जाती है -

  • सर्जरी के बाद आपको दी गई दवाएं नियमित रूप से लेते रहें। 
  • जब तक घाव पूरी तरह से न भर जाए, तब तक आपको सिर गीला करने से मना किया जाता है।
  • सर्जरी के बाद कम से कम छह महीने तक ड्राइविंग करने या किसी अन्य मशीन को ऑपरेट करने से मना किया जाता है।
  • किसी भी रडार या हाई वॉल्टेज मशीनरी को न चलाएं और न ही उसके आसपास जाएं जैसे स्मेल्टिंग फर्नेस, इलेक्ट्रिक आर्क वेल्डर या टेलीविजन ट्रांसमीटर आदि।
  • कोई भी ऐसी फीजियोथेरेपी न करें, जिसमें गर्मी पैदा की जाती हो।
  • यदि आपको हवाई यात्रा करनी है, तो एयरपोर्ट पर जांचकर्ताओं को अपने पल्स जनरेटर के बारे में बता दें। वैसे तो एयरपोर्ट के सेंसर पल्स जनरेटर को कोई नुकसान नहीं करते, लेकिन फिर भी आपको जांचकर्ताओं को इस बारे में बता देना चाहिए ताकि वो  मशीन को कम से कम संपर्क में आने दें। जांच करने की मशीन में विशेष चुंबक होते हैं, जो पल्स रिएक्टर की कार्य प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं।
  • यदि भविष्य में आप कोई अन्य सर्जरी करवाते हैं, तो डॉक्टर को पल्स जनरेटर के बारे में अवश्य बताएं।
  • ऐसी कोई भी शारीरिक गतिविधि या खेल-कूद में भाग न लें, जिससे इंपल्स जनरेटर के आसपास का हिस्सा क्षतिग्रस्त होने का खतरा रहे। ऐसा होने पर भी उपकरण की कार्य प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
  • भविष्य में कभी भी एमआरआई स्कैन या अल्ट्रासाउंड करवाने से पहले डॉक्टर को इंपल्स जनरेटर के बारे में बता दें।

डीप ब्रेन स्टिमुलेशन सर्जरी से क्या फायदे हो सकते हैं?

डीबीएस सर्जरी से निम्न फायदे हो सकते हैं -

  • इससे शारीरिक गतिविधियों में सुधार होता है
  • न्यूरोलॉजिकल समस्याओं से संबंधित लक्षणों को कम करने में मदद मिलती है
  • दवाओं की निर्भरता को कम करता है और उससे दवाओं से होने वाले साइड इफेक्ट्स भी कम हो जाते हैं।

डॉक्टर को कब दिखाएं?
यदि आपको डीप ब्रेन स्टिमुलेशन सर्जरी के बाद कुछ समस्याएं हो रही हैं, तो डॉक्टर से इस बारे में बात कर लेनी चाहिए -

(और पढ़ें - खुजली दूर करने के घरेलू उपाय)

डीप ब्रेन स्टिमुलेशन से क्या जटिलताएं हो सकती हैं?

सर्जरी से निम्न जोखिम हो सकते हैं -

  • मस्तिष्क में रक्त का थक्का जमने से स्थायी विकलांगता हो जाना
  • लीड्स से इंफेक्शन हो जाना
  • इंप्लांट से एलर्जी होना
  • चक्कर आना
  • आवाज कमजोर पड़ना
  • शारीरिक संतुलन खराब हो जाना
  • मस्तिष्क से द्रव स्राव होना
  • सर्जरी के बाद कुछ समय तक उलझन महसूस होना
  • शॉक जैसा महसूस होना
  • ध्यान देने में दिक्कत होना
  • शरीर के अंदर मौजूद उपकरण या तार टूट जाना, जिसके कारण दूसरी सर्जरी करने की आवश्यकता पड़ना।

(और पढ़ें - बेचैनी के लक्षण)

और पढ़ें ...

संदर्भ

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