ब्रेस्ट लिफ्ट सर्जरी को मेडिकल भाषा में “मेस्टोपेक्सी” कहा जाता है। यह एक कॉस्मेटिक सर्जरी है, जिसमें ढीले होकर लटके हुए स्तनों में कसाव लाकर उन्हें ऊपर उठा दिया जाता है। कुछ स्थितियों में स्तन ढीले पड़ जाते हैं और लटकने लगते हैं, जो आमतौर पर उम्र बढ़ने, गर्भावस्था या चर्बी (वजन) बढ़ने के कारण होता है। यह सर्जरी स्तनों से अतिरिक्त चर्बी व ऊतकों को हटाकर स्तनों के आकार में सुधार करती है। मेस्टोपेक्सी आमतौर पर गाइनेकोमेस्टिया से ग्रस्त पुरुषों का इलाज करने के लिए भी की जाती है। इसके अलावा कुछ लोग वजन घटाने के बाद ब्रेस्ट लिफ्ट सर्जरी करवाते हैं।

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सर्जरी के दौरान आपको एनेस्थीसिया दी जाती है, जिसमें आप गहरी नींद में सो जाते हैं और आपको कुछ महसूस नहीं होता है। इस सर्जरी को करने में 90 मिनट से 2 घंटे का समय लग सकता है। सर्जरी पूरी होने के तुरंत बाद ही इसके परिणाम देखे जा सकते हैं।

ब्रेस्ट लिफ्ट सर्जरी के बाद महिलाओं को कुछ दिनों तक सर्जिकल ब्रा पहनने की सलाह दी जाती है, जो स्तनों को सहारा प्रदान करती है। जब तक आपके स्तन ठीक नहीं हो जाते तब तक डॉक्टर आपको अधिक मेहनत वाली शारीरिक गतिविधि न करने की सलाह देते हैं। सर्जरी के बाद स्तनों पर स्कार बन सकते हैं, जो लगभग एक साल बाद धीरे-धीरे गायब हो जाते हैं। जो महिलाएं गर्भवती हैं, गर्भधारण की योजना बना रही हैं या फिर जो स्तनपान कराती हैं, उन्हें स्तन लिफ्ट सर्जरी नहीं करवानी चाहिए।

(और पढ़ें - ब्रेस्ट टाइट करने के घरेलू उपाय)

  1. ब्रेस्ट लिफ्ट सर्जरी क्या है - What is Breast lift Surgery in Hindi
  2. ब्रेस्ट लिफ्ट ऑपरेशन किसलिए की जाती है - Why is Breast lift Surgery done in Hindi
  3. ब्रेस्ट लिफ्ट सर्जरी से पहले - Before Breast lift Surgery in Hindi
  4. ब्रेस्ट लिफ्ट सर्जरी के दौरान - During Breast lift Surgery in Hindi
  5. ब्रेस्ट लिफ्ट ऑपरेशन के बाद - After Breast lift Surgery in Hindi
  6. ब्रेस्ट लिफ्ट सर्जरी की जटिलताएं - Complications of Breast lift Surgery in Hindi

स्तन लिफ्ट सर्जरी क्या है?

ब्रेस्ट लिफ्ट सर्जरी को आम बोलचाल की भाषा में स्तन लिफ्ट सर्जरी और मेडिकल भाषा में मेस्टोपेक्सी कहा जाता है। यह एक कॉस्मेटिक सर्जरी है, जिसमें ढीले व लटकते स्तनों में कसाव लाकर उन्हें ऊपर उठाया जाता है। बढ़ती उम्र, गर्भावस्था और वजन बढ़ने की स्थिति में स्तन अपनी मजबूती व आकृति खो देते हैं और ढीले पड़कर लटकने लग जाते हैं।

स्तन लिफ्ट सर्जरी में सर्जन ब्रेस्ट से अतिरिक्त चर्बी को हटा देते हैं, आसपास के ऊतकों में कसाव लाते हैं और आवश्यकता पड़ने पर निप्पल की पोजीशन में भी बदलाव करते हैं। इस सर्जिकल प्रोसीजर की मदद से स्तनों की आकृति व आकार में बदलाव किया जा सकता है। मेस्टोपेक्सी की मदद से स्तन को कितना भी छोटा या बड़ा किया जा सकता है। हालांकि, जिन महिलाओं के स्तनों का आकार बड़ा है और वे कम करवाना चाहती हैं, तो उन्हें स्तन कम करने की सर्जरी (ब्रेस्ट रिडक्शन सर्जरी) करवानी चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि बड़े स्तनों पर ब्रेस्ट लिफ्ट सर्जरी का असर लंबे समय तक नहीं रहता है।

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स्तन लिफ्ट सर्जरी क्यों की जाती है?

मेस्टोपेक्सी को मेडिकल कारणों से नहीं किया जाता है। यदि कोई महिला या पुरुष अपने स्तनों की आकृति या आकार से खुश नहीं है, तो ब्रेस्ट लिफ्ट सर्जरी की जा सकती है। इसके अलावा यदि स्तनों में ढीलापन होने या किसी अन्य कारण से लटकने लग गए हैं, तो उनमें फिर से कसाव लाने के लिए भी स्तन लिफ्ट सर्जरी की जा सकती है।

गाइनेकोमेस्टिया से पीड़ित पुरुषों के स्तन असाधारण रूप से बढ़ जाते हैं, जिन्हें स्तन लिफ्ट सर्जरी की मदद से ठीक किया जा सकता है।

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ब्रेस्ट लिफ्ट सर्जरी किसे नहीं करवानी चाहिए?

जिन महिलाओं को भविष्य में गर्भधारण करना है, उन्हें मेस्टोपेक्सी सर्जरी नहीं करवानी चाहिए। ऐसा इसलिए है, क्योंकि गर्भावस्था के दौरान स्तनों की आकृति में फिर से बदलाव हो जाता है। यदि आप स्तनपान कराती है, तो डॉक्टर कुछ समय बाद सर्जरी करवाने की सलाह देते हैं, जब आप स्तनपान कराना बंद कर देती हैं। इसके अलावा जो महिलाएं या पुरुष शारीरिक वजन घटाने की सोच रहे हैं, तो उन्हें वजन घटाने के बाद ही ब्रेस्ट लिफ्ट सर्जरी करवाने की सलाह दी जाती है।

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स्तन लिफ्ट सर्जरी से पहले की तैयारी?

स्तन लिफ्ट सर्जरी से पहले डॉक्टर आपको मैमोग्राम और स्तनों का एक्स रे करवाने को कहते हैं, ताकि कैंसर आदि के खतरे का पता लगाया जा सके। इन इमेजिंग जांचों को सर्जरी के बाद भी किया जाता है, ताकि स्तन के ऊतकों में होने वाले बदलावों की जांच की जा सके। इसके अलावा कुछ अन्य टेस्ट करवाने की सलाह भी दी जा सकती है, जिनकी मदद से आपके स्वास्थ्य की जांच की जाती है, जैसे ब्लड टेस्ट और यूरिन टेस्ट आदि।

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इसके अलावा सर्जरी से पहले आपको निम्न दिशा-निर्देश दिए जा सकते हैं -

  • यदि आप किसी भी प्रकार की दवा, हर्बल उत्पाद, विटामिन, मिनरल या अन्य कोई सप्लीमेंट लेते हैं, तो इनके बारे में सारी जानकारी साझा करने को कहा जाएगा।
  • यदि आप रक्त पतला करने वाली दवा या अन्य कोई उत्पाद ले रहे हैं, तो डॉक्टर सर्जरी से दो हफ्ते पहले ही उन्हें छोड़ने की सलाह देते हैं। रक्त पतला करने वाली दवाओं में आमतौर पर एस्पिरिन, आइबूप्रोफेन और वार्फेरिन आदि शामिल हैं।
  • यदि आप कोई हर्बल उत्पाद या कोई सप्लीमेंट लेते हैं, जो रक्त को पतला करता है, उसे भी सर्जरी से दो हफ्ते पहले ही बंद करवा दिया जाता है। उदाहरण के लिए कुछ प्रकार के विटामिन रक्त को पतला करने का काम करते हैं। (और पढ़ें - खून पतला होने का इलाज)
  • आपको कुछ विशेष प्रकार की दवाएं दी जा सकती हैं, जिन्हें आपको सर्जरी से पहले ही लेना शुरू करना होता है। ये दवाएं लेने के लिए डॉक्टर द्वारा दी गई जानकारियों को ध्यानपूर्वक पढ़ना चाहिए।

सर्जरी से पहले आपको कुछ विशेष सावधानियां बरतने को भी कहा जाता है, जिनमें निम्न शामिल हैं -

  • यदि आप गर्भवती हैं या गर्भधारण की योजना बना रही हैं, तो डॉक्टर को इस बारे में बता दें।
  • यदि आप सिगरेट या शराब पीते हैं, तो डॉक्टर आपको सर्जरी से पहले ही इन्हें छोड़ने के लिए कह सकते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि धूम्रपान व शराब का सेवन सर्जरी के बाद आपके स्वस्थ होने की प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं और सर्जरी के घाव ठीक होने में सामान्य से अधिक समय लगता है।
  • ऑपरेशन वाले दिन आपको खाली पेट आने की सलाह दी जाती है। ऐसा करने के लिए आपको ऑपरेशन वाले दिन से पहली आधी रात के बाद कुछ भी न खाने की सलाह दी जाती है। हालांकि, आप सीमित मात्रा में पानी पी सकते हैं।
  • आपको ढीले-ढाले व आरामदायक कपड़े पहनने की सलाह दी जाती है, विशेषकर जिनके सामने जिप या बटन हों।
  • ऑपरेशन वाले दिन देरी न करते हुए समय पर अस्पताल पहुंच जाएं, ताकि समय रहते सर्जरी प्रोसीजर को शुरू किया जाए।

इस दिन अपने साथ किसी करीबी रिश्तेदार या मित्र को लेकर आएं, जो सर्जरी से पहले के कार्यों में आपकी मदद कर सके और सर्जरी के बाद आपको घर ला सके।

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स्तन लिफ्ट सर्जरी कैसे की जाती है?

जब आप ऑपरेशन के लिए अस्पताल पहुंच जाते हैं, तो सबसे पहले दस्तावेज संबंधी सभी कार्य पूरे किए जाते हैं और आपको सहमति पत्र दिया जाता है। सहमति पत्र पर सर्जरी से संबंधी सभी लाभ व नुकसान लिखे होते हैं, जिसपर हस्ताक्षर करके आप सर्जन को सर्जरी करने की अनुमति दे देते हैं। इसके बाद मेडिकल स्टाफ आपको एक विशेष ड्रेस पहनने को देते हैं, जिसे हॉस्पिटल गाउन कहा जाता है। मेस्टोपेक्सी को निम्न सर्जिकल प्रोसीजर के अनुसार किया जाता है -

  • आपको ऑपरेशन थिएटर में ले जाया जाएगा और वहां पर रखी टेबल पर लिटा दिया जाएगा।
  • आपकी बांह या हाथ की नस में सुई लगाकर एनेस्थीसिया का इंजेक्शन दिया जाएगा, जिससे आप सर्जरी के दौरान गहरी नींद में सोते रहेंगे।
  • जब आप गहरी नींद में होते हैं, तो आपके स्तन में चीरा लगाया जाता है। आपकी आवश्यकता और सर्जरी के प्रकार के अनुसार चीरे को तीन अलग-अलग प्रकार से लगाया जा सकता है, जो कि निम्न है -
    • निप्पल के चारों ओर गहरे रंग की त्वचा (एरिओला) को घेरने वाला चीरा (और पढ़ें - निप्पल से जुड़े तथ्य)
    • एरिओला के चारों तरफ के चीरे के साथ-साथ निप्पल से स्तन के निचले हिस्से तक का वर्टिकल चीरा लगाना
    • उपरोक्त दोनों चीरों के साथ-साथ स्तन के निचले हिस्से (ब्रेस्ट लाइन) के पास आड़ा (हॉरिजेन्टल) चीरा लगाना
  • चीरा लगाने के बाद सर्जन अंदर से अतिरिक्त ऊतकों को हटाकर निप्पल और एरिओला की पोजीशन को बदल देते हैं।
  • यदि एरिओला का आकार भी बढ़ा हुआ है, तो सर्जन उसके भी कुछ हिस्से को हटा सकते हैं। यदि स्तनों की त्वचा कमजोर होने के कारण उनका लचीलापन कम हो गया है, तो कुछ अतिरिक्त ऊतक निकाल दिए जाते हैं, ताकि स्तन लटकने न पाएं।
  • ऊतकों व चर्बी को निकालने के बाद चीरे को सर्जिकल टेप या टांके लगाकर बंद कर दिया जाता है।

पुरुषों में मेस्टोपेक्सी को ब्रेस्ट रिडक्शन सर्जरी के साथ किया जाता है। इस सर्जरी में एरिओला में एक चीरा लगाया जाता है, जिसमें अतिरिक्त ऊतकों को काटकर या लिपोसक्शन तकनीक से हटा दिया जाता है। कई बार इन दोनों तकनीकों का इस्तेमाल भी किया जा सकता है। इसके बाद ड्रेनेज के लिए ट्यूब लगा दी जाती है और एरिओला के चारों ओर किए गए चीरे को बंद कर दिया जाता है। चीरे को बंद करते समय यह ध्यान रखा जाता है कि त्वचा कहीं पर कम या ज्यादा जमा न हो, ऐसा होने पर उसे हटाकर या आस-पास शिफ्ट करके सतह को एक समान बना दिया जाता है।

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स्तन लिफ्ट सर्जरी में आमतौर पर 90 मिनट से 2 घंटे तक का समय लग सकता है। सर्जरी के बाद आपको एक या दो दिनों तक अस्पताल रहना पड़ता है। चीरा बंद करने से पहले डाली गई ट्यूब को कुछ समय के लिए रखा जाता है, ताकि ऑपरेशन वाली जगह पर बनने वाला द्रव ट्यूब के माध्यम से निकलता रहे। कुछ समय के लिए स्तन को सर्जिकल रुई व पट्टियों से ढक दिया जाता है। सर्जरी के बाद महिलाओं को कई हफ्तों तक सर्जिकल ब्रा पहनने की सलाह दी जाती है। सर्जिकल ब्रा स्तनों को पर्याप्त सहारा प्रदान करती है, जिससे सूजन कम होती है और घाव भी अपेक्षाकृत जल्दी ठीक होने लगते हैं।

अस्पताल से छुट्टी मिलने से पहले डॉक्टर आपको घाव पर दवाएं लगाने, देखभाल करने और लक्षणों आदि पर नजर रखने संबंधी कुछ दिशा-निर्देश देंगे।

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स्तन लिफ्ट सर्जरी के बाद देखभाल कैसे करें?

ऑपरेशन के बाद कुछ दिनों तक स्तनों व उनके आस-पास दर्द, सूजन, लालिमा, नील पड़ना या त्वचा सुन्न होना आदि समस्याएं हो सकती हैं, जो कि सामान्य हैं। ये सभी लक्षण आमतौर पर धीरे-धीरे गायब हो जाते हैं।

हालांकि, दर्द, बेचैनी व अन्य तकलीफों से राहत प्रदान करने के लिए डॉक्टर आपको दर्दनिवारक दवाएं देते हैं। सर्जरी के बाद आपको रोजाना थोड़ा बहुत चलने की सलाह भी दी जाती है, ताकि आपके शरीर में रक्त संचार बना रहे। साथ ही आपके स्तनों की मालिश करने की कुछ विशेष तकनीकें और कुछ एक्सरसाइज भी सिखाई जाएंगी, जो आपको सर्जरी के बाद जल्दी स्वस्थ होने में मदद करेंगी।

सर्जरी के बाद जब तक आप पूरी तरह से स्वस्थ नहीं हो जाते हैं, तो आपको निम्न से परहेज रखने की सलाह दी जाती है -

  • अधिक मेहनत वाली शारीरिक गतिविधियां -
    आपको सर्जरी के बाद तीन से छह हफ्तों तक ऐसी सभी शारीरिक गतिविधियां करने से मना किया जाएगा, जिनमें अधिक मेहनत लगती है, जिसमें दौड़ना व भारी वजन उठाना आदि शामिल है। ऐसा इसलिए क्योंकि अधिक मेहनत वाली गतिविधियां करने से रक्तचाप बढ़ने और रक्तस्राव होने का खतरा बढ़ जाता है।
     
  • सामान्य कार्य -
    सर्जरी के एक या दो हफ्तों बाद आपको अपना विशेष ध्यान रखते हुए अपनी दिनचर्या के सामान्य कार्य करने की अनुमति दे दी जाती है।
     
  • ड्राइविंग -
    यदि आप सर्जरी के बाद ड्राइविंग या कोई मशीन ऑपरेट करना चाहते हैं, तो पहले डॉक्टर से अनुमति ले लें।

नीचे दिए गए निर्देशों का पालन करके सर्जरी के घाव की देखभाल की जा सकती है -

  • यह सुनिश्चित करें कि सर्जरी वाला घाव सूखा, साफ व पूरी तरह से ढका हुआ है।
  • यदि ड्रेनेज ट्यूब को निकाल दिया गया है, तो आपको नहाने की अनुमति दी जा सकती है। स्तनों पर पर्याप्त सनस्क्रीन लगाएं, जिसमें एसपीएफ स्तर 30 या उससे अधिक हो। (और पढ़ें - एक अच्छी सनस्क्रीन कैसे चुनें)
  • सर्जरी के बाद तीन से चार हफ्तों तक धूम्रपान न करें, क्योंकि इससे घाव के ठीक होने की प्रक्रिया धीमी पड़ जाती है और संक्रमण व अन्य जटिलताएं होने का खतरा भी बढ़ जाता है। इसी प्रकार तीन से चार हफ्तों तक ही शराब पीने से परहेज करें, क्योंकि यह भी समान रूप से शरीर को प्रभावित करती है।
  • सर्जरी के बाद ठीक होने के दौरान आपको विशेष रूप से स्वास्थ्यकर आहार लेने की सलाह दी जाती है, जिनमें पर्याप्त मात्रा में फलसब्जियां शामिल हों। स्वास्थ्यकर व संतुलित आहार लेने से सर्जरी के बाद जल्दी स्वस्थ होने में मदद मिलती है और कब्ज जैसी समस्याएं भी नहीं होती।

(और पढ़ें - कब्ज दूर करने के घरेलू)

मेस्टोपेक्सी सर्जरी से आपके स्तनों के आकार व आकृति में सुधार हो जाता है, जिसके परिणामस्वरूप आपको अच्छा महसूस होता है और आपका आत्मविश्वास भी बढ़ता है। सर्जरी के बाद आपको परिणाम के लिए कोई इंतजार नहीं करना पड़ता है, क्योंकि इसमें परिणाम तुरंत देखे जा सकते हैं। आपको सर्जरी से वास्तविक व व्यावहारिक उम्मीदें होनी चाहिए। अर्थात आपको यह समझना चाहिए कि ब्रेस्ट लिफ्ट सर्जरी से स्तनों के आकार व आकृति में सुधार किया जा सकता है, लेकिन उन्हें पूरी तरह से दोषहीन नहीं किया जा सकता है।

डॉक्टर को कब दिखाएं?

यदि आपको ब्रेस्ट लिफ्ट सर्जरी के बाद निम्न में से कोई भी लक्षण महसूस हो रहा है, तो डॉक्टर से संपर्क कर लेना चाहिए -

(और पढ़ें - निप्पल में दर्द का इलाज)

स्तन लिफ्ट सर्जरी से क्या जोखिम हो सकते हैं?

ब्रेस्ट लिफ्ट सर्जरी सर्जरी से निम्न जोखिम व जटिलताएं हो सकती हैं -

  • स्तन में गांठ बनना
  • स्तन के भीतर द्रव जमा होना (और पढ़ें - स्तन से पानी आने का इलाज)
  • स्तन का बाहरी हिस्सा सुन्न होना
  • निप्पल या एरिओला की त्वचा कम पड़ना (और पढ़ें - निप्पल की समस्याओं का इलाज)
  • एक या दोनों स्तनों में लगातार दर्द रहना
  • स्तनपान कराने की क्षमता कम होना
  • स्तन से रक्तस्राव होना
  • फेफड़े या टांग में रक्त का थक्का जमना
  • स्तनों पर स्थायी निशान (स्कार) बन जाना
  • सर्जरी वाले घाव में संक्रमण हो जाना (और पढ़ें - घाव भरने के उपाय)
  • ब्रेस्ट लिफ्ट सर्जरी ठीक से न होने पर कुछ कॉस्मेटिक समस्याएं भी हो सकती हैं, जैसे -
    • दोनों स्तनों में निप्पल अलग-अलग जगह पर होना
    • स्तनों का आकार एक समान न होना (एक स्तन छोटा और दूसरा बड़ा होना)
  • दोनों स्तनों की आकृति अलग-अलग होना
  • इसके अलावा सर्जरी के दौरान इस्तेमाल की गई एनेस्थीसिया से भी कुछ समस्याएं हो सकती हैं, जैसे सांस लेने में कठिनाई होना और एलर्जी संबंधी अन्य लक्षण पैदा होना।

(और पढ़ें - त्वचा की एलर्जी का इलाज)

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संदर्भ

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  2. American Board of Cosmetic Surgery [Internet]. Indiana. US; Breast Augmentation Guide
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  8. Townsend C, Beauchamp RD, et al. Sabiston textbook of surgery: the biological basis of modern surgical practice. 20th ed. Philadelphia, PA: Elsevier; 2017. Chapter 35, Breast reconstruction.
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