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परिचय

सीए 15-3 एक प्रकार का प्रोटीन होता है, जो स्तन के ऊतकों का सामान्य उत्पाद होता है। सीए 15-3 प्रोटीन स्तन कैंसर का कारण नहीं बनता है। लेकिन अगर स्तन में कैंसर युक्त ट्यूमर विकसित हो गया है, तो कोशिकाओं के साथ-साथ सीए 15-3 का स्तर भी बढ़ जाता है। सीए 15-3 एक प्रकार का एंटीजन या एक ऐसा पदार्थ होता है जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को उत्तेजित करता है। कुछ प्रकार की कैंसर कोशिकाएं सीए 15-3 एंटीजन को खून में स्त्रावित कर देती हैं। 

सीए 15-3 का इस्तेमाल ट्यूमर मॉनिटर के रूप में किया जाता है। इसका उपयोग आमतौर पर ब्रेस्ट कैंसर के रोगी की प्रतिक्रिया और कैंसर फिर से होने आदि जैसी स्थितियों का पता लगाया जाता है।

सीए 15-3 का सामान्य स्तर क्या है?

सीए 15-3 की सामान्य सीमा 30 यू/एमएल से कम होती है। इसकी ऊपरी सीमा लेबोरेटरी और टेस्ट करने के लिए किस प्रकार की किट का इस्तेमाल किया जाता है इस पर निर्भर करती है। अलग-अलग किट, तरीकों व लेबोरेटरी से निकाले गए स्तर के मान को एक दूसरे की जगह पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है।

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  1. सीए 15.3 टेस्ट क्या होता है? - What is CA 15.3 Test in Hindi?
  2. सीए 15.3 टेस्ट कब करवाना चाहिए - When to get tested with CA 15.3 in Hindi
  3. सीए 15.3 टेस्ट क्यों किया जाता है - What is the purpose of CA 15.3 Test in Hindi
  4. सीए 15.3 टेस्ट से पहले - Before CA 15.3 Test in Hindi
  5. सीए 15.3 टेस्ट के दौरान - During CA 15.3 Test in Hindi
  6. सीए 15.3 टेस्ट के बाद - After CA 15.3 Test in Hindi
  7. सीए 15.3 टेस्ट के क्या जोखिम होते हैं - What are the risks of CA 15.3 Test in Hindi
  8. सीए 15.3 टेस्ट के परिणाम का क्या मतलब होता है - What do the results of CA 15.3 Test mean in Hindi

सीए 15-3 टेस्ट क्या है?

इस टेस्ट की मदद से खून में सीए 15-3 की मात्रा का पता लगया जाता है। जब ब्रेस्ट कैंसर का पता लगा लिया जाए तो उस पर नजर रखने के लिए सीए 15-3 टेस्ट का उपयोग किया जाता है। इसका उपयोग यह जानने के लिए भी किया जा सकता है कि इलाज कितना प्रभावी है। इस टेस्ट को या तो सर्जरी से ब्रेस्ट कैंसर ट्यूमर को निकालने के बाद किया जाता है ताकि ट्यूमर के फिर से होने का पता लगाया जा सके या फिर कैंसर के किसी अन्य इलाज के दौरान किया जाता है ताकि कैंसर पर इलाज कितने प्रभावी रूप से काम कर रहा है ये पता लगाया जा सके। 

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हालांकि इस टेस्ट का उपयोग ब्रेस्ट कैंसर का परीक्षण व जांच करने के लिए नहीं किया जा सकता है। सीए 15-3 (कैंसर एंटीजन 15-3) एक प्रकार का प्रोटीन होता है, जो कई प्रकार की कोशिकाओं के द्वारा बनाया जाता है, इनमें खासतौर पर स्तनों में मौजूद कोशिकाएं शामिल हैं। जिन्हें ब्रेस्ट कैंसर होता है उनमें सीए 15-3 का स्तर बढ़ा हुआ मिलता है, हालांकि यह ब्रेस्ट कैंसर का कारण नहीं होता है।

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सीए 15-3 टेस्ट कब करवाना चाहिए?

कुछ स्थितियों में सीए 15-3 टेस्ट करवाने की आवश्यकता पड़ सकती है:। 

  • यदि परीक्षण के दौरान ब्रेस्ट कैंसर पाया गया है और आपका इलाज चल रहा है। इस दौरान डॉक्टर यह पता लगाने के लिए सीए 15-3 टेस्ट करते हैं कि इलाज कितने प्रभावी रूप से काम कर रहा है। 
  • यदि ब्रेस्ट कैंसर का इलाज हो चुका है और डॉक्टर यह पता लगाना चाहते हैं कि कहीं कैंसर फिर से तो नहीं हो रहा है, तो ऐसी स्थिति का पता लगाने के लिए सीए 15-3 टेस्ट किया जाता है। (और पढ़ें - ब्रेस्ट की देखभाल कैसे करें

यदि आपका पहले कभी ब्रेस्ट कैंसर का इलाज किया गया है, तो भी आपको सीए 15-3 टेस्ट करवा लेना चाहिए। इसके अलावा यदि आपको पहले निम्नलिखित में से कोई रोग हो चुका है, तो भी सीए 15-3 टेस्ट करवा लेना चाहिए: 

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सीए 15-3 टेस्ट क्यों किया जाता है?

इस टेस्ट का इस्तेमाल कुछ प्रकार के कैंसर का पता लगाने के लिए किया जाता है। जिन महिलाओं को पहले ब्रेस्ट कैंसर हो चुका है, इस टेस्ट की मदद से उनमें यह कैंसर फिर से होने के शुरूआती संकेतों का पता लगाया जा सकता है। यह विशेष रूप से ब्रेस्ट कैंसर से ग्रस्त उन महिलाओं के लिए उपयोगी है, जिनका कैंसर दूसरी या तीसरी स्टेज पर है। ये लोग नैदानिक रूप से कैंसर बीमारी से मुक्त होते हैं। (और पढ़ें - ओवेरियन कैंसर की सर्जरी)

सीए 15-3 टेस्ट के द्वारा कैंसर की विशेषताओं को निर्धारित किया जाता है, ताकि कैंसर के इलाज की प्रभावशीलता का पता लगाया जा सके और कैंसर के फिर से विकसित होने जैसी स्थितियों का पता लगाया जा सके। 

सीए 15-3 टेस्ट ब्रेस्ट कैंसर की जांच करने के लिए कोई विशेष टेस्ट नहीं होता है। क्योंकि स्वास्थ्य संबंधी कुछ अन्य समस्याओं में भी सीए 15-3 का स्तर बढ़ जाता है, जैसे: 

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सीए 15-3 टेस्ट से पहले क्या करें?

आपको इस टेस्ट से पहले कोई विशेष तैयारी करने की आवश्यकता नहीं पड़ती है। जो भी दवाएं, सप्लीमेंट या कोई अन्य प्रोडक्ट आप लेते हैं, टेस्ट से पहले इन सभी के बारे में अपने डॉक्टर को बता दें। इनमें डॉक्टर की पर्ची के बिना मेडिकल स्टोर से मिल जाने वाली दवाएं व नशीली दवाएं आदि शामिल हैं। इन सभी के बारे में जानने के बाद डॉक्टर आपके टेस्ट के रिजल्ट को और सटीक रूप से प्राप्त कर सकते हैं और परीक्षण असफल होने की संभावनाएं बहुत ही कम हो जाती हैं।

इस खून के टेस्ट से 12 घंटे पहले तक डॉक्टर आपको ऐसे मल्टीविटामिन्स व सप्लीमेंट्स ना लेने की सलाह दे सकते हैं, जिनमें बायोटिन या विटामिन बी7 होता है। बायोटिन या विटामिन बी7 आमतौर पर बालों, त्वचा और नाखूनों के सप्लीमेंट्स में पाए जाते हैं।

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सीए 15-3 टेस्ट के दौरान क्या किया जाता है?

सीए 15-3 टेस्ट करने के लिए खून के सेंपल की आवश्यकता पड़ती है। खून का सेंपल आमतौर पर बांह या हाथ की नस से निकाला जाता है। 

  • डॉक्टर सुई लगाने से पहले उस क्षेत्र को साफ करते हैं। खून निकालने के लिए आमतौर पर कोहनी के भीतरी तरफ की नस या हाथ के पीछे की नस का इस्तेमाल किया जाता है।
  • डॉक्टर बांह के ऊपरी हिस्से में एक पट्टी भी बांध सकते हैं जिसे नसों में खून का बहाव बंद हो जाता है और नसें खून से भर कर उभर जाती हैं।
  • उसके बाद डॉक्टर स्टेराइल (किटाणुरहित) सुई को नस में लगा देते हैं।
  • सुई के साथ सिरिंज, ट्यूब या शीशी जुड़ी होती है जिसमें खून के सेंपल को जमा किया जाता है।

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सीए 15-3 टेस्ट के बाद क्या करें?

टेस्ट करने के लिए खून का सेंपल लेने के बाद सुई को निकाल लिया जाता है और सुई वाली जगह पर हल्का सा दबाव दे दिया जाता है ताकि खून बहने और नील पड़ने आदि से बचाव किया जाए। 

जब खून निकालने के लिए सुई लगाई जाती है, तो कुछ लोगों को हल्का सा दर्द होता है। सुई निकालने के बाद उस जगह पर थोड़ा सा दबाव दिया जाता है, ताकी त्वचा में नील ना पड़े। (और पढ़ें - एचबीए1सी टेस्ट क्या है)

उसके बाद खून के सेंपल को टेस्टिंग के लिए लेबोरेटरी भेज दिया जाता है। 

(और पढ़ें - लैब टेस्ट क्या है)

सीए 15-3 टेस्ट से क्या  जोखिम होती हैं?

ऐसे टेस्ट जिनमें सुई का इस्तेमाल किया जाता है उनमें थोड़े बहुत जोखिम होते हैं। इनमें ब्लीडिंग, इन्फेक्शन, नील पड़ना और सिर घूमना आदि शामिल है। जब सुई आपकी त्वचा के अंदर छेद करके जाती है, तो इस दौरान आपको हल्का सा दर्द व चुभन महसूस हो सकती है। उसके बाद इस जगह में थोड़ी बहुत देर के लिए हल्का दर्द रहता है। 

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सीए 15-3 टेस्ट के रिजल्ट का क्या मतलब होता है?

  • पुरुषों  व महिलाओं दोनों सीए 15-3 की सामान्य सीमा <30 यू/एमएल (U/mL) होती है। सीए 15-3 का स्तर बढ़ना ब्रेस्ट कैंसर विकसित होने का संकेत देता है। ब्रेस्ट कैंसर से ग्रस्त लगभग 80 प्रतिशत महिलाओं में सीए 15-3 प्रोटीन बढ़ा हुआ मिलता है। (और पढ़ें - किडनी फंक्शन टेस्ट की जानकारी)
  • यदि ब्रेस्ट कैंसर का इलाज हो रहा है या कैंसर ठीक हो चुका है और उसके बाद सीए 15-3 का स्तर बढ़ा हुआ मिलता है, तो यह फिर से कैंसर विकसित होने के संकेत दे सकता है। ट्यूमर का आकार जितना बड़ा होता है या कैंसर जितना अधिक फैला होता है (खासकर लिवर व हड्डियों में) सीए 15-3 का स्तर उतना ही अधिक बढ़ जाता है। (और पढ़ें - एलर्जी टेस्ट कैसे होता है​)
  • आमतौर पर कैंसर के फैलने के साथ-साथ सीए 15-3 भी जमा होने लग जाता है। सीए 15-3 का स्तर सबसे अधिक तभी बढ़ता है, जब कैंसर लिवर या हड्डियों तक फैल जाता है। यदि समय के साथ-साथ सीए 15-3 का स्तर भी बढ़ रहा है तो इसका मतलब है कि इलाज काम नहीं कर पा रहा या फिर कैंसर फिर से विकसित हो रहा है। (और पढ़ें - एसजीपीटी टेस्ट क्या है)
  • यदि सीए 15-3 का स्तर सामान्य से कम होता है, तो एक प्रकार के ब्रेस्ट ट्यूमर का संकेत देता है। यदि इलाज शुरू करने के बाद सीए 15-3 का स्तर धीरे-धीरे कम होने लगा है, तो इसका मतलब है कि इलाज प्रभावी रूप से काम कर रहा है और उसका ट्यूमर कम हो रहा है। (और पढ़ें - एसजीपीटी टेस्ट क्या है)
  • ब्रेस्ट कैंसर से ग्रस्त महिलाओं में 25 % से 30 % ऐसी महिलाएं भी होती हैं, जिनमें सीए 15-3 का स्तर नहीं बढ़ पाता है। 

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