कैटिकोलामिन ब्लड टेस्ट क्या है?

कैटिकोलामिन शरीर में स्त्रावित होने वाला एक रसायन (केमिकल) है। यह केमिकल नसों के अंतिम सिरे और एड्रिनल ग्रंथि (किडनी के पास स्थित एंडोक्राइन ग्रंथि) द्वारा स्त्रावित किया जाता है। ये हार्मोन  और न्यूरोट्रांसमीटर (नसों में सिग्नल लेकर जाने वाले) की तरह काम करते हैं। किसी प्रकार के रोग व अन्य मेडिकल स्थितियों (विशेषकर तनाव) में ये हार्मोन शरीर का आंतरिक संतुलन बनाने में मदद करते हैं। शरीर में दो तरह के कैटिकोलामिन होते हैं एपिनेफ्रीन या एड्रेनालिन, नॉरपेनेफ्रिन या नॉरएड्रेनालिन और डोपामाइन। 

कैटिकोलामिन ब्लड टेस्ट का प्रयोग एपिनेफ्रीन, नॉरपेनेफ्रिन और डोपामाइन के स्तर का पता लगाने के लिए किया जाता है। यह मुख्य रूप से एड्रिनल ग्रंथि में किसी प्रकार के ट्यूमर और कैंसर का पता लगाने के लिए किया जाता है।

कभी-कभी 24 घंटे के यूरिन सैंपल टेस्ट की मदद से कैटिकोलामिन के अंतिम पदार्थ जैसे मेटानेफ़्रिन, नोर्मेटेनएफ्रिन और वनीलीमैंडेलिक (vanillylmandelic) एसिड की जांच भी की जाती है। जिससे कैटिकोलामिन के उच्च स्तर से जुड़ी हुई स्थितियों जैसे एड्रिनल ग्रंथि के ट्यूमर (फियोक्रोमोसाइटोमा) के परीक्षण करने में मदद मिलती है।

  1. कैटिकोलामिन ब्लड टेस्ट क्यों किया जाता है - Catecholamine Blood Test Kyu Kiya Jata Hai
  2. कैटिकोलामिन ब्लड टेस्ट से पहले - Catecholamine Blood Test Se Pahle
  3. कैटिकोलामिन ब्लड टेस्ट के दौरान - Catecholamine Blood Test Ke Dauran
  4. कैटिकोलामिन ब्लड टेस्ट के परिणाम और नॉर्मल रेंज - Catecholamine Blood Test Result and Normal Range

कैटिकोलामिन ब्लड टेस्ट किसलिए किया जाता है?

यह टेस्ट उन स्थितियों का परीक्षण करता है जिनके कारण रक्त में कैटिकोलामिन के स्तर बढ़ जाते हैं। इन स्थितियों में एड्रिनल ग्रंथि के ट्यूमर फियोक्रोमोसाइटोमा, न्यूरोब्लास्टोमा आदि आते हैं।

फियोक्रोमोसाइटोमा के कुछ लक्षण निम्न हैं:

बच्चों के रक्त में कैटिकोलामिन के बढ़े हुए स्तर निम्न का कारण बनते हैं:

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कैटिकोलामिन ब्लड टेस्ट की तैयारी कैसे करें?

कैटिकोलामिन ब्लड टेस्ट के लिए 10 घंटे तक भूखा रहना जरूरी है। इस बीच पानी पिया जा सकता है। मानसिक तनाव और अत्यधिक व्यायाम से टेस्ट की रिपोर्ट्स प्रभावित हो सकती है इसीलिए टेस्ट से पहले तनावमुक्त रहें और व्यायाम न करें।

टेस्ट से एक हफ्ते पहले तक कुछ प्रकार के खाद्य व पेय पदार्थों को बंद कर देना चाहिए, जैसे चाय, कॉफी, कोकोआ, केला, अखरोट और विटामिन सी से युक्त फल जैसे संतरे और अंगूर। 

यदि आप निम्न तत्वों से युक्त दवाएं ले रहे हैं तो टेस्ट से पहले डॉक्टर को जरूर बताएं क्योंकि ये रक्त में कैटिकोलामिन के स्तर को बढ़ा सकते हैं:

  • एसिटामिनोफेन: फ्लू, सिर दर्द, बदन दर्द, जुकाम और खांसी के लिए। 
  • एल्बुटेरॉल और एमिनोफाइलिन: अस्थमा और घरघराहट के लिए प्रयोग होने वाली एलब्यूटेरोल और एमिनोफिलिन: ये संकुचित वायुमार्ग में ऐंठन से आराम पहुंचाने के लिए प्रयोग की जाती है जो इन वायुमार्गों की मांसपेशियों में कसाव आने के कारण होती है (ब्रोन्कोलिडेटर)।
  • एम्फेटामिन और बसपिरोन: तंत्रिका तंत्र से जुड़े विकारों जैसे अटेंशन-डेफिसिट-हाइपरएक्टिव डिसऑर्डर (एडीएचडी), चिंता आदि के इलाज के लिए। 
  • कैफीन और कोकेन: जो तंत्रिका तंत्र को उत्तेजित करते हैं। 
  • मिथाइलडोपा और रेसर्पिन: कैल्शियम चैनल को अवरुद्ध करने वाली दवाएं,  जो कि उच्च रक्त चाप की स्थितियों में उपयोग की जाती हैं। 
  • साइक्लोबेंजाप्रिन: जिनका इस्तेमाल मांसपेशियों के दर्द के लिए किया जाता है। 
  • लेवेडोपा: पार्किंसन रोग के इलाज में इस्तेमाल की जाने वाली दवा।
  • निकोटिनिक एसिड: फ़ूड सप्लिमेंट के रूप में या हाई कोलेस्ट्रॉल को ठीक करने के लिए अधिक मात्रा में निकोटिनिक एसिड लेना। 
  • फेनोक्सिबेंजामिन: फीयोक्रोमोसाइटोमा में होने वाला अधिक ब्लड प्रेशर और अत्यधिक पसीना आना जैसी स्थितियों के लिए । 
  • फेनोथायजिन्स: जी मिचलाना, उल्टी, मानसिक स्थितियों जैसे स्किज़ोफ्रेनिया, मतिभ्रम आदि के लिए।
  • साइनसाइटिस को ठीक  करने के लिए स्यूडोफेड्रिन 
  • डिप्रेशन के ट्रीटमेंट के लिए ट्राइसाइक्लिक एंटीडिप्रेसेंट

निम्न दवाएं रक्त में कैटिकोलामिन के स्तर को कम करती हैं:

  • क्लोनिडाइन: उच्च रक्त चाप और एडीएचडी के ट्रीटमेंट के लिए इस्तेमाल की जाने वाली दवा
  • गौनेथिडिन (Guanethidine): उच्च रक्त चाप की दवा
  • एमएओ इनहिबिटर्स: डिप्रेशन का इलाज करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली दवा 

टेस्ट से कम से कम 12 घंटे पहले तक ऐसी दवाएं व इंजेक्शन न लें, जिनमें एपिनेफ्रीन, नॉरपेनेफ्रिन और डोपामाइन हो। इसके साथ टेस्ट से चार घंटे पहले तम्बाकू और कैफीन युक्त पदार्थ भी न लें।

कैटिकोलामिन ब्लड टेस्ट कैसे किया जाता है?

डॉक्टर आपकी बांह की नस में सुई लगाकर ब्लड सैंपल ले लेंगे। इस ब्लड सैंपल को एक विशेष ट्यूब जिसमें हेपरिन या ऐटीडीए होगा उसमें रखा जाएगा। यह जरूरी है कि सैंपल लेने के एक घंटे बाद उसे जमा दिया जाए ताकि टेस्ट की रिपोर्ट में कोई भी गलती न हो। 

इस टेस्ट के परिणाम आने में दो से पांच दिन का समय लगता है। इससे ब्लीडिंग, त्वचा के अंदर रक्त जमना (हीमेटोमा), रक्त ली गई जगह पर संक्रमण आदि समस्याएं हो सकती हैं। कुछ लोगों को सैंपल लेने के बाद चक्कर भी आ जाते हैं। हालांकि अधिकतर लक्षण स्वयं ही ठीक हो जाते हैं। यदि ये ठीक नहीं होते तो ऐसे में डॉक्टर से मिल लें। 

 
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कैटिकोलामिन ब्लड टेस्ट के परिणाम और नॉर्मल रेंज

सामान्य परिणाम :

  • एपिनेफ्रीन: 0-140 pg/mL या 764.3 pmol/L
  • नॉरपेनेफ्रिन: 70-1700 pg/mL या 413.8-10048.7 pmol/L
  • डोपामाइन: 0-30 pg/mL या 195.8 pmol/L

असामान्य परिणाम :
कैटिकोलामिन के सामान्य से अधिक स्तर को असामान्य परिणाम माना जाता है। ये निम्न दवाओं के कारण हो सकता है:

  • अचानक से चिंता या गंभीर रूप से तनाव होना 
  • फियोक्रोमोसाइटोमा (एड्रिनल ग्रंथि का ट्यूमर)
  • केंद्रीय तंत्रिका तंत्र से जुडी कुछ दुर्लभ ट्यूमर:
    • न्यूरोब्लास्टोमा 
    • गेंगिलोन्यूरोमा 
    • गेंगिलोब्लास्टोमा 
  • मल्टी सिस्टम एट्रोफी (पार्किंसनियन टाइप) यह एक दुर्लभ स्थिति है जिसके लक्षण पार्किंसन रोग की तरह ही होते हैं। यह तेज और गंभीर लक्षणों से तंत्रिका तंत्र को  प्रभावित करता है। इन लक्षणों में हाथों में कंपन, चलने में तकलीफ, चेहरे के भावों में बदलाव, पेशाब पर नियंत्रण न रहना, चलने या खड़े रहनेे के दौरान बार-बार गिरना।
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