भारत में आज वजन कम करने के लिए एक नयी डाइट का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसे "कीटोजेनिक डाइट" या सिर्फ "कीटो डाइट" के नाम से जाना जाता है। ये शरीर के फैट को बर्न करने में बहुत प्रभावी है और 10 दिन में अधिक से अधिक वजन कम करने में बहुत अधिक लाभदायक है। इस कीटो डाइट के समर्थकों का कहना है कि ये बहुत कम समय में वजन कम करती है और अधिक उर्जा भी प्रदान करती है। 

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हांलाकि कुछ आलोचकों का कहना है कि वजन कम करने के लिए ये डाउट अस्वस्थ टाइट है और ऐसे कई उदाहरण है, जो ये सिद्ध करते हैं कि ये शरीर के लिए नलसंदायक हो सकती है।

आइये बताएं आपको कीटो डाइट के बारे में - 

  1. कीटो डाइट क्या है - What is Keto Diet in Hindi
  2. कीटो डाइट के फायदे - Benefits of Keto Diet in Hindi
  3. कीटो डाइट के नुकसान - Side effects of Keto Diet in Hindi
  4. वजन कम करने के लिए 4 हफ्ते का भारतीय कीटो डाइट प्लान - 4 Week Indian Vegetarian Keto Diet Plan for Weight Loss in Hindi
  5. कीटो डाइट प्लान के डॉक्टर
  6. क्या कीटो डाइट बन सकता है किडनी को नुकसान पहुंचाने का कारण ?
  7. कीटो डाइट के लिए भारतीय आहार
  8. जानें कैसे कीटो डाइट हार्ट से संबंधित बीमारी को रोकने में कर सकती है मदद : स्टडी

कीटो डाइट कम कर्बोहाइड्रेट आहार के लिए जाना जाता है। कीटो डाइट से लीवर में केटोन्स बनाने लगते हैं, जिन्हे शरीर उर्जा के रूप में इस्तेमाल करने लगता है। इस डाइट को कीटो डाइट के अलावा "लो कार्ब और हाई फैट डाइट" के नाम से भी जाना जाता है।

जब आप अधिक कार्बोहाइड्रेट वाली डाइट खाते हैं, तो शरीर में ग्लूकोज़ और इंसुलिन बनने लगते हैं। ग्लूकोज को शरीर बहुत असानी से उर्जा में बदल देता है, और इसलिए अन्य उर्जा स्त्रोत की तुलना में हम ग्लूकोज को चुनता है। इंसुलिन ग्लूकोज को रक्त के माध्यम से पूरे शरीर में पहुंचाने में मदद करता है।

क्योंकि शरीर में ग्लूकोज प्राथमिक उर्जा के रूप मे इस्तेमाल होता है, इसलिए आपका शरीर फैट का इस्तेमाल उर्जा के रूप में नहीं करता है। इसकी वजह से शरीर में फैट जमा हो जाता है। किसी भी सामान्य या अधिक कार्बोहाइड्रेट वाले आहार लेने पर शरीर ग्लूकोज़ को उर्जा के मुख्य स्रोत के रूप में इस्तेमाल करता है।

अपने आहार में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा कम लेना शरीर में "कीटोसिस" की स्थिति पैदा कर देता है। कीटोसिस एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, जो भोजन की मात्रा कम होने पर हमें जीवित रहने में मदद करता है। इस स्थिति में हमारा शरीर किटोन्स का उत्पादन करता है, जो लीवर में फैट के बर्न होने से बनते हैं।

कीटो डाइट का उदेश्य शरीर को इस कीटोसिस प्रक्रिया में लाना है। गौर करिये, शरीर को खाने से वंचित नहीं करना है, सिर्फ कार्बोहाइड्रेट्स कम से कम करने हैं। 

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कीटो डाइट के फ़ायदे निम्म हैं -

1. वजन घटाने में -

कीटो डाइट लेने से हमारा शरीर फैट को उर्जा के रूप में इस्तेमाल करने लगता है। साथ ही ये वजन कम करने में भी मदद करता है। इस डाइट के लेने से हमारे शरीर का फैट बर्न होने लगता है, जिससे शरीर में इंसुलिन का स्तर बहुत कम हो जाता है।

रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने में -

किटो डाइट में आप जिस तरह के फूड्स खाते हैं, उससे रक्त शर्करा का स्तर कम हो जाता है। अध्ययनों के मुताबिक कम-कैलोरी वाले डाइट की तुलना में डायबिटीज से बचाने में कीटोजेनिक डाइट अधिक प्रभावी है।

यदि आप डायबिटीज के प्राथमिक चरण में हैं या टाइप-2 डायबिटीज से ग्रसित हैं, तो आपको गंभीरता से केटोजेनिक आहार को अपनाना चाहिए। ऐसे कितने ही पाठक हैं, जिन लोगों नें कीटो डाइट के माध्यम से रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित किया है।

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2. मानसिक एकाग्रता बढ़ाने में -

कई लोग मानसिक प्रदर्शन को बेहतर करने के लिए कीटो डाइट अपनाते हैं। कीटो डाइट मस्तिष्क के उर्जा का एक बड़ा स्त्रोत है। जब आप कार्बोहाइड्रेट कम मात्रा में लेते हैं, तो ब्लड शुगर में बड़े कीलों से बच जाते हैं। ये दोनों मिल कर आपके दिमाग़ की फोकस और एकग्रता को बढ़ाते हैं। अध्ययन बताते हैं कि फैटी एसिड अधिक मात्रा में लेने से हमारा मस्तिष्क अधिक सक्रिय हो जाता है।

उर्जा का स्तर बढ़ाने में और भूख को नियंत्रित करने में -

कीटो डाइट से हमारे शरीर को उर्जा का एक बेहतर स्त्रोत मिलता है, जिससे आप दिन में अधिक उर्जावान महसूस करते है। साथ ही उर्जा के रूप में, फैट का अधिक से अधिक इस्तेमाल होता है।

3. मिर्गी के इलाज में -

सन् 1900 से मिर्गी के इलाज में केटोनिक डाइट का सफलता पूर्वक इस्तेमाल किया जा रहा है और आज भी मिर्गी से बहुत अधिक पीड़ित बच्चों को, इसके उपचार के लिए इस डाइट को दिया जाता है। इसका सबसे बड़ा लाभ ये है कि इसमें बहुत कम खर्च होता है और मिर्गी को नियंत्रित करने में बहुत असरदार है।

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4. कोलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेसर नियंत्रित करने में -

कीटो डाइट, ट्राइग्लिसराइड और कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बढ़ाने में मदद करता है, जो धमनियों के लिए फ़ायदेमंद होते हैं। कर्बोहाइड्रेट की मात्रा कम और हाई-फैट डाइट, ख़राब कोलेस्ट्रॉल (LDL) के स्तर को कम करने में और अच्छे कोलेस्ट्रॉल (HDL) के स्तर को बढ़ाने में अधिक मदद करता है, लो-फैट डाइट की तुलना में।

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5. इंसुलिन को रोकने में -

इंसुलिन प्रतिरोध की वजह से टाइप-2 डायबिटीज हो सकता है, यदि इसको सही तरीक़े से नियंत्रित न किया जाये तो। ऐसे कई शोध हैं, जो बताते हैं कि कम कर्बोहाड्रेट और कीटोजनिक डाइट इंसुलिन के स्तर को कम करने में और इसके स्तर को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करते हैं।

6. मुंहासों से छुटकारा दिलाने में -

कीटो डाइट लेने से आपकी त्वचा में अपने आप सुधार होने लगता है।

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एक अध्ययन के मुताबिक कम कार्बोहाइड्रेट वाले डाइट के दौरान घाव और त्वचा के सूजन में सुधार पाया गया। वहीं दूसरे तरफ एक अध्ययन में, अधिक कार्बोहाइड्रेट वाले डाइट से मुंहासों में बढ़ोतरी देखा गया।

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कीटो डाइट के सामान्य दुष्प्रभाव निम्न हैं -

1. शरीर में ऐंठन -

कीटो डाइट लेने से ऐंठन और ख़ासकर पैरों में ऐंठन एक सामान्य बात है। ये आमतौर पर सुबह और शाम को अधिक होता है। हालांकि इस बात से घबराने की ज़रूरत नहीं है, ये इस बात का संकेत देता है कि आपके शरीर में खनिज की कमी है ख़ास कर मैग्नीशियम।

इसलिए अपने आहर में अधिक से अधिक तरल खाद्य पदार्थ और नमक लें। इससे आपके शरीर में मैग्नीशियम की कमी पूरी हो जाएगी और ऐंठन की समस्या से राहत मिल जाएगी।

2. कब्ज की समस्या -

पानी की कमी कब्ज की एक सबसे सामान्य समस्या है। इसलिए इसका सबसे सरल समाधान है अधिक से अधिक पानी पिएं। साथ ही फाइबर और बिना स्टार्च वाली सब्जियों के सेवन से भी कब्ज़ से राहत मिलती है। यदि इन सब से भी राहत नहीं मिले, तो ईसबगोल की भूसी या प्रोबायोटिक भी ले सकते हैं।

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3. घबराहट या आसामन्य दिल की धड़कन होना -

जब आप कीटो डाइट अपनाते हैं, तो आपकी दिल की धड़कन पहले की उपेक्षा तेज़ हो जाती है और सांस लेने में भी परेशानी हो सकती है। यह एक सामान्य बात है इसलिए चिंता न करें। इसे सामान्य स्थिति में लाने के लिए अधिक से अधिक पानी पिएं और नमक खाएं। आमतौर पर इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए ये पर्याप्त है। इसके अलावा आप दिन में एक बार पोटैशियम सप्लिमेंट भी ले सकते हैं।

4. शरीरिक क्षमता कम होना -

जब आप किटो डाइट लेना शूरू करते हैं, तो हो सकता है कि आपके शारीरिक क्षमता में कमी आए। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि आपका शरीर फैट को उर्जा के रूप में इस्तेमाल करता है। इसलिए परेशान होने की ज़रूरत नहीं है, कुछ ही दिनों में आपकी शारीरिक क्षमता पहले जैसी हो जाएगी।

वजन घटाने के लिए 4 हफ्ते का भारतीय कीटो डाइट प्लान -

वजन कम करने के लिए चार हफ्ते का भारतीय कीटो डाइट प्लान। क्रमसः 1 हफ्ते से लेकर 4 हफ्ते तक निम्नलिखित है।

नीचे दिए गए खाद्य पदार्थ में से आप पूरे हफ्ते एक-एक करके अलग-अलग फूड्स खा सकते हैं।

1. पहला हफ्ता -  

नाश्ता -

दोपह का भोजन -

  • सामान्य सलाद (पालक, शिमला मिर्च, मशरूम, जैतून के तेल और मक्खन में तला हुआ, कभी-कभी चिकन के साथ, कभी कभी अंडे के साथ और कभी-कभी केवल सब्जी और पनीर की अधिक मात्रा के साथ) ले सकते हैं।
  • पालक सूप का क्रीम साथ में तला हुआ मशरूम या ब्रोकली
  • सोलकढ़ी और बेक्ड फ्रेंच बीन्स, पनीर के साथ।

रात का भोजन -

  • पनीर और क्रीम के साथ बेक्ड पालक
  • लेमन चिकन मुरब्बा
  • तला हुआ पनीर पकौड़ा
  • फ्राई मटन अपने पसंद के मसाले के साथ
  • फूलगोभी का सलाद या गोभी थोरान नारियल के साथ (केरला की तरह बनने वाली सब्जी)

2. दूसरा हफ्ता -

दूसरे हफ्ते में आप नारियल तेल, क्रीम और बटर का मिश्रण लेना शुरू करें। ये थोड़ा मुश्किल है लेकिन अगर आपको वजन कम करना है तो इसे खाना पड़ेगा। इसे आप अपने चाय या काढ़ा में मिला कर भी ले सकते  हैं। इसके अलावा अपनेे स्वाद अनुसार इसमें मसाले का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। चानी से परहेज़ करें। इसकी जगह आप सुगर-फ्री क्रतिम मीठा का इस्तेमाल करें। ये आपको फैट कम करने में मदद करेगा। इस मिश्रण को आप बुलेट कॉफी कह सकते हैं।

नाश्ता -

बुलेट कॉफी (कॉफी या चाय, नारियल तेल, क्रीम और बटर के साथ)

दोपहर का भोजन -

  • सामान्य सलाद (पालक, शिमला मिर्च, मशरूम, जैतून के तेल और मक्खन में तला हुआ, कभी-कभी चिकन के साथ, कभी कभी अंडे के साथ और कभी-कभी केवल सब्जी, पनीर की अधिक मात्रा के साथ) ले सकते हैं।
  • मसालेदार, तली हुई पनीर पकौड़ा
  • लाल चना का सलाद
  • नींबू चिकन
  • सोयाबीन करी
  • मूंगफली के साथ तली हुई भिंड़ी (महाराष्ट्रीयन स्टाइल में बना हुआ)

रात का भोजन -

  •  पनीर से बने हुए पकवान और तली हुई फ्रेंच बीन्स
  • फूलगोभी, नारियल के दूध और नारियल के तेल में पकाया हुआ।
  • मशरूम का क्रीम
  • उबला हुआ चिकन
  • पनीर पकौड़ा

3. तीसरा सप्ताह -

जैसे-जैसे आप अगले हफ्ते की ओर बढ़ते हैं। कीटो डाइट आपके लिए मुश्किल होता जाता है। तीसरे हफ्ते को फॉस्टिंग स्टेट या उपवास चरण कहते हैं। इसलिए आप तीसरे हफ्ते में सुबह जल्दी नाश्ता कर लेंगे और दोपहर में आपको कुछ नहीं खाना होगा और इस तरह आप 12 घंटे के उपवास के बाद रात के भोजन में अधिक वसा वाली खाद्य पदार्थ लेंगे। ये उपवास अनिरंतर उपवास कहलाता है।

नाश्ता -

बुलेट कॉफी

दोपहर का भोजन -

दोपहर में आप थोड़ा-थोड़ा करके पानी पिएं और बिना चीनी के ग्रीन टी या नींबू पानी के साथ मिर्च लें।

रात का भोजन -

  • पानी में भिगोया हुआ 6 से 8 बादाम रोज़ाना इस पूरे हफ़्ते में
  • पनीर और पालक के साथ पस्टो सॉस में चिकन लें (जैतून के तेल में तला हुआ)
  • पनीर चिली
  • भुना हुआ चिकन, पालक और चीज़ सलाद के साथ
  • पालक अंडा ऑमलेट, पनीर की अधिक मात्रा के साथ

4. चौथा हफ्ता -

कीटो डाइट का चौथा हफ्ता बहुत ही कठिन होता है। इस हफ्ते में आपको केवल रात को ही भोजन करना होता है। पूरे दिन उपवास के दौरान आप बिना चीनी के ग्रीन टी और नींबू पानी (नमक और मिर्च) के साथ ले सकते हैं। साथ ही आप अधिक से अधिक पानी पिएं। अगर ये उपवास करना आपके लिए बहुत मुश्किल हो रहा हो, तब आप दूसरे हफ्ते के डाइट पर वापस जा सकते हैं और वहां से फिर से शुरूआत कर सकते हैं।

नाश्ता -

दोपहर का भोजन -

  • हरी चाय (चीनी के बिना)
  • नींबू पानी (चीनी के बिना)
  • अधिक से अधिक पानी पिएं

रात का भोजन -

  • नारियल और मूंगफली के साथ तली हुई हरी बीन्स
  • शेजवान चिकन
  • पनीर, क्रीम और दूध में पकाया हुआ पालक
  • तली हुई सब्जियां
  • उबला हुआ चिकन
  • थाई चिकन
  • नींबू चिकन
  • शिमला मिर्च, पालक और तला हुआ पनीर
  • बादाम के आटे की टिकिया

नोट -

यहाँ आपको भारतीय कोटोजेनिक डाइट के बारे में जानकारी दी गयी है, लेकिन आपको पता होना चाहिए कि इसे अपनाना कितना कठिन है। इसलिए इस डाइट को बिना डाइटीशियन या डॉक्टर की सलाह के न आपनाएं। अगर आपको इस डाइट को अपनाने से किसी तरह की स्वास्थ्य संबंधी समस्या होती है, तो आपके उसके ज़िम्मेदार आप स्वयं होंगे।

(और पढ़ें - वजन कम करने के लिए डाइट टिप्स)

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